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इंग्लैंड में भारतीयों का राज

Posted on 15 May 2020 by admin

इतिहास का चक्र किस प्रकार करवटें बदलता है, कोरोना संकट ने इसे साबित कर दिया है। इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और प्रिंस चार्ल्स दोनों ही कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसे में देष कौन चला रहा है? सूत्रों की मानें तो इंग्लैंड का शासन इस वक्त भारतीय मूल के दो भारतवंशी चला रहे हैं। इसमें से एक वहां के फाइनेंस मिनिस्टर ऋषि सुनक हैं, दूसरी होम सेक्रेटरी प्रीति पटेल हैं। यानी ब्रिटेन पर खुल्लमखुला भारतवंशियों के राज का डंका बज रहा है?

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…और अंत में

Posted on 15 May 2020 by admin

कोरोना संकट की इस घड़ी में राहुल गांधी सामाजिक दूरी बनाए रखने के सूत्र पर पूरी तरह से अमल कर रहे हैं। अब उन्हें पार्टी जनों से मिलते-जुलते कम ही देखा जा रहा है। अपने परम मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया की बेवफाई से आहत राहुल ने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है। और मजे की बात तो यह है कि उन्होंने अपना यह नया नंबर कुछ इस तरह से सीक्रेट रखा हुआ है कि उनकी अपनी कोटरी के लोग भी उनसे मिलने और बात करने को तरस रहे हैं।

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क्यों गईं ईरानी?

Posted on 21 May 2018 by admin

बड़े बोल वचनों के लिए मशहूर स्मृति ईरानी से जब इस दफे सूचना प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार वापिस लेकर उन्हें कपड़ा मंत्रालय तक ही सीमित कर दिया गया तो राजनैतिक पर्यवेक्षकों की भवें तन गईं कि स्मृति को इतनी बड़ी सजा क्या सिर्फ फेक न्यूज मामले में दी गई है या प्रसार भारती के सीईओ सूर्यप्रकाश से उनकी इतनी लंबी तनातनी को किंचित संघ के शीर्ष नेतृत्व ने पसंद नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि सबसे ताज़ा मामला राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण में राष्ट्रपति की किरकिरी को लेकर था, सूत्र यह भी स्पष्ट करते हैं कि इस मामले को लेकर राष्ट्रपति ने कहीं न कहीं पीएम के समक्ष अपनी नाराज़गी दर्ज कराई थी। दरअसल, राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए राष्ट्रपति को आमंत्रित करने में स्मृति ने अपने ऑफिशिएल चैनल का सहारा लिया था, उनके विभाग की ओर से राष्ट्रपति को अधिकारिक तौर पर निमंत्रण देने के लिए चिट्ठी लिखी गई थी, पर स्वयं स्मृति ने माननीय राष्ट्रपति से जाकर मिलने और उन्हें न्यौतने की अनौपचारिक पहल नहीं की, जबकि अब तक कि मान्य परंपराओं में सूचना प्रसारण मंत्री राष्ट्रपति से निजी मुलाकात कर उनसे अनौपचारिक आग्रह भी करता आया है। शायद यही वजह रही कि राष्ट्रपति की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह के लिए राष्ट्रपति के शामिल रहने के लिए एक घंटे का वक्त मुकर्रर कर दिया गया था और सारा बवाल यहीं से मचा।

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सत्ते पे अट्ठा

Posted on 21 May 2018 by admin

संघ दुलारे और उत्तराखंड के सीधे-साधे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मीडिया से हर मुमकिन दूरी बना कर रखने की कोशिश करते हैं। पर बावजूद इसके सुर्खियों की उल्टी बयार कहीं न कहीं उन्हें छू ही लेती है। पिछले साल जब सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया कि नेशनल हाईवे से 500 मीटर के दायरे में कोई शराब की दुकान नहीं होगी तो कहते हैं रावत सरकार ने इन शराब की दुकानों को स्टेट हाईवे पर शिफ्ट करा दिया। अब तो यह आलम है कि वहां परचून की दुकानों पर भी मदिरा उपलब्ध है, अब इस बात को लेकर उत्तराखंड के विपक्षी दल हाय-तौबा मचा रहे हैं और रावत पर यह आरोप लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं कि मुख्यमंत्री के जो 7 भाई हैं उनका कोई न कोई कनेक्शन इन शराब माफियाओं से है। आरोप बड़ा है, इसको नज़रअंदाज कर पाना दिल्ली के निजाम के लिए भी आसान न होगा।

