Posted on 28 November 2017 by admin
गुजरात में भाजपा साफ तौर पर दो खेमों में बंटी नज़र आ रही है। एक खेमा है जिसका नेतृत्व स्वयं सीएम विजय रूपाणी करते हैं और इस खेमे को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का आशीर्वाद प्राप्त बताया जाता है, दूसरा खेमा है जिसकी नुमांइदगी उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल करते हैं, पटेल को पीएम मोदी का खास विश्वासपात्र माना जाता है। गुजरात में यह चर्चा भी जोरों पर रही है कि रूपाणी की ओर से जितनी भी योजनाएं स्वीकृत कर उसके बजट आबंटन के लिए नितिन पटेल के पास भेजी गईं, इसमें से ज्यादातर योजनाओं के बजट पटेल ने स्वीकृत नहीं किए। इन दोनों बड़े नेताओं की आपसी खींचातानी पहले से कम न थी कि इसमें राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल का भी मसला जुड़ गया है। सूत्र बताते हैं कि भाजपाध्यक्ष अमित शाह से बेहद नाराज़ चल रही आनंदी बेन पटेल राज्य में अपनी ढपली अपना राग अलाप रही है।
Posted on 28 November 2017 by admin
स्मॉग से घिरी दिल्ली को गैस चैंबर करार देने वाले राज्य के क्रांतिकारी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने सरकारी निवास पर हालिया दिनों में कम से कम 7 एयर फ्यूरिफॉयर लगवाए हैं। मुख्यमंत्री जी के फेफड़ों को ताजी और शुद्ध हवा की दरकार है और दिल्ली की जनता फिलवक्त सिर्फ हवा का रुख भांपने में व्यस्त है। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 20 November 2017 by admin
अहमदाबाद और गांधीनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों का भाजपा को टोटा पड़ गया है। 2008 के नए परिसीमन के बाद अहमदाबाद लोकसभा सीट को दो अलग-अलग सीटों में बांट दिया गया था, अहमदाबाद वेस्ट जो कि एक आरक्षित सीट बना दी गई, फिलवक्त जिसका प्रतिनिधित्व भाजपा के किरीट सोलंकी करते हैं। इस सीट के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती है, जिसमें से असरवा और दलिमदा आरक्षित सीटें है और शेष की 5 सामान्य सीटें। दूसरी लोकसभा सीट अहमदाबाद ईस्ट है जिसकी नुमाइंदगी भाजपा के परेश रावल करते हैं, इसके अतंर्गत भी विधानसभा की 7 सीटें आती है जो सभी सामान्य श्रेणी की हैं। इसके अलावा इससे लगी गांधीनगर लोकसभा सीट है, संसद में जिसका प्रतिनिधित्व लालकृष्ण अडवानी करते हैं, इसके अंतर्गत भी विधानसभा की 7 सामान्य सीटें आती हैं। अब भाजपा की दिक्कत यह है न तो लालकृष्ण अडवानी और न ही परेश रावल अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों की कोई सुध लेते हैं। इससे यहां के स्थानीय वोटरों में खासी नाराज़गी है। सो, भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने फिलवक्त किरीट सोलंकी को यह जिम्मा सौंपा है कि वे अपनी संसदीय सीट अहमदाबाद वेस्ट के अलावा अहमदाबाद ईस्ट और गांधीनगर का भी जिम्मा संभाल लें और इन दोनों संसदीय सीटों के लोगों के दुख तकलीफों का अंदाजा लें और इसके समाधान का उपाय ढूंढे। चुनांचे इन दिनों डॉ. किरीट सोलंकी को ढूंढ़ने वाले ढूंढ नहीं पा रहे हैं।
Posted on 20 November 2017 by admin
भले ही 2019 के चुनाव में अभी वक्त हो पर भाजपा अभी से इलेक्शन मोड में आ गई है। अमित शाह के दफ्तर में धड़ाधड़ यूपी के मौजूदा सांसदों की रिपोर्ट कार्ड पहुंचने लगी है। सूत्र बताते हैं कि सांसदों के परफॉरमेंस को एक सर्वेक्षण एजेंसी की मदद से अलग-अलग पैमानों पर रेटिंग की जा रही है। पार्टी अध्यक्ष से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अगले आम चुनाव में यूपी के आधे से ज्यादा निवर्तमान सांसदों का टिकट कट सकता है। राजनाथ सिंह समेत कई दिग्गजों को अपने संसदीय सीटों को बदलने पर भी मजबूर होना पड़ सकता है। सूत्र बताते हैं कि 65 पार सांसदों को पार्टी कार्यों में लगाया जा सकता है और 50 से ज्यादा सिटिंग सांसदों के टिकट काटे जा सकते हैं और उनकी जगह नए चेहरों को मैदान में उतारा जा सकता है। अमित शाह की यह पुरानी रणनीति है, इस विधि से वे नाराज़ वोटरों को उदासीन कर लेते हैं। गुजरात के लिए जारी 70 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट में भी 15 चेहरे बिल्कुल नए हैं।
