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गुजरात में समय से पूर्व हो सकते हैं चुनाव

Posted on 28 March 2017 by admin

हालिया विधानसभा चुनावों में 5 में से 4 राज्यों में भगवा परचम लहराने के बाद देश के नवअवतरित महानायक के इरादे आसमां को चुनौती देते लग रहे हैं, अभी पिछले दिनों नरेंद्र मोदी गुजरात में थे, अपनी इस दो दिवसीय गुजरात यात्रा की एक रात्रि को मोदी ने अपने खास लोगों की एक अहम बैठक आहूत की। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इस बेहद गोपनीय बैठक में मात्र 18 लोगों को आमंत्रित किया गया, इनमें से 12 गुजरात भाजपा के शीर्ष नेता थे, 3 संघ के नेता थे, जिन्हें मोदी का बेहद विश्वस्तपात्र माना जाता है और 3 लोग इंडिया फाउंडेशन से थे, जिनका नेतृत्व शौर्य डोवल कर रहे थे। सूत्र बताते हैं कि मोदी ने इस बैठक में साफ कर दिया कि गुजरात में विधानसभा चुनाव तय समय सीमा से पहले हो सकते हैं, अभी एक रोज पूर्व पीएम ने दिल्ली में गुजरात के सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली, सूत्र बताते हैं कि पीएम ने इन सांसदों को अभी से गुजरात चुनाव की तैयारियों में जुट जाने को कहा है। यूं तो गुजरात के मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 जनवरी 2018 को पूरा हो रहा है, पर सूत्रों की मानें तो गुजरात में जुलाई-अगस्त में भी चुनाव हो सकते हैं। गांधी नगर बैठक को इतना गुप्त रखा गया कि बैठक में शामिल होने वाले लोगों से कहा गया कि वे अपनी गाड़ी से न आकर किराए की टैक्सी से आएं, जिससे किसी को, खास कर मीडिया वालों को इस बात की कानों कान खबर न हो। कहते हैं कि मोदी ने बैठक में मौजूद नेताओं से यह भी कहा कि वे अब हर महीने कम से कम दो बार गुजरात आते रहेंगे और चुनावी तैयारियों की निजी तौर पर समीक्षा करेंगे। बैठक में मौजूद एक नेता ने जब मोदी के समक्ष यह प्रष्न उठाया कि आम आदमी पार्टी के लोग ईवीएम में गड़बड़ी की बात कर रहे हैं, तो मोदी ने बेहद शांत भाव से उस नेता से कहा-’इन बातों की आप चिंता मत करिए, यहां हमारी ऐतिहासिक जीत होगी।’ जो लोग मोदी को करीब से जानते हैं वे बखूबी इस बात से वाकिफ हैं कि किसी भी चुनाव से पहले मोदी सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए जरूर जाते हैं, पिछले कुछ महीनों में मोदी 7 बार गुजरात जा चुके हैं, इस 8 मार्च को उन्होंने सोमनाथ के दर्शन किए। यानी संकेत साफ है कि गुजरात में कभी भी चुनाव हो सकते हैं।

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ऑक्सफोर्ड में कब बोलेंगे राहुल

