Posted on 09 May 2015 by admin
एक कविता की पंक्ति है-‘वैसे तो मैं पूरा कामयाब हूं। लेकिन कामयाब होने की ऐंठ के साथ। जरा कामयाब होना चाहता हूं।’ गुजरात के इस कामयाब उद्योगपति के लिए महा जग जीतना बाकी है। कभी ये शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, कमलनाथ, जयंती जटराजन के दरबार में हाजिरी बजाते थे, आज घड़ी का चक्र बदल गया है। अब बड़े नेता इनकी परिक्रमा कर रहे हैं। सफलता के सातवें घोड़े पर सवार अब ये हर धंधे में हाथ आजमाना चाहते हैं, ताजा-ताजा इनकी डिफेंस सेक्टर में भी एंट्री हो गई है। अभी हालिया दिनों में इन्होंने डिफेंस बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए इटली की एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी से हाथ मिला लिया है, यह वही कंपनी है जिसका नाम अगस्ता वेस्टलेंड स्कैंडल में सामने आया था, पर इस उद्योगपति का साथ मिलने के बाद ‘फिनमेकानिका’ (Finnemecanica)का नाम काली सूची में से आनन-फानन में हटा लिया गया है।
Posted on 09 May 2015 by admin
रक्षा क्षेत्र में हाथ आजमाने को बेकरार इसी उद्योगपति को हालिया दिनों में भाजपा शासित राज्य के एक युवा मुख्यमंत्री के साथ स्वीडन में देखा गया। जहां कथित तौर पर इन दोनों की मुलाकात उस कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से भी हुई जिस कंपनी ने बोफोर्स तोप का निर्माण किया है। जब से डिफेंस सेक्टर में एफडीआई बढ़ाई गई है, स्वीडन की यह कंपनी भी भारत में अपने हाथ-पैर फैलाने को बेकरार है। स्वीडन से लौटने के बाद इन दिनों ये उद्योगपति अपनी कोरिया यात्रा पर निकले हुए हैं, सनद रहे कि विवादों की आहटों को भांपते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी चीन यात्रा के प्रतिनिधिमंडल की सूची में से अपने इस मित्र उद्योगपति का नाम काट दिया था, क्योंकि इनके इसी मित्र उद्योगपति को लेकर राहुल गांधी कुछ ज्यादा ही हमलावर मुद्रा में हैं। समझा जाता है कि अपने कोरिया प्रवास में यह उद्योगपति प्रमुख कोरियन बैंक के शीर्ष अधिकारियों से मिले, उनका यह सारा उपक्रम हाल ही में कोरिया में अधिकृत किए गए अपने माईंस प्रोजेक्ट के लिए बैंकों से बड़ी रकम जुटाने के लिए है।
Posted on 09 May 2015 by admin
केंद्रनीत मोदी सरकार में भले ही अधिकारिक तौर पर यूपी के सबसे कद्दावर नेता राजनाथ सिंह को नंबर ‘दो’ का दर्जा प्राप्त हो, पर इतना तो सबको मालूम है कि मोदी सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री अरुण जेतली ही हैं। सो, जैसे ही मौजूदा बजट प्रावधानों में गृह मंत्रालय के बजट में बेतरह कटौती की गई, राजनाथ की भृकुटियां भी उसी अनुपात में तन गईं, अपनी शिकायत लेकर वे सीधे मोदी के पास जा पहुंचे, बजट कटौती की सीधी मार राजनाथ के मंत्रालय के उन योजनाओं पर पड़ी जो योजनाएं उनकी प्राथमिकताओं की सूची में शीर्ष पर थे, मसलन-नक्सल, पूर्वोत्तर और पुलिस सुधार। और ये वही योजनाएं हैं जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय सीधे हेंडल करता है, मसलन स्मार्ट पुलिसिंग को लेकर राजनाथ तमाम तरह की कवायद कर रहे थे, पर नए बजट में पुलिस आधुनिकीकरण का बजट सीधे राज्यों को ‘हेंडओवर’ कर दिया गया है, और फंड के निर्धारण का अधिकार भी सीधे राज्यों को सौंप दिया गया है, यानी राज्य चाहे तो यह पैसा वह किसी और मद में डायवर्ट कर सकता है। राजनाथ इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं, मसलन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ)के लिए 190 करोड़ की अतिरिक्त राशि की मांग की गई थी, पर मिले सिर्फ 50 करोड़ रुपए। यानी आने वाले दिनों में इस सहधर्मी हठधर्मिता की नई गूंज सत्ता के हलकों में सुनाई दे सकती है।
