Posted on 20 July 2015 by admin
नरेंद्र मोदी ने भले ही प्रधानमंत्री पद का सफर तय कर लिया हो, पर उनके अंदर विरोधी नेता का सुर जब-तब जग ही जाता है और वे गांधी परिवार पर सीधा हमला करने के लोभ से बच नहीं पाते हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री अरुण जेटली के ष्वसुर व कांगे्रसी नेता गिरधारी लाल डोगरा की जन्म षताब्दी वर्श मनाने के सिलसिले में जम्मू में थे। मोदी ने कहा कि ’उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि बतौर वित्त मंत्री डोगरा साहब ने 26 बजट पेष किए, पर जेटली समेत उन्होंने अपने किसी परिवार के सदस्य को कभी कोई फायदा नहीं पहुंचाया, वहीं आज तो हम जानते हैं कि दामादों के कारण क्या-क्या बातें होती है।’ सबको मालूम था कि मोदी का सीधा निषाना गांधी परिवार के दामाद राॅबर्ट वाड्रा की ओर है, पर मंच पर मौजूद दो प्रमुख कांग्रेसी नेता डा. कर्ण सिंह और गुलामनबी आजाद इस बाबत चुप्पी साध गए।
Posted on 20 July 2015 by admin
भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर भले ही मोदी सरकार ने अभी अपने कदम पीछे खींच लिए हों, पर सरकार के कर्णधारों खासकर अरुण जेटली को इस बात की पूरी उम्मीद है कि वे सदन में जीएसटी बिल को पास करा लेंगे। पर राहुल गांधी की टेढ़ी निगाह जीएसटी बिल पर भी है। कांग्रेस को इस बिल में 5 गंभीर आपत्तियां हैं। अगर सरकार कांग्रेस की सलाहों से पल्ला झाड़ती है तो इस बिल का भविश्य भी अधर में लटक सकता है, चूंकि यह बिल संविधान संषोधन से जुड़ा है, चुनांचे इसे राज्यसभा में पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा जो कि कांग्रेस की मदद के बगैर संभव नहीं है।
Posted on 20 July 2015 by admin
’व्यापमं’ की तोहमत अब कांग्रेस के सिर मढ़ना भाजपा के लिए मुष्किल हुआ जाता है। क्योंकि व्यापमं घोटाले का जिस षख्स ने पर्दाफाष किया था, उसके संघ के स्वयंसेवक होने के संकेत मिले हैं। डा. अन्ना राय नामक यह व्यक्ति इंदौर का एक डाॅक्टर है जो इंदौर में भाजपा के मेडिकल विंग से जुड़ा रहा है, डा. राय न सिर्फ भाजपा से अपितु इन्होंने सन् 2005 से लेकर 2013 तक संघ की गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है, कई टीवी डिबेट में इन्होंने खुद इस बात को स्वीकार भी किया है कि उनका संघ से एक गहरा नाता है।
Posted on 12 July 2015 by admin
मोदी इस वक्त चैन की बंसी बजा रहे हैं, अतीत में उनकी ही पार्टी के जिन लोगों ने मोदी की राह में कांटे बिछाने के प्रयास किए थे, उनमें से ज्यादातर लोग आज एक बदली परिस्थितियों में सियासी संत्रास झेलने को अभिषप्त हैं। षिवराज सिंह चैहान को अडवानी गुट मोदी के मुकाबले पीएम पद का एक बेहतर चेहरा बता रहा था, आज षिवराज व्यापम की आंच झेल रहे हैं, मामला सीबीआई के पास है यानी चाबी केंद सरकार के हाथों में हैं। अडवानी गुट मोदी के मुकाबले नीतीष को बतौर पीएम सपोर्ट करने को तैयार था, बताया जाता है कि इस अहम मीटिंग की वीडियो फुटेज मोदी के पास है, जो वक्त पड़ने पर इसका जरूरी इस्तेमाल कर सकते हैं, मोदी विरोध की अलख को कथित तौर पर हवा देने वाली पार्टी की दोनों उत्साही नेत्रियां सुशमा व वसुंधरा ललितगेट की चपेट में हैं, तो अपने तीन टर्म के सीएम पद से पीएम पद की दावेदारी पर आंख टिकाने वाले छत्तीसगढ़ के सुलझे मुख्यमंत्री रमण सिंह छत्तीस हजार करोड़ के घोटालों की आंच में घिरे हैं। मोदी ने बदले हालात में अपनी बदली टीम प्रस्तुत करने की सारी रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली है, बदलाव की इस पटकथा को तब अंजाम दिया जाएगा, जब मीडिया में इन मामलों की गंूज कम हो जाएगी।
