Archive | मुख्य

पवार का पछतावा

Posted on 05 December 2016 by admin

मराठा क्षत्रप शरद पवार इस बात से किंचित परेशान है कि अगर उनकी पार्टी की ओर से थोड़ी और मेहनत की गई होती या वे राज्य के कुछ इलाकों में घूम जाते, या फिर कांग्रेस की ओर से सोनिया या राहुल राज्य में कदम रख देते, तो इस दफे के महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजों में बड़ी फेरबदल हो सकता था। पवार उस घड़ी को भी कोस रहे हैं कि जब सीटों के तालमेल को लेकर एनसीपी और कांग्रेस की बातचीत टूट गई। पवार इसका दोष कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण को देना चाहते हैं, और वे यह बताने से नहीं हिचकते कि सिर्फ चव्हाण की हठधर्मिता की वजह से ही कांग्रेस-एनसीपी में चुनावी समझौता नहीं हो पाया, चूंकि कई ऐसी सीटों की मांग कर रहे थे जो एनसीपी की बढ़त वाली सीटें थीं। चुनांचे दोनों दलों में तालमेल नहीं हो पाया।

Comments Off on पवार का पछतावा

…सोशल मीडिया से

Posted on 05 December 2016 by admin

रियल एस्टेट एजेंट का नया शिगूफा-’सर, एकदम एटीएम फेसिंग फ्लैट है…’

Comments Off on …सोशल मीडिया से

मिस्टर गांधी की द्विविधा

Posted on 01 December 2016 by admin

द्रमुक के नेतागण राहुल गांधी से नाराज़ हैं, नाराज़ हैं कि राहुल को चेन्नै जाकर बीमार जयललिता को देखने की क्या जरूरत आन पड़ी थी? और अगर वे चेन्नै गए भी तो उन्हें कम से कम स्टालिन के साथ बैठ कर एक कप चाय तो पी लेनी चाहिए थी। डीएमके नेताओं की नाराज़गी की ख़बर जब राहुल को लगी तो उन्होंने इन नेताओं को अपने घर चाय पर बुलाया और उनके साथ अपने दिल की बात शेयर की। सूत्र बताते हैं कि राहुल ने इन नेताओं के समक्ष स्पष्ट किया कि इन दिनों उनके कार्यक्रम बस एक दिन पहले ही फाइनल होते हैं, ऐसा विगत दिनों उनकी सभाओं में हो रहे हंगामों के मद्देनजर किया गया है। चूंकि पिछले कई बार से राहुल को चंद अप्रिय हालातों का सामना करना पड़ा है, पहले जब वे दिल्ली में एक बाक्सिंग मैच देखने पहुंचे तो मुट्ठी भर लोगों ने उनका विरोध किया और मोदी-मोदी के नारे लगाए। एक-दो रोज पूर्व जब वे नोटबंदी के उपरांत दक्षिण दिल्ली के व्यापारियों का दुख दर्द पूछने पहुंचे तो ठीक यही वाकया वहां भी घटित हो गया। जब तक कि पार्टी का कोई नियत कार्यक्रम न हो, या कोई बड़ी सभा न हो, राहुल अपने कार्यक्रमों को सार्वजनिक करने से परहेज कर रहे हैं, क्योंकि उनके विरोध का यह वीडियो ’मोदी आर्मी’ आनन-फानन में सोशल मीडिया पर वायरल भी करा देती है कि ’देखो, राहुल लोगों के बीच कितने अलोकप्रिय हैं।’ लगता है यह बात द्रुमुक नेताओं को समझ में आ गई और उन्होंने अपना संदेशा चेन्नै अपने हाईकमान तक पहुंचा दिया है।

Comments (1)

