Posted on 07 May 2017 by admin
जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने केंद्र सरकार को लताड़ लगाई है कि लोकपाल की नियुक्ति क्यों अटकी हुई है? केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि चूंकि इस वक्त कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं है, इसीलिए निर्णय लेने में बाधा आ रही है। तो माननीय कोर्ट ने जानना चाहा कि फिर सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति कैसे हो गई, उसमें भी तो नेता प्रतिपक्ष की राय लेनी होती है? (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 24 April 2017 by admin
अभी पिछले दिनों लखनऊ में चंद्रशेखर जयंती का आयोजन था, शहर में इसको लेकर कई-कई कार्यक्रम आहूत थे, पर दो कार्यक्रम जो सबसे महत्त्वपूर्ण थे उनमें से एक का आयोजन योगी सरकार द्वारा किया गया था, दूसरे कार्यक्रम का आयोजन समाजवादी पार्टी ने किया था। मज़े की बात तो यह कि राज्य के ज्यादातर ठाकुर नेता जिनमें सपा के एमएलए व एमएलसी भी शामिल थे, वे अपनी पार्टी के कार्यक्रम में शरीक होने के बजाए, योगी द्वारा आहूत सरकारी कार्यक्रम में जा पहुंचे, जो कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि ठाकुर बिरादरी में योगी सबसे बड़े नेता के तौर पर उभर रहे हैं। यह बात राजनाथ सिंह की पेशानियों पर बल ला सकती है, पर मुमकिन है कि यह रणनीति मोदी-शाह द्वय के मेगा प्लॉन का एक हिस्सा हो।
Posted on 24 April 2017 by admin
प्रख्यात चिंतक गोविंदाचार्य के 75वें जन्म दिवस के मौके पर नई दिल्ली के मावालंकर हॉल में खूब भीड़ जुटी और इस मौके पर ‘भारत गौरव अभियान’ की शुरूआत की गई। सनद रहे कि जब 16 वर्ष पूर्व गोविंदाचार्य को अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मनमुटाव के बाद पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था तब भी 2001 में इसी मावालंकर हॉल में उनके समर्थन में एक सभा हुई थी और उस सभा में भी हजारों की तादाद में भीड़ जुटी थी। इस भीड़ में भाजपा से दीगर कई दलों के नेतागण शामिल थे, पर भाजपा से कोई भी बड़ा नेता ‘भारत गौरव अभियान’ का हिस्सा बनने की हिम्मत नहीं जुटा पाया, सिवा अदद सुब्रह्मण्यम स्वामी के जो खम्म ठोककर वहां मौजूद थे। जबकि आयोजकों का दावा है कि उन्होंने दो महीने एडवांस में इस कार्यक्रम की जानकारी भाजपा के तमाम नेताओं को दे दी थी, सच है सियासत हवाओं पर लिखा पैगाम सबसे पहले पढ़ लेती है।
Posted on 24 April 2017 by admin
नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस रविवार को भाजपा शासित दस राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम बैठक करेंगे। सूत्र बताते हैं कि यह बैठक दो खास वजहों से बुलाई गई है, एक तो 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राज्यवर तैयारियों का जायजा लिया जाएगा, साथ ही जिन राज्यों में आने वाले दिनों में चुनाव होने हैं, उस पर भी विचार विमर्श होगा। सूत्र बताते हैं कि टीम शाह ने भाजपा शासित तमाम राज्यों की राज्य सरकारों की कार्यकुशलता को लेकर एक डॉसियर बनाया है, इस बैठक में बिन्दुवार इस डॉसियर में उठाए गए मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
Posted on 24 April 2017 by admin