Posted on 28 March 2017 by admin

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी ’इमेज मेकओवर’ को लेकर किंचित गंभीर नज़र आते हैं। भले ही यूपी चुनाव में उनकी भद्द पिट गई हो पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तेज़-तर्रार व सोचने-विचारने वाले नेता के तौर पर अपनी इमेज बनाने में वे और उनका निजी ऑफिस खासी दिलचस्पी दिखा रहा है। सूत्र बताते हैं कि आरजी ऑफिस कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पहल पर ऑक्सफोर्ड यूनियन से लगातार संपर्क में है, कोशिश की जा रही है कि किसी प्रकार से राहुल का एक लेक्चर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हो जाए। हालांकि राहुल खुद कैंब्रिज से पढ़े-लिखे हैं, पर राजनीतिक संदेशों को पहले पढ़ने व संप्रेशित करने में ऑक्सफोर्ड का कोई सानी नहीं, चुनांचे टीम राहुल लगातार ऑक्सफोर्ड यूनियन के संपर्क में है। सूत्र बताते हैं कि यूनियन के सेक्रेटरी की शशि थरूर से इस बारे में वन-टू-वन बात भी हो चुकी है। पर यूनियन के अन्य सदस्य राहुल को आमंत्रण देने के लिए इतने गंभीर नहीं जान पड़ते। उनका मानना है कि एक राजनेता के तौर पर सोशल मीडिया में राहुल के बारे में कोई अच्छी धारणा नहीं है, उन्हें इस बात का भी भय है कि अगर वे राहुल को बोलने के लिए आमंत्रित करते हैं तो वहां के छात्रों में इसकी बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आएगी, चुनांचे ऑक्सफोर्ड राहुल को बुलाने से पहले अपनी हर भ्रांति को दूर कर लेना चाहता है। समझा जाता है कि इसीलिए आरजी ऑफिस ने दो प्रमुख अनिवासी भारतीय उद्योगपति स्वराज पाल परिवार और हिंदूजा बंधुओं से कहा है कि वे राहुल का लेक्चर वहां आयोजित कराने में मदद करें, क्योंकि इन दोनों परिवारों ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को कई मदों में बड़े चंदे दिए हैं। पर आरजी ऑफिस को इन परिवारों की ओर से कोई उत्साहजनक जवाब नहीं मिल पाया है।

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केजरीवाल का होमवर्क

Posted on 19 March 2017 by admin

मोदी विरोध का अलख जगाने वाले क्षेत्रीय सूरमाओं मसलन लालू, अखिलेश, मायावती, ममता आदि को कहीं पहले ही यह इल्म हो चुका था कि इन पांच राज्यों के चुनाव में कम से कम चार राज्यों में कमल के प्रस्फुटन पर लगाम नहीं लगने वाली, सो बारी-बारी से इन नेताओं ने टीवी पर शुरुआती रुझान आते ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अऱविंद केजरीवाल को फोन लगाया और उनसे कहा कि वे ईवीएम के मुद्दे को जोर-शोर से उठाएं, यह भी तय हुआ कि केजरीवाल 11 तारीख को दोपहर 12 बजे एक प्रेस कांफ्रेंस करेंगे, पर केजरीवाल ने उस प्रस्तावित प्रेस कांफ्रेंस को अगले दिन के लिए स्थगित कर दिया। क्योंकि पहले वे ईवीएम के तकनीकी पहलुओं को बारीकी से समझना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने हैदराबाद के अपने एक इंजीनियर मित्र का सहारा लिया। सूत्र बताते हैं कि श्रीकांत नामक यह इंजीनियर आईआईटी के दिनों में कभी अऱविंद के साथ पढ़ा करते थे। इस बीच आप के दोनों बूथ लेवल तक के आंकड़े जुटाने, हैदराबाद के इंजीनियर दिल्ली पहुंचे और उन्होंने केजरीवाल के सामने यह डेमो दिया कि ईवीएम में कहां और कैसे छेड़छाड़ की जा सकती है, तब कहीं जाकर अगले रोज ईवीएम के मुद्दे पर केजरीवाल अपनी प्रेस कांफ्रेंस कर पाए।

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तिवारी और संगठन में ठनी

Posted on 19 March 2017 by admin

ऐसे वक्त में जबकि हर ओर भगवा उफान परवान पर है, दिल्ली भाजपा में सब कुछ ठीक-ठीक नहीं चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि इन दिनों दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी और प्रदेश संगठन मंत्री सिद्धार्थन में तलवारें खिंची हुई हैं। एक ओर जहां दिल्ली भाजपा के संगठन में पुरकश दखल रखने वाले श्याम जाजू और सिद्धार्थन चाहते हैं कि तिवारी संगठन के काम काज में दखल ना दें और अपना सारा फोकस पार्टी के प्रचार-प्रसार पर रखें। वहीं माना जाता है कि तिवारी पार्टी के अहम मामलों में अपनी शिरकत चाहते हैं। वैसे भी दिल्ली में निकाय चुनाव सिर पर हैं और तिवारी कैंप चाहता है कि टिकट बांटने में उनकी भी एक निर्णायक भूमिका हो, साथ ही तिवारी यह भी चाहते हैं कि संगठन में किसके पास क्या दायित्व रहे इसमें उनकी राय को महत्व दिया जाय। वैसे पार्टी संगठन पर दबदबा रखने वाले नेतागण मनोज तिवारी को सिर्फ और सिर्फ दिल्ली भाजपा का चेहरा बनाए रखना चाहते हैं।

