Posted on 08 February 2014 by admin
संसद के मौजूदा सत्र में कोई भी बिल पास होने की उम्मीद नहीं जग रही, राहुल गांधी अपने 6-7 महत्वाकांक्षी विधेयकों को पास कराने की जल्दी में हैं, पर विपक्ष खासकर भाजपा युवराज के मंसूबों पर पानी फेर देना चाहती है, सो न तो तेलांगना बिल के संसद में पास होने की उम्मीद है और न ही दंगा निरोधक बिल के। केवल ‘एप्रोप्रिएशन बिल’ पर विपक्ष झुक सकता है।
Posted on 08 February 2014 by admin
इशरत जहां मामले में आईबी के वे चारो अधिकारीगण जिनका नाम चार्जशीट में आया है, सूत्रों की मानें तो वे जल्द ही बड़ा खुलासा करने वाले हैं, ये खुलासे इतने बड़े हो सकते हैं कि इससे यूपीए सरकार व दस जनपथ की नींव डगमगा सकती है, ये खुलासे इस बात को लेकर हो सकते हैं कि पिछले दस वर्षों में यूपीए गवर्मेंट के कुछ कर्णधारों ने किस तरह से आईबी व इन जैसी खुफिया एजेंसियों का बेज़ा इस्तेमाल किया है। ये खुलासे इतने बड़े हो सकते हैं कि दस जनपथ से जुड़े कई बड़े राजनीतिज्ञों के कैरियर चौपट हो सकते हैं।
Posted on 08 February 2014 by admin
लोकपाल कौन बनेगा? इसको लेकर कांग्रेस की दिलचस्पी समझ आ रही है, कांग्रेसनीत यूपीए सरकार नए लोकपाल को नियुक्त करने की जल्दी में है, और जल्दी भी इस कदर है कि प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की आपत्तियों पर भी उसे कान धरने की फुरसत नहीं, लोकपाल की नियुक्ति को लेकर 3 फरवरी को मीटिंग हो गई, इस मीटिंग में प्रधानमंत्री, स्पीकर लोकसभा, नेता प्रतिपक्ष लोकसभा और सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस मौजूद थे, सुषमा स्वराज की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए पी.पी.राव का नाम फाइनल कर दिया गया, ये राव वही हैं जो गांधी परिवार के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं, राव के नाम पर मुहर लगने के लिए फाइल राष्टï्रपति महोदय के पास भेज दी गई, पर इतने दिन गुज़र जाने के बावजूद पी.पी.राव का नाम राष्टï्रपति द्वारा अनुमोदित नहीं हो पाया है, मगर क्यों? इस देरी की वजह क्या है? यह सवाल बड़े दूर की कौड़ी है। वैसे भी कोलगेट, 2जी, अगस्टा वेस्टलैंड, हाईवे स्कैम जैसे घोटालों की पर्दागिरी के लिए किसी कांग्रेस-समर्थक लोकपाल का आना बेहद जरूरी है।
Posted on 01 February 2014 by admin
सुब्रह्मïण्यम स्वामी भाजपा के गली की हड्डïी बन गए हैं, राजनाथ-मोदी द्वय से न उन्हें निगलते बन रहा है, न उगलते। राजनाथ ने स्वामी के इस बात का खासा बुरा माना कि उन्होंने ख्वामख्वाह वायको के खिलाफ बयान दे दिया। एक तरह से कमल पार्टी ने स्वामी को नई दिल्ली संसदीय सीट ऑफ कर रखी है पर स्वयं स्वामी दिल्ली से लोकसभा का चुनाव लडऩे के इच्छुक नहीं, वे अपने लिए मुंबई नार्थ-ईस्ट की सीट चाहते हैं।
Posted on 01 February 2014 by admin
कांग्रेस के लिए नए गठबंधन साथियों की तलाश कोई आसान काम नहीं रह गया है, तेलंगाना राष्टï्र समिति के अध्यक्ष के.चन्द्रशेखर राव अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने की एक बड़ी कीमत मांग रहे थे, राव का तर्क था कि उनकी पार्टी छोटी सी है और कांग्रेस एक गंगा, सो विलय के बाद उनके समर्थकों के लिए ठौर पाना आसान नहीं होगा सो वे आर्थिक रूप से इतने सबल हो जाना चाहते हैं कि अपने कट्टïर समर्थकों को ठीक-ठीक एडजस्ट कर सके। सूत्र बताते हैं कि जब कांग्रेस को यह मांगी गई रकम बहुत ज्यादा लगी तो उसने टीआरएस के समक्ष फ्रेंडली फाइट और चुनाव बाद गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, चंद्रशेखर राव इस पर अभी विचार कर रहे हैं।
Posted on 01 February 2014 by admin
