Archive | विशेष

जगन के अगन में पीके का नशा उतरा

Posted on 21 May 2018 by admin

सियासी हवाओं के रुख भांपने में सिद्दहस्त प्रशांत किशोर भले ही इन दिनों आंध्र के युवा नेता जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के लिए काम कर रहे हों, पर उनके बाजार भाव में किंचित बड़ी गिरावट दर्ज बताई जाती है। पीके ने बड़े गाजे-बाजे व शोर-शराबे के साथ जगन का काम देखना शुरू किया था। सूत्र बताते हैं कि काम शुरू करते ही विजयवाड़ा और तिरूपति में पीके ने आनन-फानन में अपना ऑफिस भी खोल दिया और अपने लोगों को काम में लगा दिया। सूत्रों की मानें तो अपने काम के पहले चरण में पीके ने आंध्र की विधानसभा सीटों का एक व्यापक सर्वेक्षण करवाया और एक पूरी लिस्ट तैयार कर जगन के पास पहुंचे कि किस सीट से किस व्यक्ति को टिकट देने से चुनाव में पार्टी की संभावनाएं सबसे बेहतर रहेगी। और साथ ही एक लंबा-चौड़ा बिल भी जगन को ठोक दिया। कहते हैं पीके की इस अदा पर जगन चिढ़ गए बोले टिकट के लिए व्यक्ति तय करना आपका काम नहीं, आप सिर्फ जमीनी सर्वे कर चुनावी मुद्दों की पड़ताल करें, रणनीति बनाएं, बाकी काम हमारे पार्टी संगठन पर छोड़ दें। कहते हैं जगन व पीके के बीच काम को लेकर एक साल तक का समझौता हुआ है जिसके लिए पीके ने तीन डिजिट में अपना बजट दिया था, जगन इस बजट को एक डिजिट में समेट देना चाहते हैं, पीके को अपने साथ यह धोखा लग रहा है। सूत्रों का कहना है कि पीके के साथ काम कर लोगों को दो महीने से वेतन नहीं मिला है और जगन हैं कि फंड ही रिलीज नहीं कर रहे हैं, पीके इतना तो समझ ही चुके हैं कि उनके पूर्ववर्ती बॉस मोदी, नीतीश, राहुल, अखिलेश की तरह देने के मामले में जगन इतने दरियादिल नहीं, वे तो बस काम के बदले पैसा देना चाहते हैं।

Comments Off on जगन के अगन में पीके का नशा उतरा

आखिर कर्नाटक में शाह का मास्टर स्ट्रोक क्यों चूक गया?

Posted on 21 May 2018 by admin

कर्नाटक में क्या खूब सियासी ड्रामा घटित हुआ, येदुरप्पा को जाना पड़ा और संयुक्त विपक्षी सुर ने कुछ ऐसा हंगामा मचाया हुआ है कि लगता है कि जैसे दक्षिण में एकबारगी लोकतंत्र की बहाली हो गई हो। सनद रहे कि कर्नाटक के चुनावी नतीजे आने के बाद भाजपाध्यक्ष अमित शाह का फौरी बयान आया था कि यह साऊथ में हमारी ’एंट्री’ है, पर येदुरप्पा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद क्या यह माना जाएगा कि दक्षिण में भगवा पार्टी की डगर किंचित मुश्किल है, क्योंकि भाजपा विधायकों को अपनी सरजमीं पर बिठाने या छुपा कर रखने के लिए दक्षिण का कोई राज्य तैयार नहीं हुआ। सवाल इस पर भी उठ रहे हैं कि येदुरप्पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का कर्नाटक के गवर्नर का फैसला संवैधानिक मान्यताओं पर कितना खरा उतरता है। तो इस संदर्भ में हम अपने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के स्टैंड को उद्दृत कर सकते हैं जब उन्होंने एक दफे ब्रिटिश संवैधानिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा था कि ’सिंगल लार्जेस्ट पार्टी को ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए।’ डॉ. शर्मा संविधान के अच्छे जानकारों में शुमार होते थे उन्होंने कैंब्रिज से एलएलएम किया था और हावर्ड से पीएचडी। पर फिर भी न्यायालय को येदुरप्पा को बहुमत सिद्ध करने के लिए 15 दिन दिया जाना न्यायोचित नहीं लग रहा था। सुप्रीम कोर्ट के जिन तीन जजों जस्टिस सिकरी, जस्टिस बोबडे और जस्टिस भूषण की बेंच ने येदुरप्पा मामले में फैसला सुनाया, वह पहले चीफ जस्टिस के खिलाफ एक याचिका को निरस्त कर चुकी थी, सो बेंच का चुनाव सत्ताधारी दल के नजरिए से भले ही मुफीद लग रहा हो, पर इनका फैसला लोकतंत्र को मजबूती देने वाला था। कानूनी लड़ाई में भी भाजपा कहीं पिछड़ गई लगती है, कांग्रेस के पास कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी,सलमान खुर्शीद, पी.चिदबंरम से लेकर कई काबिल वकीलों की फौज खड़ी थी, वहीं भाजपा के पास ले-देकर मुकुल रोहतगी और तुषार मेहता जैसे चेहरे थे, जो फीस लेकर काम करने वाले वकील हैं, इस हार से भाजपा को कई बड़े सबक लेने की जरूरत लगती है, क्योंकि जब आप सत्ता के शीर्ष पर होते हो तो बड़ी चुनौतियां भी छोटी दिखती हैं, पर जब इन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तो यह आपको आपकी जमीन भी दिखा देती है।

