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खाड़ी देश भारत के नए मित्र

Posted on 23 August 2015 by admin

मोदी की सफल अरब यात्रा के बाद से खाड़ी देश आशा भरी निगाहों से भारत की ओर देख रहे हैं, इन देशों की निगाहें भारत-पाक के एनएसए स्तर की वार्ता पर भी टिकी हुई थीं, यह वार्ता खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है। खाड़ी देश इन दिनों यूं अचानक पाकिस्तान को लेकर बेहद सषंकित हो गए हैं और उनके खुफिया सूत्र संकेत दे रहे हैं कि पाकिस्तान इन देशों में कुछ गड़बडि़यां पैदा कर सकता है। वैसे भी खाड़ी देशों में पाकिस्तानियों की एक बड़ी आबादी बसर करती है, अकेले बहरीन पुलिस में दस हजार से ज्यादा पाकिस्तानी तैनात हैं, सऊदी अरब में तो एक अलग आर्मड ब्रिगेड है, तो वहीं ओमान में एफ-16 लड़ाकू विमानों के ज्यादातर पायलट पाकिस्तानी है, तो जोर्डन भी ऐसे ही कुछ समस्याओं से जूझ रहा है। वैसे भी अरब देशों में पाकिस्तानी फौजों की तैनाती पाक के विदेष नीति का एक अहम हिस्सा है, कई खाड़ी देशों मसलन सऊदी अरब, लीबिया, जाॅर्डन, इराक, ओमान, संयुक्त राश्ट्र अमीरात और कुवैत में पाकिस्तानी ट्रेनर की बड़े पैमाने पर मौजूदगी देखी जा सकती है, पाक रक्षा विषेशज्ञों की टीम भी इन देशों में अपना डेरा-डंडा जमाए रखती है। चुनांचे अब आतंकवाद के मुद्दे पर भारत को खाड़ी देशों में जबर्दस्त समर्थन मिलने की उम्मीद है।

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संकट में रफाल डील

Posted on 23 August 2015 by admin

मोदी की फ्रांस यात्रा में रफाल डील ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब यूं अचानक रफाल समझौता अपनी आखिरी सांसे गिनने लग गया है, दरअसल रफाल डील भारत-फ्रांस दो सरकारों के बीच हुई है, पर मामला इसकी कीमत को लेकर फंस गया है, भारत खुले बाजार की जरूरतों और दरकारों के बीच रफाल की एक उचित कीमत अदा करना चाहता है, वहीं फ्रांस अड़ा हुआ है कि उसने जिस रेट पर अपने लड़ाकू विमान मिस्र यानी इजिप्ट को बेचे हैं, भारत को भी यही रेट देने होंगे। भारत इस रेट के लिए तैयार नहीं है, भारत अपने ’मेक इन इंडिया’ एजेंडा के तहत टेक्नोलाॅजी का भी तुरंत ट्रांसफर चाहता है, पर फ्रांस इस मामले में भी टाल-मटोल कर रहा है, चुनांचे रफाल डील का भविश्य तो फिलवक्त अधर में ही दिखता है।

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केंद्र से बाहर होंगे उपेंद्र?

Posted on 23 August 2015 by admin

उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहा है, बिहार विधानसभा चुनाव में जहां कुशवाहा अपनी क्षेत्रीय पार्टी के लिए 67 सीटें मांग रहे हैं, वहीं भाजपा हाईकमान उन्हें 18 से ज्यादा सीटें देने को राजी नहीं, सूत्र बताते हैं कि भाजपा बिहार में पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति के लिए 42, मांझी के लिए 20 और कुशवाहा के लिए 18 सीटें छोड़ने को तैयार है। वहीं कुशवाहा का तर्क है कि अगर राज्य में महज़ 1 फीसदी कुर्मी वोटों पर अपना दबदबा रखने वाले नीतीश कुमार को अतीत में भाजपा मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना सकती है तो फिर उनके सजातीय 3 फीसदी कोयरी वोटों की अनदेखी कैसे की जा सकती है? अगर कुशवाहा व भाजपा में बात नहीं बनी तो बिहार चुनाव के बाद उपेंद्र कुशवाहा को केंद्र में मंत्री पद से हटाया जा सकता है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को कथित तौर पर भाजपा और अमित शाह की ओर से यह आष्वासन प्राप्त हुआ है कि बिहार चुनाव के बाद या तो उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया जाएगा या फिर किसी राज्य का गवर्नर, समझा जाता है कि मांझी ने इन दोनों प्रस्तावों के लिए हामी भर दी है।

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संसद में रहकर भी सदन नहीं आए मोदी

