Posted on 19 June 2015 by admin
सपा मुखिया मुलायम सिंह चाहते हैं कि पुराने गिले-शिकवों को भुलाकर अमर सिंह को पुन: पार्टी में वापिस लिया जाए, पर अखिलेश और प्रोफेसर रामगोपाल यादव की जोड़ी अमर के इरादों में पलीता लगाने का काम कर रही है। रामगोपाल यादव तो इस बाबत खुलकर कहते हैं कि सपा ज्वॉइन करने की बाबत उनका (अमर सिंह का) अब तक कोई आवेदन भी नहीं आया है। सूत्र बताते हैं कि मुलायम ने तो अमर से राज्यसभा देने का वायदा भी कर लिया था, मुलायम अपने एक खास विश्वासी से राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने को भी कह चुके थे, ताकि उनकी रिक्त की गई सीट से अमर एक बार फिर से ऊपरी सदन की शोभा बढ़ा सकें। हां-ना की इस उधेड़बुन से जूझते अमर सिंह को पिछले दिनों लोदी एस्टेट स्थित अपने सरकारी बंगले को खाली भी करना पड़ गया। अमर ने अपने इस बंगले को आलीशान बनाने की एवज में काफी रकम खर्च कर डाली थी, चुनांचे अमर के बंगले पर मोदी सरकार के कई मंत्रियों की नार थी, पर बाजी मार गए गिरिराज सिंह। पर गिरिराज को उस वक्त काफी निराशा हाथ लगी जब बंगले पर कब्जा लेने के बाद उन्हें इल्म हुआ कि अब यह बंगला उतना आलीशान भी नहीं रह गया है, चूंकि इसके सारे साजो-समान उखाड़ लिए गए हैं, यहां तक कि इसकी टाइल्स भी उखाड़ ली गई है।
Posted on 19 June 2015 by admin
मोदी अपने दो बेहद करीबी मंत्रियों से खासे दुखी हैं, उनमें से एक हैं रेल मंत्री सुरेश प्रभु और दूसरे हैं रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिक्कर। प्रभु से मोदी को उम्मीद थी कि वे रेलवे में काफी विदेशी निवेश लेकर आएंगे, निवेश आने की बात तो दूर, प्रभु की रेल पटरी पर सुचारू रूप से दौड़ नहीं पा रही। वहीं पर्रिक्कर पाकिस्तान को लेकर कुछ ऐसा बयान दे देते हैं जिससे कूटनीतिक मोर्च पर भारत की परेशानी बढ़ जाती है। सूत्र बताते हैं कि मोदी इन दोनों के विकल्पों की तलाश में है। मंत्रिमंडल के अगले फेरबदल में वे इन दोनों मंत्रालयों की किस्मत को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
Posted on 19 June 2015 by admin
पिछले दिनों शहरी विकास मंत्रालय में स्मार्ट सिटीज को लेकर एक सचिव स्तरीय बैठक आहूत हुई और उसमें तय हुआ कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का अध्ययन करने 8.10 लोगों की एक टीम जापान भेजी जानी चाहिए, सरकारी खर्चे में कटौती का हरकारा भरने वाली सरकार इस ट्रिप पर कोई एक करोड़ रूपए खर्च करने को राजी हो गई। फिर तय हुआ कि इस दौरे में टीम के साथ फाइनेंशियल एडवाइजर को भी जापान भेजना चाहिए, नहीं तो बजट प्रावधानों को लेकर सबसे ज्यादा आपत्तियां भी उनकी ओर से ही आती है। वैसे भी इस प्रोजेक्ट की देख रेख के लिए मंत्रालय ने कंसलटेंसी कंपनी की तैनाती कर रखी है, यानी ऐसे में मंत्रालय की अपनी कोई जवाबदेही नहीं रह जाती है।
Posted on 07 June 2015 by admin
मोदी के इस मुंहलगे कैबिनेट मंत्री को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि उनकी यह नादानी उन्हें इस कदर भारी पड़ने वाली है, मोदी के ढाका रवाना होने से ऐन पहले मंत्री जी ने उनसे मिलने का वक्त मांगा, थोड़ा अर्जेंट बताकर। सो, प्रधानमंत्री ने भी मंत्री जी को अपने 7 रेसकोर्स आवास पर बगैर देर किए मिलने को बुला लिया। मंत्री जी जब प्रधानमंत्री आवास पहुंचे तो अपने साथ उस मित्र उद्योगपति को भी ले गए, जो कांग्रेस के टिकट पर न सिर्फ 2014 का चुनाव हार गए थे, अपितु उनका नाम कोल ब्लॉक आबंटन मामले से भी जुड़ा है और उन पर इस बाबत कई मुकदमे भी चल रहे हैं। मंत्री जी वेटिंग रूम में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, तो प्रधानमंत्री को उनके निजी सहायकों ने इस