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अखिलेश के पंख निकल आए हैं

Posted on 23 January 2017 by admin

सपा और कांग्रेस गठजोड़ को यूपी में किसी की नज़र लग गई, या आत्ममुग्ध आत्मविश्वास से लबरेज युवा अखिलेश ने कांग्रेसी उम्मीदों से छल किया? एक वक्त इस पूरे चुनावी गठजोड़ की इबारत लिखी जा चुकी थी, कांग्रेस की ओर से पीके की पहल पर प्रियंका गांधी इसकी सूत्रधार बनीं। पर जैसे ही चुनाव आयोग ने अखिलेश को उनकी साइकिल थमाई, अखिलेश हवाओं से बात करने लग गए। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने राहुल और प्रियंका के फोन तक लेने बंद कर दिए। कांग्रेस के निवर्तमान विधायकों को सपा तोड़ने में जुट गई, उन सीटों से भी अखिलेश ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए जिन सीटों पर 2012 के चुनाव में कांग्रेस का प्रत्याशी जीता था। परेशान होकर यूपी के कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने अखिलेश के राजनैतिक मार्गदर्शक प्रोफेसर रामगोपाल यादव को फोन लगाया और उनसे शिकायत लगाई कि अखिलेश तो राहुल जी का भी फोन नहीं ले रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इस पर प्रोफेसर साहब ने दो टूक कहा कि वे (अखिलेश) हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, सो इन दिनों वे बहुत व्यस्त हो गए हैं, सो वे आपके उपाध्यक्ष जी का फोन नहीं उठा पाए, इशारा साफ था कि अखिलेश को अब कांग्रेस अध्यक्षा का फोन जाना चाहिए।

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प्रोफेसर का भगवा कनेक्षन

Posted on 23 January 2017 by admin

कांग्रेसी नेताओं का दर्द है कि दरअसल प्रोफेसर रामगोपाल ही उनकी राहों में रोड़े अटका रहे हैं और किंचित वे भाजपा के हाथों में खेल रहे हैं। इसकी वजह बताते हुए कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि प्रोफेसर साहब व उनके पुत्र का नाम नोएडा के कुचर्चित यादव सिंह मामले में पहले ही आ चुका है और यह मामला फिलवक्त सीबीआई के पास है। प्रोफेसर रामगोपाल की अमित शाह के बेहद खासमखास माने जाने वाले पत्रकार हेमंत शर्मा से दांत कटी रोटी वाली दोस्ती है, नोएडा के सेक्टर 44 में रहने वाले हेमंत शर्मा के पड़ोसियों ने अक्सर प्रोफेसर साहब को शर्मा जी के घर आते-जाते देखा है। सो, यह माना जा रहा है कि भगवा मंशाओं व आकांक्षाओं को परवान चढ़ाने में हेमंत शर्मा एक महती भूमिका निभा रहे हैं। और जाने-अनजाने कांग्रेस का खेल भी खराब कर रहे हैं।

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…और अंत में

Posted on 22 January 2017 by admin

कहते हैं पिता (मुलायम) पुत्र (अखिलेश) को एक कराने में अखिलेश के पुत्र (8-10 वर्षीय) अर्जुन की एक महती भूमिका रही, मुलायम का अर्जुन से एक बेहद खास लगाव है, उसके बगैर वह रह नहीं पाते हैं, अपने पुत्र से मेल मिलाप के बाद मुलायम ने अपने पसंद के मट्ठे वाले आलू, घुईयां (अरबी) और कद्दू की सब्जी का जमकर लुत्फ उठाया। इन दिनों वे अखिलेश को अतिरिक्त सियासी ज्ञान भी दे रहे हैं और अपने पोते अर्जुन को अतिरेक स्नेह भी। (एनटीआई-gossipguru.in)

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आप तो ऐसे न थे

Posted on 22 January 2017 by admin

आप ने घोषणा की है कि वह राजनीति से वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, चुनांचे पंजाब में भी उसके जो उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे वह अपने लिए सरकार से सुरक्षा गार्ड तक नहीं लेंगे। सनद रहे कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भी आप की ओर से ऐसा ही कुछ कहा गया था। आज आप दिल्ली में ’आप’ के नेताओं को देख सकते हैं, उनके पास गाड़ी भी है, बंगला भी है और सुरक्षा के अन्य तामझाम भी हैं। अब सवाल उठता है कि पंजाब की भोली-भाली जनता ऐसे सियासी शिगुफों पर कैसे यकीन करे?