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लाल के गढ़ में केसरिया चुनौतियां

Posted on 11 March 2017 by admin

5 राज्यों के हालिया विधानसभा नतीजों के बाद से निरंतर भगवा आकांक्षाएं नया हिलोर मार रही हैं। भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले अमित षाह 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अब ऐसे सुदूर और छोटे राज्यों पर फोकस कर रहे हैं जहां कभी कमल के प्रस्फुटन के लिए माहौल उतना केसरिया नहीं था। पहले असम में भगवा सरकार, फिर मणिपुर में जानदार प्रदर्षन और अब सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए टीम अमित षाह केरल और त्रिपुरा जैसे राज्यों पर फोकस कर रही है। त्रिपुरा में लगभग हर षाम भाजपा के लोग एक यात्रा निकालते हैं, जिसमें न सिर्फ भगवा इरादों के परचम लहराए जाते हैं अपितु इस यात्रा को षक्ल देने वाले स्थानीय युवा मोदी-मोदी का गगनभेदी उद्घोश करते चलते हैं। भले ही त्रिपुरा में कमान वामपंथ के आखिरी गढ़ को बचाने की चुनौती में डूबे मानिक सरकार के पास है और वहां विधानसभा चुनाव में भी भले ही अभी साल भर की देर हो, भाजपा की सक्रियता को देखकर यह आसानी से समझा जा सकता है कि 2019 के आम चुनाव में मोदी के लिए एक-एक सीट किस हद तक महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि वामपंथी अभी से आरोप हवा में उछालने लगे हैं कि त्रिपुरा के गवर्नर की पृश्ठभूमि भगवा रही है, चूंकि ये तथागत राय कभी बंगाल भाजपा के प्रमुख हुआ करते थे और इन्होंने अपने जीवन में सियासी ककहरा वामपंथी के गढ़ पष्चिम बंगाल में ही सीखा है, सो उन्हें वामपंथ की खूबियां भी मालूम है और कमजोरियां भी। पर प्रदेष भाजपा इस राजनैतिक लड़ाई का कीचड़ महामहिम के दामन पर नहीं लगाना चाहती, उसका कहना साफ है कि वामपंथी हताषा में ऐसी बातें कह रहे हैं।

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संघ का फिल्म समारोह

Posted on 11 March 2017 by admin

भाजपा की विजय यात्रा को रंग-रौगन कर उसे चाक-चैबंद करने का जिम्मा आगे बढ़ कर संघ ने भी अपने कंधों पर उठा रखा है। संघ न सिर्फ भगवा जमीन तैयार कर रहा है बल्कि उसमें संस्कृति और राश्ट्रीयता का नया छौंक भी लगा रहा है। इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए संघ और उसके आनुशांगिक संगठन नए प्रयोगों को आजमा रहे हैं। इस कड़ी में संघ की योजना ’षाॅर्ट फिल्मस’ समारोह आयोजित करने की है, इसका आगाज़ अल्पसंख्यक प्रेम में आकंठ छूती दीदी के राज्य बंगाल से होने जा रहा है। संघ की इस पहल का नामकरण ’मानुश चाय’ हुआ है इस षाॅर्ट फिल्मस समारोह के लिए अब तक कोई 50 से ज्यादा फिल्मों के लिए आवेदन आ चुके हैं। अप्रैल में होने वाले इस समारोह को संघ की एक बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। संघ का मीडिया विंग-विष्व संवाद केंद्र ’मानुश चाय’ की परिकल्पना को साकार करने में कहीं षिद्दत से जुटा है। और इस पूरी परिकल्पना को विवेकानंद के आदर्षों से प्रेरित बता रहा है, पर जब लेंस पर पूर्वाग्रहों के रंग चढ़ने लगेंगे और रचनात्मकता पर कुंद आदर्षवादिता की जंग लगने लगेगी तो कोई भी प्रेरक व अर्थवान सिनेमा अपना मतलब खोने लगेगा।

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क्यों रिटायर होना चाहते हैं पीएम के सबसे भरोसेमंद अफसर पीके?