बाबत इतला दी कि मंत्री जी के साथ मिलने को और कौन आया है? खून का घूंट पीकर रह गए मोदी, उन्होंने केवल मंत्री जी को मिलने के लिए अंदर बुलाया और उनकी ऐसी क्लास ली कि मंत्रीजी पानी-पानी हो गए। पसीने से तरबतर वे कमरे से बाहर निकले और वेटिंग रूम में इंतजार कर रहे अपने मित्र उद्योगपति को साथ लिया और सीधे गाड़ी में जा बैठे। गाड़ी में सफर के दौरान उन्होंने उद्योगपति मित्र को बताया कि प्रधानमंत्री जी ने आश्वासन दिया है कि उनके साथ न्याय होगा और एक बार उन्हें कोल मामले में क्लीनचिट मिल जाए तो अगली बार उनसे मिल भी लेंगे, दोनों मित्रों के लिए दिल को बहलाने का ख्याल अच्छा था।
Posted on 07 June 2015 by admin
विदेशों में छुट्टियां मनाने की लाख तोहमत उठा चुके राहुल गांधी एक बार फिर से विदेश जाने की तैयारी में हैं। जून के दूसरे सप्ताह में वे लंदन की उड़ान पकड़ने वाले हैं, 18जून को राहुल का बर्थ-डे होता है, और अब तक वे अपनी एक खास मित्र के साथ अपना जन्मदिन यूरोप में ही सेलिब्रेट करते आए हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक राहुल 15 जून को लंदन की फ्लाइट पकड़ने वाले हैं। राहुल के बर्थ-डे समारोह में शरीक होने के लिए प्रियंका और राबर्ट वाड्रा भी खास तौर पर लंदन जा रहे हैं पर, मां सोनिया इस दौरान भारत में ही बनी रहेंगी।
Posted on 07 June 2015 by admin
कांग्रेस के देदीप्यमान नक्षत्र राहुल गांधी को नए अवतार और नई ब्रांडिंग में पेश करने में एक शख्स तल्लीनता से जुटे हैं। जिनका कहीं शिद्दत से मानना है कि राहुल में वह दमखम है जिसकी वजह से कांग्रेस अपने कोर वोट बैंक को वापिस पा सकती है। कोर वोट बैंक यानी दलित और मुस्लिम वोटों का गठजोड़। यही वह शख्स हैं जो राहुल गांधी को दलित परिवारों के बीच मऊ लेकर गए और यही वह शख्स हैं जो राहुल के लिए एक विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रहे हैं कि कांग्रेस अपना खोया जनाधार कैसे वापिस पा सकती है। इसके लिए उन्होंने ‘दिल जीतो, राज्य जीतो’ का फार्मूला इजाद किया है। यानी विभिन्न राज्यों मसलन पंजाब, बिहार, यूपी, बंगाल चुनाव में कांग्रेस पूरे दमखम से जुटेगी, और पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पुन: अपनी सरकार बनाने का प्रयास करेगी। यह शख्स आंध्र कैडर के एक रिटायर्ड आइएएस अफसर के.राजू हैं जो इन दिनों राहुल गांधी के सर्वप्रमुख सलाहकार के तौर पर उभरे हैं, राजू जो जाति के दलित हैं, उन्हाेंने राहुल दरबार में मोहन प्रकाश, सीपी जोशी और मधुसूदन मिस्त्री जैसे दिग्गज नेताओं के भाव कम करा दिए हैं।
Posted on 07 June 2015 by admin
नए विजिलेंस कमिश्नर (सीवीसी) के तौर पर के. वी. चौधरी की नियुक्ति को लेकर नए विवादों का आगाा हो चुका है, चौधरी एक हाई-प्रोफाइल अफसर रहे हैं, फिलहाल इनकी फाइल राष्ट्रपति के पास दस्तखत होने को गई है। इससे पहले भी चौधरी के पास कई हाई प्रोफाइल केस का जिम्मा रह चुका है, जिसमें मोईन कुरैशी से लेकर राडिया टेप की जांच शामिल हैं। बतौर सीबीडीटी चैयरमैन चौधरी तत्कालीन सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा से चार मुलाकातें कर विवादों में घिर चुके थे। राम जेठमलानी और प्रशांत भूषण जैसे लोग चौधरी को सीवीसी बनाए जाने का पुरकश विरोध दर्ज करा चुके हैं। सनद रहे कि ये वही के. वी. चौधरी हैं जब ये सीबीडीटी में थे तो नितिन गडकरी के फर्जी कंपनियों के विवाद ने तूल पकड़ा था, जाने-अनजाने चौधरी ही वे वजह थे जिनके चलते गडकरी दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनने से चूक गए थे। चौधरी को सीवीसी बनवा कर मोदी गडकरी और संघ को क्या कोई नया संदेश देना चाहते हैं? या मोदी का यह कोई मास्टर स्ट्रोक है?