Posted on 12 July 2015 by admin
मीडिया से लगातार एक दूरी बनाकर चल रहे मोदी सरकार के मंत्रियों ने अब पत्रकारों को लेकर अपना रूख बदला है। जब इस षुक्रवार को बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने बिहार विधान परिशद चुनाव में 24 में से 13 सीटें जीत ली और लालू-नीतीष व कांग्रेस महागठबंधन मात्र 9 सीटें हासिल कर सकीं तो सरकार के कई उत्साही मंत्रियों ने स्वयं पत्रकारों को फोन किए और इस बारे में अपनी राय दी। सरकार के जो सीनियर मंत्री पिछले एक साल से पत्रकारों से कन्नी काट रहे थे, वे अब उन्हीं पत्रकारों को अपने घर लंच-डिनर पर आमंत्रित कर रहे हैं और उनसे मन की बातें भी कर रहे हैं।
Posted on 12 July 2015 by admin
मायावती ने यूपी के ग्राउंड जीरो पर अभी से अपने प्रचार अभियान का श्रीगणेष कर दिया है, 2017 के विधानसभा चुनाव में वह ऐसी कोई पुरानी गलती नहीं दोहराना चाहती हैं जिससे वह सत्ता पाने से चूक जाएं। सूत्र बताते हैं कि अपने पार्टी कैडर से अलहदा हालिया दिनों में बहिनजी ने उत्साही नौजवानों का भत्र्ती अभियान चलाया है और बकायदा उन्हें तनख्वाह पर रख लिया है। इन नौजवानों का काम है कि वे गांव-गांव घूमकर अखिलेष सरकार की पोल खोल रहे हैं, और उन्हें 2012 से पहले के बहिनजी के राज्य का स्मरण करा रहे हैं कि आज की तुलना में तब यूपी की कानून व्यवस्था कितनी चाक-चैबंद थी। जिन मंत्रियों पर भ्रश्टाचार या कोई आपराधिक आरोप लगते थे तो फौरन उन मंत्रियों के इस्तीफे हो जाते थे। सपा सरकार में तो आरोप सिद्ध होने पर भी उन्हें नहीं हटाया जाता है। इसके अलावा मायावती के कुछ खास वफादारों ने अभी से अपने तार भगवा पार्टी से जोड़ रखे हैं, जिससे इस बात के संकेत मिलते हैं कि अगर बहिनजी 17 के चुनाव में गिनती बल में कम भी रहती हैं तो वह भाजपा के समर्थन से यूपी में सरकार बनाने को तैयार हैं।
Posted on 12 July 2015 by admin
सपा में अपनी घर वापसी को लेकर ठाकुर अमर सिंह इन दिनों काफी सक्रिय हो गए हैं, अमर सिंह की इस सक्रियता को 2016 में राज्यसभा पाने के उनके ख्वाब से जोड़ कर देखा जा रहा है। पिछले रविवार को वे मुलायम सिंह को साथ लेकर भाजपा के निर्वासित नेता लालकृश्ण अडवानी से मिलने जा पहुंचे। अडवानी के आवास पर इन तीनों नेताओं की लंबी बातचीत हुई। इसके बाद अमर सिंह ने अडवानी पुत्री प्रतिभा अडवानी का परिचय नेताजी से करवाया और प्रतिभा के समक्ष ’गंगा’ पर एक वृत्त चित्र बनाने का प्रस्ताव रखा, सूत्र बताते हैं कि प्रतिभा ने भी इस प्रस्ताव को सहर्श स्वीकार कर लिया है, समझा जाता है कि इस फिल्म का खर्च या तो स्वयं अमर सिंह उठाएंगे या फिर यूपी सरकार। पुराने रिष्तों में लगी जंग को क्या गंगा धो पाएगी? यही एक अहम सवाल अमर सिंह के समक्ष मुंह बाए खड़ा है।
Posted on 12 July 2015 by admin
