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बहन प्रियंका के प्यार में रंगा है राहुल का नया अवतार

Posted on 15 January 2017 by admin

क्या इसे एक नए राहुल गांधी का प्रादुर्भाव माना जा सकता है, जिन लोगों ने 11 जनवरी को तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस की जन वेदना रैली में राहुल को बोलते सुना, एक पल को वे भी भौच्चक रह गए। राहुल सचमुच एक नए अवतार में थे, आत्मविश्वास से लबरेज और पीएम पर सीधा हमला साधते हुए। कांग्रेस से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि 10 तारीख को तालकटोरा स्टेडियम में तैयारियों का जायजा लेने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और उनकी टीम रात के बारह बजे तक वहीं जमी थी, जब 12 बजे के आसपास पटेल अपने घर जाने के लिए गाड़ी में बैठने लगे तो प्रियंका गांधी की गाड़ी वहां आ धमकी। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि प्रियंका रात के कोई ढाई बजे तक वहीं जमी रहीं और कांग्रेस नेताओं के साथ रणनीतियों को अंतिम रूप देती रहीं कि आखिरकार राहुल को क्या बोलना है, किस लहज़े में बोलना है और किस हद तक बोलना है। टीम राहुल के लिए भले ही रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नसीहतें उतनी काम की नहीं रह गईं हों, पर प्रियंका अब भी पीके की बातों और उनकी सलाहों पर गंभीरता से कान धरती है। मां की तबियत अब भी थोड़ी नासाज़ है। सो, प्रियंका इन दिनों नियम से दिन का भोजन मां सोनिया के साथ करती हैं, उनसे राजनैतिक मशविरे लेती हैं और उसका संदेश पार्टी और राहुल के पास पहुंचा देती हैं। इन दिनों वह कांग्रेस की हर अहम बैठक में हिस्सा ले रही हैं, लिहाजा मामला चाहे यूपी चुनाव का हो, पंजाब और उत्तराखंड में उम्मीदवारों के चयन का हो प्रियंका की सक्रियता हर जगह देखी जा सकती है। इस फरवरी में तयशुदा कार्यक्रमों के मुताबिक राहुल को गुलाम नबी आजाद के साथ चीन के दौरे पर जाना था, जहां राहुल को न केवल कई सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेना था, अपितु उनके वहां कई लेक्चर भी होने थे। पर प्रियंका के दखल के बाद राहुल ने अपने चीन का प्रोग्राम रद्द कर दिया और चीन सरकार से आग्रह किया गया कि राहुल के चीन दौरे की तिथि को आगे बढ़ा दी जाए, क्योंकि इस वक्त वे पांच राज्यों के चुनावों में बेहद व्यस्त हैं, कहना न होगा कि चीनी सरकार ने राहुल के इस अनुरोध को सहज स्वीकार कर लिया। चुनांचे अब कांग्रेस में प्रियंका की नई धारा शनैःशनैः बहने लगी है।

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10 राजाजी मार्ग में शिफ्ट हो सकते हैं प्रणब दा!

Posted on 15 January 2017 by admin

कोई 300 एकड़ में फैले और 285 कमरों वाले राष्ट्रपति भवन को अलविदा कह प्रणब दा अब 10 राजाजी मार्ग के बंगले में शिफ्ट करने वाले हैं। फिलहाल, यह पता केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा का है। सूत्र बताते हैं कि शर्मा से कह दिया गया है कि वे अपने लिए कोई नया ठौर ढूंढ लें। सूत्रों की मानें तो मौजूदा राष्ट्रपति की इच्छा राष्ट्रपति भवन के चार बंगलों में से एक में शिफ्ट होने की थी, पर प्रोटोकाल का हवाला देकर उनसे और विकल्पों पर भी विचार करने को कहा गया। अपने पूर्ववर्ती डा. एपीजे अब्दुल कलाम की तरह प्रणब दा को भी लिखने-पढ़ने का बहुत शौक है। नए बंगले की बाबत डा.कलाम ने अपनी बस एकमात्र इच्छा यही व्यक्त की थी कि वहां एक अच्छी लाइब्रेरी होनी चाहिए। 10 राजाजी मार्ग जो एक टाइप-VIII बंगला है, इन मापदंडों पर बिल्कुल खरा उतरता है। 11776 स्वायर फीट के इस डुप्ले बंगले में पूरे एक फ्लोर पर लाइब्रेरी अवस्थित है। वैसे भी किसी पदमुक्त राश्ट्रपति के लिए नई दिल्ली के लुटियंस जोन में बस 3 ही बंगले इस कसौटी पर खरे उतरते हैं, वे हैं 31 औरंगजेब रोड, 7 तुगलक रोड और 10 राजाजी मार्ग। डा. कलाम के इस बंगले में षिफ्ट होने से पहले 10 राजाजी मार्ग के इस बड़े बंगले को दो शक्तिशाली नौकरशाह शेयर करते थे, इनमें से एक प्रसार भारती के तत्कालीन सीईओ बीएस लाली और दूसरे पावर सेक्रेटरी अनिल राजदान थे। अब यहां से डा. महेश शर्मा की रूखसती के बाद राष्ट्रपति जी के इच्छानुरूप इसे नई साज-सज्जा में प्रस्तुत किया जा सकता है। पर अपने पूर्ववर्ती डा. कलाम की तरह प्रणब दा की दिलचस्पी भी इसकी पहली मंजिल पर अवस्थित एक बेहद शानदार रीडिंग स्पेस और लाइब्रेरी में बताई जा रही है।

