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नीतीश-लालू में मनमुटाव की शुरूआत

Posted on 27 December 2015 by admin

क्या नीतीश व लालू के बीच का हनीमून समाप्त होने की टंकार अब साफ-साफ सुनी जा सकती है? अपने चुनावी वायदों को अमलीजामा पहनाने की नियत से नीतीश ने राज्य में शराब बंदी के लिए ताने-बाने बुनने शुरू कर दिए हैं, यहां तक कि उन्होंने राज्य के शराब ब्रिकेताओं को यह नसीहत भी दे डाली है कि वे शराब बेचना बंद कर, दूध बेचना शुरू करें। राज्य की शराब लॉबी अपने दुख-दर्द का बड़ा पोटला लेकर पिछले दिनों लालू यादव से मिलने जा पहुंचे और उनसे अपने कष्टों का इजहार किया कि ’क्या कभी दूध व शराब बेचने का मुनाफा एक जैसा हो सकता है?’ लालू बात समझ गए, उन्होंने नीतीश से बात की और उन्हें समझाने की कोशिश की, शराब बंदी की मांग तो गांव की महिलाएं करती आई हैं, तो गांव में शराब बंद कर दो, शहरों में बिकने दो। नीतीश को यह तर्क रास नहीं आ रहा है और फिलवक्त इस मुद्दे पर न तो वे अपना दिल खोल रहे हैं और न ही मुंह।

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क्या बासी हो गए जोशी?

Posted on 27 December 2015 by admin

पिछले दिनों भाजपा मार्गदर्शक मंडल के एक अहम नेता मुरली मनोहर जोशी बेंगलुरू की अपनी प्रस्तावित यात्रा पर थे, पार्टी ने इसके लिए पहले अपने एक एमएलसी को अधिकृत किया, पर एमएलसी साहब ने यह कहते हुए एयरपोर्ट जाने से मना कर दिया कि उनके पास छोटी गाड़ी है। इसके बाद पार्टी ने एक एमएलए से संपर्क साधा, जो कालांतर में भी जोशी जी को एयरपोर्ट पर रिसीव करते रहे हैं, उनके पास गाड़ी भी बड़ी थी, पर उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि उस तारीख को वे बेंगलुरू से बाहर रहेंगे। जैसे-तैसे करके पार्टी ने अपने एक विधायक को इस पुनीत कार्य के लिए तैयार किया। राजनीति के असली चरित्र को समझने के लिए यह वाकया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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…और अंत में

Posted on 27 December 2015 by admin

अब से पहले मीडिया से मिलने, बात करने और उसे नियंत्रित करने के लिए पीएम मोदी अपने एक खास रणनीतिकार मित्र पर निर्भर थे, पर नए साल में उन्होंने कुछ नया करने की ठानी है, सूत्र बताते हैं कि मोदी ने तय किया है कि वे नए साल में पत्रकारों से स्वयं की पहल से ’वन टू वन’ मिलेंगे और उनसे अपने दिल की बात भी करेंगे। इसका श्रीगणेश भी उन्होंने बकायदा कर दिया है। हालांकि नए साल में अभी चंद रोज बाकी है पर पीएम को अपनी नई पहल के लिए और इंतजार नहीं चाहिए था।

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नीतीश को चाहिए तीर के बाद चक्र

Posted on 21 December 2015 by admin

पर नीतीश के मन में इन दिनों उद्दात महत्त्वाकांक्षाओं का सैलाब उमड़ रहा है, दो दिन पहले वे लालू जी के साथ रात्रि भोजन का लुत्फ उठा रहे थे, तब इन दोनों नेताओं ने तय किया कि वे अब जनता दल के महागठबंधन को एक नया रूप देंगे, और आश्चर्यजनक रूप से लालू अपने समधी मुलायम सिंह को इस महागठबंधन से बाहर रखने को राजी हो गए हैं। इसी कड़ी में नीतीश कुमार ने चुनाव आयोग में जनता दल के पुराने चुनाव चिन्ह ’चक्र’ के लिए भी आवेदन कर दिया है। और इन दोनों नेताओं में यह सर्वसम्मति बनी है कि 2019 का आम चुनाव देवेगौड़ा की अध्यक्षता में लड़ा जा सकता है। इस महागठबंधन में लालू नीतीश के अलावा देवेगौड़ा, अजीत व चैटाला की पार्टी को शामिल किया जा सकता है।

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पप्पू पास नहीं हुआ

Posted on 21 December 2015 by admin

महज़ एक चुनाव नतीजे से सियासी परिदृश्य किस कदर बदल सकता है, पप्पू यादव इसके एक नायाब उदाहरण हैं। वे मधेपुरा से लालू प्रसाद की राजद के सांसद हैं, पर इस दफे के बिहार चुनाव में उन्होंने भाजपा के इशारे पर लालू यादव की जड़ में मट्ठा डालने का काम किया। पर चुनावी नतीजों ने लालू-नीतीश की बम-बम करा दी, लौट के बुद्धु घर को आए, सूत्र बताते हैं कि बिहार के चुनावी नतीजों के बाद पप्पू ने कई-कई दफे लालू से मिलने का समय मांगा, पर लालू इसके लिए किंचित तैयार नहीं हुए। पिछले दिनों पार्लियामेंट में पप्पू पीएम से टकरा गए, पप्पू ने पीएम से आग्रह किया कि वे उनसे मिलना चाहते हैं, मिलकर कुछ बात करना चाहते हैं। सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी ने छूटते ही पप्पू यादव से कहा-’आपका बहुत सहयोग हो गया, अभी मिलना संभव नहीं हो पाएगा।’ पप्पू कभी हैरत से खुद को, तो कभी पीएम को देख रहे थे, यही पीएम थे, जो बिहार चुनाव से पूर्व उन्हें बुला-बुला कर मिल रहे थे।