भारत में आर्थिक मंदी आने की चेतावनी रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के लिए अनायास नहीं थी, सूत्र बताते हैं कि उन्होंने मोदी सरकार पर दबाव बनाने की नीयत से ऐसा किया, क्योंकि आने वाले दिनों में उनके कार्यकाल की मियाद खत्म होने वाली है और वित्त मंत्री अरूण जेटली उन्हें एक्सटेंषन दिए जाने के पक्षधर नहीं क्योंकि देष की आर्थिक नीति को लेकर राजन व जेटली की राय पहले से अलग-अलग है। जेटली चाहते थे कि बैंकों के ब्याज दर में और कटौती की जाए, वहीं राजन की चिंता बढ़ती हुई मुद्रास्फीति को लेकर है। जेटली चाहते हैं कि बकाया वसूली के काम में किसी एजेंसी की मदद ली जाए, वहीं राजन की राय इससे अलग है। जेटली की राय में उन्हें ऐसा आर्थिक विकास चाहिए जो मोदी सरकार के राजनैतिक एजेंडे को भी साथ लेकर चल सके, इस बात से राजन सहमत नहीं बताते जाते हैं। सो, मोदी सरकार राजन की जगह रिवर्ज बैंक के अगले गवर्नर की तलाष में जुटी है।
Posted on 12 July 2015 by admin
21 जुलाई से आरंभ हो रहे संसद के मानसून सत्र के हंगामाखेज रहने के आलोक में मोदी सरकार के षुभचिंतकों का डैमेज कंट्रोल अभियान अभी से जारी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ललितगेट, व्यापम और चावल घोटाले की गूंज में मानसून सत्र का पहला सप्ताह हंगामों की भेंट चढ़ सकता है, चुनांचे इसके बाद के दिनों में जीएसटी बिल और रीयल एस्टेट बिल को सदन में पारित कराने की रणनीतियां बुन ली गई हैं। रीयल एस्टेट बिल को सदन में पास कराने का जिम्मा सपा के नरेष अग्रवाल ने उठा रखा है। अग्रवाल के कुछ बड़े बिल्डरों से बेहद करीबी रिष्ते बताए जाते हैं। सो, पिछले दिनों नरेष अग्रवाल ने कमेटी के सदस्यों को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया और उन्हें इस बात के लिए तैयार करने में महती भूमिका निभाई कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रीयल एस्टेट बिल क्यों इतना जरूरी है।
Posted on 05 July 2015 by admin
मोदी सरकार ने ललित मोदी पर शिकंजा कसने की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है, ‘ऑपरेशन ललित’ की कमान सरकार के सर्वशक्तिमान अरुण जेटली ने संभाल रखी है। सरकार को पूरी उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में ललित मोदी पर ‘रेड कार्नर’ नोटिस जारी करवाया जा सकता है। सरकार की तमाम खुफिया एजेंसियां मसलन आईबी, रॉ, ईडी ललित के खिलाफ मिले कागजातों को खंगाल चुकी हैं, उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि अब ‘फेमा’ की जगह ललित मोदी पर ‘पीएमएलए’ यानि प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज हो सकता है। जांच एजेंसियों को मालूम पड़ा कि यूपीए के जमाने में बीसीसीआई के तत्कालीन मुखिया श्रीनिवासन की ओर से चेन्नई पुलिस में ललित मोदी के खिलाफ मनी लांड्रिंग की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें कथित तौर पर श्रीनिवासन की ओर से यह कहा गया था कि मॉरिशस रूट से अवैध तरीके से पैसा बाहर ले जाया गया है, पर यह शिकायत एफआईआर में सिर्फ इस वजह से तब्दील नहीं पाई कि सुप्रिया सूले ने कनिमोझी से बात कर इस मामले का निपटारा करवा दिया था, चूंकि उस वक्त तमिलनाडु में डीएमके की सरकार थी इसके चलते ललित मोदी पर एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई। चूंकि तब ललित मोदी के शरद पवार और सुप्रिया सूले से बेहद करीबी रिश्ते थे। अब ईडी अपने पॉवर का इस्तेमाल कर इसी शिकायत को एफआईआर में तब्दील करवा रहा है, जिससे पीएमएलए के तहत ललित मोदी पर केस दर्ज हो सके और उन पर ‘रेड कार्नर’ नोटिस जारी करवाया जा सके ताकि दुनिया के किसी भी एयरपोर्ट पर ललित मोदी को गिरफ्तार कर उन्हें वहां से भारत लाया जा सके। सच है, मुक्त होने का पाखंड, हर भंगिमा से बड़ा है, कलनाद करता जल मिट्टी के किसी घड़े में कैद पड़ा है।