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यूपी सीएम की रेस में सिन्हा, शर्मा व मौर्या के नाम आगे

Posted on 10 January 2017 by admin

यूपी को लेकर भाजपा के हौंसले बम-बम हैं, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पूरा भरोसा है कि इस दफे यूपी में कमल खिलेगा, वह भी अपने दम पर। शायद यही वजह है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह यूपी में बिहार चुनाव की कोई गलती नहीं दोहराना चाहते हैं। सनद रहे कि बिहार में सांसदों की सिफारिशों पर उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में थोकभाव में टिकट दिए गए थे। इस बार टिकट बांटने की प्रक्रिया बेहद जटिल और पारदर्शी है। अभ्यर्थियों के नाम नीचे मंडल स्तर से आ रहे हैं, जहां से उन्हें जिला कमेटी में भेजा जा रहा है, उसके बाद ये नाम स्टेट कमेटी में आ रहे हैं। फिर इन नामों पर कोर कमेटी में विचार हो रहा है। छह लोगों की इस कोर कमेटी में सुनील बंसल, दिनेश शर्मा, लक्ष्मीकांत वाजपेयी, केशव प्रसाद मौर्या, ओम माथुर, शिव प्रकाश जैसे लोग शामिल हैं। कोर कमेटी एक या ज्यादा नामों को ‘सिलेक्ट’ कर पार्लियामेंट्री बोर्ड के पास अनुमोदन के लिए भेज रही है, जहां उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। भाजपा से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी समाप्त होने के दो दिन बाद पार्टी की पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक होने वाली है, जहां पार्टी उम्मीदवारों के नाम फाइनल हो सकते हैं और आने वाले कुछ रोज में इसकी घोषणा मुमकिन है। भाजपा के हौसले इस दफे इतने बुलंद है कि अभी से सीएम उम्मीदवारों के नाम भी चर्चा में हैं, इस रेस में फिलवक्त 3 नाम सबसे आगे बताए जाते हैं, वे हैं केंद्रीय राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा जो गुजरात के प्रभारी भी रह चुके हैं और इस नाते वे अमित शाह के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं।

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आंकड़ो का भगवा सच

Posted on 10 January 2017 by admin

2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा का वोट शेयर 42.3 फीसदी था। 2007 विधानसभा चुनाव में जब मायावती भारी बहुमत से चुन कर आई थीं तो उनका वोट शेयर तकरीबन 30 फीसदी था। 2012 में सपा को पूर्ण बहुमत मिला और तब उसका वोट शेयर 27.3 प्रतिशत रह गया था। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर इस दफे के यूपी चुनाव में बहुकोणीय मुकाबला हुआ और लोकसभा चुनाव के मुकाबले भाजपा के वोट षेयर में 8-10 प्रतिशत की कमी भी आई तो भी भाजपा अपने दम पर यूपी में सरकार बना लेगी। इन भगवा कर्णधारों का मानना है कि अगर भाजपा अपना वोट शेयर 35-36 फीसदी भी रख पाई तो उसकी झोली में कम से कम 250 तक सीटें आ सकती हैं।

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ज्योतिषियों की राय में यह नया साल भयंकर ऊथल-पुथल लेकर आएगा

