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..और अंत में

Posted on 10 January 2017 by admin

सुब्रह्मण्यम स्वामी पर इन दिनों संघ का शीर्ष नेतृत्व मेहरबान दिखता है, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं से भी स्वामी इन दिनों निरंतर संपर्क में बताए जाते हैं। सूत्रों का दावा है कि संघ के निर्देश पर ही इन दिनों स्वामी ने अपनी जुबान सिल रखी है, यही वजह है कि मौके-बेमौके तल्ख बयानीबाजी की अपनी हरकतों से भी वे बाज आ रहे हैं। चुनांचे न तो वे केंद्र के सर्वशक्तिमान मंत्री अरूण जेटली के खिलाफ ही बेजा बयानबाजी कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने अटार्नी जनरल को भी बख्श रखा है, यहां तक कि जेटली करीबी अनुराग ठाकुर की बीसीसीआई से छुट्टी के बाद भी स्वामी की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। (एनटीआई-gossipguru.in)

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भाजपा का वॉर रूम अखिलेश के पीछे

Posted on 10 January 2017 by admin

सपा के झगड़ों से भले ही पार्टी का एक और चेहरा मीडिया और लोगों के बीच आया हो, पर एक ताजा जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक इन तमाम पारिवारिक झगड़े-फसाद के बीच से यूपी के युवा सीएम अखिलेश यादव एक विजेता के तौर पर उभर कर सामने आए हैं। इस सर्वेक्षण में दावा हुआ है कि पार्टी कार्यकर्त्ताओं और यूपी की आम जनता के बीच अखिलेश की आंखों से टपके आंसुओं ने उनके पक्ष में सहानुभूति लहर ला दी है। इन घटनाओं से बाहर निकल कर युवा अखिलेश की एक ऐसे नेता के तौर पर छवि बनी है, जो भ्रष्टाचार से लड़ना चाहता है और आम आवाम की भलाई के लिए विकास के कार्यक्रम चलाना चाहता है, पर पार्टी व परिवार के ‘गुंडा एलिमेंट’ उन्हें ऐसा करने से रोक रहे हैं। भाजपा का वॉर रूम भी इस बात से अच्छी तरह बाखबर है, चुनांचे सोशल मीडिया का करीने से इस्तेमाल कर भाजपा अखिलेश को ‘विलेन’ साबित करने में जुटी है और सोशल मीडिया पर उन्हें नया तमगा ‘औरंगजेब’ दिया गया है। एक ऐसा शासक जो सत्ता के लिए अपने बाप से भी बगावत करता है। पर भाजपा की असली चिंता अपनी बात गांव-चौबारे तक पहुंचाने की है, जहां अब भी सोशल मीडिया का उतना असर नहीं है, और ग्रामीण मतदाताओं की नज़र में अखिलेश एक नव अवतरित नायक है।

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मुखिया की तलाश में लोकसभा टीवी

Posted on 10 January 2017 by admin

लोकसभा टीवी की सीईओ सीमा गुप्ता का कार्यकाल खत्म हो गया है, चुनांचे उनके उत्तराधिकारी की जोर-शोर से तलाश जारी है। फिलहाल, इस सरकारी टीवी में मार्केटिंग का जिम्मा संभाल रहे एक शख्स सुमित सिंह को इसका कार्यवाहक सीईओ बना दिया गया है, यह और बात है कि मार्केटिंग का अनुभव रखने वाले इस शख्स को एडिटोरियल का किंचित ज्ञान है भी या नहीं। सूत्र बताते हैं कि राहुल देव और अभिलाश खांडेकर के नेतृत्व में एक अदद इंटरव्यू बोर्ड का गठन किया गया है। राहुल देव हिंदी के एक नामधन्य पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी में भी काम का पूर्व अनुभव है। अब सवाल उठता है कि ये अभिलाश खांडेकर कौन हैं? सूत्रों की मानें तो यह साहब ताई के अति दुलारे हैं, वे सिर्फ ताई की अनुकंपा से मध्य प्रदेश के एक प्रमुख हिंदी दैनिक के नेशनल ब्यूरो में नौकरी पा गए थे, यह और बात है कि उन्हें भी टीवी में कार्य करने का किंचित ही कोई पूर्व अनुभव है। सबसे दिलचस्प तो यह कि लोकसभा टीवी के सीईओ बनने की कतार में सेवा निवृत्त सीईओ सीमा गुप्ता के अलावा राजीव मिश्रा और सुमित टंडन जैसे दो पूर्व सीईओ भी शामिल हैं जो यूपीए के जमाने में सत्ता से नजदीकी का लाभ उठा चुके हैं, अब इन्होंने बदले मौसम में भी अपने लिए नए ठिकाने ढूंढ लिए हैं।