Posted on 09 May 2015 by admin
सत्ता के कंगूरे पर हर पल होती है जिनकी नार, धर्नुधर अर्जुन की मानिंद, सिर्फ मछली की आंख पर, केंद्र में चाहे जिस पार्टी की सरकार रहे, आए या जाए, कुछ तो बात है राजीव शुक्ला में कि उनका आभामंडल प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उतना ही देदीप्यमान बना रहता है। पिछले दिनों उनके एक आईपीएल मैच में दिल्ली बनाम मुंबई की जंग में एक खास बॉक्स में राजीव शुक्ला को विदेश सचिव एस.जयशंकर की आवभगत करते देखा गया, जयशंकर इस नाते भी शुक्ला के लिए अहम थे कि विदेश सचिव अभी-अभी प्रधानमंत्री के साथ जर्मनी, फ्रांस व कनाडा की यात्रा से लौटे थे। शुक्ला जी के साथ एक खास उद्योगपति भी उस बॉक्स में मौजूद थे, जिनका परिचय वे विदेश सचिव से करवा रहे थे। कभी शुक्ला जी शाहरूख के ब्रांड एंबेसडर हुआ करते थे, वक्त बदला, दिल्ली का निजाम बदला तो अब उन्होंने अक्षय कुमार का दामन थाम लिया। चुनांचे उसी मैच के, उसी बॉक्स में अक्षय कुमार भी शुक्ला जी के बगलगीर दिखे। मौका पर चौका जड़ना कोई शुक्ला जी से सीखे।
Posted on 09 May 2015 by admin
जब नहीं दिखा कुछ भी, तुम्हें देखते हुए, तो दिल ने मान लिया कि तुम वही भूल हो, जिसके साथ हमारा कोई भविष्य नहीं। कभी नितिन गडकरी के सबसे खास वफादारों में शुमार होने वाले अजय संचेती के दिल ने भी शायद ऐसा ही मान लिया और उन्होंने गडकरी के बजाए देवेंद्र फड़नवीस का चुनाव करना ज्यादा मुफीद समझा। सनद रहे कि संचेती तब सुर्खियों में आए थे जब कहा गया कि गडकरी के पार्टी अध्यक्ष रहते उन्होंने उनके तब के 13 तीर्नमूत्ति मार्ग को सजाने-संवारने में अपने करोड़ों फूंक दिए थे। गडकरी उन्हें राज्यसभा में लेकर आए और इसके लिए लाखों के बोल सहे। और जब इस दफे बीएमसी यानी बृहन्मुंबई महानगर पालिका में कश्मिनर बनाने की बारी आई तो इस रेस में तीन नाम शामिल थे, जिसमें से एक नाम गडकरी की पसंद का भी उम्मीदवार था, पर देवेंद्र फड़नवीस ने गडकरी की जगह अजय संचेती के उम्मीदवार अजॉय मेहता को प्राथमिकता देते हुए उन्हें बीएमसी का अगला कमिश्नर नियुक्त करवा दिया। जाहिर है संचेती और गडकरी के रिश्तों में अब कहीं ज्यादा तल्खी आ गई हैं, अब उनके बीच मामला सिर्फ दुआ-सलाम तक ही सीमित रह गया है।
Posted on 03 May 2015 by admin
50 दिनों के विदेश प्रवास, विपश्यना, मौसा वॉल्टर विंसी का साथ, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की राजनैतिक सलाहें कुछ तो है जो राहुल गांधी एक बदले अवतार में समाने आए हैं, और अब उनकी कही गई बातों के मायने और संदर्भ पहले से कहीं ज्यादा सारगर्भित हैं। सो, जब राहुल गांधी कहते हैं कि गुजरात के एक खास उद्योगपति के लिए अच्छे दिन आ गए हैं तो उसका एक व्यापक फलक है। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री जब भी विदेश यात्रा को जाते हैं, तो वे जिस भी होटल में रूकते हैं वहां इस उद्योगपति के लिए एक कमरा पहले से आरक्षित होता है, कमरे की बुकिंग भी पीएमओ द्वारा करवाई जाती है। अब मामला चाहे पेरिस के प्लाजा एथेना होटल का हो, बर्लिन के एडलॉन का, न्यूयॉर्क के न्यूयॉर्क पैलेस का या फिर सिडनी या टोक्यो के होटलों का, हर जगह इस उद्योगपति को प्रधानमंत्री के साथ रुकने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां तक कि प्रधानमंत्री के सम्मान