Posted on 02 January 2017 by admin

नव वर्ष 2017 के आलोक में प्रतिष्ठित ‘पार्लियामेंटेरियन’ पत्रिका के ताजा अंक में देश-विदेश के नामी-गिरामी ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों को जगह मिली है। इनमें से एक हैं संजय चौधरी, जिन्होंने 1 नवंबर 2016 को ही भविश्यवाणी कर दी थी कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के अगले राष्ट्रपति होंगे। भारत की जन्मपत्री को आधार बना कर चौधरी कहते हैं कि इसमें शनि अपनी धीमी गति से धनु की ओर बढ़ रहा है, वहां यह इसके आठवें घर में प्रवेश करेगा, और 25 जनवरी 2020 तक यहीं जमा रहेगा। चंद्र-राहु की दषा 31 जनवरी 2017 से 2 अगस्त 2018 तक बनी रहेगी, इसके दुश्प्रभाव से आम भारतीयों की कमाई घटेगी, बड़े बिजनेस पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं, दुश्मन ग्रह भारी पड़ सकता है, जिससे बड़ी तादाद में नौकरियां जा सकती हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के बारे में संजय चौधरी का कहना है कि 2017 की शुरूआत में पार्टी में अंतर्कलह मच सकती है, कई पार्टी कद्दावर भाजपा छोड़ सकते हैं। अप्रैल 2017 में मोदी कैबिनेट में एक बड़ा फेरबदल मुमकिन है, जिसमें कई हैवीवेट मंत्रियों की कुर्सी छिन सकती है। कांग्रेस अन्य दलों से गठबंधन के उपरांत एक नई व प्रभावशाली भूमिका में नज़र आ सकती है। नोटबंदी से उपजे हालात देश को कई बड़े ‘शॉक’ दे सकते हैं, कंपनियां बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। चीन के साथ भारत के संबंधों में तल्खी आ सकती है और सीमा पर तनाव बढ़ सकता है। मार्च से मई 2017 के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों से जूझना पड़ सकता है।

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क्या होगा ‘बिग वॉर-3’ का आगाज़?

Posted on 02 January 2017 by admin

‘पार्लियामेंटेरियन’ पत्रिका के इसी जनवरी अंक में डेनमार्क के जाने-माने भविश्यवेक्ता विस्टी लार्सन ने नरेंद्र मोदी को लेकर कई भविश्यवाणियां की हैं। लार्सन के मुताबिक आने वाले 5 विधानसभा चुनाव में मोदी को उनकी नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है यानी इन चुनावों में भाजपा आषा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। नोटबंदी का असर और इसके दुश्परिणाम मई 2017 तक देखे जा सकते हैं। सितंबर 2017 से लेकर 2018 के प्रारंभ तक अपने पड़ोसी मुल्क चीन और पाकिस्तान से सीमा पर तनाव बना रहेगा और छुटपुट लड़ाईयां भी हो सकती है। तुला की चक्रदशा में जब 2019 में अगला आम चुनाव होगा तो उसमें नरेंद्र मोदी फिर से चुन कर सरकार में आ सकते हैं। राहुल गांधी के भविश्य के बारे में विस्टी लार्सन का कहना है कि नए साल में राहुल को पार्टी में सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है यानी वे पार्टी अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं, विपक्षी दलों के महत्व और प्रभाव में बढ़ोतरी होगी, राहुल भी पहले से ज्यादा पॉपुलर होंगे, पर उन्हें साल के उत्तरार्द्ध में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। पत्रिका के इसी अंक में प्रोफेसर के.एन.राव की उस भविश्यवाणी को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है जिसमें राव ने यह दावा किया है कि इस नए साल में तीन परमाणु संपन्न मुल्कों में भयंकर लड़ाई छिड़ सकती है। पाकिस्तान की आड़ में चीन हम पर आक्रामक होगा। बांग्लादेश में किंचित उदारवादी शेख हसीना सरकार की जगह कोई कट्टरपंथी विचारों वाली सरकार काबिज हो सकती है इससे भारतीय हितों को खतरा है। वहीं ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भाम्बी का दावा है कि प्रधानमंत्री के संग देश के युवाओं का मोहभंग हो सकता है और देश में अन्ना आंदोलन की तरह ही एक नए युवा आंदोलन की शुरूआत होगी। 2017 में अमित शाह के नेतृत्व के समक्ष भी महती चुनौतियां उछलेंगी।

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लोढा की डिजिटल डायरी में छुपे हैं कई अहम राज़