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टाटा ने भागवत से क्या कहा?

Posted on 10 January 2017 by admin

केंद्रनीत मोदी सरकार में भी रतन टाटा को चाहने वालों की कोई कमी नहीं है। न सिर्फ प्रधानमंत्री से टाटा का सीधा संवाद बना हुआ है, बल्कि वित्त समेत कई अहम मंत्रालयों में उनकी तूती बोलती है और उनके इस रूतबे को मुकेश अंबानी की दोस्ती से भी नई धार मिली है। कहते हैं कि केंद्र के एक हेवीवेट मंत्री की सलाह के बाद ही रतन टाटा को संघ सरचालक मोहन भागवत से मिलने की सुध आई। सूत्र बताते हैं कि टाटा जिस शायना एनसी के साथ भागवत से मिलने नागपुर गए थे, उन्हीं शायना के इन दिनों भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भी अच्छे संबंध हैं। शायना के जो चचेरे भाई टाटा के लीगल सेल से जुड़े हैं, उनकी केंद्र के एक बेहद प्रभावशाली मंत्री से बेहद करीबी रिश्ते हैं, और शायना को टाटा से मिलवाने में भी इस मंत्री की सबसे महती भूमिका थी। सूत्र बताते हैं कि संघ प्रमुख से रतन टाटा ने बेहद खुल कर बातचीत की और बातों-बातों में वे भागवत को यह बताना नहीं भूले कि जार्ज फर्नांडीस और सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसे नेताओं से उनके कितने पुराने रिष्ते हैं। टाटा याद करते हैं कि कैसे आपातकाल के जमाने में उन्होंने फर्नांडीस और स्वामी को अपने एक फ्लैट में शरण दी थी। कहते हैं टाटा को चाहने वालों की न्यायपालिका में भी कमी नहीं है और इस बात से सायरस मिस्त्री भी अच्छी तरह से वाकिफ हैं।

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रतन-मुकेश करीब आए

Posted on 10 January 2017 by admin

एक वक्त था जब भारतीय औद्योगिक जगत के दो बेताज बादशाह रतन टाटा और मुकेश अंबानी के दरम्यान चंद तल्खियां करवटें बदलती थीं, कुछ नीरा राडिया के प्रयासों की बदौलत और कुछ परिस्थितिजन्य संत्रास की वजह से आज भारत के ये दोनों शीर्ष उद्योगपति सबसे करीबी दोस्त बन गए हैं, कुछ इतने करीबी कि साइरस मिस्त्री के बारे में किंचित कठोर और कड़ा फैसला लेने से पूर्व, अगर रतन टाटा ने किसी से बात करने की जहमत उठाई तो वे बस मुकेश अंबानी थे। अंबानी से जुड़े एक करीबी सूत्र के मुताबिक उस दिन जब मुकेश को टाटा का फोन गया तो मुकेश नीदरलैंडस की राजधानी एम्सटर्डम के एक होटल में ‘जिम’ कर रहे थे। दरअसल, मुकेश व रतन को करीब लाने में उद्योगपति नुस्ली वाडिया की भी एक अपरोक्ष भूमिका रही है। नुस्ली वाडिया और रिलायंस के कर्णधार धीरूभाई अंबानी की व्यावसायिक दुष्मनी किसी से छुपी नहीं है, और ताजा हालात में रतन टाटा बनाम साइरस मिस्त्री की जंग में वाडिया का झुकाव साफ तौर पर साइरस मिस्त्री के लिए दिखता है, ऐसे में रतन टाटा का मुकेश अंबानी के प्रति रूझान शनैःशनैः बढ़ता चला गया। सो, इस वक्त मुकेश भी न सिर्फ खुलकर रतन टाटा का साथ दे रहे हैं, बल्कि अपनी दोस्ती को एक नया परवान भी दे रहे हैं।

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What’s next for Akhilesh ?

