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Posted on 04 July 2016 by admin
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Posted on 26 June 2016 by admin
भाजपा के भगवा चिराग वरूण गांधी को लेकर भले ही पार्टी हाईकमान की भृकुटियां तनी हो, पर वरूण के पिता व दादी की पार्टी कांग्रेस में उनको लेकर पलक-पांवड़े बिछाए जा रहे हैं। अभी पिछले दिनों लखनऊ में उत्तर प्रदेष कांग्रेस की महत्त्वपूर्ण बैठक आहूत थी, तीन घंटे तक चली इस बैठक में 40 मिनट तो केवल वरूण के नाम पर चर्चा हुई। इसकी षुरूआत एक कांग्रेसी विधायक बंसी पहाड़िया ने की, उन्होंने भरी मीटिंग में यह कहने का दुस्साहस कर डाला कि ‘अगर प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में नहीं आ रही हैं, तो हमें वरूण का चेहरा सामने रख कर यूपी चुनाव में जाना चाहिए, तब ही हम सपा-बसपा जैसे दलों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।’ एमएलसी नसीब पठान ने पहाड़िया की बातों का अनुमोदन करते हुए कहा कि ‘वरूण की पढ़े-लिखे छवि का फायदा हमें इन चुनावों में मिल सकता है।’ पूर्व मंत्री राम सूरत उपाध्याय ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हमें अपनी भावनाओं से पार्टी हाईकमान को अवगत कराना चाहिए, अगर हम वरूण को साथ लाने में कामयाब रहे तो यूपी में हम लड़ाई में आ जाएंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने इस राय की मुखालत करते हुए कहा कि ‘यह मीटिंग कांग्रेस पार्टी की है, जिसमें हम पिछले चालीस मिनट से एक भाजपा सांसद की तारीफों के पुल बांध रहे हैं।’ इस पर पूर्व प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष अरूण कुमार मुन्ना ने तमतमाते हुए कहा-‘हम बीजेपी की नहीं, अपने नेता के बेटे की बात कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले 9 वर्शों में हमारे खिलाफ एक षब्द नहीं बोला।’ फिर उन्होंने आरपीएन को लताड़ते हुए कहा-’मैं तो हैरान हूं, आर पी एन की बात व विचार सुन कर, इनके पिता तो संजय गांधी की चप्पल उठा कर नेता बने हैं, यह कौन नहीं जानता।’ इस पूरी बैठक के दौरान मौजूद यूपी के प्रभारी गुलाम नबी आजाद बस मंद-मंद मुस्कुराते रहे और अंत में बस उन्होंने इतना कहा कि ‘आप सबों की भावनाएं हाईकमान तक पहुंचा दी जाएंगी।’
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Posted on 26 June 2016 by admin
स्वामी प्रसाद मौर्य के यूं अचानक बसपा छोड़ने की कुछ खास वजहें थीं, एक तो वह अपने अलावा अपने बेटे और बेटी के लिए भी बसपा का टिकट मांग रहे थे, सनद रहे कि उनकी पुत्री संघमित्रा मौर्य पिछले चुनाव में एटा से बुरी तरह से पराजित हुई, बसपा सुप्रीमो ने स्वामी प्रसाद के बच्चों को पार्टी टिकट देने से साफ इंकार कर दिया था। इसके अलावा मौर्य के सगे भतीजे पर, जो बसपा की ओर से अवध मंडल का अध्यक्ष था, उन पर टिकट दिलाने के नाम पर पैसे लेने के गंभीर आरोप लगे थे। सूत्रों की माने तो मायावती ने इस मामले की जांच भी करा ली थी। सूत्र बताते हैं कि बहिन जी के पास इस बारे में भी कुछ पुख्ता खबरें थीं कि स्वामी प्रसाद पिछले दो महीनों में भाजपा नेता ओम माथुर से 3 बार, आजम खां और षिवपाल यादव से भी 3-4 दफे मिल चुके थे, और वहां मोल-भाव कर रहे थे। कहते हैं कि मायावती को यह भी कयास था कि मौर्य बीजेपी से मोल-तोल में मोदी सरकार में अपने लिए मंत्रिपद मांग रहे थे, भाजपा ने उनकी इस मांग को एक झटके में खारिज कर दिया, तो वे सपा के करीब हुए, अखिलेष उन्हें सपा में लेने को तो राजी थे, पर अपनी सरकार में मंत्री बनाने से उन्होंने मौर्य को मना कर दिया था। सूत्र बताते हैं कि एक दिन जब सहसा मौर्य के सचिव पार्टी कार्यालय पहुंचे तो उनके एक मुंहलगे चपरासी ने उन्हें अंदर की खबर दी और बताया कि परसों बाबूजी (मौर्य) को पार्टी से ‘एक्सपेल्ड‘ किया जा रहा है, इसके लिए जरूरी पेपर टाइप हो रहे हैं। सचिव ने यह खबर भाग कर मौर्य तक पहुंचाई और भाग मिल्खा भाग की तर्ज पर मौर्य भाग कर सपा की षरण में जा पहुंचे और बसपा से उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