Posted on 20 November 2017 by admin
दिल्ली के स्वनामधन्य मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मुफ्त प्रचार पाने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते। अब दिल्ली सरकार ने अपने मुख्यमंत्री की आकांक्षाओं को शिरोधार्य करते हुए अपने अधीन आने वाले तमाम अस्पतालों को यह निर्देश जारी किया है कि इन अस्पतालों के मरीजों को मुफ्त दवाईयां मिलेंगी और यहां के अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर कोई ऐसी दवा नहीं लिखेंगे जो दवा इन अस्पताल के दवाई घरों में उपलब्ध नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अस्पतालों में महज गिनती की दवाईयां उपलब्ध है, यहां के डॉक्टर मरीजों का मर्ज भांप तो रहे हैं, पर वे दवाईयां नहीं लिख पा रहे हैं जो उनकी बीमारियों के लिए मुफीद हैं, सो, डॉक्टर व मरीज दोनों की जान सांसत में हैं।
Posted on 20 November 2017 by admin
पीएमओ में कार्यरत एक दक्षिण भारतीय आईएएस अधिकारी की पुत्री के विवाह के मौके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हुआ था, जिसमें यह दावा हुआ था कि इस मौके पर भारत के माननीय राष्ट्रपति की अवहेलना हुई है और उन्हें प्रधानमंत्री की मौजूदगी में उनका उचित सम्मान नहीं दिया गया। जैसे ही यह वीडियो आप नेता आशुतोष को प्राप्त हुआ उन्होंने एक चुभते हुए कमेंट के साथ इस वीडियो को ट्वीट कर दिया, ऐसा ही कुछ आप नेता सोमनाथ भारती ने भी कर दिया। बाद में इस बारे में राष्ट्रपति भवन से भी स्पष्टीकरण जारी हुआ कि इस तस्वीर में जिन्हें राष्ट्रपति बताया जा रहा है, वे माननीय कोविंद जी नहीं है। इस मामले की पड़ताल आगे बढ़ी तो पता चला कि यह कारस्तानी कांग्रेस के डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट की है। दरअसल उस विवाह समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी प्रधानमंत्री मोदी के साथ शामिल हुए थे जिन्हें कोविंद बता दिया गया। मामले के तूल पकड़ते ही आशुतोष और सोमनाथ दोनों ने ही फौरन अपने ट्वीट डिलीट कर दिए। पर लोगों के जेहन में डर्टी ट्रिक्स की छाप जिंदा रह गई।
Posted on 20 November 2017 by admin
जिन लोगों ने हार्दिक पटेल की सेक्स सीडी कांड की ऑरिजनल सीडी देखी है, उनका दावा है कि मूल सीडी में तीन लड़कों में से एक हार्दिक की शक्ल से मिलता जुलता लड़का था और इस सीडी में जिस लड़की को दिखाया गया है वह भी भारतीय मूल की लड़की न होकर पूर्वी एशियाई चेहरे वाली एक लड़की है। यानी हार्दिक से जुड़े लोगों का यकीनी तौर पर दावा है कि जो सीडी बाद में जारी की गई है उसमें हार्दिक के चेहरे को भी मॉर्फ किया गया है। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 13 November 2017 by admin