Comments Off on आखिर कर्नाटक में शाह का मास्टर स्ट्रोक क्यों चूक गया?

मुंबई के एक फ्लैट में शाह और कुमारस्वामी की हुई गुपचुप मुलाकात

Posted on 14 May 2018 by admin

सियासी चौसर पर रात दिन कौडि़यों की तरह बेची-खरीदी जा रही हैं आवाजें, हर हर्फ़ का जैसे सौदा हुआ है, हर जु़बान पर जैसे ताले जड़े हों। 2018 आते न आते 18 राज्यों में कमल खिल उठा है और कुमुदिनी मुस्कान लिए भाजपा के दोनों सिरमौर कर्नाटक विजय की उद्घोष में 2019 का चुनावी बिगुल फूंकने को बेकरार हैं, भगवा पार्टी ने अपनी ओर से सरकार बनाने की क़वायद शुरू कर दी है। सूत्रों की माने तो कर्नाटक में मतदान के चंद रोज पहले सुप्रीम कोर्ट के एक वकील जेडीएस नेता कुमारस्वामी को लेकर यूं अचानक मुंबई पहुंचे, सूत्रों के अनुसार वहां कांदिवली स्थित एक अपार्टमेंट में (जिस फ्लैट को अमित शाह का बताया जाता है) भाजपा सिरमौर शाह के साथ जेडीएस नेता की एक सारगर्भित बातचीत हुई। और उसमें तय हुआ कि कर्नाटक में जहां-जहां भाजपा कमजोर है वहां अंदरखाने से जेडीएस को मजबूत किया जाएगा, जैसे ओल्ड मैसूर के इलाके हासन, चमराजनगर आदि। जो मुस्लिम बहुल, दलित बहुल इलाके हैं वहां भी जेडीएस की मदद होगी और चुनावी नतीजों के बाद जेडीएस को भाजपा का यह कर्ज उतारना होगा, अंदर या बाहर से सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन देकर। भगवा चाणक्य ने अपनी रणनीतियों को दुधारी बना दिया है, चित्त या पट दोनों ही सूरत में कमल के प्रस्फुटन की संभावनाओं को सिंचित किया जा चुका है।

Comments Off on मुंबई के एक फ्लैट में शाह और कुमारस्वामी की हुई गुपचुप मुलाकात

गोयल के नक्षे कदम पर गडकरी

Posted on 14 May 2018 by admin

वक्त है जो किसी किताब के मिसरों में कैद नहीं होता, वक्त है जो किसी इतिहास के दरवाजे की सांकल नहीं बनता और ये वक्त ही है जो सीली-सीली हवाओं के संग बह कर भी कभी भीगता नहीं, और मोदी राज में जब से मंत्रियों को यह फरमान सुनाया गया है कि वे अपने संबंधित मंत्रालयों की उपलब्धियों के बखान के लिए पत्रकारों को चारा डालें, उन्हें ज्ञान दें और सूचनाएं भी, जरूरत पड़े तो उन्हें घुमाइए-फिराइए खुश रखिए। तब से किंचित सरकार के बड़े मंत्रियों की भी भंगिमाएं बदल गई है। षुरूआत रेल मंत्री पीयूश गोयल की तरफ से हुई जब पत्रकारों के एक बड़े दल को आनन-फानन में नार्थ ईस्ट की यात्रा पर भेज दिया गया। अब गडकरी कहां पीछे रहने वाले थे, तुरंत-फुरंत एक्शन में आ गए। अपनी नेपाल यात्रा के फौरन बाद पीएम को 19 मई को लद्दाख में जो जिला सुरंग का उद्घाटन करने जाना है, तो नितिन गडकरी को लगा कि यह मौका भी है और दस्तूर भी, पत्रकारों को उपकृत कर देते हैं और उन्हें पीएम के साथ भेज देते हैं। सो, गडकरी की ओर से पीएमओ को कहा गया है कि ये पत्रकारों के जाने का इंतजाम कर दें। फौरन पीएमओ से जवाब आ गया-’ये पीएम के प्रोग्राम में नहीं है, उनके साथ केवल एएनआई और सरकारी मीडिया ही रहेगा।’ यानी पीएम ने अभी भी पत्रकारों से दूरी बना

