Posted on 08 August 2017 by admin
इस शुक्रवार को उप राष्ट्रपति पद के ऐन पहले एनडीए के उम्मीदवार वेंकैया नायडू ने अपनी नई दिल्ली के औरंगजेब रोड स्थित आवास पर दिल्ली के दो सौ से ज्यादा नामधन्य पत्रकारों को लंच पर बुलाया। दक्षिण भारतीय भोजन, खासकर आंध्र के लजीज व्यंजनों को देखकर सबके मुंह में पानी आ गया। इस भोज के लिए वेंकैया ने विशेष तौर पर अपने गृह क्षेत्र नेल्लौर से रसोइए बुलाए थे। आंध्र स्टाइल के मांसाहारी व्यंजनों की बहार थी। झींगा मछली से लेकर, चिकन और आंध्र मटनकरी की बहार थी। यहां तक कि एक दर्जन से ज्यादा वेराइटी की मिठाईयों पर भी आंध्र कल्चर की छाप थी। कभी इंडिया टुडे ग्रुप में काम कर चुके स्वप्नदास गुप्ता, (अब राज्यसभा सांसद) जिस मेज पर बैठे थे, उनके पूर्व बॉस अरूण पुरी, अपनी बेटी कोयल पुरी और संपादक राज चेंगप्पा के साथ उनकी ओर बढ़ चले। पर अपने पूर्व बॉस के सम्मान में स्वप्नदास गुप्ता ने खड़े होने की जहमत सिर्फ इसीलिए नहीं उठाई कि अब वक्त बदल चुका है। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 02 August 2017 by admin
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य क्या अगस्त के फेरबदल में मोदी कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं? सियासी जानकार इसकी दो प्रमुख वजह बता रहे हैं, एक तो अगर मौर्य यूपी में उप मुख्यमंत्री बने रहते हैं तो उन्हें लोकसभा की अपनी सदस्यता छोड़नी होगी। फिलवक्त मौर्य इलाहाबाद से लगे फूलपुर से भाजपा के सांसद हैं, भाजपा को खबर मिली है कि राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद बसपा नेत्री मायावती की नजरें भी फूलपुर लोकसभा क्षेत्र पर टिकी हैं, अगर मौर्य यह सीट छोड़ते हैं तो इसके बाद होने वाले उप चुनाव में मायावती भी अपना पर्चा यहां से दाखिल कर सकती हैं, चूंकि फूलपुर में दलित वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है, चुनांचे यहां से किसी हल्के फुल्के भाजपा उम्मीदवार के लिए मायावती को पटकनी देना किंचित आसान नहीं होगा। सो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि मौर्या फूलपुर से सांसद बने रहे, बदले में उन्हें केंद्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया जा सकता है। मौर्या को लखनऊ से बेदखल करने की एक और वजह हो सकती है सूत्र बताते हैं कि इन दिनों सीएम योगी और उनके दरम्यान तलवारें खींची हुई है और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व लखनऊ में ऐसा कोई तमाशा नहीं चाहता है। सो मुमकिन है कि केशव को दिल्ली की ठौर पकड़नी पड़ जाए।
Posted on 02 August 2017 by admin
अपने पूर्ववर्त्ती मुख्यमंत्री अखिलेश से अलहदा यूपी के भगवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मीडिया व पत्रकारों से अपने रिश्तों की परवाह किए बगैर एक नया राग अलापने में जुटे हैं, एक ओर अखिलेश ने जहां मीडिया व पत्रकारों पर खुले हाथों से सरकारी खजाना लुटाया, वहीं योगी ने मीडिया वालों पर किंचित सख्ती बरत रखी है। यूपी की पूर्ववर्ती सरकारों ने थोकभाव में पत्रकारों को सरकारी घर आबंटित कर रखे थे, जिनका नाम मात्र का किराया अदा किया जाता है। योगी सरकार ने राजव्यापी एक व्यापक सर्वे करवाया है जिन पत्रकारों या उनकी पत्नी के नाम अगर यूपी में कोई घर है तो उनसे सरकारी आवास वापिस लिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं जो समाचार पत्र या पत्रिका अपने प्रसार संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे थे, उनके बकायदा ’फिजिकल वेरिफिकेशन’ किए जा रहे हैं, इनमें से सैकड़ों की तादाद में प्रकाशनों को जाली पाया गया है, जो मात्र सरकारी विज्ञापनों की प्राप्ति के लिए ही अपने समाचार पत्र-पत्रिका का प्रकाशन कर रहे थे, वे भी मात्र गिनती की कॉपी। उन सब पर योगी सरकार की गाज गिर रही है। सरकारी अफसरों की मिली भगत से अपना दुकान चमकाने वाले मीडिया वालों की मंशाओं पर ताले जडे़ जा रहे हैं, चहुं ओर त्राहिमाम है, सरकार की पोल खोल का दावा है, पर इन बातों से बेखबर योगी बकायदा अपने मिशन में जुटे हैं।
