Posted on 28 July 2021 by admin
पिछले दिनों सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव लखनऊ में मुसलमानों की एक बड़ी मजलिस में शिरकत करने पहुंचे तो आयोजकों ने उनसे हाथ जोड़ कर कहा कि ऐसे आयोजनों में उन्हें आने की जरूरत नहीं, क्योंकि मुसलमानों के एकमुश्त वोट इस बार सपा को ही जाएंगे। इसके बजाए अपना समय वे अन्य वोटरों में लगाएं। सो अब अखिलेश को यकीन हो चला है कि प्रदेश के तकरीबन 21 फीसदी मुसलमान और 9-10 फीसदी यादवों के वोट सपा को एकमुश्त मिल सकते हैं। चाचा शिवपाल को साथ लड़ने के लिए अखिलेश ने लगभग मना लिया है, छोटे चौधरी जयंत भी उनके साथ हैं, इसके अलावा उनकी बातचीत आम आदमी पार्टी से भी चल रही है, आप 25 सीटें मांग रही है, पर अखिलेश पांच सीटों पर अड़े हैं। कुर्मी वोटों में तोड़ के लिए वे अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल और बहन पल्लवी पटेल से भी बात कर रहे हैं। अखिलेश लगातार यूपी के छोटे दलों के संपर्क में हैं, वे जानते हैं कि 1 और 1 मिल कर ही 11 बनते हैं।
Posted on 28 July 2021 by admin
पिछले कुछ महीने भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ तल्खी लेकर आया है, खास कर पूर्व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्विटर, फेसबुक जैसे संस्थानों पर जब खुला धावा बोला, और कई अमेरिकी अखबारों में कोरोना काल में भारत के बारे में छपी रिपोर्ट्स को चुनौती दी इससे अमेरिकी शीर्ष के पेशानियों पर बल ला दिए थे। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि भारत स्थित अमेरिकी राजदूत ने हमारे विदेश मंत्री से मिल कर उन्हें प्रधानमंत्री को संबोधित वाशिंगटन का एक तल्ख पत्र भी सौंपा था। खैर, भारत ने अपनी ओर से मैत्री की नई शुरूआत की, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और पीएम मोदी की अब तक दो बार फोन पर बात हुई। पीएम मोदी ने भारतीय मूल की अमेरिकन उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को बेंगलुरू में 17 से 19 नवंबर 21 में आयोजित होने वाले ’टेक सम्मिट’ के उद्घाटन के लिए भारत आमंत्रित किया है। अगर कोरोना के हालात सुधरते रहे तो पीएम मोदी नवंबर-दिसंबर में अमेरिका जा सकते हैं, जहां उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन के साथ अहम मुलाकात हो सकती है। भारतीय विदेश मंत्रालय कोस कर रहा है कि मोदी अपनी उस अमेरिका यात्रा में जब वाशगटन जाएं तो ’यूनाइटेड स्ट्ेटस कांग्रेस’ यानी वहां के दोनों सदनों को भी संबोधित कर सकें, पर कहते हैं इस बारे में अमेरिका की ओर से अभी कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं, पर इस नए भारत को भी संकेतों की प्रतीकात्मकता बदलने में महारथ हासिल है। इस कड़ी में अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी बिल्केन 27 जुलाई को अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं, जहां उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी होगी और अपनी इस यात्रा में वे 28 जुलाई को पीएम मोदी से भी मिलेंगे।
Posted on 28 July 2021 by admin
