Posted on 22 May 2021 by admin
भाजपा को असम में जीत के बाद भी नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। सर्वानंद सोनोवाल अड़ गए हैं सीएम पद नहीं छोड़ेंगे, हेमंता बिस्वा सरमा ने भी इस बार जिद पकड़ ली है कि उन्हें ही बनना है मुख्यमंत्री, वरना कांग्रेस का दरवाजा अब भी उनके लिए खुला हुआ है। पार्टी हाईकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली आने को कहा है ताकि नेतृत्व का फैसला हो सके, शनिवार को दोनों दिल्ली पहुंचे जहां उनकी मुलाकात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा से हुई, क्या कोई सुलह का फार्मूला निकाला गया है इसका पता तो रविवार को ही चल पाएगा।
Posted on 22 May 2021 by admin
कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में संपन्न हुए चुनावों की समीक्षा के लिए एक वर्चुअल मीटिंग रखी थी। इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन खासा निराशाजनक रहा है असम और केरल में उसे वापसी की उम्मीद थी पर पुदुचेरी से भी हाथ धोना पड़ा और बंगाल में तो पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई। तमिलनाडु में डीएमके के भरोसे रही। 10 तारीख को कांग्रेस कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी की बैठक आहूत है। सूत्र बताते हैं कि 10 तारीख की बैठक काफी हंगामाखेज रहने वाली है। कांग्रेस का असंतुष्ट गुट ’जी-23’ फिर से जाग गया है। सूत्रों की मानें तो इस असंतुष्ट गुट की ओर से सोनिया गांधी को एक सुलह का फार्मूला दिया गया है, इस फार्मूले के मुताबिक प्रियंका गांधी को कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए तथा उन्हें संबल देने के लिए ’जी-23’ के किसी मंझे नेता को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहिए। इससे उबरना सोनिया के पुत्रमोह के समक्ष असली चुनौती है।
Posted on 22 May 2021 by admin
दिनेश त्रिवेदी का तो नाम सुना होगा आपने, गुजराती होकर भी जिन्होंने बंगाल की मां, माटी और मानुष को अपना बना लिया। लेकिन जब भी सियासत ने उन्हें मौका दिया उन्होंने पार्टी भी बदली और अपनी निष्ठा भी। बंगाल चुनाव की पूर्वबेला में उन्होंने यह कहते हुए ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया कि ’मुझे यहां घुटन महसूस हो रही है’ जबकि उनकी राज्यसभा की मियाद अभी साढ़े पांच साल बची हुई थी। अब दीदी उनकी छोड़ी हुई सीट से यशवंत सिन्हा को ऊपरी सदन में भेजना चाहती हैं ताकि वे राज्यसभा में भाजपा की नाक में दम कर सकें। त्रिवेदी को लगा था ’जब बंगाल में डंके की चोट पर भाजपा की सरकार आएगी तो अपनी घुटन को वे आजादी की रूह पहना सकेंगे। त्रिवेदी के एक करीबी बताते हैं कि भाजपा और संघ नेतृत्व ने उनसे वादा किया था कि उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया जाएगा, क्योंकि त्रिवेदी के संघ में भी गहरे रिश्ते हैं, संघ के नंबर दो दत्तात्रेय होसाबोले और कृष्ण गोपाल से उनके आत्मीय रिश्ते बताए जाते हैं। पर अब त्रिवेदी से कहा जा रहा है कि वे किसी राज्य के गवर्नर बन जाएं, क्योंकि भाजपा उन्हें तब ही केंद्र में मंत्री बना सकती हैं जब उन्हें देने के लिए कोई राज्यसभा सीट खाली हो, और भाजपा कोटे की राज्यसभा सीट 22 से पहले खाली नहीं होने वाली। त्रिवेदी की मन की इच्छा है कि उन्हें भाजपा अपना उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाएं, पर यहां चाहने से क्या होता है, ‘होइए वही जो मोदी रचि राखा।’
