Posted on 03 September 2017 by admin
आइए अब वापिस लौटते हैं मोदी-शाह की भाजपा सांसदों की उस बैठक की ओर जिसमें मोदी सांसदों को डिजिटल मीडिया के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए उन्हें प्रेरित कर रहे थे। इसके बाद मोदी ने उपस्थित सांसदों से पूछा कि ’आप सबमें से कितनों ने अपने मोबाइल में ये ऐप्प डाउनलोड कर रखे हैं? जवाब में सिर्फ पच्चीस हाथ ऊपर उठे, हैरान परेशान मोदी ने अपने सांसदों से आह्वान किया कि वे आज ही अपने-अपने मोबाइल में ये दोनों ऐप्प डाउनलोड करेंगे और इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करेंगे। मोदी ने सांसदों से कहा कि वे स्वयं इस बात की तहकीकात करेंगे कि कितने सांसद सक्रिय रूप से इन ऐप्प का इस्तेमाल कर रहे हैं। सनद रहे कि इनमें से ज्यादातर भाजपा सांसद ’ओल्ड स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स’ से थे, इसे देखते हुए और उनकी भावनाओं को समझते हुए पीएम ने सांसदों से कहा कि उन्हें अपना अस्टिटेंट रखने के लिए जो सांसद भत्ता मिलता है, इन पैसों से वे अपने लिए किसी ऐसे सहायक का चुनाव करें जो डिजिटल और सोशल मीडिया को अच्छी तरह से हेंडिल कर सके। कहना न होगा कि इस बैठक से बाहर निकल भाजपा के सांसदगण आईटी के ऐसे व्यक्तियों की तलाश में शिद्दत से जुटे हैं।
Posted on 03 September 2017 by admin
बवाना विधानसभा चुनाव में आप के हाथों हुई शर्मनाक हार को भाजपा पचा नहीं पा रही है, चुनांचे निकट भविष्य में आम आदमी पार्टी के नेताओं पर भाजपा का रूख हमलावर रह सकता है। आप से बर्खास्त नेता कपिल मिश्रा के तौर पर भाजपा ने अपना हथियार ढूंढ लिया है, जो इन दिनों केजरीवाल को निशाने पर रखकर एक बुकलेट तैयार कर रहे हैं, जिसमें सतेंद्र जैन व उनकी पत्नी पर सीबीआई जांच का हवाला देते हुए बुकलेट का शीर्षक दिया गया है-बंटी, बबली और केजरीवाल। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 29 August 2017 by admin
मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें फिर से जोरों पर है, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह फेरबदल 3 सितंबर से पहले कभी भी हो सकता है क्योंकि 3 सितंबर को प्रधानमंत्री चीन की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, संभवतः 7 सितंबर को उनकी स्वदेश वापसी होगी। 5 तारीख से ही पितृपक्ष यानी श्राद्ध शुरू हो रहा है, यह बीस तक चलेगा। किसी शुभ कार्य के लिए इस पीरियड को अच्छा नहीं माना जाता है। जब यूं अचानक अमित शाह ने अपनी चेन्नई यात्रा रद्द कर दी तो कयास लगने लगे कि विस्तार 25 तारीख को हो सकता है, फिर 27 तारीख की बात सुनाई देने लगी क्योंकि इसी दिन पटना में लालू यादव की राजद की रैली है, भाजपा की रणनीति थी कि अगर 27 को मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो फिर विस्तार की खबरों से न्यूज चैनल पट जाएंगे और ऐसे में लालू की रैली की आहटें नेपथ्य में चली जाएगी। पर इस बीच डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम का मामला मीडिया में छा गया, अब देखना दिलचस्प रहेगा कि सुर्खियों की सवारी गांठने में माहिर प्रधानमंत्री मोदी किस वक्त अपने मंत्रिमंडल का चेहरा-मोहरा बदलेंगे।
Posted on 29 August 2017 by admin
जिन लोगों ने मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल की आहटों को भांपते अपनी शेरवानियां सिलवा ली है, उसमें पहला नाम संघ विचारक विनय सहस्त्रबुद्दे का माना जा रहा है, उनके करीबियों ने खुलासा किया कि सत्ता के शीर्ष की ओर से उन्हें दिल्ली में ही बने रहने को कहा गया है। इनको पहले उम्मीद थी कि 25 तारीख को गणेश चतुर्थी के आरंभ में ही मंत्रिमंडल फेरबदल को सरंजाम दिया जा सकता है, पर यह गणेश उत्सव अभी 10 दिनों तक चलने वाला है, चुनांचे आने वाले सप्ताह में कभी भी यह फेरबदल मुमकिन है। ऐसी ही कुछ सूचना अन्नाद्रमुक के सीनियर नेता थंबी दुरै के पास भी है, सूत्र बताते हैं कि उन्हें एक महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने जा रहा है। भाजपा के शीर्ष नेताओं को सबसे ज्यादा मशक्कत शिवसेना के साथ करनी पड़ी है, सूत्र बताते हैं कि शिवसेना को लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद दिया जा सकता है, पर सवाल उठता है कि ऐसे में फिर भाजपा के सीनियर आदिवासी नेता करिया मुंडा का क्या होगा? क्या उन्हें कैबिनेट में लिया जाएगा? जेडीयू में भी लगातार सस्पेंस बना हुआ है कि नीतीश किसका नाम आगे करेंगे, संभवतः नीतीश की पार्टी को एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री की कुर्सी मिल सकती है। फिलवक्त इस रेस में नीतीश के दो करीबियों, राज्यसभा में पार्टी के नेता आरसीपी सिंह और दिल्ली में नीतीश का मोर्चा संभाले रखने वाले केसी त्यागी का हो सकता है। एनसीपी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की अटकलें जारी है, पर ’ होइए वही जो मोदी-शाह रचि राखा!’
