Posted on 06 September 2014 by admin
बतौर पार्टी अध्यक्ष जब अमित शाह ने मुंबई की पहली यात्रा की तो उन्होंने चाय विनोद तावड़े के घर पी, पर दोपहर का लंच भाजपा सांसद और दिवंगत प्रमोद महाजन की पुत्री पूनम महाजन के घर किया। समझा जाता है कि इस लंच को पूनम के घर आयोजित करवाने में महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस की भी एक महती भूमिका रही। शाह अपनी पत्नी और बेटे व पुत्र वधु के साथ पूनम के घर पहुंचे और विशुद्ध शाकाहारी महाराष्ट्रीयन भोजन का लुत्फ उठाया। पूनम ने भी इस मौके का खूब फायदा उठाया और अपने संसदीय क्षेत्र नार्थ-सेंट्रल मुंबई के हर प्रभावशाली नेता, कॉरपोरेटर की फोटो शाह के साथ खिंचवा दी। वहां मौजूद लोगों से शाह ने जी खोलकर पूनम की तारीफ की, यानी पूनम ने भी पार्टी में अपना नया मेंटर ढूंढ लिया है।
Posted on 31 August 2014 by admin
सारदा चिट फंड से निजात पाने के लिए ममता बनर्जी हर तरफ हाथ-पांव मार रही है, कोई भी हथकंडा अपनाने को तैयार है। सूत्र बताते हैं कि पिछले एक महीने में दीदी चार बार दिल्ली आ चुकी हैं, और इनकी चारों यात्राओं को गुप्त रखने की कोशिश हुई है, ममता अपने एक भरोसेमंद ड्राईवर के साथ भाजपा के एक बेहद करीबी माने जाने वाले योग गुरू के साथ गुपचुप मिली है। समझा जाता है कि इस योग गुरू से दीदी को यह आश्वासन प्राप्त हुआ है कि सारदा मामले को रफा-दफा करने में वे दीदी की पूरी मदद करेंगे।
Posted on 31 August 2014 by admin
इस बार केंद्र में कमल क्या खिला और इस कदर खिला कि कमल निशान को लेकर पार्टी की दीवानगी परवान चढ़ गई है। पार्टी के रणनीतिकारों ने यह तय किया है कि चूंकि ईवीएम मशीन में पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ में दिखता है तो इसकी समानता बनाए रखने के लिए क्यों न पूरे प्रचार सामग्री में कमल को कलर के बजाए ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ में ही रखा जाए। दूसरा, पार्टी को लगता है कि ईवीएम में जो कमल का निशान दिखता है उसके किनारे बहुत पतले और धूमिल हैं, चुनांचे इसकी आउटलाइन को और मोटा किए जाने की जरूरत है। सूत्र बताते हैं कि इस बाबत जल्द ही पार्टी चुनाव आयोग में एक प्रतिवेदन दाखिल कर सकती है कि ईवीएम में कमल की सही आकृति कैसे उभर सके इस हेतु आयोग प्रयास करे। यानी कमल निशान के आउटलाइन को और गहरा किया जाए, सचमुच यह मोदी युग के आगाज की आहट है।
Posted on 31 August 2014 by admin
साफ-सुथरी राजनीति का रिकार्ड रखने वाले राजनाथ सिंह के पुत्र को लेकर जब कंट्रोवर्सी सार्वजनिक हुई तो इसके तार कहीं न कहीं पीएमओ से जुड़े पाए गए। जिस दक्षिण भारतीय पत्रकार की वेबसाइट पर यह खबर सबसे पहले देखी गई उसे पीएमओ में नंबर दो पी.के.मिश्रा का करीबी बताया जाता है। इस दक्षिण भारतीय पत्रकार ने पंकज सिंह से जुड़ी खबर अपने साइट पर डालने के 3 घंटे के अंदर इसे डिलीट भी कर दिया, पर यह खबर तब तक तेजी से वायरल हो चुकी थी। भाजपा के करीबी माने जाने वाले एक न्यूज चैनल ने भी इस खबर को प्रमुखता से चलाया। बाद में भले ही पीएमओ से खंडन आ गया हो पर तब तक इस बड़े ठाकुर नेता का मान मर्दन हो चुका था।
Posted on 31 August 2014 by admin
नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय की मरम्मत और इसके रंग-रोगन का काम जोरो पर है। समझा जाता है कि संघ कार्यालय के इस पूरे कायाकल्प में डेढ़ से दो वर्ष का समय लग सकता है, लिहाजा संघ कार्यालय को अस्थायी तौर पर देशबंधु गुप्ता रोड स्थित एक बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि यह बिल्डिंग अनंत राज ग्रुप की है जिन्होंने दो वर्षों के लिए इसे संघ को दे दी है, सबसे खास बात तो यह कि इसके एवज में संघ से कोई किराया भी नहीं लिया जा रहा। सबसे दिलचस्प बात तो यह कि इसी अनंत राज ग्रुप पर कांग्रेसी मुख्यमंत्री हुड्डा भी काफी मेहरबान रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक 2-3 लाइसेंस के अलावा हुड्डा ने इस ग्रुप को गुड़गांव में कोई 26 एकड़ जमीन भी दी है। सूत्र तो यह भी दावा करते हैं कि हुड्डा के एक नजदीकी रिश्तेदार की इस कंपनी में हिस्सेदारी भी है। तो क्या इस कंपनी के मर्ाफ्त हुड्डा भी संघ की शरण में आने को आतुर हैं?