Posted on 22 May 2021 by admin
बंगाल की बोसीदा भगवा हवाओं से सीली बारूदों की गंध आ रही है। दीदी के शपथ लेने के बाद जब नव निर्वाचित भाजपा विधायकों की पहली बैठक हुई तो उनमें से मुकुल राय नदारद थे। बैठक की नुमांइदगी कर रहे दिलीप घोष ने विधायकों को बताया कि मुकुल दा को अचानक कृष्णानगर नार्थ अपने निर्वाचन क्षेत्र जाना पड़ा है, क्योंकि वहां से हिंसा की खबरें आ रही थीं। जाहिर है नव निर्वाचित भगवा विधायक घोष की बातों से इत्तफाक नहीं रखते थे, क्योंकि कुछ दिन पहले ही मुकुल राय को दीदी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ घुल-मिल कर हंसते-बोलते देखा गया था। बंगाल चुनावों में भाजपा शीर्ष ने जिस तरह शुभेंदु अधिकारी को ज्यादा महत्व दिया उससे मुकुल नाराज़ बताए जाते हैं। यहां तक कि इन चुनावों में भी भाजपा की ओर से उन्हें कोई महती जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी, जबकि सन् 18 के पंचायत चुनावों में और 19 के लोकसभा चुनाव में भगवा पार्टी ने उन्हें चुनाव समिति में अहम जिम्मेदारी दी थी। कहते हैं एक बार जब अमित शाह कोलकाता में थे तो मुकुल ने उनसे कहा था कि ’बंगाल चुनाव सांप्रदायिक आधार के बंटवारे से नहीं जीता जा सकता है’ तो कथित तौर पर शाह ने उन्हें झिड़क दिया था। मुकुल तो इस बार का विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ना चाहते थे, पर शाह के आदेश की उन्हें तामील करनी पड़ी। मुकुल जब तक तृणमूल कांग्रेस में थे वहां वो ‘मास्टर स्ट्रेजिस्ट’ थे, ममता ने भी अपनी चुनावी रैलियों में कभी मुकुल पर सीधा निशाना नहीं साधा, क्या यह इस बात के संकेत है कि मुकुल कभी भी अपने समर्थक विधायकों के साथ अपने पुराने घर लौट सकते हैं?
Posted on 22 May 2021 by admin
जब से कोरोना के मामले में देश की अदालतों ने कड़े फैसले लेने शुरू किए हैं। तब से केंद्र सरकार की भी तंद्रा टूटी है। दिल्ली में ऑक्सीजन को लेकर मचे हाहाकार के बीच जब दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई तो केजरीवाल ने कोर्ट को बताया कि ’उन्हें यानी दिल्ली को 700 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है पर केंद्र ने उनके लिए महज़ 378 मैट्रिक टन का कोटा निर्धारित कर रखा है।’ तब केंद्र की ओर से जवाब आता है कि ’इन्हें जितना आबंटित है उसका पूरा भी ये इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, इनकी डिस्ट्रीब्यूशन ही नहीं हो पा रही है,’ इस पर हाई कोर्ट ने केंद्र को फटकारते हुए कहा कि ’आप पहले ऑक्सीजन उपलब्ध कराएं, डिस्ट्रीब्यूशन का काम दिल्ली सरकार का है।’ काश अदालतें और कुछ पहले हरकत में आ जाती तो सरकारों का निकम्मापन कुछ हद तक तो कम होता।
Posted on 22 May 2021 by admin