Comments Off on गोयल के नक्षे कदम पर गडकरी

संघ का सूरज सातवें आसमान पर

Posted on 07 May 2018 by admin

पत्थर मार के जैसे किसी ने नारंगी सूरज के कर दिए हैं टुकड़े-टुकड़े, जमीं का ज़र्रा-ज़र्रा जैसे गेरूआ रंग से नहाया हुआ है। वक्त बदला, दिल्ली का निज़ाम बदला तो सियासी मंसूबे और दस्तूर भी बदल गए, संघ इतना शक्तिशाली कभी न था, जितना आज दिख रहा है, चुनांचे भगवा विचारकों को अब इसके ’डॉक्यूमेंटेशन’ की चिंता बेतरह सताने लगी है। जब तक दिल्ली के निज़ाम पर कांग्रेसी झंडा बुलंद रहा और कांग्रेस जाहिरा तौर पर लेफ्ट सेंटर की राजनीति करती रही, वामपंथी विचारधारा के इतिहासकारों ने मार्क्स को भारतीयता के जुमले में उतार दिया, हमारे इतिहास व साहित्य के पुस्तकों के हरफ लाल रंगी होते चले गए। जब से केंद्र में मोदी युग का अभ्युदय हुआ है, संघ और भाजपा ने लाल विचारों को भगवा रंग में रंगने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, सनद रहे कि उस वक्त जहां केंद्र में अटल बिहारी के नेतृत्व वाली एनडीए की पहली-दूसरी सरकार बनी तो हिंदी के एक जाने-माने पत्रकार दीनानाथ मिश्र की निगरानी में इस हेतु एक कमेटी का गठन किया गया था और जाने-अनजाने मिश्र को भाजपा व संघ से जुड़े ’डॉक्यूमेंटेशन’ का कार्य सौंपा गया था। तब इस प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए खर्च हुए पर इसके वांछित परिणाम सामने नहीं आ सके। मिश्र के नेतृत्व व निगरानी में तब नीतीश भारद्वाज ने भगवा विचारों के प्रतिपादन के लिए एक फिल्म भी बनाई थी जिसका बकायदा दिल्ली में ’प्रिव्यू’ भी रखा गया था, पर भगवा विचारकों को इस फिल्म में कई कमिया नज़र आ रही थीं, भारद्वाज से इसे ’रीशूट’ करने को कहा गया,पर इतनी वैचारिक रफ्फूगिरी के बाद भी बात नहीं बनी और संघ की यह महत्वाकांक्षी फिल्म ठंडे बस्ते के हवाले हो गई। अब नव सांस्कृतिकवाद के नए मिथक गढ़ने के लिए संघ ने बाहुबली फिल्म के चर्चित राइटर केवी विजेंद्र प्रसाद से अपने ऊपर एक मेगा बजट फिल्म बनाने को कहा है, सूत्र बताते हैं कि इस फिल्म का बजट कोई 180 करोड़ रुपयों के आसपास रखा गया है, इसके अलावा बॉलीवुड के कई नामचीन डायरेक्टर मोदी, संघ और भाजपा से प्रेरित होकर बड़ी फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें जे ओमप्रकाश मेहरा मोदी के जीवन पर जो फिल्म बना रहे हैं उसका सबको इंतजार है। कई स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं से कहा गया है कि वे इस आशय की फिल्म बनाए, ऐसी फिल्मों की फंडिंग के लिए कई मंत्रालयों ने अपने दरवाजे खोल रखे हैं। इसके अलावा नए सिरे से इतिहास लेखन के कार्य भी प्रगति पर है। सो, आने वाले दिनों में देश की सूरतेहाल बदले न बदले इसके अंदाजेबयां का अंदाज और मिजाज तो यकीनन बदल जाएगा।