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भारत का उत्तर कोरिया प्रेम

Posted on 21 May 2018 by admin

विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह की हालिया उत्तर कोरिया यात्रा को लेकर हंगामा बरपा है और वे विपक्षी हमलों के निशाने पर हैं। हालांकि सरकार ने भी पहले वीके सिंह की इस उत्तर कोरिया की यात्रा पर मौन साध रखा था, पर जब वहां की एक प्रमुख न्यूज एजेंसी ने भारतीय मंत्री की उत्तर कोरिया के अधिकारियों और त्योंगयांग स्थित भारतीय राजदूत की साथ वाली फोटो रिलीज कर दी तो भारत को भी कहना पड़ गया कि सिंह वहां भारत की योग पद्दति और यहां की परंपरागत औषधियों की बात करने त्योंगयांग गए थे। पर राजनैतिक पर्यवेक्षक बताते हैं कि ऐसे वक्त में सिंह उत्तर कोरिया दौरे में कई सियासी निहितार्थ छुपे हैं, क्योंकि इस 12 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के शासन प्रमुख किम जोंग के बीच एक निर्णायक मुलाकात होने वाली है, और इस मुलाकात से ऐन पहले दोनों देशों के चीफ की ओर से सुलगते-भड़कते बयान आने लगे हैं, ऐसे में क्या भारत अपने मित्र देश अमेरिका की मदद करना चाहता है क्योंकि उत्तर कोरिया से उसके रिश्ते कभी खराब नहीं रहे हैं। सनद रहे कि 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में तत्कालीन सूचना प्रसारण राज्य मंत्री मुख्तार अब्वास नकवी भी एक फिल्म समारोह में हिस्सा लेने उत्तर कोरिया गए थे।

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ऐश्वर्या बनाम दिव्या

Posted on 21 May 2018 by admin

कर्नाटक की हार पर कांग्रेस में आत्ममंथन का दौर शुरू हो चुका है और वहां के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को भी ठंडे बस्ते में डालने की कवायद शुरू हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि टिकट वितरण में भी सिद्दारमैया ने कई बार पार्टी हाईकमान की सलाह पर कान नहीं धरे शायद यही वजह रही कि राहुल गांधी के चाहने पर भी मैसूर के केआर नगर सीट से सिद्दारमैया ने राहुल की पसंद की युवा उम्मीदवार ऐश्वर्या महादेव को टिकट नहीं दिया। ऐश्वर्या के पिता एम महादेव वहां के एक जनप्रिय नेता थे और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतते रहे थे। उनके निधन के बाद उनकी पुत्री ऐश्वर्या ने राजनीति में पांव रखे। ऐश्वर्या अमेरिका के पेनसिल्वेनिया युनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं, और इस दफे राहुल की तमाम प्रेस कांफ्रेंस और रैलियों में इस चेहरे को देखा और पहचाना गया। एक कयास यह भी लगाए गए कि यही वह चेहरा है जो कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड दिव्या स्पंदना को रिप्लेस कर सकता है। क्योंकि दिव्या पर मीडिया के एक वर्ग द्वारा तीखा हमला किया जा रहा था। और जब दिव्या रमैया नाम से कन्नड़ फिल्मों की एक प्रमुख हीरोइन थीं तो उनकी शराब कारोबारी विजय माल्या से नजदीकियों के किस्से हर ओर सुने जा रहे थे। मीडिया ने इस बात को भी जोर-शोर से उछाला कि 2010 में स्पंदना विजय माल्या के साथ हांगकांग छुट्टियां बिताने भी गई थीं। हालांकि इस बात से दिव्या स्पंदना ने भी कभी मना नहीं किया कि माल्या उसके अच्छे दोस्त थे। सिद्दारमैया ने इस दफे केआर नगर से ऐश्वर्या की जगह जिस रविषंकर को टिकट दिया, वह पिछला चुनाव भी यहीं से हारे थे। और इस सीट से जेडीएस के एसआर महेश ने लगातार तीसरी जीत दर्ज कर हैट्रिक बना ली। अब सुना जा रहा है कि राहुल गांधी अपनी डिजिटल टीम में ऐश्वर्या महादेव को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने जा रहे हैं।

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नायडू की नाराज़गी

Posted on 21 May 2018 by admin

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस बात का डंका जोर-शोर से पीट रहे हैं कि आंध्र के लोगों की नाराजगी की वजह से इस दफे कर्नाटक में भाजपा को अपनी दर्जन भर सीटें गंवानी पड़ी है। सनद रहे कि एनडीए से नाता तोड़ने के बाद चंद्रबाबू ने कर्नाटक में रह रहे लाखों आंध्र के लोगों से आह्वान किया था कि वे भाजपा को उनके प्रदेश से छल का स्वाद जरूर चखाएं। कर्नाटक की कम से कम 46 सीटें ऐसी है जहां 50 हजार से ज्यादा आंध्र के लोग वोटर हैं। इस दफे इन 46 सीटों में से मात्र 5 पर ही भाजपा अपनी जीत दर्ज करा पाई है, जबकि कांग्रेस ने इनमें से 32 सीटें जीत ली और 9 जेडीएस के हिस्से गई।