Posted on 29 August 2017 by admin
समझा जाता है कि मोदी कैबिनेट के इस चिर प्रतीक्षित फेरबदल में प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों के काम-काज के आधार पर डिमोशन या प्रमोशन दे सकते हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में बकायदा हर मंत्री की परफॉरमेंस रिपोर्ट बनती है और उनकी कार्यकुशलता और काम-काज को अंकों के पैमाने पर तय किया जाता है। चुनांचे इस दफे के फेरबदल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को ईनाम पाने की स्वाभाविक आकांक्षा है, इस कड़ी में नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, आदि के नाम लिए जा सकते हैं। कयास लग रहे हैं कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु का तबादला पर्यावरण मंत्रालय में हो सकता है। रेल चलाने की नई जिम्मेदारी सरपट सड़कों पर गाडि़यां भगा चुके नितिन गडकरी को मिल सकती है, पर देखना दिलचस्प रहेगा कि उन्हें यह जिम्मेदारी भूतल परिवहन और जहाजरानी मंत्रालय के साथ मिलती है या फिर उनसे पिछले मंत्रालय का प्रभार वापिस ले लिया जाएगा। सुगबुगाहट तो इस बात की भी सुनाई दे रही है कि भूतल परिवहन और रेल को मिलाकर एक नए मंत्रालय का गठन किया जा सकता है। लोग भूले नहीं होंगे कि पिछली दफे के फेरबदल में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने जिन मंत्रियों को अपने पास बुलाकर उनकी क्लास लगाई थी या तो उन्हें अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा या उनका डिमोशन हो गया था, सूत्र बताते हैं कि इस बार शाह ने तीन मंत्रियों को तलब कर उनसे लंबी बात की है, ये तीनों मंत्री है-चौधरी बीरेंद्र सिंह, राजीव प्रताप रूढ़ी और उपेंद्र कुशवाहा, सो मुमकिन है कि ये तीनों भी अपने भविष्य को लेकर चिंतित होंगे।
Posted on 29 August 2017 by admin
हर बात पर, बेबात पर, बरसाती मेंढकों सा टर्राने वाले आम आदमी पार्टी की बोलती इन दिनों बंद है, अब तो उनकी सरकार के एक और मंत्री सत्येंद्र जैन पर सीबीआई का शिकंजा कस गया है। चुनांचे वजह की पड़ताल शुरू हुई कि आखिरकार टीवी स्टूडियो से लेकर सड़क तक आप नेताओं ने मौन व्रत क्यों धारण कर रखा है? तो सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि भाजपा की ओर से तमाम न्यूज चैनलों को यह संदेशा पहुंचा दिया गया है कि जिस टीवी डिबेट में आप के किसी नेता या नेत्री की उपस्थिति होगी उसमें भाजपा का कोई नेता या प्रवक्ता शामिल नहीं होगा, फिर क्या था टीवी वालों ने आप वालों से मुंह ही फेर लिया। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 21 August 2017 by admin
18 जुलाई को जब से स्मृति ईरानी को सूचना प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, तब से वह इस मंत्रालय के चेहरे से पुरानी गर्दो-गुबार झाड़ने में जुटी हैं। सूत्र बताते हैं कि वेंकैया के जमाने से मंत्रालय पर एक गुट विशेष का कब्जा था, पिछले दिनों नार्थईस्ट के लिए जिस हिंदी चैनल अरूण प्रभा की शुरूआत हुई, आरोप है कि उसमें भी कार्यक्रम आबंटन में बड़े पैमाने पर धांधलियां हुईं और प्रोग्राम के स्वरूप व उनकी गुणवत्ता के बजाए कार्यक्रम आबंटन में सियासी पैरवी का ही ध्यान रखा गया। स्मृति के जेहन में ये बातें ताजा हैं, चुनांचे उन्होंने नए सिरे से मंत्रालय का चेहरा-मोहरा बदलने की कवायद शुरू कर दी है। ताजा मामला 20-28 नवंबर 2017 को गोवा में आहूत होने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का है। इसमें गड़बडि़यों की आहट भांपते मंत्री महोदया ने 21 सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, इस कमेटी में ज्यादातर पैरवी के लोग भर्त्ती हुए समझे जाते हैं। हालांकि यह कमेटी अब तक 150 विदेशी फिल्मों का प्रीव्यू कर चुकी थी, इनकी जगह स्मृति इंडस्ट्री के कुछ धुरंधरों को लेकर नई कमेटी बना रही हैं। इसके अलावा मंत्री महोदया पुरस्कार में दी जाने वाली राशि में भी कटौती चाहती हैं, सनद रहे कि इस वक्त ’आईएफएफआई’ द्वारा जिन फिल्मों को ’गोल्डन पीकॉक अवार्ड’ के लिए चुना जाता है उसे 40 लाख रूपए का पुरस्कार भी दिया जाता है, स्मृति का मानना है कि किसी विदेशी फिल्म निर्माता पर इतना पैसा बहाने की जगह इस रकम का इस्तेमाल देश में अच्छे विषयों को केंद्र में रखकर बनाई जाने वाली फिल्मों पर होना चाहिए। पर सवाल उठता है कि क्या इतने क्रांतिकारी विचारों व बदलावों के लिए मंत्रालय का लचर सिस्टम तैयार है?