Comments Off on संघ का सूरज सातवें आसमान पर

सिमरत को जावड़ेकर का सहारा

Posted on 07 May 2018 by admin

दिल्ली के दयाल सिंह (सांध्य) कॉलेज का नाम बदलने को लेकर भाजपा के अंदर ही तूफान मचा है, सनद रहे कि संघ विचारक और भाजपा के पूर्व प्रवक्ता अमिताभ सिन्हा ने जो दयाल सिंह कॉलेज की गवर्निंग कमेटी के चैयरमैन भी हैं, उन्होंने इस कॉलेज का नाम बदलकर वंदेमातरम दयाल सिंह कॉलेज कर दिया। जिसका केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने तीव्र विरोध करते हुए कहा कि ’चाहे जो हो जाए इस कॉलेज का नाम नहीं बदला जाएगा।’ भाजपा व संघ के अंदर से ही सवाल उठने लगे हैं कि जावड़ेकर इस बात को लेकर इतनी हाय-तौबा क्यों मचा रहे हैं, जबकि यह कवायद कॉलेज का नाम बदलने की नहीं, बस उसके नाम के पहले वंदेमातरम जोड़ने की है। सूत्र बताते हैं कि जावड़ेकर से ऐसे बयान दिलवाने के पीछे केंद्रीय राज्य मंत्री हरसिमरत कौर बादल का हाथ माना जा रहा है जो यह नहीं चाहतीं कि दयाल सिंह कॉलेज के संस्थापक सरदार दयाल सिंह मजीठिया की विरासत से कोई छेड़छाड़ हो, सनद रहे कि सरदार दयाल सिंह अपने जमाने में एक प्रमुख समाज सुधारकों में शुमार होते थे, उन्होंने न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में कई क्रांतिकारी बदलावों को परवान चढ़ाया, बल्कि कई स्कूल-कॉलेजों की स्थापना की, द् ट्रिब्यून अखबार और पंजाब नेशनल बैंक के भी वे संस्थापक थे। सूत्र बताते हैं कि हरसिमरत दयाल सिंह मामले को हवा देकर अपने भाई विक्रम सिंह मजीठिया की छवि पर आई आंच पर पानी डालना चाहती हैं, चूंकि विक्रम सिंह मजीठिया को दयाल सिंह के परिवार से बताया जाता रहा है। चुनांचे भाई-बहन इस छवि की जोत में रौषन होना चाहते हैं।

Comments Off on सिमरत को जावड़ेकर का सहारा

कुमारस्वामी से क्या गिटपिट बतिया रहे हैं अनंत कुमार

Posted on 30 April 2018 by admin

कर्नाटक में कमल के प्रस्फुटन को लेकर भाजपा में किंचित संशय का आलम है, जहां प्रदेश में कांग्रेस के हौंसले बम-बम हैं, वहीं भाजपा में चीनी कम है। इसे देखते हुए दक्षिण भारत के एक बड़े सियासी नटराज अनंत कुमार फौरन हरकत में आ गए, अनंत एंड कंपनी को लगता है कि इस दफे राज्य में त्रिशंकु विधानसभा हो सकती है। इस कयास के हिंडौलों पर सवार अनंत जेडीएस के कुमारस्वामी को साधने में जुट गए हैं। सूत्रों की माने तो अनंत कुमार और कुमारस्वामी में इस बात को लेकर कई दौर की बैठकें हो चुकी है। पर इन बैठकों का अब तलक कोई लब्बोलुआब नहीं निकल पाया है, चूंकि कुमारस्वामी का मानना है कि कर्नाटक में जो भी अगली सरकार बनेगी वह जेडीएस के समर्थन से बनेगी, सो, अगर उनकी पार्टी किंग मेकर की भूमिका में आती है फिर तो सीएम भी जेडीएस का ही होना चाहिए, यानी खुले तौर पर कुमारस्वामी खुद को सीएम कैंडिडेट मान कर चल रहे हैं। वैसे भी कुमारस्वामी के लिए भाजपा एक सहज च्वॉइस है क्योंकि उनके पिता एचडी देवेगौड़ा और कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्दारमैया में छत्तीस का आंकड़ा है। देवेगौड़ा ने चुनावी सभाओं में अपना यह दर्द बयां करने से संकोच नहीं किया है कि सिद्दारमैया उनकी छवि धूमिल करना चाहते हैं। देवेगौड़ा का कर्नाटक के लोगों से कहना है कि वे देश के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री बने जो कर्नाटक से आते हैं, इस नाते कर्नाटक के तमाम सरकारी दफ्तरों में उनकी तस्वीर लगी थी पर सिद्दारमैया ने मुख्यमंत्री बनते ही तमाम सरकारी दफ्तरों से उनकी तस्वीरें हटवा दीं।