उत्तराखंड कांग्रेस को प्रीतम सिंह की जगह एक नया अध्यक्ष मिलना है, पर नए अध्यक्ष की घोषणा पंजाब संकट के वजह से बार-बार टल रही है, क्योंकि फिलवक्त हरीश रावत पंजाब के कांग्रेस प्रभारी हैं। नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम निकल कर सामने आ रहे हैं, पर फिलवक्त पौढ़ी से ताल्लुक रखने वाले दो बार विधायक रह चुके गणेश गोंदियाल का नाम रेस में आगे बताया जा रहा है। वहीं मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह जो जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखते हैं अपनी ओर से नारायण दत्त तिवारी के पूर्व सहयोगी रहे आर्येंद्र शर्मा का नाम आगे बढ़ा रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान हरीश रावत को अपना सीएम फेस बना सकता है, प्रीतम सिंह को भी नई सरकार में महती जिम्मेदारी मिल सकती है।
Posted on 28 July 2021 by admin
जिस मोदी और भाजपा के लिए चिराग पासवान ने अपना सब कुछ यानी पूरी राजनीति दांव पर लगा दी वहां से छले जाने पर वे खुद को बेहद ठगा महसूस कर रहे हैं। उनके पास तेजस्वी का खुला प्रस्ताव है कि वे राजद में आ जाएं और वे चाहे तो अपनी पार्टी को भी राजद में मिला दें। एक तो चिराग अभी भी अधर में है, उन्हें नहीं मालूम कि उनके पिता द्वारा बनाई गई ‘लोक जनशक्ति पार्टी’ के बारे में चुनाव आयोग क्या फैसला लेगा, पर उन्हें लगता है कि चूंकि पार्टी संगठन मजबूती से उनके पीछे खड़ा है, सो पार्टी तो वापिस उन्हीं के पास आएगी। चिराग जानते हैं कि तेजस्वी के साथ जाने से उन्हें सियासी रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि कालांतर में उनके पिता ने भी जब-जब लालू का थामन थामा था, लोक जनशक्ति का चुनावी प्रदर्शन अपने निचले स्तर पर पहुंच गया था। क्योंकि राज्य में यादव और पासवान दोनों ही मार्शल कौमें हैं जिनकी आपस में कभी बनती नहीं। चिराग अब भी मोदी की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं कि वही उनको इस सियासी झंझावत से उबार सकते हैं। चिराग जानते हैं कि उनकी पार्टी के चार सांसद यानी पशुपति पारस, वीणा देवी, चंदन सिंह और महबूब अली कैसर कभी भी जदयू ज्वॉइन कर सकते हैं। पर उनके चचेरे भाई प्रिंस पासवान लौट के उनके पास आ सकते हैं। फिलहाल तो चिराग का 12 जनपथ का उनका बंगला भी अधर में लटका है। सुनने में आ रहा था कि सरकार ने यह बंगला उनके चाचा पशुपति पारस के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद उन्हें आबंटित कर दिया था, पर लोक-लाज के भय से पशुपति पारस ने वह बंगला लेने से मना कर दिया। अब जदयू कोटे से केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह इस बंगले के लिए कोशिश कर रहे हैं ताकि नीतीश कुमार के अहं पर मरहम लगाया जा सके, गेंद फिलहाल मोदी के पाले में है कि क्या वे अब भी चिराग को अपना हनुमान मानते हैं?
Posted on 09 July 2021 by admin
राहुल के पुराने संगी-साथियों ने जब से बेवफाई के तेवर दिखाने शुरू किए हैं और जिस तरह हालिया दिनों में जन्मजात कांग्रेसी जितिन प्रसाद भी भगवा रंग में रंग गए तो सचिन पायलट की बैचेनियां फिर से करवटें लेने लगीं। तो इस बार स्वयं राहुल गांधी ने सचिन से दो टूक बात की है, राहुल ने इस युवा नेता से कहा कि ’वे बस 3-4 महीनों तक का इंतजार करें, जब राहुल कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभाल लेंगे और उनकी अध्यक्षता वाली जो नई टीम बनेगी उसमें वे अशोक गहलोत को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना कर उन्हें पार्टी संगठन का कार्य भार सौंप देंगे।’ कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जब इस बार सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा का चुनाव जीता था, राहुल तब ही सचिन को राजस्थान का सीएम बनाना चाहते थे, पर तब अहमद पटेल ने सलाह दी थी कि ’राजस्थान की कमान किसी अनुभवी हाथों में ही सौंपी जानी चाहिए।’ ये भी सुना जा रहा है कि अगर राहुल इस दफे पार्टी अध्यक्ष बनते हैं तो वे अपने खास वफादार केसी वेणुगोपाल को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं, जो पार्टी के दैनंदिन कार्यकलापों को चलाने के लिए अधिकृत रहेंगे।
Posted on 09 July 2021 by admin
लगता है बिहार कांग्रेस अपना पुराना वजूद खो चुकी है, यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों से वह कभी लालू प्रसाद तो कभी नीतीश कुमार के रहमोकरम पर चलने को अभिशप्त है। कांग्रेस ने हालिया दिनों में भक्तचरण दास को बिहार का प्रभारी बनाया है। पर कांग्रेस के इस प्रभारी ने जब से बिहार का कार्यभार संभाला है, ये नीतीश कुमार के सबसे बड़े भक्त के तौर पर अवतरित हो गए हैं। भक्तचरण ने अपना सह प्रभारी जुम्मा-जुम्मा कांग्रेस में शामिल हुए एक दलित नेता ब्रजलाल खाबरी को बना दिया है। भक्तचरण दास स्वयं 2016 में बसपा छोड़ कर कांग्रेस में आए हैं। पार्टी हाईकमान ने दास से नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए कुछ नाम मांगे थे, संयोग देखिए दास साहब ने जो तीन नाम दिल्ली भेजे हैं, ये तीनों ही दलितों की एक खास जाति से ताल्लुक रखते हैं। इन्होंने पहला नाम उमेश राम का भेजा है, दूसरा नाम प्रतिमा कुमारी का है जो हाजीपुर से फस्र्ट टर्म एलएलए हैं, इन्होंने निर्दलीय के तौर पर चुनाव जीता था और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गई थीं, तीसरा नाम राजेश राम का है जो पूर्व मंत्री दिलकेश्वर राम के बेटे हैं और कुटुंबा से चुनाव जीते हैं। पर वहीं राहुल गांधी हैं जो किसी फाईटर नेता को बिहार की कमान सौंपने के इच्छुक बताए जाते हैं। राहुल किसी मुस्लिम फेस की तलाश में हैं, फिलहाल उनकी खोज तारिक अनवर पर आकर ठहर गई है। नाम तो रंजीत रंजन, श्याम सुंदर सिंह धीरज, कोकब कादरी के भी चल रहे हैं पर फिलवक्त दावा तारिक अनवर का सबसे मजबूत नज़र आ रहा है।
Posted on 09 July 2021 by admin
भले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को सियासी ककहरा कंठस्थ याद हो, पर उनके डिप्टी मनीष सिसौदिया बतौर दिल्ली के शिक्षा मंत्री प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को एक नया चेहरा-मोहरा देना चाहते हैं। मनीष चाहते हैं कि दिल्ली के शिक्षार्थी इस रट्टापंथी सिस्टम से बाहर निकल, नई शिक्षा के एक नए मॉडल को अपना सकें। इसके लिए उन्होंने सीबीएसई की तर्ज पर डीबीएसई यानी ’दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन’ का गठन किया है। पहले वर्ष में दिल्ली सरकार 20-25 सरकारी स्कूलों को इस नए बोर्ड से जोड़ने जा रही है। इसके बाद धीरे-धीरे दिल्ली के तमाम सरकारी स्कूल इसी बोर्ड के तहत आ जाएंगे। रही बात दिल्ली के प्राईवेट स्कूलों की तो यह निर्णय उन्हें लेना है कि वे अपने पुराने बोर्ड से ही जुड़े रहते हैं या शिक्षा नीति में एक बड़े सुधार के इस नव आह्वान में शामिल होते हैं। इसके अलावा दिल्ली सरकार ’स्कूल ऑफ स्पेश्लाइज़्ड एक्सीलेंस’ की भी नींव रखने जा