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…और अंत में

Posted on 29 May 2017 by admin

अपनी पार्टी से नाराज चल रहे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहार भाजपा के महाबली सुशील मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शॉटगन चाहते हैं कि पार्टी हाईकमान अविलंब सुशील मोदी की तमाम पार्टी पदों से छुट्टी करें। शॉटगन के समर्थन में ’शत्रुघ्न सिन्हा फैंस क्लब’ जल्द ही सुशील मोदी को हटाने के लिए एक बड़े हस्ताक्षर अभियान का श्रीगणेश कर रहा है, इसके बाद इन हस्ताक्षरों को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के पास भेजा जाएगा ताकि वह बिहार की जनता की भावनाओं को समझ सकें। सूत्र बताते हैं कि शत्रु सुशील मोदी से इस बात को लेकर खफा हैं कि उन्होंने वक्त-बेवक्त शत्रु पर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं पर शत्रु की दिक्कत है कि बिहार भाजपा का कोई भी बड़ा नेता उन्हें समर्थन देने के लिए आगे नहीं आ रहा है। (एनटीआई-gossipguru.in)

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हाथ हिलाना मना है

Posted on 22 May 2017 by admin

इस दफे जब पीएम केदारनाथ की यात्रा पर गए और एक जनसभा को संबोधित कर लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार कर रहे थे, तो ऐन वक्त मोदी के पीछे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और भाजपा के केंद्रीय पदाधिकारी श्याम जाजू भी खड़े थे, पीएम की देखा देखी इन दोनों ने भी पब्लिक को हाथ हिलाना शुरू कर दिया, सूत्र बताते हैं कि इस पर वहां मंच पर मौजूद एसपीजी ने आपत्ति की और उन्होंने इन दोनों नेताओं को पीएम के साथ हाथ हिलाने से मना कर दिया। मुमकिन है यह घटना पीएम के संज्ञान में भी हो, पर स्वयं मोदी ने भी इस घटना को कोई तवज्जो नहीं दी।

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रतन टाटा भी राष्ट्रपति पद की रेस में

Posted on 22 May 2017 by admin

हालांकि नए राष्ट्रपति को लेकर कहते हैं प्रधानमंत्री और भाजपा के शीर्ष ने अपना मन बना लिया है और इस बारे में संघ के शीर्ष नेतृत्व की सहमति भी हासिल कर ली गई है, विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि अगले राष्ट्रपति के तौर पर एनडीए की संभावित उम्मीदवार लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन या फिर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हो सकती हैं। अगर सुषमा स्वराज के स्वास्थ्य ने उनका साथ दिया तो वह गंभीर उम्मीदवार के तौर पर उभर सकती हैं, नहीं तो सुमित्रा महाजन का नाम एक तरह से तय माना जा रहा है। फिर भी रतन टाटा व अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। कहते हैं पिछले कुछ दिनों में कम से कम चार बार रतन टाटा पीएम से मिले हैं। यह भी माना जाता है कि सायरस मिस्त्री ने जब एक तरह से ममता बनर्जी से हाथ मिला लिया तो पीएम के चाहने पर ही रतन टाटा ने मिस्त्री को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया, अब बारी प्रतिदान की है।

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अपने डिप्टी के निशाने पर योगी

Posted on 22 May 2017 by admin

एक मीटिंग में यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या अपने सीएम योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में भी हुंकार भर गए और उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को लगभग चेतावनी भरे अंदाज में कह डाला कि ’बतौर पार्टी अध्यक्ष वे सबको कड़ी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर किसी भी पार्टी नेता को या कार्यकर्ता को पार्टी संगठन के समानांतर अगर कोई दूसरा संगठन चलाते हुए पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी।’ सनद रहे कि इन दिनों योगी की ’हिंदू युवा वाहिनी’ चर्चा में है और योगी ने एक तरह से साफ संकेत दिए हैं ’हिंदू युवा वाहिनी’ को बंद नहीं किया जाएगा, यह पहले की तरह जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर काम करती रहेगी। ऐसे में मौर्या के बड़बोलों ने एकबारगी जरूर योगी की पेशानियों पर बल ला दिए हैं।