Posted on 16 August 2015 by admin

संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस का बेतरतीब हंगामा किंचित प्रधानमंत्री मोदी को रास नहीं आया, यही वजह है कि संसद भवन में मौजूद रहने के बावजूद उन्होंने कम ही सदन में आने की जहमत उठाई। मोदी नियम से संसद आते थे, और नियम से सदन के फ्लोर व पाॅलिटिकल मैनेजमेंट से जुड़ी कोर टीम से ठीक सुबह के साढ़े दस बजे उनकी मीटिंग होती थी। इस आठ सदस्यीय कोर टीम में मोदी के अलावा राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, सुशमा स्वराज, नितिन गडकरी, वैंकेया नायडू, राजीव प्रताप रूढ़ी, मनोहर पर्रिक्कर और मुख्तार अब्बास नकवी मौजूद रहते थे। इस कोर ग्रुप के साथ गंभीर मंत्रणा के बाद सरकार संसद में अपनी रणनीति को अंतिम रूप देती थी। फिर संसद भवन स्थित अपने कमरे से ही पीएम अपना नियमित काम काज देखते थे, आगंतुकों से मिलते थे और सबसे ज्यादा दफे अपने खास वफादार अतिम शाह से राजनैतिक मंत्रणा करते थे और अपनी सरकार के काम काज के बारे में ’पब्लिक ओपिनियन’ यानी शाह का फीडबैक लिया करते थे।

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मानसून सत्र पार्ट-II की तैयारियां

Posted on 16 August 2015 by admin

आने वाले दिनों में सरकार संसद का विषेश सत्र बुलाने के बजाए मानसून सेशन पार्ट-II बुला सकती है, इस बाबत सरकार के कर्णधार प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के निरंतर संपर्क में है कि 2-3 चलने वाले इस सत्र को कैसे सुचारू रूप से चलाया जाए और इसमें जीएसटी बिल पर चर्चा होनी है और सदन में इसे पास करवाना है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस आलाकमान पर उनके ही कई मुख्यमंत्रियों का दबाव है कि जीएसटी बिल का पास नहीं होना राज्यों के हक में नहीं होगा। वैसे इस दफे भी मानसून सत्र शुरू होने से पहले मोदी सरकार के कर्णधारों यानी अरुण जेटली, वैंकेया नायडू और मुख्तार अब्बास नकवी की विपक्षी दलों के प्रमुखों से इस बात पर रजामंदी हो चुकी थी कि चाहे संसद का मानसून सत्र कितना भी हंगामीखेज क्यों न हो जीएसटी बिल पारित करने में कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल सरकार की मदद करेंगे। इस बारे में सोनिया गांधी की भी सहमति बताई जाती है, पर सदन आरंभ होने की पूर्व संध्या पर लोकसभा में कांग्रेस के एक प्रमुख नेता का मैसेज सरकार के पास आया कि वे अब कुछ नहीं कर सकते क्योंकि उनके हाथ बंधे हुए हैं, चूंकि राहुल गांधी ने तय कर दिया है कि जब तक सुषमा स्वराज का इस्तीफा नहीं हो जाता, पूरा मानसून सत्र ’वाॅश आउट’ रहेगा और कालांतर में हुआ भी यही।

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मोदी के जहाज में मीडिया भी सवार

Posted on 16 August 2015 by admin

इस 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी के 90 मिनट के भाशण में दहाड़ और हुंकार में बेतहाषा कमी नजर आई, वे पुरानी बातों को ही दोहराते नजर आए और मीडिया को लेकर भी उनका रूख किंचित नरम नज़र आया। यही नहीं मीडिया को लेकर मोदी और पीएमओ का दृश्टिकोण भी इन दिनों तनिक बदला-बदला नज़र आ रहा है, क्योंकि यह केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद पहली बार है जब मीडिया हाउस से पूछा गया कि वे प्रधानमंत्री के आबूधाबी और दुबई के दो दिवसीय विदेशी दौरे में अपना कोई प्रतिनिधि पीएम के साथ भेजना चाहेंगे? मई 2014 में केंद्र में भाजपानीत एनडीए सरकार के गठन के बाद से इस परंपरा पर पूरी तरह से लगाम लगा दी गई थी कि प्रधानमंत्री के विदेशी दौरे में उनके साथ पत्रकारों का कोई दल जाए। नहीं तो अब तक की परंपराओं में प्रधानमंत्री के साथ जाने वाले पत्रकारों के दल का सिर्फ होटल में रूकने का खर्च उनका मीडिया हाउस वहन करता था, विदेश मंत्रालय के इस ताजा अनुरोध से देश के मीडिया घराने सचमुच हैरान है कि मोदी सरकार अब आबूधाबी और दुबई जाने के लिए पत्रकारों के नखरे उठाने को तैयार हैं।