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मजीठिया का आतंक

Posted on 22 January 2017 by admin

आम आदमी पार्टी पूरे दमखम के साथ पंजाब के चुनावी मैदान में डटी है, पंजाब के निवर्तमान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की विधानसभा सीट लांबी और सुखबीर बादल की जलालाबाद जैसी महत्वपूर्ण सीटों से आप उम्मीदवार मजबूती से लड़ रहे हैं, और उनका चुनाव प्रबंधन भी यहां किंचित बेहतर है। पर पंजाब की एक सीट ऐसी भी है जहां आप को अपना चुनाव दफ्तर खोलने के लिए भी कोई किराए पर जगह नहीं दे रहा है, और यह सीट है मजीठा। जहां से बादल परिवार के मजीठिया चुनाव लड़ रहे हैं। अब मजीठिया के प्रभाव या उनके आतंक का इतना असर है कि विरोधी दल वहां प्रचार नहीं कर पा रहे हैं, आप की भी मुश्किल यही है जब पार्टी दफ्तर ही नहीं, तो चुनाव प्रचार नियंत्रित कहां से हो?

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वित्त मंत्री का मित्र प्रेम

Posted on 22 January 2017 by admin

टीवी के एक नामधन्य पत्रकार जो वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुंहलगे मित्रों में शुमार होते हैं, एक दिन उनके साथ अकेले में बैठे थे, सो बातों ही बातों में उन्होंने वित्त मंत्री से पूछ लिया-’सच बताइए, आपको नोटबंदी के बारे में पहले से कुछ पता नहीं था न?’ जेटली टाल गए, कुछ और बात करने लगे। पत्रकार महोदय से रहा नहीं गया, उन्होंने आग्रहपूर्वक फिर पूछ लिया-’अरुण जी, सच बताइए न आपको पता था?’ जेटली हौले से मुस्कराए और बोले-’जरा गौर से देख लीजिएगा, उस नोटिफिकेशन पर दस्तखत मेरे ही हैं।

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पीएम के पिटारे में बड़ी योजनाओं का अंबार

Posted on 15 January 2017 by admin

देश के चतुर सुजान पीएम चुप नहीं बैठे हैं, उनके रणनीतिकार कुछ बड़ी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में जुटे हैं, इसमें से एक योजना के बारे में स्वयं पीएम का कहीं शिद्दत से मानना है कि यह भाजपा सरकार का सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक्स साबित हो सकता है और वह है यूनिवर्सल बेसिक इंन्कम योजना, इस योजना के तहत देश के हर व्यक्ति की कम से कम एक निश्चत आय का लक्ष्य तय किया जा सकता है। इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, जिसके तहत मध्य प्रदेश के एक पंचायत को चुना गया है, जहां प्रति व्यक्ति को पांच सौ रुपए प्रति माह की दर से सरकार की ओर भत्ता दिया जा रहा है। इस योजना के बेहद सकारात्मक परिणाम निकल कर सामने आए हैं और जिन लोगों को इस योजना से जोड़ा गया है उनके जीवन व रहन-सहन में आमूल-चूल बदलाव दिखने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि 2019 के आम चुनाव के परिप्रेक्ष्य में मोदी सरकार के पिटारे में ऐसी कई लोकलुभावन योजनाएं कुनमुना रही है, जिसमें रोज़गार भत्ता के अलावा वृद्धावस्था पेंशन भी शामिल है। भाजपा की देखा-देखी आम आदमी पार्टी भी इस जंग में कूद आई है, अभी गोवा में आप ने ऐलान किया है कि अगर वहां आप की सरकार आई तो गोवावासियों को 3500 रुपए का भत्ता दिया जाएगा।