Posted on 06 March 2017 by admin

नौकरशाही के व्योम में धूमकेतु से चमकने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आंख-नाक-कान माने जाने वाले गुजरात कैडर के 1972 बैच के आईएएस अफसर पी के मिश्रा अब अपने पद से रिटायर होना चाहते हैं। विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि अभी चंद रोज पूर्व मिश्रा ने प्रधानमंत्री से मिल कर अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पद मुक्त होने की इच्छा जताई है। समझा जाता है कि मिश्रा के इस आग्रह से स्वयं प्रधानमंत्री भी एक पल को भौच्चक रह गए। क्योंकि यह मिश्रा ही हैं जो मोदी के गुजरात के अभ्युदय काल से उनके सबसे भरोसेमंद अफसरों में शुमार होते हैं, उन्होंने लगभग 13 वर्ष तक गुजरात में मोदी के साथ काम किया है, मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में मिश्रा उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी रह चुके हैं। उनके बारे में माना जाता है कि वे भी पीएम मोदी की तरह न सिर्फ धुन के पक्के हैं बल्कि उतने ही बड़े ’वर्कोहोलिक’ (काम के मद में चूर) हैं, मिश्रा को आज भी सुबह 9 बजे से रात के ग्यारह बजे तक पीएमओ में काम करते हुए देखा जा सकता है। एक आम भ्रांति है कि पीएम के मुलाकातियों को उनके सचिव भास्कर खुल्बे समय देते हैं, पर अंदर की जानकारी है कि यह काम भी पीके द्वारा ही अंजाम दिया जाता है। अब पीके की बॉल मोदी के पाले में है, जो सियासत के सबसे माहिर खिलाड़ी हैं और बखूबी जानते हैं कि बॉल को गोल पोस्ट में डालने का सबसे माकूल वक्त कौन सा है।

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फैसले लेने वाला पीएमओ

Posted on 06 March 2017 by admin

वित्त मंत्रालय के मान्य परंपराओं और प्रोटोकॉल के मुताबिक पहले कोई भी फाइल नीचे से ऊपर मूव होती थी उसके बाद अनुमोदन के लिए पीएमओ में भेजी जाती रही है। लेकिन दिल्ली में निज़ाम बदलने के साथ-साथ और सत्ता के शीर्ष पर नरेंद्र मोदी के अभ्युदय के बाद इस पुरानी परंपरा ने यू-टर्न ले लिया है। ताजा बदले घटनाओं में अब ये तमाम अहम फाइलें पहले पीएमओ में शक्ल पाती हैं और उसके बाद पीएमओ के सर्वशक्तिमान नृपेंद्र मिश्र के पास जाती है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इसके बाद इन अनुमोदित फाइलों को पीएम के सचिव भास्कर खुल्बे ’बाय हेंड’ वित्त मंत्री जेटली के पास ले कर जाते हैं उनकी दस्तख्त के लिए। और इसके बाद फाइल पुनः पीएमओ में लौट आती है और नीतियों की प्रत्यंचा पर तीर को कस दिया जाता है। फाइनेंस मिनिस्ट्री को वाकई पता ही नहीं चल पाता कि आखिर वित्त मंत्रालय के हवाले से ये हो क्या रहा है।

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यूपी की फिजाओं में ’विजय-दिवस’ की भगवा आहटें