बड़बोले सिंधिया

Posted on 01 December 2016 by admin

कांग्रेस के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले 15 दिनों से मध्य प्रदेष में घूम-घूम कर कांग्रेस के पक्ष में अलख जगाने में जुटे थे। भिंड, मुरैना, छतरपुर, ग्वालियर, विदिशा में उनके कई कार्यक्रम हुए, इस क्रम में जब वे खजुराहो पहुंचे तो वहां खजुराहो से सटे बांदा के कार्यकर्त्ता भी पहुंचे थे। वे यूपी चुनाव का जायजा लेने बांदा के नेताओं से पूछने लगे। सो, उन्होंने अपने अंदाज में वहां जमा हुए कांग्रेस जनों से पूछा-’इस बार यूपी में क्या लग रहा है आप लोगों को?’ उन्हें उपस्थित भीड़ की ओर जवाब मिला-’अगर प्रियंका दीदी आ जातीं तो यहां भी माहौल बदलने में देर नहीं लगेगी।’ सूत्र बताते हैं कि सिंधिया साहब इस पर यूं ही अनायास बड़बड़ा उठे-’आप लोग कभी भी गांधी परिवार से ऊपर नहीं सोच पाते हैं।’ कहते हैं कि उपस्थित भीड़ में कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी के एक नजदीकी रिश्तेदार भी मौजूद थे, उन्होंने यह खबर झटपट द्विवेदी जी तक पहुंचा दी, इस बात की भनक सोनिया गांधी को भी लगी और राहुल को भी। राहुल ने दिग्विजय सिंह से कहा कि वे इस बाबत सिंधिया से बात कर लें, फिर दिग्गी राजा ने बड़बोले सिंधिया को समझाया, तब जाकर ज्योतिरादित्य इस बात का इल्म हुआ कि उनसे एक बड़ी सियासी चूक हो गई है।

Comments Off on बड़बोले सिंधिया

अंबेडकर व कांग्रेस में तकरार

Posted on 01 December 2016 by admin

प्रकाश अंबेडकर का कांग्रेस ज्वॉइन करने का मामला खटाई में पड़ गया लगता है, नहीं तो प्रकाश के साथ कांग्रेस की बातचीत एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई थी। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने प्रकाश से राज्यसभा देने का वायदा किया था, साथ ही उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाया जाना भी तय था। दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस भी तय हो गई थी, इस प्रेस कांफ्रेंस को राहुल व प्रकाश संयुक्त रूप से संबोधित करने वाले थे कि ऐन वक्त अंबेडकर ने यू टर्न ले लिया और उन्होंने कांग्रेस से कहा कि वे अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में नहीं करेंगे अपितु वे कांग्रेस के साथ चुनावी समझौता करने को राजी हैं। कहते हैं इस बात पर राहुल बेतरह उखड़ गए और आनन-फानन में यह प्रेस कांफ्रेंस कैंसिल कर दी गई। अंबेडकर और गांधी एक बार फिर से साथ आते-आते रह गए।

Comments Off on अंबेडकर व कांग्रेस में तकरार

जब हरिवंश से लगा दंश

Posted on 01 December 2016 by admin

सेंट्रल हॉल में धुंरधर समाजवादी नेता शरद यादव अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद हरिवंश से भिड़ गए। दरअसल, हरिवंश एक बड़े पत्रकार हैं और बिहार-झारखंड के एक प्रमुख हिंदी दैनिक ’प्रभात खबर’ के प्रमुख संपादक रह चुके हैं। वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं। दरअसल शरद यादव हरिवंश से इसीलिए नाराज़ थे कि उन्होंने नोटबंदी के समर्थन में अपने अखबार में एक संपादकीय आलेख लिख डाला था। शरद ने उनसे कहा कि ’ये सब लिखने से पहले आपको एक बार मुझसे पूछ तो लेना चाहिए कि इस पर हमारी क्या राय है?’ हरिवंश का दो टूक जवाब आया-’हमने नीतीश जी से पूछ लिया था।’

