Posted on 20 June 2016 by admin
अब इन कयासों पर विराम लगने की बारी है कि बिहार में नीतीश लालू के हाथों में खेल रहे हैं, सच तो यह है कि नीतीश अब अपना ही गेम खेल रहे हैं। अब जरा बिहार में लॉ ऑफिसर्स का ही मामला ले लें, जब बिहार में नीतीश भाजपा के गठबंधन में सरकार चला रहे थे तो आधे लॉ-ऑफिसर्स भाजपा के कोटे से थे। जब इस बार धूम धड़ाके से बिहार में नीतीश-लालू व कांग्रेस की सरकार बनी तो यह तय हुआ कि जिस हिसाब से इन पार्टियों को सीटें मिली है, उसी अनुपात में ये पार्टियां अपने कोटे से लॉ-ऑफिसर के नाम अनुमोदित कर सकती है। सैद्धांतिक रूप से इस बात की मंजूरी मिलने के बाद राजद और कांग्रेस ने भी अपनी-अपनी लिस्ट मुख्यमंत्री को भेज दी, पर सरकार के गठन के इतने महीने गुजर जाने के बाद भी नीतीश अपने गठबंधन साथियों की लिस्ट पर कुंडली मारे बैठे हैं। नतीजन जहां बिहार में 70 से ज्यादा लॉ-ऑफिसर हैं वे सभी कहीं न कहीं बस नीतीश से ही सहानुभूति रखने वाले हैं।
Posted on 20 June 2016 by admin
भगवा रंग में असंतोष का लाल रंग अब सिर चढ़ कर बोलने लगा है, पिछले दिनों बीजेपी के ही कुछ अंसतुष्ट कार्यकर्त्ताओं ने पार्टी को एक नया नाम दिया है बीजेपी नहीं, अब ‘बीजीपी’यानी ‘भारतीय गुजरात पार्टी’। इन कार्यकर्त्ताओं की नाराज़गी की एक खास वजह है, वह यह है कि विगत दिनों इलाहाबाद में आहूत भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पर मंच पर आसीन होने का सौभाग्य जिन चार प्रमुख नेताओं-मोदी, शाह, आडवानी और जेतली को मिला, इन सबके गुजरात कनेक्शन हैं, जेतली का इसीलिए कि वे गुजरात से ही राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। पार्टी कार्यकर्त्ताओं को ऐसा लगा कि इलाहाबाद में जैसे पार्टी की राष्ट्रीय नहीं बल्कि संसदीय दल की बैठक हो रही हो। पार्टी की मान्य परंपराओं के मुताबिक राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मंच पर पूर्व अध्यक्षों को भी बिठाने की परंपरा रही है, कम से कम पिछले अध्यक्ष यानी राजनाथ सिंह के लिए तो मंच पर जगह बनती ही थी। पूर्व में पार्टी उपाध्यक्षों को भी मंच पर जगह दी जाती रही थी, पर अब बदले परिदृश्य से मंच सिर्फ और सिर्फ किसका है, यह सब जानते हैं।
Posted on 20 June 2016 by admin
बदले सियासी हालात से पस्त जगन मोहन रेड्डी ने शरद पवार के रूप में अपना नया तारणहार ढूंढ लिया है, पिछले पखवाड़े वे पवार के आमंत्रण पर दिल्ली पधारे, जगन बड़े अरमानों के साथ दिल्ली आए, जहां पवार साहब के घर खाने पर विभिन्न पार्टियों के कई नेता गण उनका इंतजार कर रहे थे। इन नेताओं में बीजेडी के जयपांडा, एनसीपी के डीपी त्रिपाठी, दिवंगत पीए संगमा के पुत्र कॉनरेड संगमा, सपा के रामगोपाल यादव, इनेलोद के दुष्यंत चौटाला आदि। पर जगन को लगा था कि पवार साहब भाजपा के कुछ बड़े नेताओं की मीटिंग उनसे करवाएंगे, ऐसा हुआ नहीं। जगन की मनोभावनाओं को समझते हुए दिल्ली के एक तीसमार खां पत्रकार-संपादक ने अपने घर पर एक डिनर रखा और जगन से कहा कि इस डिनर में भाजपा के कुछ बड़े नेता आएंगे, पर उस डिनर में भी जो नेता आए, वे छुटभैय्ये किस्म के थे। उस पर से इस संपादक जी ने जगन से अपने लिए राज्यसभा की डिमांड कर दी कि वे एमपी रहते हुए जगन का दिल्ली में काम-काज देखेंगे। इन नए सियासी दस्तूरों को जगन न समझ पा रहे हैं और न ही पचा पा रहे हैं।
Posted on 20 June 2016 by admin
ज़ी के सर्वेसर्वा सुभाष चंद्रा को राज्यसभा भेजने में अहम भूमिका निभाने वाले भूपिंदर सिंह हुड्डा के सिर लगातार सीबीआई जांच की तलवार लटक रही है। सूत्र बताते हैं कि हुड्डा इस बात को लेकर बेहद आक्रांत हैं कि कहीं उनका हश्र भी इनेलोद प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला जैसा न हो जाए, तो उन्होंने अपने कुछ करीबी सूत्रों की मदद से मोदी सरकार से भी अपने बेहतर रिश्ते बनाने की शुरूआत कवायद शुरू कर दी। जब इस बात की भनक कांग्रेस हाईकमान को लगी तो उसने हुड्डा को तलब कर उनकी क्लास ली। सूत्र बताते हैं कि अपने पार्टी हाईकमान से नाराज़ हुड्डा पहले तो एक नई क्षेत्रीय पार्टी लांच करने का मन बना चुके थे, क्योंकि स्वयं सोनिया ने हुड्डा पुत्र दीपेंद्र को संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी देने से मना कर दिया था। पर सोनिया के एक करीबी नेता के बीच-बचाव के बाद अब यह मामला ठंडा पड़ा है और अब हुड्डा ने तय किया है कि वे कांग्रेस में रह कर ही जाटों की सरपरस्ती करेंगे।