में दिए गए हर स्टेट डिनर में भी इस उद्योगपति की मौजूदगी देखी गई। पेरिस के होटल प्लाजा एथेना का नाारा तो सबसे अलग था, हालांकि फ्रांस की यात्रा पीएम की सबसे व्यस्तम यात्राओं में से एक थी, फिर भी उस यात्रा में भी प्रधानमंत्री ने प्लाजा एथेना में कोई ढाई घंटे इस उद्योगपति के साथ बिताए, न सिर्फ उनके साथ डिनर किया, बल्कि मन की बातें भी शेयर कीं, सूत्र बताते हैं कि इन ढाई घंटों में जब प्रधानमंत्री अपने इस उद्योगपति मित्र के साथ डिनर कर रहे थे, तब तक नीचे होटल की लॉबी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल, विदेश सचिव एस.जयशंकर और फ्रांस में भारत के राजदूत अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए। प्रधानमंत्री की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान भी कई बार कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सत्ता के कंगूरे पर अच्छे दिनों की यह कौन सी आहट सुनाई दे रही है भई? क्या अरुण शौरी की ताजा खिसियाहट इन्हीं बातों से जुड़ी है?
Posted on 03 May 2015 by admin
मुस्लिम राग अलापने के लिए मशहूर मुलायम परिवार की हिंदू कर्म कांडों में आस्था बढ़ती ही जा रही है। हालिया दिनों में मुलायम और अखिलेश ने हिंदू पुजारियों व धर्म गुरुओं के लिए अपने घर और दिल के दरवाजे खोल दिए हैं, और आए दिन कोई न कोई पूजा-पर्व या अनुष्ठान चलता ही रहता है। इस परंपरा की शुरूआत तब हो गई थी जब अखिलेश 2012 में यूपी के सीएम बने तो उस समय पंचक था, इसकी शुद्धि के लिए 47 पंडितों से इसकी पूजा करवाई गई। इसके बाद मुलायम परिवार के एक उद्योगपति मित्र के उनके गोमती नगर स्थित आवास पर एक बड़ा अनुष्ठान संपन्न हुआ, सूत्र बताते हैं कि इसकी पूर्णाहुति पर अखिलेश और डिंपल भी शामिल हुए, अनुष्ठान में सहभागी बने तमाम पंडितों को उन उद्योगपति की ओर से और अखिलेश-डिंपल की ओर से 51-51 हजार रुपयाें की दक्षिणा दी गई, अनुष्ठान में शामिल होने वाले पंडितों के मोबाइल फोन बाहर ही रखवा लिए जाते थे। इस बार जब सपा सुप्रीमो मुलायम अचानक से बीमार पड़ गए तो इस परिप्रेक्ष्य में बड़े धूम-धाम से श्रवण यात्रा का आयोजन हुआ, श्रद्धालुओं को लखनऊ से ऋषिकेश-हरिद्वार की मुफ्त यात्रा करवाई गई, उनके लिए ठहरने से लेकर खाने-पीने तक का पुख्ता इंतजाम किए गए। ट्रेन के पांच कोच इनके लिए खास तौर पर आरिक्षत किए गए, श्रद्धालुओं को खाने-पीने के समान से भरा एक बैग भी खास तौर से भेंट किया गया। स्वयं मुख्यमंत्री इन्हें लखनऊ स्टेशन विदा करने पहुंचे, तमाम अखबारों में यात्रा से संबंधित बड़े-बड़े विज्ञापन दिए गए। ज्यों-ज्यों 2017 की चुनाव की घड़ी करीब आ रही है मुलायम-अखिलेश दरबार में हिंदू पंडितों व धर्म गुरुआें का महत्त्व निरंतर बढ़ता जा रहा है।
Posted on 03 May 2015 by admin
संसद के मौजूदा बजट सत्र के बाद कुछ बड़े फेरबदल की सरगोशियां सुनी जा सकेंगी, सबसे ज्यादा शोर तो मोदी मंत्रिमंडल में एक बड़े फेरबदल की है, इसी वक्त विभिन्न प्रांतों में 9 राज्यपालों की नियुक्ति होनी है, राज्यपाल पद के आकांक्षियों में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के वरिष्ठ भगवा नेता शामिल हैं। उत्तर प्रदेश से लालजी टंडन, मध्य प्रदेश से नामा हेपतुल्लाह, दिल्ली से विजय कुमार मल्होत्रा, बिहार से सीपी ठाकुर जैसे नेताओं के नाम इस दौड़ में हैं। पर पिछले दिनों प्रधानमंत्री से मिल कर कथित तौर पर ठाकुर ने राज्यपाल बनने में अनिच्छा जताई है, वैसे भी ठाकुर की राज्यसभा की मियाद अभी ढाई वर्ष बाकी