रविवार को आहूत मुख्यमंत्रियों की बैठक में झारखंड के लिट्टीपारा उप चुनाव में भाजपा की हार को लेकर भी गहन मंत्रणा हो सकती है। लिट्टीपारा सीट पर विगत चार दशकों से झारखंड मुक्ति मोर्चा का दबदबा है, मोदी-शाह द्वय इस बार उसे तोड़ना चाहते थे। यही वजह है कि इस उप चुनाव में न सिर्फ मोदी ने यहां रैली की, बल्कि भाजपा ने संसाधनों में भी कोई कमी नहीं आने दी। विश्वस्त सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो भगवा इरादों में रंग भरने के लिहाज से यहां के लोगों में कोई 1 लाख मोबाइल फोन भी मुफ्त बांटे गए थे। दिलचस्प तो यह कि जब माननीय राष्ट्रपति इस दफे अपने झारखंड दौरे पर गए तो सरकार के कई लोकलुभावन स्कीम के उन्होंने बकायदा उद्घाटन भी किए। इन तमाम कोशिशों के बाद भी भाजपा लिट्टीपारा उप चुनाव कोई 12,900 वोटों से हार गई, ऐसे में वहां के मुख्यमंत्री रघुवर दास को तो इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ सकती है।
Posted on 24 April 2017 by admin
टीम मोदी ने अभी से 2019 के आम चुनाव के लिए कमर कस ली है, इसके लिए बकायदा एक ’वार रूम’ का गठन किया जा चुका है और इस वॉर रूम ने काम करना भी शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया को हेंडल करने के लिए एक ओर जहां विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, वहीं लोकसभा सीट के हिसाब से अलग-अलग ग्राउंड लेवल सर्वे किए जा रहे हैं, उनके आंकड़ो को खंगाला जा रहा है। वहीं जनप्रतिनिधियों की लोकप्रियता के भी आकलन हो रहे हैं। चुने हुए अथवा हारे हुए सांसद क्षेत्र में कितना सक्रिय हैं, जनता की उम्मीदें क्या है, कौन से मुद्दे 2019 के चुनाव में प्रभावी रह सकते हैं, उनका विश्लेषण हो रहा है। और सबसे खास बात तो यह कि देश के वरिष्ठ पत्रकारों को भाजपा अपने वॉर रूम से जोड़ रही है और इसके एवज में उन्हें अच्छा खासा पैसा भी दे रही है, वह भी कैश में, कैशलेस जमाने में कैश की इतनी आसान प्राप्ति, पत्रकारों को और चाहिए क्या?
Posted on 24 April 2017 by admin
बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के ताजा फैसले से (करीब एक दर्जन नेताओं पर फिर से मुकदमा चलेगा) तो कभी पीएम इन वेटिंग और अब प्रेसिडेंट इन वेटिंग कहे जाने वाले अडवानी की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। इस जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए माना जा रहा था कि अडवानी की दावेदारी भी बुलंद थी। पर अडवानी खेमे ने अभी भी हथियार नहीं डाला है, अडवानी समर्थकों का तर्क है कि कोर्ट के ताजा फैसले के बाद भी अगर उमा भारती नैतिक आधार पर मंत्रिपद से इस्तीफा नहीं दे रही हैं तो फिर अडवानी जी भी तो राष्ट्रपति पद के लिए एकदम ’फिट’ हैं। क्या अडवानी वाकई राष्ट्रपति पद के लिए एकदम ’फिट’ है, इसका आखिरी निर्णय तो नरेंद्र मोदी को ही लेना है। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 17 April 2017 by admin