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…और अंत में

Posted on 21 May 2018 by admin

शरद यादव अपनी नई राजनैतिक पार्टी की गठन की तैयारियों में जोर-शोर से जुटे हैं, सूत्र बताते हैं कि इस पार्टी का नाम लोकतांत्रिक जनता दल हो सकता है, इस पार्टी से नीतीश से नाराज व बागी नेताओं का एक बड़ा वर्ग जुड़ने को तैयार बताया जाता है। इसके अलावा शरद की पार्टी को केरल के राज्यसभा सांसद एमपी वीरेंद्र कुमार और गुजरात के एक विधायक छोटू भाई बसावा का भी समर्थन मिल सकता है। सूत्र बताते हैं कि यादव की इस पार्टी को अंदरखाने से आम आदमी पार्टी का भी समर्थन मिल रहा है और कहा यह भी जा रहा है कि आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल लगातार षरद के संपर्क में हैं।
एनटीआई &gossipguru.in

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कैराना में माया का मास्टर स्ट्रोक

Posted on 14 May 2018 by admin

मायावती ने नए सियासी सबक कंठस्थ कर लिए हैं, अब उनकी राजनीति और उनका दिल पहले की तरह तंगेहाल नहीं, खुलेपन का यह दस्तूर भले नया हो, पर इस दफे इसकी आहट कर्नाटक चुनाव में भी देखने को मिली और जेडीएस के संग गठबंधन में भी माया ने अपनी फराखदिली का परिचय दिया है। इस दफे भी जब कैराना और नूरपुर में सपा और लोकदल के बीच बातचीत पटरी से उतर रही थी और पहले अखिलेश इस बात पर अड़े रहे कि कैराना से सपा अपना उम्मीदवार उतारेगा तो नूरपुर से लोकदल अपना उम्मीदवार उतार ले, पर जब जयंत चौधरी इस बात के लिए नहीं माने तो अखिलेश ने एक नया खटराग अलापना शुरू कर दिया कि अगर वाकई लोकदल को कैराना सीट चाहिए तो वह अपना विलय सपा में कर दें। जब इस खटराग की खबर बहिनजी को लगी तो उन्होंने सीधे अखिलेश को फोन लगाया और कहा कि ’आप कैराना लोकदल को दे दो, चुनाव चिन्ह उनका रहेगा पर उम्मीदवार सपा का। नहीं तो कैराना में अगर सपा अपने चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार उतारती है और किसी वजह से वह चुनाव हार जाती है तो गोरखपुर और फूलपुर का मोमेंटम हम खो देंगे, क्योंकि कैराना में इस दफे पूरी सरकारी मशीनरी चुनाव लड़ेगी। ऐसे में लोकदल को लड़ने दो, जीते तो 2019 में हमारे गठबंधन के वे साथी होंगे और हार गए तो फिर उनका नसीब। 19 में वे हम से ज्यादा मांग नहीं पाएंगे।’ बात अखिलेश की समझ में आ गई, वे ये भी समझ पाए कि बहिनजी अब ’कम बैक’ करने को आतुर हैं।

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जेटली की पार्टी में सिंधिया

Posted on 14 May 2018 by admin

सूत्रों की माने तो दिग्गज भगवा नेता अरूण जेटली को एक महिला डोनर मिल चुकी हैं और आने वाले कुछ दिनों में उनकी किडनी का प्रत्यारोपण मुमकिन है, पिछले दिनों जब उनकी अस्पताल से वापसी हुई थी तो उनके सम्मान में उनके एक परम मित्र और दिल्ली के एक बड़े वकील ने अपने घर चुनींदा लोगों का एक डिनर रखा था। इस डिनर को भी शाम के 7 बजे से शुरू होकर रात्रि के 9 बजे तक खत्म हो जाना था। सूत्र बताते हैं कि इस डिनर में मध्य प्रदेश के एक प्रभावशाली नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी आमंत्रित किया गया था, सूत्रों की मानें तो जब डिनर अपने शबाब पर था तो मजाक-मजाक में एक पूर्व सॉलिसीटर जनरल ने युवा सिंधिया से पूछा-’आप मध्य प्रदेश के सीएम कब बन रहे हों’ ’जल्दी ही जब राहुल जी देश का पीएम बनेंगे’ उधर से जवाब आया। इस पर वहां मौजूद एक पत्रकार ने सिंधिया से पूछा-’क्या आपको वाकई लगता है कि राहुल इस बार देश के पीएम बनेंगे?’ सिंधिया ने हौले से चुटकी लेते हुए कहा-इस बात का जवाब तो अरूण अंकल के पास होगा।’

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