है, आसन्न बिहार विधानसभा चुनाव के आलोक में डा. ठाकुर संगठन में अपनी कोई महती भूमिका चाहते हैं, स्वयं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इन संभावनाओं को टटोल रहे हैं कि अगर डा. ठाकुर को बिहार भाजपा का अध्यक्ष बनाया जाता है तो इससे क्या राज्य की अगड़ी जातियां भाजपा के पक्ष में लामबंद्द हो सकती है? क्योंकि बिहार के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे का कार्यकाल पिछले 18 अप्रैल को ही समाप्त हो गया था और वैसे भी भगवा कैडर में यह बेहद आम धारणा है कि पांडे अब तक बिहार भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेता सुशील मोदी के रबर स्टैंप की तरह काम करते आए हैं।
Posted on 03 May 2015 by admin
जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखें करीब आ रही है, प्रदेश कांग्रेस में आपसी कलह और गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। अब से पहले बिहार कांग्रेस चार गुटों में बंटी दिखाई पड़ती थी, अशोक चौधरी गुट, सदानंद सिंह गुट, प्रेमचंद्र मिश्रा गुट और अशोक राम गुट। पर हालिया दिनों में वहां एक नए गुट का अभ्युदय हुआ है, वह है मीरा कुमार का गुट। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह के पुत्र और औरंगाबाद के पूर्व सांसद निखिल कुमार तो अब सार्वजनिक मंचों से यह आवाज उठाने लगे हैं कि बिहार में कांग्रेस की नुमांइदगी मीरा कुमार को सौंपी जाए, सूत्र बताते हैं कि लोकसभा की पूर्व स्पीकर और बाबू जगजीवन राम की सुपुत्री मीरा कुमार भी ऐसी कोई जिम्मेदारी उठाने को तैयार है, बशर्ते पार्टी हाईकमान अपनी ओर से उनका नाम आगे करे। मौजूदा लोकसभा में बिहार से कांग्रेस के दो सांसद हैं किशनगंज से असवारूल हक और पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन। पर ये दोनों सांसद शायद ही कभी पार्टी की राज्य स्तरीय बैठकों में शामिल होने की जहमत उठाते हैं। वहीं बिहार कांग्रेस के ज्यादातर नेतागण इस चुनाव में लालू-नीतीश गठबंधन के साथ नहीं जाना चाहते, वे राहुल गांधी से आग्रह कर रहे हैं कि बिहार में कांग्रेस सभी 243 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़े, जाहिर है कि ऐसे में ये नेता टिकटों का और केंद्र से प्राप्त चुनावी धन का अच्छे से बंदरबांट कर पाएंगे।
Posted on 03 May 2015 by admin
कोई पौने ग्यारह करोड़ की सदस्यता रिकार्ड बनाने के बाद टीम शाह के हौंसले बुलंद है। संघ और शाह के बीच तनातनी की कथित आहटों के बावजूद टीम शाह की स्वयं प्रधानमंत्री नियमित तौर पर हौंसला अफजाई कर रहे हैं, भाजपा के सदस्यता अभियान के प्रभारी रहे लखनऊ के पूर्व मेयर और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा को उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया जा सकता है। शर्मा समर्थकों का दबाव है कि पार्टी उन्हें यूपी में अपने मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करे, पर दिल्ली की दहलाने वाली हार से आक्रांत पार्टी अभी इस मसले पर बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहती है, फिलवक्त शर्मा को पार्टी ने गुजरात का प्रभारी बना रखा है, इससे पूर्व वे हरियाणा और महाराष्ट्र में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर चुके हैं। संगठन कार्यों में दक्ष माने जाने शर्मा के काम-काज का अंदाज भी किंचित निराला है, उनकी पत्नी आईआईएम, अहमदाबाद में प्रोफेसर हैं और धाराप्रवाह गुजराती बोलती हैं। इस नाते भी शर्मा जी का गुजरात कनेक्शन कहीं ज्यादा मजबूत है।