Comments Off on जब हरिवंश से लगा दंश

सिद्धू कैसे पहुंचे कांग्रेस के द्वार

Posted on 01 December 2016 by admin

नवजोत सिंह सिद्धू और बैंस ब्रदर्स के बीच जब सब कुछ खत्म हो गया और बैंस ब्रदर्स ने ’आप’ का हाथ थाम लिया तो सिद्धू के पास कांग्रेस का द्वार खटखटाने के सिवा और कोई चारा नहीं बचा। दरअसल, सिमरजीत सिंह बैंस जब भी किसी सियासी गुफ्तगू के लिए सिद्धू को फोन करते थे, तो सूत्रों के मुताबिक उन्हें सिद्धू का यही रटा-रटाया जवाब सुनने को मिलता था कि ’अभी मैं मुंबई में हूं, शूटिंग में व्यस्त हूं।’ आजिज़ आकर बैंस ने आप के नंबर दो मनीष सिसौदिया से बात की और उनके आप में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त हो गया। इसके तुरंत बाद सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर कैप्टन अमरिंदर से मिलने पहुंची। कैप्टन ने राहुल गांधी से बात की और फिर यह तय हुआ कि नवजोत कौर कांग्रेस के टिकट पर पंजाब में चुनाव लड़ेगी, और अगर कैप्टन पंजाब के अगले सीएम बनते हैं तो वे अपनी अमृतसर की लोकसभा सीट सिद्धू के लिए खाली कर देंगे, अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर सिद्धू को कांग्रेस राज्यसभा में भेजेगी। और बात बन गई।

Comments Off on सिद्धू कैसे पहुंचे कांग्रेस के द्वार

नोटबंदी ने कई देशों को दर्द भी दिया है

Posted on 20 November 2016 by admin

नोटबंदी से उपजे खटराग में भगवा सियासत बेसुर-बेताल हुई जा रही है, संसद नए रण की जमीन तैयार कर रही है और विपक्षी पलटवार के लिए मुस्तैद लड़ाकों के मानिंद कमर कस चुके हैं। वाम व कांग्रेस से ताल्लुक रखने वाले अर्थशास्त्रियों को आशंका है कि मोदी का यह दांव उल्टा भी पड़ सकता है। क्योंकि सोवियत संघ, घाना, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया जैसे कई देशों में नोटबंदी के फैसलों से पहले ही बड़े भूचाल आ चुके हैं। घाना जैसे गरीब अफ्रीकी देश में वहां फैले व्यापक भ्रष्ट्राचार और टैक्स चोरी को रोकने के लिए 1982 में वहां की सरकार ने बड़े नोटों (सेडी) के चलन पर पाबंदी लगा दी, तो घाना के मुट्ठी भर अमीरों ने रातों रात अपने काले धन को विदेशी मुद्राओं में कन्वर्ट करा लिया। वहीं सुदूर इलाकों में रहने वाली गरीब जनता मीलों का सफ़र तय करके बैंकों तक पहुंची तो लाइनों में खड़े होकर भी उनका श्रम बेकार साबित होता रहा। कई तो रास्तों में ही लुट गए। डेड लाइन खत्म होने के बाद वहां बंडलों के बंडल बेकार नोट नज़र आए। वहां की पूरी इकॉनमी तहस-नहस हो गई। ऐसा ही कुछ हाल नाइजीरिया व जायरे जैसे देशों का भी हुआ। उत्तरी कोरिया में भी वहां के तानाशाह शासक किम जांग-II ने काले धन पर अंकुश लगाने के उद्धेश्य से वहां बड़े नोटों पर पाबंदी लगा दी। इसका असर वहां की खेती किसानी पर देखने को मिला, देश भुखमरी का शिकार हो गया। तानाशाह किम को अपने देश की जनता से माफी मांगनी पड़ी। किम ने नोट बंदी का ठीकरा अपने वित्त मंत्री पर फोड़ दिया और उन्हें सजा-ए-मौत की सजा दे दी। 1991 में सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाचोव ने देश में फैले काले धन पर लगाम लगाने के लिए बड़े रूबल पर एकाएक पाबंदी लगा दी। सनद रहे कि उस वक्त सोवियत संघ में एक तिहाई प्रचलन इन्हीं बड़े नोटों का था। गोर्वाचोव के इस फैसले से वहां मुद्रास्फीति की दर इस कदर बढ़ी की वहां कि अर्थव्यवस्था ढह गई और भयंकर राजनैतिक अस्थिरता और उथल-पुथल के बाद सोवियत संघ भी कई भागों में टूट गया। भगवान करे कि सियासी रंगों में रंगे इन रंगे सियारों (अर्थशास्त्रियों) की हकीकत परत दर परत खुल जाए, चूंकि-एक बिचारे मोदी के पीछे यूं भी पड़े हैं, सैंकड़ों रोज़मर्रा के मसले, सिर्फ एक नोट बंदी ही तो नहीं, तेरे मेरे दरम्यान के फासले।’