आत्ममुग्घता जब अपनी हदें लांघ लें तो वह आत्मश्लाघा की ओर प्रवृत्त होने लगती है। जब विदेशी मीडिया में हमारे नियंताओं की किरकिरी होने लगी तो फिर विदेश मंत्री एस जयशंकर की क्लास लग गई, उनसे कहा गया कि भारत में कोरोना की दूसरी वेव की रिपोर्टिंग के वन साइडेड नैरेटिव को बदलने की जुगत भिड़ाई जाए। इसके बाद तुरंत हरकत में आते हुए हमारे विदेश मंत्री ने दुनिया भर में तैनात भारतीय राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ गुरूवार को आनन-फानन में एक वर्चुअल मीटिंग की और उनसे कहा गया कि वे अपने-अपने देशों के मीडिया को ’सच्चाई’ से रूबरू कराएं। नहीं तो दुनिया भर के अखबार, टीवी चैनल व डिजिटल मीडिया में कोरोना की दूसरी वेव की चेतावनियों के संकेत को मोदी सरकार द्वारा हल्के में लेने की बात कही जा रही थी। चुनावी रैलियों और कुंभ मेले को संक्रमण के ‘सुपर स्प्रेडर’ के तौर पर बताया जा रहा है। हालांकि इस मीटिंग का आधिकारिक एजेंडा कुछ और बताया गया और कहा गया कि जिन देशों ने मदद देने का आग्रह किया है उनके साथ कैसे समन्वय बिठाया जाए।
Posted on 22 May 2021 by admin
झारखंड की राजधानी रांची में पैदा हुए डॉ. प्रभात झा दुनिया के एक नामचीन महामारी विशेषज्ञ हैं, जो फिलहाल टोरेंटो के ‘सेंट माइकल अस्पताल’ में ‘सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च’ के निदेशक हैं। इनका कहना है कि ’भारत में अभी कोरोना का पीक आने में और वक्त लगेगा क्योंकि यहां जनसंख्या का घनत्व बहुत ज्यादा है।’ डॉ. झा का कहना है कि ’भारत को ऐसे वक्त सियासत की नहीं विज्ञान की सुननी चाहिए, क्योंकि विज्ञान के बिना इस महामारी से निकलना आसान नहीं होगा।’ वहीं ‘ब्राउन यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक हेल्थ’ के डीन डॉ. आशीष झा कहते हैं कि ’भारत में व्यापक जीनोमिक अनुक्रमण की कमी के कारण डेटा सीमित हैं, सो म्यूटेंट वेरिएंट मौजूदा संकट को और बढ़ा सकते हैं। ये महामारी विशेषज्ञ भारत की लचर स्वास्थ्य प्रणाली की ओर भी इशारा करते हैं,’ इनका कहना है कि भारत के कुल स्वास्थ्य देखभाल का खर्च सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 3.5 फीसदी है, वहीं ब्राजील जैसे देश इस पर 9.5 प्रतिशत तो दक्षिण अफ्रीका जैसे देश भी 8.3 प्रतिशत खर्च कर रहे हैं। भारत में मात्र एक-तिहाई स्वास्थ्य देखभाल का खर्च सरकार की ओर से आता है, बाकी नागरिकों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है, यानी भारत में फंडा साफ है कि जिनकी जेब में पैसा है, वे स्वास्थ्य सुविधाएं अपनी मर्जी से खरीद सकते हैं, ’आत्मनिर्भर’ जुमला को धार देने के लिए भारत ने ‘फाइजर-स्पुतनिक-मॉडर्ना’ जैसे वैक्सीन को मंजूरी देने में काफी देर लगाई, जब भारत अपने स्वदेशी वैक्सीन को 80 देषों में निर्यात कर रहा था, तब देश में प्रतिदिन केवल 0.2 प्रतिशत आबादी का ही टीकाकरण हो पा रहा था, हम अपने को विश्वगुरू बनने की होड़ में दिखा रहे हैं और कोरोना हमें आइना दिखा रहा है।
Posted on 21 April 2021 by admin
लखनऊ में भी कोरोना महामारी भयंकर रूप दिखा रही है, इत्तफाक से यह केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संसदीय क्षेत्र भी है, अपने संसदीय क्षेत्र को लेकर राजनाथ वैसे भी कहीं ज्यादा संवदेनषील हैं। जब उनके पास सुबह से शाम तक लखनऊ से कोविड मरीजों के रिश्तेदार व शुभचिंतकों के फोन आने लगे कि गंभीर मरीजों को भी अस्पताल में बेड नहीं मिल रहे हैं तो राजनाथ के ऑफिस ने लखनऊ के तमाम अस्पतालों को फोन खटखटाने शुरू कर दिए। पर दिक्कत यह थी कि अस्पतालों के बेड पर भी वीआईपी लोगों ने पहले से कब्जा जमा रखा था। खास कर वैसे राज्य में जहां के मुख्यमंत्री, डीजीपी से लेकर एडिशनल चीफ सेक्रेटरी तक संक्रमण की जद में हों वहां फरियाद की भी जाए तो किससे? ऐसे में राजनाथ के एक नजदीकी व्यक्ति ने सलाह दी कि चूंकि डीआरडीओ उनके मंत्रालय के अधीनस्थ है सो वे इसके उच्च अधिकारियों से बात कर आनन-फानन में वहां एक अस्थायी कोविड अस्पताल बनवा सकते हैं, और ऐसे यह 1000 बेड के कोविड अस्पताल की अवधारणा को मूर्त रूप मिल पाया।