Comments Off on कुमारस्वामी से क्या गिटपिट बतिया रहे हैं अनंत कुमार

देवेगौड़ा के तार कांग्रेस से जुड़े

Posted on 30 April 2018 by admin

पर देवेगौड़ा के एक पुराने मित्र ऐसे भी हैं जो उनके तार सीधे कांग्रेस से जोड़ने में मदद कर रहे हैं और ये नेता हैं शरद यादव, जिनके समर्थकों ने हालिया दिनों एक नई राजनैतिक पार्टी की बुनियाद डाली है। वैसे भी पिछले काफी समय से जेडीएस प्रमुख एचडी देवेगौड़ा, शरद यादव और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख सीताराम येचुरी के संपर्क में है। देवेगौड़ा चाहते हैं कि इस दफे के कर्नाटक चुनाव में ये दोनों लोग और उनकी पार्टियां जेडीएस के समर्थन में अलख जगाएं। पर जब पिछले दिनों शरद यादव कर्नाटक में थे तो उन्होंने कांग्रेस को समर्थन देने की खुली घोषणा कर दी, वहीं इस मुद्दे पर अभी तक येचुरी ने चुप्पी साध रखी है, वे न तो जेडीएस और न ही कांग्रेस को समर्थन देने की बात कह रहे हैं, पर सीपीएम से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि वामपंथी दलों ने अपने जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को अंदरखाने से यह खबर भिजवा दी है कि उन्हें कांग्रेस के समर्थन में काम करना है। कहते हैं शरद यादव ने अपने पुराने मित्र एचडी देवेगौड़ा को इस बारे में आश्वस्त किया है कि जेडीएस और कांग्रेस के बीच मित्रता और चुनाव पश्चात् गठबंधन के द्वार खुले रहेंगे। यानी जेडीएस एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रही है, जहां पिता देवेगौड़ा कांग्रेस से तार भिड़ा रहे हैं तो पुत्र कुमारस्वामी भगवा उम्मीदों का कमल खिला रहे हैं।

Comments Off on देवेगौड़ा के तार कांग्रेस से जुड़े

संघ पर 100 करोड़ की मेगा फिल्म बनाएंगे बाहुबली के राइटर

Posted on 16 April 2018 by admin

आप मौजूदा वक्त को प्रखर हिंदूवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वर्णिम काल मान सकते हैं, संघ की बुलंदियों का सूरज सातवें आसमान पर चमक रहा है, और उसकी चिटकती धूप से जो चेहरा छू जाता है, चेहरे की भंगिमाएँ भगवा हो जाती हैं, पल भर के लिए ही सही। सो, तमाम मोर्चों पर भगवा पताका लहराने के बाद अब सुनने में आया है कि संघ के ऊपर 100 करोड़ की लागत से एक मेगा फिल्म का निर्माण हो रहा है। सूत्रों की मानें तो संघ के कर्णधारों को फिल्म ’बाहुबली’ की भव्यता व बॉक्स ऑफिस पर इसकी अपार सफलता इस कदर मोहित कर गई कि उन्होंने ’बाहुबली’ फिल्म के चर्चित निर्देषक एसएस राजा मौलि के पिता के वी विजेन्द्र प्रसाद से संपर्क साधा है। विजेन्द्र प्रसाद भी एक सुलझे हुए पटकथा लेखक व मंझे निर्देषक हैं। उनकी हालिया चर्चित फिल्मों में ’बाहुबली’ और ’बजरंगी भाईजान’ का नाम लिया जा सकता है। प्रसाद ने 2011 में एक चर्चित तेलुगू फिल्म ’रज्जन्ना’ को निर्देषित किया था जिसे बेस्ट फीचर फिल्म के नंदी अवार्ड से सम्मानित किया गया था। प्रसाद ने अपने फिल्म कैरियर की शुरूआत सन् 1988 में की और अब तक वे 25 से ज्यादा फिल्में लिख चुके हैं और इनमें से अधिकांश फिल्में सुपर-डुपर हिट रही हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रसाद की यह फिल्म संघ के एक विहंगम रूप को सामने लाएगी, इसमें संघ की विचारधारा, आदर्ष, मिषन और उपलब्धियों को फिल्मी ताने-बाने में गुंथा जाएगा। इस फिल्म में डॉ. हेडगेवार, एमएस गोलवलकर, वीर सावरकर, के सुदर्षन और संघ प्रमुख मोहन भागवत के जीवन के प्रेरक किस्सों को एक सूत्र में पिरोया जाएगा और उसे नए कलेवर में पेष किया जाएगा जिससे कि नई पीढ़ी इससे प्रेरणा पा सके। सूत्र बताते हैं कि इस फिल्म के सिलसिले में प्रसाद की नागपुर में कई बैठकें हो चुकी हैं। इस प्रोजेक्ट से अक्षय कुमार व अजय देवगन जैसे अभिनेता भी जुड़ने को तैयार बताए जाते हैं। मूल फिल्म का निर्माण हिंदी में होगा और इसे तेलुगू, कन्नड़ जैसे क्षेत्रीय भाषाओं में डब किया जाएगा। 2019 में आम चुनावों से पहले देष भर में एक साथ इस फिल्म को रिलीज करने की तैयारी है। ज़रा आंखें मल कर धूप के उस पार देखो, देखना एक दिन उतर आएगा यह सुर्ख सूरज तेरे कांधों पर।