Posted on 02 August 2017 by admin
जब से बिहार में भाजपा को फिर से नीतीश का साथ मयस्सर हुआ है, कहते हैं उसने अपने पुराने गठबंधन साथियों और उसके मुखियागण यानी रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा पर यह दबाव बनाना शुरू कर दिया है वे अपने-अपने राजनैतिक दलों के विलय भाजपा में कर दें। दरअसल, पार्टी की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि इस वक्त बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से अकेले 22 पर भाजपा का कब्जा है। एक बार अगर नीतीश के साथ उसका गठबंधन होता है तो उसके हिस्से बमुश्किल गिनती की सीटें आएंगी, ऐसे में रामलिवास या कुशवाहा के क्षेत्रीय दलों के लिए सीटें छोड़ पाना उसके लिए आसान नहीं होगा। भाजपा रणनीतिकारों को उम्मीद है आज न कल पासवान व कुशवाहा उसकी बात मान ही जाएंगे, नहीं तो उनके पास और चारा ही क्या है?
Posted on 02 August 2017 by admin
बसपा नेत्री मायावती का सबसे बड़ा डर नसीमुद्दीन को लेकर है, नसीमुद्दीन काफी लंबे वक्त तक मायावती के राजदार रह चुके हैं और इन दिनों केंद्रीय जांच एजेंसियों की नजरें इनायत नसीमुद्दीन पर बनी हुई है। ईडी से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि एक तरह से नसीमुद्दीन सरकारी ’अप्रूवर’ बनने को तैयार हो गए हैं। अगर यह खबर सच है तो वाकई बसपा नेत्री के लिए यह बात चिंता की सबसे बड़ी वजह है, क्योंकि नसीमुद्दीन माया के अच्छे दिनों के साथी हैं, लिहाजा वे बहुत सारी ऐसी बातों के राजदार हो सकते हैं, जिन सूचनाओं की जांच एजेंसियों को तलाश है। मायावती की एक दिक्कत और भी है कि उन्होंने अपने सियासी सफर में पार्टी या पार्टी लाइन से इतर शायद ही कुछ दोस्त बनाए हैं। भाजपा रणनीतिकारों के पास यह एक बड़ी चाबी है इससे वे माया को यूपी में सपा व कांग्रेस के साथ मिलकर एक महागठबंधन बनाने से रोक सकते हैं। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 26 July 2017 by admin
एक ओर जहां राहुल गांधी चीन के मुद्दे पर फंस गए, वहीं उनके चचेरे भाई वरुण गांधी सत्ता पक्ष के सांसद होने के बावजूद 12-13 जुलाई को चीन के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों में अपनी विद्वता का डंका बजा आए। वरुण को चीन के शंघाई और पीकिंग विश्वविद्यालय में वहां के छात्रों के समक्ष बोलना था, वरुण ने अपनी चीन यात्रा के संबंध में न केवल भारत के विदेश मंत्रालय अपितु राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को इसकी जानकारी दी। वे चीन में जहां-जहां गए, उनके साथ चीन में भारत के राजदूत विजय गोखले की उपस्थिति भी देखी गई। वरुण के लेक्चर का विशय था-’एक चमत्कार जिसका नाम भारत है।’ सबसे दिलचस्प तथ्य तो यह है कि इन दोनों विश्वविद्यालयों में जब वरुण से छात्रों ने वन-टू-वन सवाल पूछे तो उन सवालों में कहीं भी भारत-चीन के संबंधों में आई तल्खी नहीं झलक रही थी। छात्रों के ज्यादातर सवाल टैगौर, बुद्ध और आमिर खान को लेकर थे। यानी भारत व चीन के संबंधों में आई तल्खी से ये चीनी नौजवान बेखबर थे या उनके सवाल प्रायोजित मंशा के द्योतक थे।
Posted on 26 July 2017 by admin