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सिद्दिकी का सच

Posted on 22 May 2017 by admin

पिछले दिनों मायावती से जुड़े ओडियो टेप जारी हुए और इन टेपों में बारंबार उनके पूर्व विश्वस्त नसीमुद्दीन सिद्दिकी को बहिनजी और उनके पीए से यह कहते हुए सुनाया गया कि ’बहिन जी ये लोग मिल नहीं रहे हैं, मेरा फोन उठा नहीं रहे हैं, एक बार इनसे मिल लूं तो आपके पास आकर सारा हिसाब किताब करूं।’ सूत्र बताते हैं कि जिस प्रेस कांफ्रेंस में नसीमुद्दीन ने ये टेप जारी किए, ये लोग आजू-बाजू सिद्दिकी के साथ ही बैठे हुए थे। इसी टेप में कई-कई बार सिद्दिकी कई उम्मीदवारों के बारे में यह कहते सुने जा सकते हैं कि इनको टिकट उन्होंने नहीं दिलवाया है, जबकि मायावती से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि इस यूपी विधानसभा चुनाव में बहिनजी ने केवल नसीमुद्दीन के कहने पर बसपा के 102 टिकट बांटे थे, जिनमें से ज्यादातर टिकट पश्चिमी यूपी के थे।

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केजरी की मोदी से तौबा!

Posted on 22 May 2017 by admin

पिछले कुछ दिनों में आम आदमी पार्टी के साथ जो कुछ हुआ उसने पार्टी रणनीतिकारों को हैरान-परेशान कर रखा है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में अब तय हुआ है कि अब आप के नेतागण सीधे तौर पर मोदी का नाम लेकर ’हल्ला बोल’ नहीं करेंगे क्योंकि अपने पूर्व के अनुभवों से पार्टी ने जान लिया है वे जितनी बार मोदी का नाम लेकर भाजपा पर हमला बोलते हैं, ’आप’ का वोट बैंक उतनी ही तेजी से लुढ़कता जाता है और फायदे में बीजेपी रहती है। सो, आप के रणनीतिकारों ने तय किया है कि वे मोदी सरकार की जगह केंद्र सरकार का नाम लेंगे। क्या यही वजह है कि अरविंद केजरीवाल ने भी इन दिनों अपना मुंह सिल रखा है, उनकी ट्विटर चिडि़या का भी कहीं नामो-निशां नहीं मिल रहा है, क्योंकि केजरीवाल स्वयं जानते हैं कि उनका मुंह खुलेगा तो बस मोदी-मोदी का ही जाप होगा।

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आप में ऐसे थमी बगावत

Posted on 14 May 2017 by admin

दरअसल, कपिल मिश्रा प्रकरण की पटकथा काफी पहले लिखी जा चुकी थी, आप से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कुमार विश्वास पहले से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे, उन्हें लगता था कि ‘आप’ अपने आदर्शों से भटक गई है। सूत्रों की मानें तो कुमार विश्वास के समर्थन में तेजी से आप के विधायक लामबंद होने लगे थे, धीरे-धीरे असंतुष्ट विधायकों की फेहरिस्त लंबी हुई जा रही थी, आधे दर्जन विधायकों ने तो बकायदा कुमार के समर्थन में दस्तखत भी कर दिए थे। आप से जुड़े सूत्र बताते हैं कि आप के कई विधायकों मसलन सोमनाथ भारती, कपिल मिश्रा (मंत्री), राजेश ऋषि, आदर्श शास्त्री व अलका लंबा की नाराजगी तो खुलकर सामने आने लगी थी। जब इस बात की भनक केजरीवाल को लगी तो उन्होंने अपने इन नाराज विधायकों से बात करनी चाही तो उन्हें बताया गया कि आदर्श शास्त्री रानीखेत चले गए हैं, सोमनाथ भारती ने शिमला की ठौर पकड़ ली थी, अलका लांबा बातचीत के लिए उपलब्ध थी, पर उन्होंने ऐसा दर्शाया जैसे कहीं कोई बात ही नहीं हुई थी। केजरीवाल ने डैमेज कंट्रोल के तहत एक-एक विधायक से निजी तौर पर मिलना शुरू किया, इससे पार्टी में बगावत टल गई।