Posted on 31 August 2014 by admin
ममता दीदी को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेतली से बहुत उम्मीदें हैं कि वह पश्चिम बंगाल को वित्तीय घाटे से उबारने के लिए कोई अच्छा सा पैकेज देंगे। सो, पिछले दिनों अरुण जेतली का कोलकाता दौरा तय हुआ तो दीदी ने आनन-फानन में उन्हें सपत्नीक कोलकाता आने का निमंत्रण दिया। दीदी को यह तो मालूम था कि जेतली खाने-पीने के बहुत शौकीन हैं, फिर उन्होंने दिल्ली फोन कर जेतली के कुछ मुंहलगे पत्रकारों से पूछा कि वित्त मंत्री जी को खाने में क्या-क्या पसंद है। ममता ने जेतली की पसंद के तमाम व्यंजन तैयार करवाए, जिसमें किस्म-किस्म के कबाब भी परोसे गए थे। फिर बंद कमरे में दीदी और जेतली की बातचीत शुरू हुई, पर धीरे-धीरे माहौल गरमाता गया, ममता जब गुस्से में होती है तो वह बांग्ला स्टाइल अंग्रेजी बोलने लगती हैं अपनी नफासत भरी अंग्रेजी से जेतली अपना बचाव करते रहे, पर जब बात फिर भी नहीं बनी तो जेतली तमतमाए हुए कमरे से बाहर आ गए।
Posted on 31 August 2014 by admin
बिहार भाजपा के एक उत्साही नेताजी जो अब तक कुंवारे हैं उन्होंने मोदी राग गाने में सबसे ज्यादा उतावलापन दिखाया था और इस लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अमित शाह के कंधे में कंधा मिला कर जोर-शोर से चुनाव प्रचार भी किया था। सबसे पहले तो उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला, वे राजनाथ की टीम में शामिल थे पर जब इस बार अमित शाह ने अपनी नई टीम की घोषणा की तो इसमें से उनका नाम गायब था। जब इन नेताजी ने अमित शाह से मिल कर इसका कारण जानना चाहा तो उनके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई। दरअसल ये बिहार के नेताजी पिछले महीने एक सप्ताह के लिए अमरीका गए थे, वहां एक होटल के कमरे में उनके गैर स्त्रियों के साथ अंतरंग पलों की सीडी बन गई और यह सीडी अमित शाह के पास पहुंचा दी गई, पर कुंवारों को तो इतना माफ होना चाहिए शाह जी? वरना किस-किस की सीडी बनवाएंगे?