उसी प्रकार एआईयूडीएफ के बदरूद्दीन अजमल भी कांग्रेस को आंखें तरेर रहे हैं। कांग्रेस असम में अजमल की पार्टी से चुनाव पूर्व गठबंधन चाहती है और कांग्रेस अजमल की पार्टी के लिए असम की 3 संसदीय सीटें छोडऩे को राजी थी पर अजमल नहीं माने, उनका तर्क था कि 2 सीटें तो वे ऐसे ही जीत रहे हैं, ऐसे में अगर वे असम की सभी 14 लोकसभा सीटों से अपना उम्मीदवार उतारते हैं तो राज्य में उनकी पार्टी का विस्तार होगा। पर कांग्रेस ने अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी है, उसने अजमल को मनाने का प्रयास जारी रखा हुआ है।
Posted on 25 January 2014 by admin
दिल्ली का राज-काज चलाने में भले ही अरविन्द केजरीवाल उतने चुस्त-दुरूस्त न दिख रहे हों पर उनके नाम, रसू$ख और उसूल का डंका हर तरफ बज रहा है, पिछले दिनों नई दिल्ली के प्रगति मैदान के पास एक बिजनेसमैन की लंबी चमचमाती कार ने रेडलाइट जंप कर दी तो आगे टै्रफिक पुलिस वालों ने उन्हें रोका, टै्रफिक इंस्पेक्टर ने बिजनेसमैन से पूछा किसके हक में हो, केजरीवाल या कांग्रेस? बाद में उन्हें से इसका अर्थ भी समझाया गया कि ‘केजरीवाल यानी सीधे हजार रुपए का चालान भरो, कांग्रेस यानी 100 रुपए की रिश्वत ट्रैफिक पुलिस की जेब में डालो और चलते बनो।’ (एनटीआई) द्दशह्यह्यद्बश्चद्दह्वह्म्ह्व.द्बठ्ठ
Posted on 25 January 2014 by admin
‘आप’ के मुख्य चिंतक व विचारक योगेंद्र यादव, ‘आप’ प्रर्वतक अरविन्द केजरीवाल के उस धारणा से इत्तफाक नहीं रखते थे कि रेल भवन के समक्ष चलने वाला यह धरना 10 दिनों तक चले, सो जब केजरीवाल का धरना नई दिल्ली के रेल भवन के सामने शुरू हुआ और अरविन्द 10 दिनों की पूरी तैयारी के साथ वहां डटे थे, तो यादव जी के हाथों में हरे रंग का एक पाउच मात्र था, जिसमें उनका नया टूथ ब्रश व पेस्ट था, ‘आप’ नेताओं ने जानना चाहा कि वे रात कैसे गुजारेंगे? उनका बिस्तर और उनकी रजाई कहां है? तो योगेंद्र यादव का जवाब था कि ‘वे तो 48 घंटों के लिए भी तैयार होकर नहीं आए हैं’ और वाकई अगले ही दिन यह धरना खत्म हो गया।
Posted on 25 January 2014 by admin
काला चश्मे वाले बाबा करुणानिधि ने अपने राजनैतिक वारिस के नाम पर जैसे मुहर लगा दी है, पार्टी को एक तरह से सूचित कर दिया गया है कि करुणानिधि के राजनैतिक उत्तराधिकारी स्टालिन ही होंगे, सो अलागिरी को इस तरह यूं अचानक पार्टी से सस्पेंड करने का $फैसला अचानक नहीं था, कहते हैं करुणानिधि ने अपने परिवार के साथ मिल-बैठकर इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया, तब कहीं जाकर वे इस बड़े $फैसले पर पहुंचे हैं, वैसे भी अलागिरी पहले भी दो मौकों पर पार्टी से सस्पेंड हो चुके थे, पर बाद में उन्हें वापिस ले लिया गया था, पर इस बार करुणानिधि अपने इस $फैसले को बदलने को तैयार नहीं दिखते।
Posted on 25 January 2014 by admin
गुड प्रेस और बैड प्रेस का एक नज़ारा पिछले दिनों अमेठी में देखने को मिला, राहुल व प्रियंका गांधी जब अपने दो दिवसीय अमेठी दौरे के लिए निकले तो वहां पहुंचने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष को काले झंडे दिखाए गए, काली साड़ी में लिपटीं कुछ महिलाओं ने ‘राहुल वापिस जाओ’ के नारे लगाए और देश के लगभग सभी न्यूज चैनलों ने इस $खबर को प्रमुखता से दिखाया। हैरान-परेशान कांग्रेस इस मामले की तह में गई, इस आशंका के साथ कि राहुल को काला झंडा दिखाने की साजिश के पीछे भाजपा या ‘आप’ हो सकती है, पर जब मामला खुला तो कांग्रेस की धडक़नें बढ़ गई, क्योंकि उन्हें इस घटना के पीछे राज्य में सत्तारूढ़ सपा का हाथ दिखा, दरअसल सपा राहुल के मुजफ्फरनगर के दंगा पीडि़तों को लेकर अपनी सरकार की छीछालदारी से काफी नाराज़ थी सो, वह राहुल पर एक पलटवार करना चाहती थी। पर यह पलटवार कुछ इस अंदाज में होगा कांग्रेसियों को इसका गुमान न था।