Posted on 07 June 2015 by admin
कांग्रेस युवराज राहुल गांधी की बतौर अध्यक्ष ताजपोशी की तैयारियां जोरों पर हैं। सूत्र बताते हैं कि सितंबर माह में आहूत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के एक अहम अधिवेशन में राहुल की ताजपोशी का ऐलान मुमकिन है। यह अधिवेशन नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हो सकता है। समझा जाता है कि इस बाबत स्वयं सोनिया गांधी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श किया है, और आने वाले दिनों में वे कांग्रेस के कई अन्य सीनियर नेताओं से वन-टू-वन मुलाकात करने वाली हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष सोनिया ने स्पष्ट कर दिया है कि सितंबर माह से जहां राहुल बतौर अध्यक्ष पार्टी की कमान संभालेंगे, वहीं स्वयं सोनिया पार्टी की मार्गदर्शक के तौर पर अवतरित होंगी।
Posted on 07 June 2015 by admin
मुस्लिम वोटों के प्रबल आकांक्षी मुलायम की सपा सरकारों पर हमेशा से बड़े मुस्लिम धर्मगुरूओं की इनायत रही है। यूपी में जब मुलायम मुख्यमंत्री थे तो कहा जाता है कि उनकी सरकार दिल्ली के जामा मस्जिद के सर्वेसर्वा इमाम बुखारी चलाते थे, अखिलेश की मौजूदा सरकार पर जमात-ए- इस्लामी हिंद के सद्र मौलाना अरशद मदनी का खासा असर देखा जा सकता है। पश्चिमी यूपी में तो मामूली ट्रांसफर-पोस्टिंग भी मदनी साहब के इजाजत के बगैर नहीं हो सकती। इस काम में मदनी साहब के फ्रंटमैन आशु मलिक को खासा सक्रिय देखा जा सकता है। मलिक जिनकी पहले एक मामूली सी फोटोग्राफी की दुकान हुआ करती थी, आज की तारीख में वे सपा के बड़े नेताओं में शुमार होने लगे हैं, और उनका मुलायम सिंह से भी सीधा संवाद बना हुआ है। मदनी साहब का तो यह भी आग्रह है कि अखिलेश अपनी कैबिनेट में आशु मलिक को शामिल करें।
Posted on 26 May 2015 by admin
वह बुद्ध की तरह आचरण करते हैं, पर बुद्ध नहीं हैं और न ही बुद्ध से किंचित करुणा, क्षमा या उदात्तता ही उधार लेने की कोशिश करते हैं, पिछले दिनों जब भाजपा के शीर्ष पुरुष अमित शाह नागपुर तलब किए गए तो संघ नेतृत्व ने उन्हें यही समझाने की कोशिश की कि कैसे केंद्र में भगवा सरकार के आसीन होने के महा एक वर्ष के अंदर पार्टी के आम कार्र्यकत्ताओं और शीर्ष नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ी है। समझा जाता है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर से अपना पुराना स्टैंड सामने रखा कि भाजपा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री को एक ही राज्य (गुजरात) से नहीं होना चाहिए, इसी परिप्रेक्ष्य में संघ नेतृत्व ने राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी से खुलकर बातचीत की। अगले चंद दिनों में जहां अमित शाह अपनी नई टीम का ऐलान कर सकते हैं (समझा जाता है कि इस टीम में अर्जुन मुंडा, आर.अशोक जैसे नए चेहरों को जगह मिल सकती है) वहीं एक कयास यह भी लग रहा है आने वाले दिनों में भाजपा को एक नया अध्यक्ष मिल सकता है और शाह या तो गुजरात सरकार की कमान संभाल सकते हैं या फिर केंद्रनीत मोदी सरकार में उन्हें किसी अहम मंत्रालय से नवाजा जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि उन्हें गृह, ग्रामीण विकास या कृषि में से कोई एक मंत्रालय सौंपा जा सकता है, अब तो शाह भी इन नई परिस्थितियों के लिए तैयार बताए जाते हैं।