Posted on 26 December 2016 by admin

कोलकाता के कुचर्चित बिजनेसमैन पारसमल लोढ़ा पर जब से ईडी समेत अन्य जांच एजेंसियों का शिकंजा कसा है, कई बड़े सियासी हुक्मरानों की अकड़ ढीली पड़ती जा रही है। सूत्र बताते हैं कि लोढा से पूछताछ में एक से बढ़ कर एक खुलासों को नया आसमां मुहैया होने लगा है। सबसे हैरान करने वाली बात तो यह कि 8 नवंबर की नोटबंदी के बाद लोढा गुजरात के उसी नामधन्य उद्योगपति के साथ कोई आधा दर्जन यात्राएं उस चार्टर्ड विमान से कर चुके हैं, जिस विमान का उपयोग उस राज्य के मुख्यमंत्री भी किया करते हैं। ऐसा इस विमान के ’रोस्टर’ से पता चला है। कहते हैं लोढा से जो डिजिटल डायरी जब्त हुई है उसमें कई नामचीन हस्तियों के साथ लेन-देन का जिक्र है। इसमें सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता के पुत्र का नाम भी दर्ज है। इसके अलावा गुजरात के उस नामधन्य उद्योगपति के परिवार के कई सदस्यों के नाम इसमें दर्ज है। इससे इस बात का खुलासा होता है कि लोढा काला धन को सफेद करने के उपक्रम में भी कहीं शिद्दत से जुटे थे। इस डायरी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस का नाम भी बताया जाता है। संचार व तेल क्षेत्र के कारोबार से जुड़े देश के एक प्रमुख उद्योगपति का नाम भी इस डायरी में दर्ज हैं, ये वही उद्योगपति हैं जिनका 2जी घोटाले में भी नाम उछला था। सूत्र बताते हैं कि इस डायरी में सहारा प्रमुख से जुड़े उस विजय सिंह डोगरा का भी जिक्र है, सनद रहे कि ये वही डोगरा हैं जिन्हें लंदन के चेल्सी के एक एटीएम से एक बड़ी कैश रकम के साथ धरा गया था, और तब से ही ये ’वांटेड’ की सूची में शुमार हैं। इन्हीं डोगरा की डायरी को आधार बना कर इन दिनों राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सीधे पीएम पर निशाना साध रहे हैं। कोलकाता के इस बिजनेसमैन को जब नई करेंसी नोट की बड़ी रकम के साथ धरा गया था तो उन्होंने ईडी की पूछताछ में चैन्ने के बिजनेसमैन शेखर रेड्डी और दिल्ली के एक लॉ-फर्म के स्वामी रोहित टंडन का नाम उगला था। बताया जा रहा है कि लोढा के पास ऐसी कई विस्फोटक जानकारियां हैं जिससे सियासी भूचाल आ सकता है, पर लगता नहीं है सरकार इस मामले को उतना आगे तक ले जाएगी, जहां इसके कुछ छींटें उसके दामन पर भी पड़ सकते हैं।

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मंत्रियों का नया साल देश में

Posted on 26 December 2016 by admin

आम तौर पर विदेश में नया साल मनाने के शौकीन भगवा नेताओं को कहीं पहले पीएमओ से संदेशा आ पहुंचा कि केंद्र सरकार के सभी मंत्रियों को नववर्ष का स्वागत सादगीपूर्ण माहौल में करना है। कहते हैं पीएमओ के इस फरमान के बाद कोई दर्जन भर मंत्रियों को अपनी विदेश यात्राएं कैंसिल करनी पड़ी। नितिन गडकरी जैसे दिग्गजों ने भी अपना मन व प्रोग्राम बदल लिया, गडकरी अब अपना नया साल नागपुर में मनाएंगे। उसी तरह अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी अपना नया साल गोवा में मना रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 30 और 31 दिसंबर को उनके सौजन्य से नार्थ गोवा के पंजिम के ग्रैंड हयात होटल में एक शानदार पार्टी रखी गई है, इस पार्टी में कई हाई-प्रोफाइल मेहमान शामिल होने वाले हैं। बताया जाता है कि यह होटल उसी शाहिद बलवा का है जिनका नाम 2जी मामले में पहले ही उछल चुका है, और सबको मालूम है कि रोहतगी 2जी व कोल गेट मामले को कोर्ट के समक्ष रखते आए हैं।

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स्वामी फिर से एक गुप्त मिशन पर