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…और अंत में

Posted on 21 December 2015 by admin

तमाम सियासी लुका-छिपी के बाद भी असम में कांग्रेस और बदरूद्दीन अजमल का एक अघोषित तालमेल हो चुका है। हालांकि शुरूआत में अजमल कांग्रेस के साथ जाने को इच्छुक नहीं थे, पर असम में कमल के प्रस्फुटन से आक्रांत कुछ मुस्लिम नेताओं के दबाव के बाद अजमल ने कांग्रेस से हाथ मिलाने में ही बेहतरी समझी। अजमल अब इस बात पर राजी हो गए हैं कि वे अपर असम और नार्थ बैंक इलाके में अपना कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं करेंगे, बल्कि कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों की मदद करेंगे।

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नेशनल हेरल्ड पर बंटी कांग्रेस

Posted on 15 December 2015 by admin

नेशनल हेरल्ड मुद्दे पर जैसे कांग्रेस ने अपनी खोई जमीन हासिल कर ली है, और सोनिया के रणनीतिकारों से भाजपा की गैर जरूरी उग्रता का फायदा उठाते हुए, इसे कानूनी मुद्दे से एक राजनीतिक मुद्दे में तब्दील कर दिया है। पर ऐसा भी नहीं है कि पार्टी की इस रणनीति को लेकर इसके सभी सांसदों की राय एक जैसी है, नेशनल हेरल्ड मुद्दे को लेकर कांग्रेस के तकरीबन सवा सौ सांसदों (राज्यसभा समाहित) की राय तनिक बदली-बदली सी है और यहां दो अलग ’स्कूल आॅफ थाॅट्स’ हैं, एक और सोनिया-राहुल कोटरी के नेता इस मुद्दे की आक्रामता और धार बनाए रखने के पक्षधर हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्नीस तारीख को उनके पार्टी नेताओं के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी होते हैं तो देशवासियों की सहानुभूति उन्हें हासिल हो सकती है, वहीं बंगाल और पंजाब के कई सांसद ऐसे भी हैं जो इस मामले को ज्यादा तूल दिए जाने के पक्षधर नहीं, उन्हें लगता है कि जनता इसे ’चोरी भी व सीना जोरी भी’ मानती है, पर वे अपनी बात पार्टी फोरम पर रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, उन्हें शायद इस बात की अपेक्षा है कि गांधी परिवार को आइना दिखाने का काम सत्तारूढ़ भाजपा ही करे तो ज्यादा अच्छा।

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…और अंत में

Posted on 15 December 2015 by admin

इस शुक्रवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक दिलचस्प नज़ारा देखने को मिला, अरूण जेटली अपने दोनों जूनियर मंत्रियों यानी वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ के साथ सदन में मौजूद थे। सदन में अपनी उपस्थिति के बावजूद जेटली संबंधित मंत्रालयों से जुड़े प्रश्नों के जवाब स्वयं नहीं देकर अपने जूनियर मंत्रियों से दिलवा रहे थे। एक ’बिग ब्रदर’ के मानिंद उन्हें बीच-बीच में टिप्स भी दे रहे थे, उनकी हौंसला अफजाई कर रहे थे और एक ’मेंटर’ की तरह उन्हें तैयार भी कर रहे थे।

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फड़नवीस से उपजी टीस

Posted on 06 December 2015 by admin

महाराष्ट्र के युवा और उत्साही मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस मुश्किलों में घिरे दिख रहे हैं। उनके मंत्रिमंडल के अधिकांश साथियों को उनसे शिकायतें बहुत है और यह बात सिर्फ शिवसेना कोटे के मंत्रियों की नहीं है, अपितु भाजपा के मंत्रिगण भी अपनी नाराजगी का खटराग पार्टी हाईकमान के पास पहुंचाने में लगे हैं। जहां उनकी सुनवाई होनी मुश्किल है, क्योंकि फड़नवीस हालिया दिनों में दिल्ली के दुलारे के तौर पर अवतरित हुए हैं, जो अपने हर छोटे-बड़े फैसलों के लिए दिल्ली का मुंह ताका करते हैं। शायद यही वजह है कि अब महाराष्ट्र के सियासी दंगल में कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन शनैःशनैः वापिस पाने लगी है। गुजरात के अपने एक मित्र उद्योगपति की उदात्त महत्त्वाकांक्षाओं के घोड़े पर सवार शरद पवार ने भी बदले सियासी परिदृश्य में अपने को मौजू बनाना शुरू कर दिया है। जो कहीं न कहीं फड़नवीस के लिए यह एक खतरे की घंटी है।

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…और अंत में

Posted on 06 December 2015 by admin

पिछले दिनों पार्लियामेंट से बाहर पोर्टिको में भाजपा नेता शत्रुघ्न सिन्हा अपनी कार में जा बैठे और जब उनकी कार चलने प्रस्तर को हुई तो, उन्हें इस बात का इल्म हुआ कि उनकी कार के बाहर एक नामचीन फोटोग्राफर कैमरा लिए खड़ा है। कैमरे को देखते ही शाटगन दन्न से अपनी कार से बाहर निकले और वापिस से कार में बैठने का पोज़ देने लगे, तो वह फोटोग्राफर बेसाख्ता बोल पड़ा-’आज नहीं सर, कल ही आपकी फोटो क्लिक की थी।’

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