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Posted on 26 June 2016 by admin
जैसा कि इसी काॅलम में सबसे पहले यह खुलासा हुआ था कि आगामी 30-31 जुलाई को संघ का एक आनुशांगिक संगठन माने जाने वाले हिंदू स्वंयसेवक संघ ब्रिटेन में अपनी उपस्थिति का गोल्डन जुबली ईयर यानी 50वां साल मना रहा है। लंदन के ल्यूट्न में एक दो-दिवसीय षिविर का आयोजन हो रहा है, जिसमें संघ के षीर्श नेतागण मसलन मोहन भागवत व दत्तात्रेय होसबोले हिस्सा लेने वाले हैं। संघ के विदेष विभाग के प्रमुख स्वमित्र गोखले इस आयोजन के मुख्य सूत्रधार हैं। इस आयोजन में दुनिया भर की नामी-गिरामी सेलिब्रेटी मसलन हाॅलीवुड स्टार लियोनार्दो-दि कैपेरियो, वर्जिन एयरलाइंस के मालिक रिचर्ड ब्रैनसन, भारत से सचिन तेंदुलकर और कई षीर्श उद्योगपति हिस्सा ले सकते हैं। आयोजकों ने इस आयोजन से ब्रिटेन सरकार व लंदन स्थित भारतीय दूतावास को अलग-थलग रखा है क्योंकि ‘ब्रेक्सिट’ के ताजे़ फैसले व ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून के इस्तीफे के हालिया ऐलान के बाद वहां घोर सियासी उथल-पुथल मची है। इस आयोजन में महर्शि वैदिक रिसर्च यूनिवर्सिटी की भी एक महती भूमिका देखी जा सकती है। इस आयोजन का उद्देष्य हिंदुत्व की अलख जगाने के साथ विष्व भर में षाकाहार को बढ़ावा देना है, कैपेरियो व रिचर्ड ब्रैनसन जैसी हस्तियां पहले ही बीफ बैन और षाकाहार की मुहिम से जुड़ी हैं। संघ चाहता है कि हिंदुत्व पर वैज्ञानिक दृश्टि से मनन हो ताकि इसकी स्वीकार्यता वैष्विक स्तर पर बने। सूत्र बताते हैं कि स्वयं संघ प्रमुख दो दिनों तक इस षिविर में ही प्रवास करेंगे, जहां उनकी मुलाकात विष्वभर की नामचीन हस्तियों से होंगी, आयोजकों ने स्पश्ट कर दिया है कि कैपेरियो व ब्रैनसन जैसी बड़ी हस्तियों को भी मंच पर जगह नहीं मिलेगी, मंच साधु-संतों व आध्यात्मिक गुरूओं के लिए ही आरिक्षत रहेगा।
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Posted on 26 June 2016 by admin
मोदी सरकार के एक सर्वषक्तिमान मंत्री ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री संतोश गंगवार को फोन कर हड़काया-’यह मैं आपको पांचवीं बार फोन कर रहा हूं, पर आप चेतन चैहान के नाम का नोटिफिकेषन नहीं निकलवा रहे हैं, आप मुझे इतने हल्के में लेने की गलती मत करिए।’ बात निफ्ट (राश्ट्रीय फैषन संस्थान) के डायरेक्टर नियुक्त करने की हो रही थी। मंत्री असमंजस में थे, क्योंकि उन्हें इस बारे में पीएमओ से कोई निर्देष नहीं आया था, सूत्र बताते हैं कि मंत्री ने हिचकिचाते हुए सर्वषक्तिमान से पूछा कि क्या उन्होंने इस बारे में पीएम से बात कर ली है? उन्हें जवाब मिला कि ’हां, उनसे बात होने के बाद ही आपको फोन कर रहा हूं।’ सर्वषक्तिमान की बातों से मंत्री जी आष्वस्त हो गए और उन्होंने आनन-फानन में निफ्ट के डायरेक्टर के लिए चेतन चैहान के नाम की घोशणा कर दी, इत्तफाक से उक्त रोज मंत्री जी के विभागीय सचिव भी छुट्टी पर थे। यह अधिसूचना जारी होने के कुछ घंटों बाद ही मंत्री जी को पीएम का फोन आ धमका, सूत्र बताते हैं कि पीएम ने मंत्री जी की खूब क्लास ली और उनसे कहा कि किसी ऐसे फैसले से पहले उन्हें पीएमओ से पूछना तो चाहिए था, पर फिर मंत्री जी ने सर्वषक्तिमान का हवाला दिया और कहा कि उन्होंने बताया कि ‘आप से बात हो गई है।’ पीएम ने कहा कि अगर बात हो गई होती, तो फिर मैं आपको क्यों फोन करता?