Comments Off on संघ पर 100 करोड़ की मेगा फिल्म बनाएंगे बाहुबली के राइटर

संघ के खेमे में आने की होड़

Posted on 16 April 2018 by admin

बंद कोठरी के दरवाजे खुल गए हैं, बोसीदा हवाओं में नई खिड़कियों के गंध घुल गए हैं। संघ और उनके कर्णधारों को भली भांति इस बात का इल्म हो गया है कि अगर देष की युवा आबादी में अपनी पैठ बनानी है तो सांस्कृतिक उपनेषवाद के नए मिथक गढ़ने होंगे, संवाद और विचारों को नए पन का लिबास पहनाना होगा, षायद यही वजह थी कि पिछले कुछ वर्शों में संघ ने सिनेमा, संगीत व रंगमंच के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। पिछले कुछ दिनों में संघ की प्रेरणा पाकर दो ऐसे फिल्म फेस्टिवल आयोजित किए गए, जिसमें शामिल हुई फिल्मों में भारतीय संस्कृति और एक नवराष्ट्रवाद की झलक देखी गई। यह पहल सिनेमाई फलक को नापने की शुरूआत भर थी। सूत्र बताते हैं कि अब देशभर में भगवा विचारों से अभिप्रेरित फिल्मोत्सवों की बाढ़ आने वाली है, और कई बड़े फिल्मकार, एक्टर व फाइनेंसर नदी की इस भगवा उफान में बहने को तैयार हैं। पिछले वर्ष संघ ने प्रयोग के तौर पर एक प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी। इस फिल्म का नाम था-’एक थी रानी ऐसी भी।’ इस फिल्म को गुल बहार सिंह ने निर्देषित किया था और हेमा मालिनी ने इस फिल्म में दिवंगत भाजपा नेत्री विजया राजे सिंधिया का किरदार निभाया था। कहना न होगा कि यह फिल्म राजमाता सिंधिया के ऊपर बनी एक बॉयोपिक थी। इसको लिखने का श्रेय गोवा की मौजूदा गवर्नर मृदुला सिन्हा को जाता है, जिन्होंने राजमाता की जिंदगी के विभिन्न रंगों को समेटते हुए एक उपन्यास लिखा- ‘राजपथ से लोकपथ पर।’ इसी उपन्यास को आधार बनाकर इस फिल्म की पटकथा लिखी गई। भगवा विचारों की आग में तपने के लिए और फिर कुंदन बन कर निखरने के लिए अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, अजय देवगन, कंगना रणौत, प्रिंटी जिंटा, अुर्जन रामपाल जैसे सितारे, सोनू निगम व अभिजीत जैसे सिंगर, सुभाश घई व मधुर भंडारकर जैसे बड़े निर्देषक पलक पांवड़े बिछाए बैठे हैं। इन्होंने समय से समय का रुख भांप लिया है।

Comments Off on संघ के खेमे में आने की होड़

Download
GossipGuru App
Now!!