रही है। यह कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए है जो अपने लिए किसी खास फील्ड को चुनना चाहते हैं। यानी अगर किसी छात्र-छात्रा में कोई खास विलक्षण अभिरूचि है तो ये नवस्थापित स्कूल उनके मनमाफिक विषय की दक्षता को निखारेंगे। यानी ऐसे स्कूल किसी विद्यार्थी को शुरूआत से ही कौशल विकास में दक्ष बनाएंगे। विद्यार्थी अपने लिए विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, ह्यूमेनिटीज यानी मानविकी, परफॉरर्मिंग और विजुअल आटर्स (प्रदर्शन व दृश्य कला) में से कोई भी अपना पसंदीदा विषय चुन सकते हैं। सिसौदिया की योजना पूरे दिल्ली में ऐसे 100 स्कूल स्थापित करने की है, इसमें से 20-30 स्कूल 2021-22 में तैयार किए जा सकते हैं। इसके अलावा मनीष सिसौदिया दिल्ली मॉडल वर्चुअल स्कूल (डीएमवीएस) भी खोलना चाहते हैं, ये वैसे स्कूल होंगे जिनकी पहचान इमारतें नहीं होंगी, बल्कि इसमें अत्याधुनिक डिजिटल साधनों का इस्तेमाल कर ऑनलाइन शिक्षा की अभिनववादी बुनियाद रखी जा सकेगी। सिसौदिया की ये नई पाठशालाएं वाकई एक नए दिल्ली की उम्मीद जगाती हैं।
Posted on 09 July 2021 by admin
’लफ्जों की बतकहियों से कब कोई किरदार बनता है
लाख तोड़ दो आइने चेहरा उसमें वही जिंदा रहता है’
सियासी मैनेजमेंट की इससे क्या नायाब मिसाल मिल सकती है, कभी पानी पी-पी कर भाजपा और पीएम को कोसने वाले घाटी के नेता इस गुरूवार को जब पीएम मोदी से मिल कर बाहर निकले तो उनके चेहरों से रौनके नूर टपक रहा था। अब ये ‘गुपकार गैंग’ भी ‘गुपकार एलायंस’ हो चुका था, कभी पीएम पर तोहमत लगाते फूट-फूट कर रोए थे फारूख अब्दुल्लाह पर भंगिमाएं तो इस बार उनकी भी बदली हुई थीं। कांग्रेस के ’जी-23’ के नेता गुलाम नबी आजाद ने पीएम के समक्ष अपनी 5 सूत्री मांग रखी थी, जिसमें से एक मांग कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की भी थी, वाह आजाद साहब आप तो वाकई नियति के गुलाम निकले कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर तब आपने कोई कदम क्यों नहीं उठाया जब आप 2007-2008 तक जम्मू-कश्मीरी के सीएम थे। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि गुलाम नबी की भाजपा के साथ डील फाइनल है कि वे चुनाव के बाद अपने जीते हुए विधायकों के साथ भगवा रंग में रंग जाएंगे, अभी गए तो मुस्लिम वोटों का टोटा पड़ सकता है। वैसे भी घाटी में भाजपा को अपने लिए नए साथी की तलाश है, क्योंकि पीडीपी की महबूबा मुफ्ती से भगवा पार्टी का साथ जून 2018 में ही छूट गया था। फिलहाल जम्मू-कश्मीर में सीटों के परिसीमन का कार्य प्रगति पर है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कश्मीर की 46, जम्मू की 37, लद्दाख की 4 सीटें हैं और 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर की हैं। ‘जम्मू- कश्मीर रिआर्गेनाइजेशन एक्ट 2019’ में यहां की 7 विधानसभा सीटें बढ़ा दी गई हैं यानी जम्मू-कश्मीर की 83 सीटें बढ़ कर अब 90 हो गई हैं। इतना तो तय है कि नए परिसीमन में आबादी के प्रतिनिधित्व के हिसाब से जम्मू की सीटें बढ़ेंगी, जो यकीनन भाजपा के असर वाला क्षेत्र है। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में इस परिसीमन आयोग का गठन हुआ है, इस आयोग का कार्यकाल इस वर्ष 5 मार्च तक ही था, पर कोविड की वजह से आयोग को एक साल का एक्सटेंशन दे दिया गया है। पहले कश्मीर की राजनैतिक पार्टियों ने इस आयोग का बॉयकॉट कर रखा था, और वे इसे असंवैधानिक बता रहे थे, पर लगता है पीएम से इस ताजा मीटिंग के बाद ये दल भी परिसीमन पर मान गए हैं। एक पते की बात और कि परिसीमन आयोग के फैसले को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, जरा समझिए इस बात के मर्म कितने गहरे हैं।