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तोल-मोल के बोल

Posted on 14 May 2017 by admin

भारतीय जनता पार्टी के पास वाक्पटु प्रवक्ताओं की एक बड़ी फौज है, जिनके दीदार आपको अक्सर टीवी के प्राइम टाइम डिबेट में हो जाते हैं, पर कई बार ऐसा लगता है कि उत्साह के अतिरेक में वे तथ्यों से नाइंसाफी कर जाते हैं, यही बात भाजपा के दो शीर्ष पुरुषों मोदी व शाह को भी लगती है। सो, मुमकिन है कि आने वाले दिनों में कई भाजपा प्रवक्ताओं की छुट्टी हो जाए और कई नए उत्साही चेहरे भगवा तर्कों से विरोधियों को परास्त करते दिखे। पर शाह की एक परेशानी और है कि शब्दों के ये भगवा लड़ाके टीवी पर तो रोज-बरोज दिख जाते हैं पर नई दिल्ली के 11 अशोक रोड स्थित पार्टी दफ्तर में आने की वे कभी जहमत नहीं उठाते। सो, उनसे कह दिया गया है कि वे नियमित रूप से पार्टी कार्यालय में आएं, टीवी रिपोर्ट, डिजिटल व सोशल मीडिया तथा समाचार पत्रों को खंगाले एवं रोज की एक रिपोर्ट तैयार करें और इस रिपोर्ट को पार्टी हाईकमान के साथ शेयर करें। यह नई व्यवस्था अब से लागू है।

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यूपी के घोषणा मुख्यमंत्री

Posted on 14 May 2017 by admin

सवाल यह भी सबसे बड़ा है कि आदित्यनाथ योगी क्या महज एक ’घोषणा मुख्यमंत्री’ बन कर रह जाएंगे या उनकी घोषणाएं कभी हकीकत का भी रूप लेगी? यूपी के इस उत्साही मुख्यमंत्री ने खम्म ठोककर ‘गोमती रिवर फ्रंट घोटाले’ की जांच की बात कही थी, महीना बीत गया न तो गोमती साफ हुई और न ही जांच शुरू हुई। योगी ने अतिउत्साह में घोषणा की थी कि उनकी सरकार के तमाम मंत्री और सचिव स्तर के तमाम अधिकारीगण अपनी संपत्ति का ब्यौरा देंगे, इस बात को भी काफी दिन गुजर गए हैं पर अभी तक सचिव स्तर के 150 से ज्यादा अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी है, सरकार के आधे से ज्यादा मंत्रियों को भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना है? आखिर कब हरकत में आएंगे योगी?

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खाने-खिलाने से परेशान योगी

Posted on 14 May 2017 by admin

यूपी के नवअवतरित मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी एक ओर तो प्रदेश का चेहरा-मोहरा बदलने के लिए कृतसंकल्प जान पड़ते हैं, पर उनकी राह में उनके ही लोग किंचित अवरोध पैदा कर रहे हैं। लगभग नियम से हर रोज उनके पास संघ के किसी बड़े नेता का, या फिर केंद्र के किसी मंत्री का या फिर संघ से जुड़े किसी आनुशांगिक संगठन के सिरमौर का फोन चला जाता है कि ’आपके साथ डिनर करना है’ यह डिनर कम, एजेंडा प्रतिष्ठापन प्रयास ज्यादा रहता है। इस डिनर से निबटते-उबरते रात के 10-11 बज जाते हैं और योगी पहले से तयशुदा कई महत्वपूर्ण बैठकों में (इनमें से ज्यादातर बैठकें यूपी सरकार के आला अफसरों के साथ आहूत रहती हैं) जाने से चूक जाते हैं। योगी का धैर्य चूक रहा है, वे समझ नहीं पा रहे हैं कि यह किसी सोची-समझी रणनीति के तहत हो रहा है या महज एक संयोग है।

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