Posted on 21 April 2021 by admin
कांग्रेसी नेता राहुल गांधी को ‘पप्पू’ करार देने में भाजपा और मोदी सरकार कभी पीछे नहीं रहती। पर राहुल जो मांग रखते हैं घुमा-फिरा कर सरकार उसे मान लेती है, कोरोना की रफ्तार बेतहाशा बढ़ी तो राहुल ने कहा-’लॉकडाउन लगाओ।’ ये लग गया, राहुल ने कहा-’भारत आने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पाबंदी लगे,’ पाबंदी लग गई। जब देशभर में कोरोना वैक्सीन की किल्लत को देखते हुए राहुल गांधी ने सरकार से मांग की थी कि ’विदेशी वैक्सीन को अप्रूवल देने की प्रक्रिया को तेज किया जाए’ तो इस पर 9 अप्रैल को एक ट्वीट कर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल पर तंज कसा-’बतौर पार्ट टाइम राजनेता असफल रहने के बाद अब क्या राहुल गांधी फुल टाइम लॉबिस्ट बनना चाहते हैं?’ लेकिन विडंबना देखिए कि पिछले बुधवार को ही मोदी सरकार ने एक अहम फैसला लिया कि विदेश में बनी कई कोविड वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल दिया जाएगा। इसके बाद प्रसाद लगातार सोशल मीडिया पर ट्रोल होते रहे।
Posted on 21 April 2021 by admin
कोरोना महामारी जिस रफ्तार से इतना विकराल रूप अख्तियार कर रही है, उसने बहुराष्ट्रीय दवा निर्माता कंपनियों को पंख पसार कर उड़ने के लिए एक बड़ा आसमां मुहैया करा दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले 2024 तक कोरोना वैक्सीन का बाजार 25 बिलियन यूएस डॉलर से भी बड़ा हो जाएगा, यानी जितना बड़ा डर, उतना ही बड़ा बाजार। 10 बड़ी फार्मा कंपनियों ने इस बाजार पर अभी से अपना अधिपत्य जमा लिया है और वे वैक्सीन के ‘मोनो वेलेंट’ (एकल) या ‘मल्टी वेलेंट कैटेगरी’ (एक से ज्यादा वेरियंट के लिए) को बाजार में लेकर आने लगी है। इन 10 बड़ी कंपनियों में फाईजर, मोर्डना, जॉनसन एंड जॉनसन, एस्ट्राजनिका और डेची सेक्यो जैसी कंपनियां शामिल हैं। फाईजर ने तो एक नया शिगूफा उछाला है कि कोरोना वैक्सीन की डोज लोगों को हर साल लेनी पड़ सकती है। वहीं अन्य कंपनियां इसके ‘कॉकटेल’ और ‘बूस्टर’ डोज जैसी अवधारणाओं को मूर्त रूप देने में जुटी है, पर डब्ल्यूएचओ ने इन आइडियाज को अभी हरी झंडी नहीं दिखाई है। अब तो लगे हाथ रूसी और चीनी कंपनियां भी मैदान में कूद गई है। चीनी दवा कंपनियों के वैक्सीन की प्रभावोत्पादकता तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानकों पर
भी खरा नहीं उतर पा रही हैं फिर भी इन्हें बाजार कब्जाने की जल्दबाजी है। चीन की दो बड़ी कंपनियां सीनो फॉर्म और सीनो वैक ने कोरोना वैक्सीन का निर्माण किया है। इनके द्वारा तैयार किए गए वैक्सीन डब्ल्यूएचओ के 50 फीसदी प्रभावोत्पादकता मानक पर भी खरे नहीं उतर पा रहे हैं। सीनो फॉर्म ने तो अब तलक अपना डाटा ही नहीं बताया है और अपने चार कोरोना वैक्सीन इंजेक्शन के बाद अपने पांचवें इंजेक्शन को भी बाजार में लाने की तैयारी कर रही है, ये चीनी कंपनियां अपने 3 बिलियन डोज का उत्पादन तो इसी वर्ष कर रही है। यानी कोरोना का डर जितना बड़ा होगा ये कंपनियां उसी रफ्तार में फलेंगी-फूलेंगी।