Posted on 09 July 2021 by admin
पिछले दिनों चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर राकांपा प्रमुख शरद पवार से मिले थे, पर सूत्र बताते हैं कि यह मुलाकात पीके के लिए अपनी कंपनी का प्रोफाइल बढ़ाने के लिए नहीं थी, बल्कि पीके ममता बनर्जी का एक खास संदेशा लेकर पवार से मिले थे। दीदी का संदेश था कि पवार की स्वीकार्यता तमाम गैर भाजपाई दलों में इस कदर है कि ’वे चाहे तो यूपीए का पुनर्गठन कर स्वयं उसका संयोजक बन सकते हैं।’ दीदी को लगता है कि पवार के नेतृत्व में यूपीए के कई पुराने घटक दल अपनी घर वापसी कर सकते हैं। दीदी सियासी चतुराई दिखाते हुए विपक्षी एका की ड्राईविंग सीट से सोनिया और राहुल को बाहर रखना चाहती है। दीदी ने यह भी साफ कर दिया है कि ’हालिया महीनों में जिन राज्यों में चुनाव होंगे वहां वह भाजपा के खिलाफ अलख जगाने जरूर पहुंचेंगी।’ दीदी उन चुनावी राज्यों में प्रेस कांफ्रेंस कर सकती है या फिर चुनावी सभाएं। दीदी ने अपने दो खास भरोसेमंदों यशवंत सिन्हा और डेरेक ओ ब्रायन को यह जिम्मा सौंपा है कि वे तमाम छोटे दलों से बात कर उन्हें यूपीए की छतरी के नीचे लाने का काम करें।
Posted on 09 July 2021 by admin
महत्वाकांक्षाओं के नए हिंडोलों पर सवारी गांठने के आदी हो चुके चिराग पासवान से रौशन उजालों ने जैसे कुट्टी कर ली हो, चाचा पारस के चतुर सियासी मूव से फिलहाल वे लड़खड़ा गए लगते हैं। चिराग की सबसे बड़ी तकलीफ इस बात को लेकर है कि जिस बीजेपी पर उन्होंने ‘ब्लाइंड’ खेला था, उनके लिए मात का दांव वहीं से आया है। सूत्रों की मानें तो नीतीश के कहने पर एक शक्तिशाली भाजपा महासचिव ने यह पूरी व्यूह रचना रची, लल्लन सिंह ने महेश्वर हजारी के मार्फत पशुपति पारस को साधा, इस भाजपा महासचिव ने लोकसभा स्पीकर से बात कर चिराग से टूटे पांचों सांसदों के लिए मैदान आसान कराया और खेल हो गया। कहते हैं बाहुबली सूरजभान के भाई चंदन सिंह को आश्वासन मिला है कि उनके परिवार पर पहले से चल रहे मामलों में ढील मिलेगी, लोजपा के एक और सांसद महबूब अली कैसर को हज कमेटी का चैयरमैन बनाने का आश्वासन मिला है, सांसद वीणा देवी के एमएलसी पति बिहार सरकार में मंत्री हो सकते हैं, चिराग के चचेरे भाई प्रिंसराज से वादा हुआ है कि उन्हें पार्टी चलाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। और पशुपति पारस से केंद्र में मंत्री बनाने का वादा है। लोजपा के पार्टी संगठन में भी तोड़-फोड़ की कवायद जारी है, तमाम प्रदेश अध्यक्षों से पार्टी लेटर हेड पर पारस ग्रुप ने पहले ही उनसे समर्थन की चिट्ठी मांग ली थी, पार्टी संगठन के अधिकांश पदाधिकारियों का समर्थन भी पारस गुट ने हासिल कर लिया है, लोजपा का गठन 2001 को हुआ था, इसके बाद का कोई ब्यौरा चुनाव आयोग को भेजा ही नहीं गया। सो, फिलवक्त चिराग दरकिनार कर दिए लगते हैं, पर वे चाहे तो बिहार के 5 फीसदी सजातीय दुसाध वोटरों का समर्थन हासिल करने के लिए राज्य में घूम-घूम कर अलख जगा सकते हैं।