Posted on 26 February 2017 by admin

महाराष्ट्र की बंपर जीत से यूपी में भगवा इरादों को एक नई धार मिली है। कैडर का हौसला बम-बम है और ‘विजय दिवस’ का आगाज़ कर एक तरह से भाजपा ने अपने लोगों को एक नई ऊर्जा से सराबोर कर दिया है। पहले पार्टी के अंदर ही इस बात को लेकर किंचित मतभेद उभरे कि यूपी और मणिपुर जैसे राज्यों में विजय दिवस का मनाया जाना कितना सही रहेगा, क्योंकि यूपी में अभी चुनाव चल रहे हैं और मणिपुर में 4 और 8 मार्च को चुनाव होने हैं। कई भगवा नेता ऐसे भी थे जिन्हें चुनाव आयोग का डर सता रहा था, पर अंतिम कॉल पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की रही। शाह ने तय किया कि महाराष्ट्र की जीत पर एक बड़ा उत्सव तो बनता है और इस ’विजय दिवस’ की पटकथा को तब अंतिम रूप दे दिया गया। शाह कैंप को लगता है कि यूपी में उनकी सोशल इंजीनियरिंग परवान चढ़ गई है। सबको मालूम है कि भाजपा ने यूपी की तैयारी काफी पहले से शुरू कर दी थी, अमित शाह को जमीनी जानकारी थी कि अगड़ी जातियां यूपी में भाजपा के साथ आने को एकदम से तैयार बैठी हैं, सो फोकस गैर यादव पिछड़ी जातियों पर किया गया था। केशव प्रसाद मौर्य को पार्टी अध्यक्ष बनाना शाह की इसी रणनीति का एक हिस्सा भर था। राज्य के लोध वोटरों को लुभाने के लिए पार्टी के पास कल्याण सिंह और उमा भारती का चेहरा था, छोटे दलों से तालमेल के क्रम में अपना दल से तालमेल कर कुर्मी वोटरों को लुभाया गया, राजभर वोटरों को लुभाने के लिए ओम प्रकाश राजभर जैसे नेताओं का सहारा लिया गया। इसके अलावा अन्य दलों के धाकड़ व मजबूत नेताओं पर भी भाजपा का दांव सफल जान पड़ता है, 2014 के लोकसभा चुनाव में जगदंबिका पाल समेत अनेक नेताओं पर भाजपा का यह खेल सफल रहा था। चुनांचे इस चुनाव में न सिर्फ यूपी में बल्कि महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भी दल बदलू नेताओं ने भगवा आकांक्षाओं के परचम को थामे रखा, महाराष्ट्र चुनाव इसकी सुखद परिणति की ओर इशारा कर रहे हैं, भाजपा को भरोसा है कि यूपी में भी उसका यही दांव फलीभूत होगा।

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अल्पसंख्यक मंत्रालय का शाकाहार

Posted on 26 February 2017 by admin

यूपी चुनाव के बीच मोदी सरकार के कुछ चतुर सुजान मंत्रिगण अपने व्यस्त चुनावी कार्यक्रमों से समय निकाल अपने मंत्रालय की लोकलुभावन योजनाओं को भी परवान चढ़ाने में जुटे हैं। इनमें से एक अल्पसंख्यक मंत्रालय के मुस्तैद मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी हैं। नई दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर इनके मंत्रालय ने ‘हुनर हाट’ का आयोजन किया है, इस हाट में न केवल देशभर के हुनरमंद कारीगरों का जमावड़ा लगा है, बल्कि इसमें हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्सों से पारंगत बावर्ची भी इकट्ठे हुए हैं। ‘हुनर हाट’ में अल्पसंख्यक कारीगर न केवल अपने हुनर का जलवा दिखा रहे हैं, वहीं देशभर से जमा हुए अल्पसंख्यक समुदाय के बावर्चियों ने तय किया है कि वे अपने व्यंजनों में पोर्क या बीफ का इस्तेमाल नहीं करेंगे। दो सप्ताह तक चलने वाले इस मेले के दौरान शुक्रवार को ‘महाशिवरात्रि’ का पर्व आ गया, तब बुधवार को नकवी ने इस हुनर हाट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों से बात की और फिर तय हुआ कि महाशिवरात्रि के रोज यहां लगने वाले कोई दो दर्जन फूड स्टॉल केवल और केवल शाकाहारी भोजन परोसेंगे, इतना ही नहीं इस मौके पर व्रत के लिए ’स्पेशल व्रत थाली’ का भी प्रावधान रखा गया। नकवी की योजना इस ‘हुनर हाट’ को देश के अलग-अलग प्रांतों में लेकर जाने की है। इसके अलावा नकवी अपने मंत्रालय की ओर से दिल्ली के पुराना किला में शायरी व गज़लों का एक प्रोग्राम ’सदा-ए-सदभाव’ करने जा रहे हैं, इस प्रोग्राम के माध्यम से मंत्री जी सांप्रदायिक सदभाव की मिसाल पेश करना चाहते हैं।

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