Posted on 02 January 2017 by admin

यादव परिवार में घमासान मचा है, इस सियासी घमासान के कई देखे-अनदेखे पहलुओं पर मंथन जारी है। कुछ पर्यवेक्षक इसे अमर सिंह बनाम प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बीच चल रही जंग की परिणति मानते हैं तो कुछ अब भी इसे बाप (मुलायम) बेटे (अखिलेश) की मिलीभगत करार देते हैं। इनका कहना है कि अखिलेश-मुलायम में इतने के बावजूद भी संवाद बना हुआ है, अखिलेश एक ओर जहां हावर्ड में पालिटिकल साइंस और पब्लिक पॉलिसी के सीनियर प्रोफेसर स्टीव जार्डिंग की राय को अहमियत दे रहे हैं, वहीं वे अहम राजनैतिक मसलों पर अपने पिता की राय को भी महत्व देते आए हैं। सूत्र बताते हैं कि यादव परिवार के इस सियासी महासंग्राम को हवा देने में प्रोफेसर रामगोपाल की उद्दात राजनैतिक महत्वांक्षाओं का भी हाथ है। कहते हैं अमर सिंह प्रोफेसर साहब को इस बात के लिए माफ नहीं कर पाए कि इन्होंने किसी भी कद्दावर ’बाहरी’ को सपा में टिकने नहीं दिया, चाहे वे खुद अमर सिंह हों, सतपाल मलिक हों, राज बब्बर हों या फिर रघु ठाकुर हों। कहते हैं पिछले कई महीनों से मुलायम और रामगोपाल के बीच बातचीत भी बंद थी। मुलायम को लगता है रामगोपाल उनके खिलाफ अखिलेश का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा सियासी ड्रामा प्रधानमंत्री को फायदा पहुंचाने की नियत से हुआ है, क्योंकि 30 दिसंबर को नोटबंदी के 50 दिन पूरे हो जाने के बाद विपक्षी दल भयंकर शोर गुल मचाने वाले थे, यादव परिवार की सियासी नौटंकी के बाद सुर्खियों में अन्य खबरों के लिए कोई जगह नहीं बच गई थी। ताजा घटनाक्रमों में अगर अखिलेश के पक्ष में ज्यादा सपा विधायक गोलबंद हो जाते हैं तो पिता मुलायम को पत्र के समक्ष झुकना पड़ सकता है और इस बात के आसार अब से दिखने लग गए हैं।

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कनिष्क की नई पाठशाला

Posted on 02 January 2017 by admin

राहुल गांधी के आंख-नाक-कान कहे जाने वाले कनिष्क सिंह को भूल गए क्या आप? कभी राहुल को सियासी ककहरा याद कराने वाले निर्वासित कनिश्क इन दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ-फेकल्टी से कानून की पढ़ाई पढ़ रहे हैं, इस कार्य में उनका साथ दे रहे हैं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सांसद पुत्र दीपेंद्र हुड्डा, इन्होंने भी लॉ-फेकल्टी में दाखिला लिया हुआ है। पर पिछले दिनों लॉ-फेकल्टी के छात्रों ने इन दोनों की कम उपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए हंगामा कर डाला, छात्रों में इस बात को लेकर आक्रोश था कि जहां आम छात्रों को लॉ-फेकल्टी में उनके कम अटेंडेंस को मुद्दा बना कर अगले एकेडमिक सेशन में प्रवेश पर रोड़े अटकाए जाते हैं वहीं इन दोनों को यानी कनिष्क व दीपेंद्र को कैसे गुपचुप तरीके से सेकिंड ईयर में प्रवेश करा दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल आक्रोशित छात्रों को समझा-बुझा कर षांत करा दिया है, पर आने वाले दिनों में इस मामले में नई चिंगारी फूट सकती है।