Posted on 19 December 2016 by admin

मोदी सरकार में चंद ठिठके हुए फैसलों को नया चेहरा मिल सकता है। मसलन अतिवादी सक्रियता की मिसाल सुब्रह्मण्यम स्वामी से कहते हैं प्रधानमंत्री ने कभी वादा किया था कि वे उनको अपनी कैबिनेट में सुशोभित करेंगे। पर वक्त गुजरता गया और फैसला टलता रहा। सूत्र बताते हैं कि स्वामी की पिछले दिनों पीएम से एक अहम मुलाकात हुई और समझा जाता है कि उन्हें एक महती जिम्मेदारी सौंपी गई है कि उन्हें केंद्र सरकार व न्यायपालिका के रिश्तों में आई खटास को दूर करना है। इस बात के पहले से साफ संकेत मिल रहे हैं कि अटार्नी जनरल और उनकी टीम के कामकाज से पीएमओ किंचित खुश नहीं, नए अटार्नी जनरल के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की पसंद के एक व्यक्ति के नाम को लगभग हरी झंडी मिल चुकी है। बस इंतजार एक सही वक्त का है, जब मौजूदा अटॉर्नी जनरल को बाहर का रास्ता दिखाया जा सके। सूत्र बताते हैं कि स्वामी को इस बात की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे न्यायपालिका के शीर्ष से संवाद सेतु कायम करें। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर का कार्यकाल 3 जनवरी को खत्म हो रहा है, इसके बाद जस्टिस केहर को पद भार संभालना है। कहते हैं न्यायपालिका के नए निज़ाम से पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज की काफी अच्छी बनती है, भारद्वाज से स्वामी की दोस्ती काफी पुरानी है। चुनांचे वे नए निज़ाम का भरोसा जीतने के लिए अपने पुराने मित्र भारद्वाज की मदद ले सकते हैं। वैसे भी केंद्र सरकार व न्यायपालिका में आई खटपट की वजह से कहीं न कहीं जजों की नियुक्तियों पर भी विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट में अभी भी जजों के सात पद रिक्त पड़े हैं, हाईकोर्ट में तो आधे से ज्यादा (तकरीबन 50) जजों के पद खाली पड़े हैं। स्वामी अगर इन अवरोधों पर विजय पाने में कामयाब रहते हैं तो उन्हें देष के अगले कानून मंत्री के तौर पर देखा जा सकता है।

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नए राज के आगाज़ में स्वराज

Posted on 19 December 2016 by admin

भाजपा की वरिष्ठ नेत्री सुषमा स्वराज अपनी किडनी के सफल प्रत्यारोपण के बाद एक नई सियासी पारी खेलने को तैयार बताई जाती हैं। सियासी हलकों में इस बात के काफी चर्चे हैं कि मैडम स्वराज को प्रधानमंत्री किसी संवैधानिक पद पर सुशोभित करना चाहते हैं। खास कर संघ के दो शीर्ष नेताओं भैयाजी जोशी व दत्तात्रेय होसबोले लगातार सुषमा के नाम को बतौर देश के अगले राष्ट्रपति के तौर पर प्रोजेक्ट करने में जुटे हैं, संघ के इन दोनों शीर्ष नेताओं की मुहिम को सरसंघचालक का मूक समर्थन बताया जा रहा है। वहीं भाजपा का एक धड़ा लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन का नाम भी अगले राष्ट्रपति के लिए उछाल रहा है। पार्टी के चंद वरिष्ठ दक्षिण भारतीय नेताओं की राय है कि भाजपा को किसी दक्षिण भारतीय व्यक्ति के नाम को राष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ाना चाहिए, जिससे आने वाले चुनावों में दक्षिण के भगवा आकांक्षाओं का विस्तार हो सके। इस कड़ी में दो पूर्व मुख्य न्यायधीशों के नाम लिए जा रहे हैं। इनमें से एक केरल के गवर्नर पी सदाशिवम हैं तो दूसरा नाम जस्टिस के जी बालाकृष्णन का है। इन्हीं नामों में से उप राष्ट्रपति पद की दावेदारी पर भी विचार किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य, वरीयता, वाकपटुता को देखते हुए संघ इस दफे सुषमा स्वराज के नाम की पुरकश वकालत कर रहा है, तो क्या इससे यह समझा जाए कि देश को एक महिला राष्ट्रपति की सौगात मिलने वाली हैं?

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