कांग्रेस के युवा तुर्कों मनीष तिवारी और दीपेंद्र हुड्डा में छत्तीस का आंकड़ा है, यह तो सबको मालूम है, पर इन दोनों की लड़ाई यूं सार्वजनिक मंचों पर उठा पटक करने लगेगी इसका तो राहुल मंडली को भी इल्म न था। हुआ यूं कि तीन-चार रोज पूर्व दीपेंद्र हुड्डा कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई की एक बैठक को संबोधित करने पहुंचे। इसके बाद इस छात्र संगठन की राष्ट्रीय सचिव सुरभि द्विवेदी का एक ट्वीट आया कि दीपेंद्र हुड्डा जी ने आज हमें एक नया स्लोगन दिया है-’यू एंड आई एनएसयूआई, सर आपका दिल से शुक्रिया, हमें इतना प्रेरित करने के लिए’ अचानक इस वाकये में मनीष तिवारी कूद पड़े उन्होंने बकायदा ट्वीट कर बताया कि ’यू एंड आई…’ का यह स्लोगन पुराना है, सबसे पहले सन् 1985 में इस नारे को जिस सज्जन ने आकर दिया था तब वे जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय एनएसयूआई के प्रेसिडेंट थे और आगे चल कर ये सज्जन एनएसयूआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने। आज ये सज्जन तेलगुदेशम पार्टी में हैं और इनकी पत्नी आज देश की रक्षा मंत्री हैं। जाहिर है तिवारी का इशारा निर्मला सीतारमण के पति पराकाला प्रभाकर की ओर था, जो आज आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू के कम्युनिकेशन एडवाइजर के तौर पर कार्यरत हैं। अब ट्विटर वाली चिडि़या भी कब किसको चोंच मार दे पता नहीं चलता।
Posted on 13 November 2017 by admin
हिमाचल में पहले फेज के चुनाव के बाद भगवा हौंसलों में एक नई चमक देखी जा सकती है, भगवा नजरिए से देखा जाए तो प्रेम कुमार धूमल हिमाचल के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं। पर नड्ढा समर्थकों ने अभी भी हौंसला नहीं खोया है, इनका दबे-छुपे तौर पर मानना है कि धूमल बमुश्किल डेढ़ साल के लिए सीएम बनेंगे, इसके बाद जब वे 75 के हो जाएंगे तो अडवानी जी तरह इन्हें भी मार्गदर्शक मंडल में जगह मिल जाएगी और नड्ढा को सीएम की कुर्सी। पर जिस राज्य में 37 फीसदी ठाकुर मतदाता हों क्या वे बतौर सीएम नड्ढा को स्वीकार करेंगे? इसका जवाब भाजपा के ही एक नेता की ओर से मिला,’जब हम जाटलैंड में (हरियाणा) में एक पंजाबी (खट्टर) बिठा सकते हैं, आदिवासी बहुल्य झारखंड में एक गैर आदिवासी रघुवर दास को बिठा सकते हैं और मराठों के राज्य महाराष्ट्र में एक गैर मराठा (फड़नवीस) को गद्दी दे सकते हैं तो हिमाचल तो बहुत छोटा सा राज्य है। दरअसल, हिमाचल में धूमल को प्रोजेक्ट करने के पीछे भाजपा की मजबूरी थी क्योंकि जिस तरह वीरभद्र सिंह की पुत्री के ब्याह के दिन उनके यहां पुलिस भेजी गई इसको लेकर केंद्रनीत मोदी सरकार से हिमाचल का ठाकुर मतदाता नाराज़ बताया जा रहा था। उनकी इस नाराज़गी को अगर राज्य के नाराज दलित मतदाताओं का साथ मिल जाता तो कमल की उम्मीदें मुरझा सकती थीं, सो आनन-फानन में जेटली के प्रयासों से धूमल का नाम सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया।
Posted on 13 November 2017 by admin
एक वक्त था जब यह माना जा रहा था कि हार्दिक पटेल गुजरात में शिवसेना को सपोर्ट दे सकते हैं। इस बात के कयास कोई 6 माह पूर्व तब से लगाए जा रहे थे जब पूर्वी मुंबई में हार्दिक पटेल और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की एक गुप्त मुलाकात हुई। सूत्र बताते हैं कि यह मुलाकात कई घंटों तक चली। इस बैठक में उद्धव ने हार्दिक से गुजरात में शिवसेना का नेतृत्व करने को कहा। हार्दिक ने इस प्रस्ताव पर सोचने के लिए थोड़ा वक्त मांगा और वे गुजरात लौट गए। तब तक अहमद पटेल राज्यसभा में आधे वोट के चमत्कार के साथ जीत गए और गुजरात का सियासी समीकरण बहुत हद तक बदल गया। हार्दिक को शिवसेना के बजाए कांग्रेस का साथ ज्यादा मुफीद लगने लगा और उनकी कांग्रेसी नेताओं से मुलाकातें शुरू हो गईं। जब इस बात की भनक शिवसेना को लगी तो उसने हार्दिक को खरी खोटी सुना दी। जैसे-जैसे हार्दिक व कांग्रेस में नजदीकियां बढ़ने लगीं भाजपा ने हार्दिक के कोर ग्रुप में सेंध लगानी शुरू कर दी। अब हार्दिक के कई खास लोग कमल के निशान पर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, भाजपा की पूरी रणनीति हार्दिक को अलग-थलग करने की है।