Posted on 12 June 2016 by admin
‘बहुत सुनते थे पहलू में शोर दिल का, पर ये तो कतरा-ए-खूं ही निकला’। मोदी कैबिनेट में संभावित फेरबदल की अटकलें लंबे समय से सुनने को मिल रही हैं, यह भी कहा जा रहा है कि यह एक बड़ा फेरबदल होगा, पर सूत्र बताते हैं कि यह एक मामूली फेरबदल हो सकता है, जिसमें मंत्रियों की रिक्त सीटें भरी जा सकती है। कयास है कि ओडिशा के संभावित विधानसभा चुनाव की आहटों को भांपते केंद्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्रदेश प्रमुख बना कर उनके गृह राज्य भेजा जा सकता है, ऐसा ही कुछ इस्पात मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बारे में सुना जा रहा है कि उन्हें शिवराज के विकल्प के तौर पर तैयार करने के लिए उन्हें पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। यूपी से योगी आदित्यनाथ सरीखों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, तो पंजाब चुनाव को देखते हुए नवजोत सिंह सिद्धू को केंद्र में खेल मंत्री बनाया जा सकता है। विजय सांपला को पहले ही पंजाब का भाजपा प्रमुख बनाया जा चुका है, चुनांचे केंद्रीय मंत्रिमंडल से उनकी छुट्टी तय मानी जा रही है। सर्वानंद सोनोवाल ने असम का मुख्यमंत्री बनने के बाद एवं दानवे पाटिल महाराष्ट्र बीजेपी प्रमुख बनने के बाद पहले ही कैबिनेट से त्याग-पत्र दे चुके हैं, सो इन पदों को भी भरने की तैयारी है। 12-13 जून को इलाहाबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होनी है, इसके बाद मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल मुमकिन है। समझा जाता है कि पीयूष गोयल व मनोज सिन्हा सरीखे मंत्रियों के कद को भी बढ़ाने की तैयारी है, कई ‘नन-परफॉरमिंग’ मंत्रियों को सरकार से हटा कर संगठन की सेवा में लगाया जा सकता है। ये तो बस अटकलें हैं, होगा वही जो नरेंद्र मोदी चाहेंगे।
Posted on 12 June 2016 by admin
मौजूदा सियासत में जहां राजनेता जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सीधे बोलने से कतराते हैं, वहीं गांधी परिवार की छोटी बहू व केंद्रीय महिला व बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी का मूक जानवरों के लिए अपने साथी मंत्री से रार ठान लेना कोई मामूली घटना नहीं है। सूत्र बताते हैं कि वन व पर्यावरण मंत्रालय कई राज्यों से जानवरों को मारने का अपना फरमान वापिस लेने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पांच देशों की यात्रा से लौट कर प्रधानमंत्री ने इस मामले पर गंभीर संज्ञान लेते हुए अपने मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को कड़ी फटकार लगाई है। प्रधानमंत्री को दी गई खुफिया रिपोर्ट में भी इस बात का दावा हुआ है कि हैदराबाद के जिन मुस्लिम शिकारियों को बिहार सरकार ने नील गायों को मारने का ठेका दिया है, उनका अतीत कहीं न कहीं दागदार रहा है, और इनके सूत्र ‘पोचिंग’ से भी जुड़े रहे हैं। किसानों की फसलों को बर्बाद करने का तोहमत लगा अकेले बिहार में नील गाय को ’वर्मिन’ घोषित कर ढाई सौ से ज्यादा नील गायों का कत्लेआम कर दिया गया, जो यूपी में बीफ की राजनीति पर सियासी रोटियां सेंकने को आतुर भाजपा के लिए कतई माकूल नहीं है। वहीं चंद्रपुर में प्रोफेशनल शूटर को किराए पर लेकर 200 से ज्यादा जंगली सूअर मार दिए गए हैं। गुजरात में जहां राष्ट्रीय पक्षी मोर का कत्लेआम हुआ है, वहीं हिमाचल में बंदरों को मारने की इजाजत दे दी गई, तो पश्चिम बंगाल में हाथियों को मारने की छूट दे दी गई है, इंसानी हैवानियत को कानूनी जामा पहनाने की इससे बड़ी वारदात और क्या हो सकती है?