Posted on 31 August 2014 by admin
हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की बल्ले-बल्ले है, तमाम जनमत सर्वेक्षण इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि इस दफे के चुनाव में भाजपा को विजयश्री हासिल हो सकती है और प्रदेश में पहली बार भगवा सरकार बन सकती है। सो, जब से इन दावों को हवा मिली है भाजपा के टिकटों की कीमत आसमान छूने लगी है। सूत्र तो यहां तक दावा करते हैं कि फरीदाबाद की कुछ विधानसभा सीटों पर कई नामी बिल्डरों ने अपनी नारें टिका रखी है, चुनांचे ओल्ड फरीदाबाद सीट को लेकर वहां के तीन बिल्डरों में घमासान छिड़ गया है। वे किसी भी कीमत पर यह सीट अपने लिए चाहते हैं, एक बिल्डर तो टिकट के लिए 50 करोड़ की बोली लगाने को तैयार है।
Posted on 23 August 2014 by admin
इस वर्ष के आखिर में या नए वर्ष की शुरूआत में यानी जनवरी 2015 में कोलकाता के निकाय चुनाव होने हैं, चुनांचे बदले वक्त की धमक भांपते ममता दीदी अपने नए सियासी अवतार में सामने आना चाहती हैं। ग्रामीण वोटरों और खास कर मुस्लिम व ओबीसी वोटरों से दीदी ने अपने तार बकायदा जोड़ रखे हैं, बंगाल में अब तक संपन्न हुए पंचायत चुनावों ने पहले ही इस बात की पुष्टि कर दी है, सो दीदी व उनकी तृणमूल के समक्ष असली चुनौती बंगाल के शहरी वोटरों को लुभाने की है, वह भी ऐसे वक्त में जब शहरों के भद्र मानुष को बीजेपी का जादू बेतरह लुभा रहा है। सो, दीदी ने यूं अचानक सिंगापुर का तुर्रा उछाल दिया, दीदी अपने दल-बल के साथ शनिवार को सिंगापुर की यात्रा से लौट आई हैं और इस बात का दावा कर रही है कि सिंगापुर की 100 कंपनियां पश्चिम बंगाल में निवेश को तैयार हैं। 13 एमओयू भी साइन हो गए हैं। पर सवाल अहम है कि सिंगूर के इतने बड़े भूमि अधिग्रहण विवाद के बाद क्या कॉरपोरेट के लिए भूमि अधिग्रहण कानून में जरूरी बदलाव हुए हैं? और अगर नहीं तो टाटा का हश्र देखकर और कौन कॉरपोरेट अपना पैसा लेकर बंगाल आना चाहेगा? दीदी की सिंगापुर यात्रा को प्रचारित करने का जिम्मा भारत की एक नामचीन पीआर एजेंसी को दिया गया, पैसा पानी की तरह बहाया गया। सूत्र बताते हैं कि अकेले सिंगापुर के दैनिक ‘स्टे्रट टाइम्स’ को 1 करोड़ के विज्ञापन दिए गए। बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य जब अपनी सिंगापुर की यात्रा पर गए थे तो उनके लिए होटल में बस एक सिंगल कमरे की बुकिंग हुई थी, दीदी के लिए सिंगापुर के पंचतारा होटल शंगरीला में 5 सुइट बुक थे। जब पूर्व में राजस्थान के मुख्यमंत्री सिंगापुर गए थे तो उनके काफिले में बस 10 लोग शामिल थे, अभी तेलांगना के सीएम गए तो उनके साथ भी 10 लोग थे, आंध्र प्रदेश के सीएम के साथ 9 लोग और इस दफे दीदी के काफिले में कुल 104 लोग शामिल थे, जिसमें 52 बिजनेस डेलिगेट्स, 40 मीडिया पर्सन्स और 12 अधिकारी शामिल थे। सो दीदी के इरादे कहीं बड़े हैं।
Posted on 23 August 2014 by admin
सूत्र बताते हैं कि ममता बनर्जी के इतने भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल को होस्ट करने का बीड़ा सिंगापुर की चांगी एयरपोर्ट कंपनी ने उठाया था, क्योंकि बंगाल के कम्युनिस्ट शासनकाल के दौर में बुद्धदेव भट्टाचार्य के प्रयासों से दुर्गापुर के पास बर्द्धमान में एक बड़ा एयरपोर्ट ‘औडल’ को डेवलप करने का टेंडर चांगी एयरपोर्ट ऑथरिटी को मिला था, तब विपक्षी नेता की हैसियत से ममता बनर्जी ने इस प्रोजेक्ट के विरोध में अलख जगा रखी थी। बंगाल में चांगी की सहयोगी कंपनी उत्सव पारिख की है, उत्सव पूर्व में एक शेयर ब्रोकर रह चुके हैं, और इनके बेटे की शादी प्रफुल्ल पटेल की बेटी के साथ हुई है, और चांगी और उत्सव पटेल का जब समझौता हुआ था उस वक्त प्रफुल्ल पटेल यूपीए-2 सरकार में नागरिक विमानन मंत्री थे, चुनांचे इस सौदे में प्रफुल्ल की दिलचस्पी सहज समझी जा सकती है। ममता के शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल से निजी ताल्लुकात रहे हैं, सो उन्हें सिंगापुर यात्रा के लिए राजी करने में जाने अनजाने दोनों समधियों की महती भूमिका हो सकती है। वहीं बीजेपी ममता की सिंगापुर यात्रा को और नजरिए से देखती है, भगवा पार्टी को लगता है कि सारदा चिट फंड घोटाले के 2 हजार करोड़ रुपयों को ‘रूट’ करने का यह एक तरीका भी हो सकता है, भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह इस बाबत एक बयान भी दे चुके हैं। सो, ममता की सिंगापुर यात्रा से बंगाल की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ सकता है।