Posted on 21 August 2017 by admin
नीतीश से टूटने के बाद जब पहली दफे शरद यादव पटना पहुंचे तो अगस्त के प्रथम सप्ताह में शरद को रिसीव करने के लिए इतना हुजूम उमड़ा कि इसे देखकर स्वयं शरद भी हतप्रभ थे। पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट पर भीड़ ’शरद यादव जिंदाबाद’ के नारे लगा रही थी, शरद को अपनी कार तक पहुंचने के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी, भीड़ में से अचानक नारे लगने लगे लालू यादव जिंदाबाद! तेजस्वी यादव जिंदाबाद! तब लोगों को मालूम चल गया कि यह भीड़ लालू व राजद प्रायोजित है। 19 अगस्त को पटना में जब नीतीश के जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी होनी थी तो शरद ने भी उसी दिन अपने को असली जनता दल यू बताते हुए वहीं से थोड़ी दूरी पर एक और कार्यकारिणी आहूत कर दी। इस कार्यकारिणी की पूर्व संध्या पर लालू ने अपने खास समर्थकों की बैठक बुलाई और उन्हें हिदायत दी गई कि राजद समर्थक उस बैठक में शरद समर्थक बनकर हिस्सा लेंगे। कोई भी समर्थक लालू-तेजस्वी के समर्थन में नारे नहीं लगाएगा और न ही वहां राजद का झंडा लेकर ही जाएगा। पर यह तो सब जानते हैं कि लालू और उनके समर्थकों को अनुशासन में चलने की कितनी आदत है।
Posted on 21 August 2017 by admin
आंकड़ो के खेल में उलझी मोदी सरकार से आंकड़ो के बयानी में कई गंभीर गलतियां हो रही है। अब नोटबंदी के बाद उपजे ताजा हालात का जायजा लें तो सबसे पहले वित्त मंत्री अरूण जेटली का बयान आया कि नोटबंदी की वजह से देश को 91 लाख नए टैक्स पेयर मिले हैं। तो वहीं नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढि़या एक समाचार पत्र को दिए अपने इंटरव्यू में कह गए कि नोटबंदी की वजह से 5 लाख 80 हजार नए टैक्स पेयर बने हैं। वहीं कहीं इस 15 अगस्त को जब लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी देश को संबोधित कर रहे थे तो अपने भाषण में उन्होंने उल्लेख किया कि नोटबंदी की वजह से 58 लाख नए टैक्स पेयर बने हैं। अब लोगों के लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि इन तीनों में से वे किस आंकड़े पर भरोसा करें।
Posted on 21 August 2017 by admin
जब यह बात सोशल मीडिया पर चल निकली कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण को दूरदर्शन और आकाशवाणी ने प्रसारित करने से इंकार कर दिया तो दिल्ली से बीबीसी की एक संवाददाता ने माणिक सरकार को फोन कर इस खबर पर उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही, इस संवाददाता ने सीएम से पूछा कि ’क्या आप इसके विरोध में कोई आंदोलन या धरना प्रदर्शन करेंगे?’ तो इस पर सरकार ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया और उन्होंने बीबीसी संवाददाता से कहा कि ’आप दिल्ली में हैं तो बेहतर होगा कि आप यह सवाल हमारे पोलित ब्यूरो के चीफ सीताराम येचुरी से पूछें कि पार्टी इस बारे में क्या सोचती है और वह क्या कदम उठाने जा रही है, यह कह कर माणिक सरकार ने फोन रख दिया। सचमुच आवाजें हिरासत में मौन हैं।