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पुराने वफादारों ने नेताजी का साथ छोड़ा

Posted on 15 January 2017 by admin

हालिया सियासी जंग में नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव ने न सिर्फ अपने बेटे अखिलेश से दूरी बना ली है, बल्कि अपने तीन सबसे करीबी लोगों को भी खो दिया जो पिछले 30 वर्षों से साए की तरह नेताजी के साथ थे। अब ये तीनों पाला बदल कर अखिलेश के साथ चले गए हैं, इनमें से एसआरएस यादव और जगजीवन 3 दशकों तक नेताजी के बतौर पीए उनका काम-काज संभालते रहे थे, तीसरे व्यक्ति हैं नेताजी के पीएसओ रहे शिवकुमार जो हमेशा साए की तरह नेताजी के साथ रहे हैं, और नेताजी की तकरीबन हर तस्वीर में शिवकुमार उनके पीछे खड़े नज़र आ जाते थे। पिछले दिनों जब अखिलेश ने बगावत का झंडा बुलंद किया तो शिवकुमार नेताजी के बजाए उनके पुत्र के पीछे कहीं शिद्दत से खड़े नज़र आए।

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अखिलेश की अंग्रेज़ी व देसी मुलायम

Posted on 15 January 2017 by admin

अपने बेटे से कोई बाप इतना भी नाराज हो सकता है भला, पिछले दिनों राहुल-प्रियंका का एक खास संदेशा लेकर जब एक कद्दावर कांग्रेसी नेता मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे तो नेताजी ने अपना पूरा दिल खोल कर उनके सामने रख दिया। नेताजी कहते रहे कि अखिलेश में ऐसा कुछ नहीं जो उनसे पा सका है, सिवा अपनी शक्ल सूरत के, न तो अखिलेश ने उनकी इतनी लंबी राजनैतिक साधना से कुछ सीखा और न ही यह सीखा कि अपने आदमियों को कैसे अपने साथ एकजुट रखा जाता है। सूत्र बताते हैं कि अखिलेश से आहत नेताजी रह-रह कर शिवपाल यादव के पुत्र आदित्य की तारीफों के पुल बांधने लगते हैं, बकौल नेताजी ’ देखो शिवपाल के बेटे को, क्या अंग्रेज़ी बोलता है, वह तो अंग्रेज़ों से अच्छी अंग्रेज़ी बोलता है। अखिलेश सीखे उससे अंग्रेज़ी, उसको तो विदेश से बुलावा आता है अंग्रेज़ी में बोलने के लिए। अभी-अभी स्विट्जरलैंड से लौटा है, वहां उसका कोई लेक्चर था।’ सचमुच बड़े नादान हैं नेताजी, अनजाने में ही किस देश की मिसाल दे गए।

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…और अंत में

Posted on 15 January 2017 by admin

’नेशन वांट्स टू नो’ फेम अर्णब गोस्वामी इस 26 फरवरी से अपना नया ’चैनल रिपब्लिक’ लेकर आ रहे हैं, सूत्र बताते हैं कि इस चैनल में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी राज्यसभा सांसद व उद्योगपति राजीव चंद्रशेखर की है, अर्णब की कंपनी एआरजी आउटलियर, जिसके एमडी स्वयं अर्णब हैं, इसमें इनकी पत्नी समयाब्रता रे का सबसे ज्यादा निवेश है। अर्णब ने ये निवेश सार्ग मीडिया होलिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए किया है। अर्णब की कंपनी एआरजी आउटलियर में पैसा लगाने वाले राजीव चंद्रशेखर कोई अकेले व्यक्ति नहीं है, उनके अलावा इस कंपनी में 14 अन्य लोगों या कंपनियां के भी पैसे लगे हैं।

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