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Posted on 26 June 2016 by admin
मोदी सरकार में राश्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल की तूती बोल रही है, पर पार्टी में एक लाॅबी उनके खिलाफ सक्रिय है, यह वही लाॅबी है जो नए राश्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के लिए विदेष सचिव एस.जयषंकर का नाम आगे बढ़ा रही है, वहीं डोवल गुट का दावा है कि जब जयषंकर एक अच्छे डिप्लोमेट व अच्छे विदेष सचिव साबित नहीं हो पाए, तो एनएसए तो एक बड़ी जिम्मेदारी है। इस गुट का यह भी कहना है कि जब तक जयषंकर अमरीका में भारतीय राजदूत थे तो अमरीका से हमारे रिष्ते सबसे ज्यादा खराब थे। वहीं जयषंकर समर्थित गुट इस बात की वकालत में जुटा है कि अब वक्त आ गया है कि डोवल को जम्मू-कष्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया जाए, क्योंकि उन्हें जम्मू-कष्मीर मामलों में विषेशज्ञता हासिल है।
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Posted on 26 June 2016 by admin
आखिरी सांसे गिन रहे अपने एक नजदीकी रिष्तेदार को मिलने की अनुमति सीबीआई कोर्ट से हासिल करने के बाद एस्सार ग्रुप के सिरमौर रवि रूईया को लंदन के 5, हर्ट फोर्ड स्ट्रीट स्थित एक नाइट क्लब ‘लोलूऊ‘ में पार्टी करते देखा गया। विष्वस्त सूत्रों से पता चला है कि 2जी मामलों के आरोपी रूवि रूईया के साथ राॅबर्ट वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी देखा गया। सूत्र यह भी बताते हैं कि यह पार्टी वाड्रा के एक करीबी मित्र व दुबई स्थित उद्योगपति राजीव वजीर ने रखी थी। इस पार्टी के हसीन जलवे के किस्सों की गूंज अब भी लंदन की गलियों में सुनाई दे रही है।
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Posted on 20 June 2016 by admin
भारत के भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या के साथ रिश्तों में तल्खी का स्वांग रचने वाले एक प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री की अनुकंपा से माल्या लंदन में सम्मानपूर्वक जिंदगी बसर कर रहे हैं, वहां के सार्वजनिक समारोहों में अपनी धमक और उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं। अभी पिछले दिनों दिल्ली के एक बड़े लॉबिस्ट के बुक-रिलीज को लंदन में माल्या ने ‘स्पांसर’ किया। मजे की बात तो यह है कि लंदन स्थित भारतीय दूतावास भी इस समारोह का सह-प्रायोजक था, इस मौके पर ब्रिटिश शिक्षा मंत्री जो जॉनसन की उपस्थिति भी हैरान करने वाली थी। माल्या को न सिर्फ भारतीय हाई कमिष्नर नवतेज सरना के साथ घुल मिल कर बतियाते देखा गया, यहां तक कि भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारीगण भी माल्या की लल्लो-चप्पो करते देखे जा रहे थे, इतने बड़े वित्तीय फ्रॉड के आरोपी को जब भारतीय बैंक सियासी चश्मे से ढूंढ रहे हों, तो माल्या का यूं इतराना तो बनता है न भाई!
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Posted on 20 June 2016 by admin
एक बड़े खोजी अंग्रेजी दैनिक के बड़े खोजी पत्रकार भी 5 करोड़ रूपयों के लेन देन के मामले में ईडी के हत्थे चढ़ गए हैं। सूत्र बताते हैं कि इस पत्रकार महोदय ने कथित रूप से हथियारों के डीलर संजय भंडारी को यह आश्वासन दिया कि वे इनकी मदद करेंगे, बदले में भंडारी ने भी कथित तौर पर उनकी आर्थिक मदद कर दी। इनके बाद यह पत्रकार महोदय भंडारी की पैरवी लेकर ईडी चीफ करनैल सिंह के पास जा पहुंचे, करनैल सिंह एक ईमानदार व सख्त छवि के अफसर हैं, उन्होंने बगैर किसी लाग लपेट के इस पत्रकार महोदय की बातों को पीएमओ में नृपेंद्र मिश्र तक पहुंचा दी, माना जाता है कि नृपेंद्र मिश्र ने इस मसले की जानकारी पीएम को दी, और उनसे पूछा कि इस मामले में क्या किया जाना चाहिए? पीएम ने कहा-‘जो सही है, वही करिए, पत्रकार कोई देवता नहीं, हम उनकी सही-गलत बातों को मानने के लिए बाध्य नहीं।’ इसके बाद ही ईडी ने इस मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया, और जांच का दायरा बढ़ते ही भंडारी के एक मेल से रॉबर्ट वाड्रा का मामला सामने आ गया। और नए सियासी पेंचोखम ने उछाल मारने शुरू कर दिए।
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