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आनंद से नहीं हैं प्रमोद

Posted on 16 August 2015 by admin

राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव पर कांग्रेस की ओर से दो वक्ताओं को बोलना था, लिस्ट में पहला नाम प्रमोद तिवारी का, तो दूसरा नाम आनंद शर्मा का था। उपसभापति के आदेश पर जैसे ही प्रमोद तिवारी बोलने को खड़े हुए, अभी उन्होंने बोलना भी शुरू नहीं किया था कि आनंद शर्मा ने अपनी सीट पर खड़े होकर बेधड़क बोलना शुरू कर दिया। तिवारी जी भौचक रह गए और फिर अपनी सीट पर बैठ गए, पर इसी बीच चंद सीनियर कांग्रेसी नेताओं मसलन सत्यव्रत चतुर्वेदी, अंबिका सोनी और गुलाम नबी आजाद ने तिवारी का हौंसला बढ़ाया कि अगर सूची में उनका नाम पहले है तो पहले उन्हें ही बोलना चाहिए। अपनी पार्टी के सीनियर नेताओं का हौंसला पाकर तिवारी जी फिर से अपनी जगह खड़े हुए और उन्होंने भी बोलना शुरू कर दिया। सदन में वाकई एक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, उपसभापति ने शर्मा और तिवारी की ओर देखते हुए कहा कि ’पहले आप दोनों फैसला कर लीजिए कि आपकी पार्टी की ओर से पहले कौन बोलेगा?’

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अदानी, इरान और हिंदुस्तान

Posted on 16 August 2015 by admin

इरान के विदेश मंत्री जावेद ज़ारिफ पिछले दिनों भारत के दौरे पर आए और नितिन गडकरी व सुशमा स्वराज से मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी से मिले। प्रधानमंत्री के साथ इस मुद्दे पर चर्चा आगे बढ़ाई गई कि भारत-इरान के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के साथ-साथ परस्पर व्यापार को और आगे कैसे बढ़ाया जाए? इन मुद्दों के अतिरिक्त शाभर पोर्ट के मुद्दे पर अलग से बातचीत हुई। दरअसल शाभर पोर्ट का मसला बीच में ही अटका हुआ है क्योंकि मोदी करीबी और भारत के एक प्रमुख उद्योगपति गौतम अदानी इस पोर्ट का अधिग्रहण करना चाहते हैं, पर वे जिन शत्र्तों पर अधिग्रहण करना चाहते हैं इसके लिए इरान सरकार तैयार नहीं बताई जाती है, सो मोदी अपनी निजी पहल पर इस मामले को निपटाने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे थे।

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सपा सुप्रीमो का मुलायम होना

Posted on 16 August 2015 by admin

संसद के मानसून सत्र के दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का मोदी सरकार के प्रति इस कदर यूं अचानक मुलायम हो जाना राजनैतिक पंडितों को हैरानी में डाल गया। सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ समय से यादव सिंह और उनके पुत्र, पुत्री व पत्नी से सीबीआई की कड़ी पूछताछ जारी है। यादव सिंह के घोटालों से जुड़ी 2002 से लेकर 2015 तक की फाइल खंगाली जा रही है और सीबीआई इस बात की तहकीकात में जुटी है कि यादव सिंह को अब तक किन-किन नेताओं व नेत्रियों से राजनैतिक संरक्षण मिलता आया है। सनद रहे कि सपा शासन काल के दौरान 954 करोड़ के घोटालों की फाइल भी खुल चुकी है, यही बात है जो कहीं न कहीं मुलायम को बेतरह पेरशान कर रही है और उन्हें अपना पुराना स्टैंड बदलने पर मजबूर भी कर रही है।

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ठंडे बस्ते में कनिष्क सिंह

Posted on 09 August 2015 by admin

क्या कनिष्क को गांधी परिवार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है? इन दिनों कनिश्क राहुल निवास की बजाए अपना ज्यादातर वक्त जवाहर भवन में काट रहे हैं, हालांकि उन्हें यदा-कदा प्रियंका गांधी के लिए काम करते भी देखा जा सकता है, पर प्रियंका के आॅफिस में सबसे सक्रिय प्रीति सहाय हैं जो प्रियंका से मिलने को इच्छुक लोगों के लिए मुलाकात का वक्त भी तय करती हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों गांधी परिवार के दो पुराने वफादार बुजुर्ग नेता सोनिया गांधी से एक लिस्ट के साथ मिले, समझा जाता है कि इन दोनों नेताओं के पास वैसे लोगों, उद्योगपतियों और बिल्डरों की गिनती थी, जिनसे किसी न किसी भांति कनिष्क और उनके भाई षषांक लाभान्वित हुए थे। इन दोनों नेताओं ने सोनिया से शिकायत लगाई कि कनिष्क ने केंद्र व राज्यों में कांगे्रस के शासन के दौरान सत्ता का बेजा लाभ उठाया है। सोनिया ने इन दोनों वफादारों की बात गंभीरतापूर्वक सुनी और कहा-’मैंने आपकी बातें नोट कर ली है, पर अभी हमें अपनों से नहीं, दूसरों से लड़ना है’, पर इसके बाद से लगातार कनिष्क को कांग्रेस व राहुल के अहम मामलों से अलग रखा गया है, चूंकि कनिष्क पिछले काफी समय से राहुल के राजदार रहे हैं, चुनांचे उनसे एकदम से किनारा कर पाना गांधी परिवार के लिए आसान नहीं होगा।

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