यूपी के एक कद्दावर नेता अखिलेश दास नहीं रहे, उनके पिता बनारसी दास गुप्त यूपी के सीएम रह चुके थे। सूत्र बताते हैं कि धन संपन्न अखिलेश दास ने इस दफे के यूपी चुनाव में कांग्रेस की जी खोल कर मदद की थी और उनकी प्रियंका गांधी से इस बाबत वन टू वन बात भी हो चुकी थी और प्रियंका ने उन्हें यूपी से कांग्रेस की टिकट पर राज्यसभा में लाने का वायदा किया था, पर किस्मत ने पलटी मारी और कांग्रेस मात्र 7 सीटों पर सिमट आई, यह न सिर्फ प्रियंका व राहुल के लिए, बल्कि दास के लिए भी उतना ही बड़ा आघात था। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 17 April 2017 by admin
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अपनी बंपर जीत को लेकर भगवा पार्टी पूरी तरह आश्वस्त है। हालिया जनमत सर्वेक्षणों में भी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को इस बात के इशारे मिले हैं कि कर्नाटक में इस दफे कमल के प्रस्फुटन की अपार संभावनाएं हैं। सूत्र बताते हैं कि शाह अब से पहले इस रणनीति पर विचार कर रहे थे कि येदुरप्पा का चेहरा सामने रख कर चुनाव में जाया जाएगा, पर यूपी के बाद की बदली परिस्थितियों में यह तय हुआ कि यूपी के तर्ज पर कर्नाटक में भी मोदी का चेहरा सामने रख कर चुनाव लड़ा जाएगा और चुनाव नतीजों के बाद सीएम के नाम की घोषणा स्वयं अमित शाह करेंगे। देवेगौड़ा के छोटे पुत्र एच डी रेवेन्ना भगवा पार्टी ज्वॉइन करने को तैयार हैं, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस काल में केंद्रीय विदेश मंत्री रह चुके एस एम कृष्णा पहले ही भाजपा ज्वॉइन कर चुके हैं। कृष्णा के सगे-संबंधियों ने उनके विदेश मंत्री काल में कई अफ्रीकी मुल्कों में अपना धंधा जमाया था, सूत्र बताते हैं कि इसकी पोल खुल चुकी है और किसी संभावित जांच से बचने के लिए कृष्णा भाजपा की शरण में आ चुके हैं।
Posted on 17 April 2017 by admin
मनोज सिन्हा भले ही यूपी की कमान पाने से बाल-बाल चूक गए हों पर भगवा राजनीति में उनकी धमक कम नहीं हुई है, क्योंकि वे मोदी, शाह और संघ तीनों के दुलारे हैं और ऐसे नायाब संयोग विरले ही देखने को मिलते हैं। सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि अभी दो-तीन रोज पूर्व जब संसद सत्र भी जारी था तो सिन्हा ने अपने सरकारी आवास पर यूपी के चंद सांसदों के लिए एक रात्रि भोज का आयोजन किया था, इतफाकन इस डिनर पर सबसे ज्यादा भाजपा सांसद पूर्वांचल के थे। इन सांसदों ने समवेत स्वरों में सिन्हा के यूपी के सीएम नहीं बन पाने पर अपनी वेदना प्रकट की और कहा कि ’आप बन जाते तो हमारे भी अच्छे दिन आ जाते, क्योंकि आप नेक इंसान हैं, व्यवहार कुशल हैं, सबके काम आते हैं। अब योगी जी के समक्ष तो अपनी बात रख पाना भी मुश्किल है।’ पार्टी में अपने लिए इतना समर्थन देख कर एकबारगी सिन्हा भी भावुक हो गए, सूत्र बताते हैं कि उन्होंने अपने साथी सांसदों से कहा-’आप चिंता मत करो, मुझे उससे भी बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, जिससे मैं आप सबकी रक्षा कर सकूंगा।’ सांसदों ने मजमून भांप लिया, उन्होंने जान लिया कि मंत्रिमंडल के आने वाले फेरबदल में सिन्हा को रक्षा मंत्रालय मिल सकता है।’ अति पिछड़ी जाति के एक सांसद ने बाहर निकल कर अपने एक मुंहलगे पत्रकार से राज उगल दिए कि ’सिन्हा जी रक्षा मंत्री बनेंगे।’ जब यह खबर सिन्हा के निजी सचिव को लगी तो उन्होंने फौरन उस सांसद से संपर्क साधा और उनसे मुंह बंद रखने को कहा, इस चेतावनी के साथ कि ’इस सरकार में पहले कुछ जो न्यूज में आ जाता है, वह फिर कभी होता नहीं है।’