नीतीश कुमार के व्यवहार से आहत जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिले। सूत्र बताते हैं कि भावविह्वल हो आए शरद ने अपने मन का दर्द सोनिया के समक्ष व्यक्त किया। शरद का दर्द है कि पार्टी में न अब उनकी कोई सुनवाई है, न पूछ, न ही कोई उनसे सलाह मशविरा ही किया जाता। सोनिया को शरद ने बताया कि जब वे 1974 में अपना पहला चुनाव जीते थे, तब नीतीश दूर-दूर तक कहीं राजनीति में भी नहीं थे। शरद का यह भी कहना था कि समाजवाद केंद्रित राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है, पर आज वक्त बदल गया है और समाजवाद के मायने भी। सूत्र बताते हैं कि शरद के दर्द में शरीक होते हुए सोनिया ने उन्हें प्रस्ताव दिया कि वे कांग्रेस ज्वॉइन कर लें और कांग्रेस उन्हें राज्यसभा में लेकर आएगी। कहते हैं शरद ने इस प्रस्ताव पर तहे दिल से सोनिया का शुक्रिया अदा किया, पर साथ ही अपनी मजबूरी भी गिना दी कि उन्होंने ताउम्र कांग्रेस विरोध की राजनीति की है, सो उम्र के इस पड़ाव में उनके लिए कांग्रेसी हो जाना आसान नहीं होगा। सो, फिलवक्त वह अपनी राजनीति ’एकला चलो’ की तर्ज पर ही करना चाहेंगे, कल ही कल देखी जाएगी।
Posted on 26 July 2017 by admin
कभी राहुल की आंखों के तारे हुआ करते थे जितिन प्रसाद, पर पिछले कुछ वर्षों में वे राहुल के मन से उतर गए हैं। सो, जब से आर पी एन सिंह को झारखंड का प्रभारी बनाया गया है जितिन अपना आवेश रोक नहीं पा रहे हैं, चिंगारियों से खेल रहे हैं, शब्द सुलग रहे हैं, मन भर आया है। सूत्र बताते हैं कि राहुल को जब से यह खबर मिली है कि दो महीने पूर्व जितिन ब्रजेश पाठक के माध्यम से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिल आए हैं, वे भी उतने ही विचलित हैं। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि शाह से जितिन ने अपने लिए राज्यसभा मांगी, पर कहते हैं शाह की ओर से उन्हें आश्वासन प्राप्त हुआ है कि 2019 के चुनाव में उन्हें पार्टी भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़वाएगी। अब यह बात आरजी को कैसे लीक हो गई यह तो अमित शाह या उनका ऑफिस ही बेहतर बता सकता है।
Posted on 26 July 2017 by admin
बसपा नेत्री मायावती के राज्यसभा से इस्तीफे का कनेक्शन क्या रामनाथ कोविंद के देश के नए राष्ट्रपति बनने से है? हो भी सकता है, क्योंकि कोविंद देश के पहले दलित राष्ट्रपति हैं जो उत्तर भारत से ताल्लुकात रखते हैं, इससे पहले जो दलित राष्ट्रपति के आर नारायणन हुए वे दक्षिण भारत से थे। इस बार यूपी में जो भाजपा को बंपर जीत मिली उसमें दलित वोटरों की भी एक निर्णायक भूमिका थी जिन्होंने थोकभाव में भाजपा को वोट दिए। वैसे भी संघ और भाजपा को विरोधी दलों ने सदैव ’एंटी दलित’ करार दिया है सो, मोदी का यह मास्टर स्ट्रोक कई मायनों में अलहदा था, उन्होंने कोविंद को राश्ट्रपति बनवा कर न केवल दलितों के लिए ’थैंक्स गिविंग’ का उपक्रम साधा, बल्कि मायावती की जड़ों में भी मट्ठा डालने का काम किया है। और आने वाले कर्नाटक, गुजरात, हिमाचल विधानसभा चुनावों में इसकी धमक सुनी जा सकती है।
Posted on 26 July 2017 by admin
हर्षवर्द्धन को जब से पर्यावरण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, उनकी पेशानियों पर परेशानियों की लकीरें देखी जा सकती है। दरअसल पर्यावरण मंत्री को ’जिनेटेकली मोडिफाइड क्रॉप्स’ पर जवाब देना है। इसकी तैयारियां अभी तक वे नहीं कर पाए हैं। सो चुप हैं। पिछले दिनों मीडिया के साथ बातचीत में एक पत्रकार ने जैसे ’जीएम’ षब्द बोला हर्षवर्द्धन उखड़ गए, उन्हें बाद में समझ आया कि पत्रकार का सवाल जिनेटेकली मोडिफाइड मास्कीटोज़ (मच्छरों) को लेकर था, तब बड़ी देर बाद वे सहज हो पाए। (एनटीआई-gossipguru.in)