Posted on 12 June 2016 by admin
कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी के सीनियर नेताओं का एक धड़ा इस बात पर अड़ा है कि प्रियंका गांधी को पार्टी महासचिव बना कर यूपी चुनाव की जिम्मेदारी दी जाए। राहुल आने वाले कुछ दिनों में हर वर्ष की तरह इस बार भी विदेश में छुट्टियां मानने के लिए रवाना हो रहे हैं, पर इसमें पेंच यह है कि 17 जून को उनका जन्मदिन आता है, सो मां सोनिया चाहती है कि वे पार्टी कार्यकर्त्ताओं के बीच अपना जन्मदिन मना कर ही विदेश यात्रा के लिए रवाना हों, जिससे कि इसके पहले कांग्रेस अपनी नई टीम की घोषणा कर सके। पार्टी नेताओं का एक गुट लगातार यह दबाव बना रहा है कि अब मौका आ गया है कि राहुल कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभाल लें, वहीं सोनिया वफादारों का गुट राहुल की अध्यक्षीय पारी के लिए इसे उपयुक्त समय नहीं मान रहा, फैसला सोनिया पर छोड़ दिया गया है।
Posted on 12 June 2016 by admin
जब से आर्म्स डीलर संजय भंडारी व रॉबर्ट वाड्रा के बीच ई-मेल के आदान-प्रदान का ईडी ने खुलासा किया है, इस बात को लेकर प्रियंका गांधी खासी परेशान बताई जाती हैं। मीडिया में लगातार रॉबर्ट का नाम उछाले जाने से विचलित प्रियंका ने पिछले कुछ दिनों में कई सीनियर पत्रकारों व संपादकों को अपने घर बुलाया है, सूत्र बताते हैं कि प्रियंका ने इन पत्रकारों से करबद्द प्रार्थना की है कि वे इस मामले को बेवजह तूल न दें और बार-बार रॉबर्ट का नाम इसमें न उछालें। समझा जाता है कि पत्रकारों ने प्रियंका के समक्ष हथियार डालते हुए कहा कि इन खबरों को रोकना उनके वष में नहीं, क्योंकि इस खबर से कहीं न कहीं सीधे तौर पर उनका मैनेजमेंट भी जुड़ा है और उनके मैनेजमेंट पर यह खबर दिखाने व चलाने का कहीं ऊपर से भारी दबाव है। बात प्रियंका के समझ में आ गई।
Posted on 12 June 2016 by admin
‘ज़ी’ के सर्वेसर्वा और नरेंद्र मोदी के खास विश्वासपात्रों में शुमार होने वाले सुभाष चंद्रा के लिए राज्यसभा की राह मुश्किल बनाने में नवीन जिंदल की सबसे महती भूमिका बताई जाती है, सूत्र बताते हैं कि चंद्रा को प्रधानमंत्री राज्यसभा के लिए मनोनीत करना चाहते थे, पर इस बारे में महामहिम की राय कुछ अलग थी, सो तय हुआ कि चंद्रा को उनके गृह राज्य हरियाणा से भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा में ले आया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि चंद्रा की भूपिंदर सिंह हुड्डा से भी इस बारे में बातचीत हो चुकी थी, इस बीच नवीन जिंदल भागे-भागे सोनिया दरबार में पहुंचे और उनसे गुहार लगाई कि अगर हरियाणा में कांग्रेस के विधायकों के लिए ‘व्हिप’ जारी नहीं हुआ तो वहां चंद्रा के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग हो सकती है, वहीं इनेलोद के समर्थन से चंद्रा को चुनौती देने के लिए मैदान में उतरे आर के आनंद को समर्थन देने के लिए कई कांग्रेसी विधायक तैयार नहीं हो रहे थे, तो नवीन जिंदल को उनसे कुछ बड़े वादे करने पड़े।
Posted on 12 June 2016 by admin
अमर सिंह को पार्टी में एंट्री दिए जाने से रूठ कर आजम खां विदेश में छुट्टियां मनाने चले गए हैं, प्रोफेसर रामगोपाल भी गाहे-बगाहे नेताजी से अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं, आंखें दिखा नहीं सकते क्योंकि उनका कोई खास राजनैतिक आधार नहीं। वहीं अमर हैं कि राज्यसभा मिलते ही नेताजी के बरसों पुराने सपने को परवान चढ़ाने में जुट गए हैं। नेताजी को 2019 के चुनाव में मोदी के समक्ष विपक्ष का सर्वमान्य चेहरा बनाने के लिए अमर ने अभी से अपनी कवायद शुरू कर दी है, वे नीतीश से बतिया रहे हैं, जयललिता व ममता पर डोरे डाल रहे हैं, अजीत सिंह का सपा के साथ चुनावी गठजोड़ की इबारत लिख रहे हैं, और अपने पुराने वामपंथी मित्रों से नए रिष्ते बना रहे हैं, मुलायम को इससे ज्यादा और चाहिए भी क्या?