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शायना माने ना

Posted on 02 January 2017 by admin

शायना एन.सी भगवा पार्टी में एक नई सियासी पारी खेलने के लिए कमर कस चुकी है, इन दिनों वे सुर्खियों में है जब वे रतन टाटा को संघ प्रमुख भागवत से मिलवाने नागपुर के रेशम बाग लेकर गईं, सनद रहे कि शायना के भाई टाटा के लीगल सेल के एक प्रमुख स्तंभ हैं और उन्हीं के माफर्त शायना रतन टाटा तक पहुंच पाईं। टाटा बनाम सायरस मिस्त्री की जंग अब एक निर्णायक मुकाम पर है, ऐसे में संघ प्रमुख को टाटा से मुलाकात के लिए राजी कर शायना ने एक बड़ा तीर मार लिया है। इन दिनों शायना महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के बेहद करीबियों में शुमार होती हैं। इससे पूर्व शायना को अमित शाह व नितिन गडकरी की परिक्रमा करते भी देखा गया था, पर इससे वह कुछ खास हासिल नहीं कर पाईं, न तो मुंबई से वह लोकसभा का टिकट पा सकीं, और न ही अपने लिए राज्यसभा की किसी अदद सीट का जुगाड़ ही कर पाईं, चुनांचे इस बदले सियासी परिदृष्य में शायना अपने लिए एक नई भूमिका की तलाश में हैं।

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अडवानी का सियासी दांव

Posted on 02 January 2017 by admin

सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों अडवानी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को फोन किया और उनसे जानना चाहा कि आंध्र प्रदेश को मिलने वाले स्पेशल पैकेज का क्या हुआ? इसको लेकर वे वाकई चिंतित हैं। नायडू अडवानी की इन भंगिमाओं के बेहद कायल हुए और उन्होंने फौरन केंद्र सरकार के अपने दोनों मंत्रियों को अडवानी के पास भेजा ताकि आंध्र के स्पेशल पैकेज को लेकर वे उनको ब्रीफ कर सकें और अडवानी यह बात पीएम तक पहुंचा सकें। सूत्र बताते हैं कि अडवानी ने नायडू को यहां तक आष्वस्त किया था कि वे आंध्र के समर्थन में एक प्रतिनिधिमंडल लेकर पीएम के पास जाएंगे। जब ये दोनों मंत्री अडवानी के पास पहुंचे तो कहते हैं कि अडवानी ने स्पेशल पैकेज की बात ही गोल कर दी, मामला सिर्फ राष्ट्रपति चुनाव पर ही टिक गया। आहत नायडू ने फिर फोन कर इस बात की जानकारी वेंकैया नायडू को दी, वेंकैया ने नायडू को समझाया ’आप को जो कहना है आप पीएम से सीधी बात करें, वैसे भी वे आपका बहुत सम्मान करते हैं।’

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…और अंत में

Posted on 02 January 2017 by admin

कांग्रेस के बंगाल से सांसद अभिजीत मुखर्जी पिछले दिनों अपने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के बारे में कुछ गंभीर शिकायतें की। सूत्र बताते हैं कि अभिजीत ने अधीर के बारे में राहुल के समक्ष दो टूक कहा कि अधीर न सिर्फ ममता के ‘पे-रोल’ पर है, बल्कि असामाजिक तत्वों को संरक्षण देते हैं, अभिजीत ने राहुल के समक्ष गुहार लगाई कि बंगाल को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलना चाहिए। राहुल ने अधीर को बुला कर उन पर लगाए आरोपों पर सफाई मांगी। जब अधीर को राहुल से यह पता चला कि उन पर ये आरोप अभिजीत लगा रहे हैं तो उन्होंने अभिजीत को फोन किया और उनसे वे फोन पर ही उलझ पड़े।(एनटीआई-gossipguru.in)

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