Comments (1)

हड़बड़ी में हुई गड़बड़ी

Posted on 20 November 2016 by admin

देश के अंदर नोट छापने वाली सभी प्रिंटिंग प्रेस यानी मिंट प्रेस से कहा गया था कि जो नए नोट छप रहे हैं वे दिसंबर से प्रचलन में लाए जाएंगे, पर इन मिंट प्रेस को इस बात का तनिक भी इल्म नहीं था कि नए नोटों के प्रचलन में आने से पूर्व 500 व 1000 के पुराने नोटों की दुकानें बंद हो जाएगीं। अचानक 8 तारीख की रात 8 बजे पीएम का राष्ट्र के नाम संदेश आता है और नोट बंदी का फैसला सुना दिया जाता है। यह पूरा ऑपरेशन इतने गुपचुप तरीकों से अंजाम दिया गया कि पीएम के संग कैबिनेट मीटिंग के लिए आए मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों को भी इस बात की कोई भनक नहीं थी। सूत्र बताते हैं कि पहली बार था कि इनके मोबाइल फोन भी बाहर रखवा लिए गए थे। अब सवाल उठता है कि नोट बंदी का जो फैसला दिसंबर में लिया जाना था उसे नवंबर में ही क्यों अमलीजामा पहना दिया गया? सूत्रों की मानें तो दो हजार के नए नोट की फोटो हैदराबाद से कहीं 6 नवंबर को ही सोशल साइट पर वायरल हो गई, सो सरकार को आनन-फानन में यह फैसला लेना पड़ा।

Comments Off on हड़बड़ी में हुई गड़बड़ी

दाउद हुए आउट

Posted on 20 November 2016 by admin

भाजपा यूपी चुनाव में इस बात का भी श्रेय लेना चाहेगी कि नोट बंदी के फैसले से दाउद इब्राहिम और हाफिज सईद जैसे सरगनाओं के पिछवाड़ों पर भी जोर की लात पड़ी है। खुफिया विभाग से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भारत में भी खूब सट्टा लगा था, और सट्टे पर लगी रकम इतनी बड़ी थी कि कई क्रिकेट मैचों की संयुक्त सट्टे की रकम से भी कहीं बड़ी। जाहिर तौर पर सट्टे का यह सारा नेटवर्क दाउद की शह पर उनके गुर्गे ऑपरेट कर रहे थे। कहते हैं ज्यादातर भारतीयों ने हिलेरी के पक्ष में पैसा लगाया था, सो ट्रंप की जीत के बाद एक बड़ी रकम नकदी के तौर पर दाउद की जेब में जाने वाली थी, ऐन वक्त मोदी के इस कालजयी फैसले से कई माफिया सरगनाओं के होश फाख्ता हो गए।

Comments Off on दाउद हुए आउट

Download
GossipGuru App
Now!!