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…और अंत में

Posted on 29 March 2010 by admin

बिहार भाजपा में नए अध्यक्ष को लेकर घमासान तेज है, फिलवक्त अध्यक्षीय दौड़ में अश्विनी चौबे, मंगल पांडे, जनार्दन सीकरीवाल का नाम चल रहा है पर ऐसे में गिरिराज सिंह दूर की कौड़ी साबित हो सकते हैं। झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए गणेश मिश्रा का नाम चल रहा है, मिश्रा जी भाजपा के कार्यालय नेताओं की पौध हैं, भाजपा में ये उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं जो केंद्रीय राजनीति में प्रभात झा व श्याम जाजू सरीखे नेताओं के अभ्युदय का कारण है।

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पुराने ढर्रे पर कांग्रेस

Posted on 16 March 2010 by admin

कांग्रेस बिहार, यूपी व झारखंड में अपने पुराने जातीय समीकरणों की तरफ वापिस लौट रही है। आजादी के बाद से सदैव बिहार और यूपी में कांग्रेस का एक मान्य फार्मूला रहा है कि अगर वहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कोई राजपूत है तो मुख्यमंत्री की कुर्सी आमतौर पर ब्राह्मणों को सौंपी गई, इसी तर्ज पर अगर प्रदेश अध्यक्ष कोई ब्राह्मण है तो मुख्यमंत्री की कुर्सी की दावेदारी ठाकुरों की रही। इस कांग्रेसी समीकरण में दलित और मुसलमान स्वत: जुड़ जाते थे। चुनांचे अब बिहार में कांग्रेस अनिल शर्मा की जगह कोई ठाकुर या ब्राह्मण अध्यक्ष को तरजीह दे सकती है।

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रामगोपाल का नया कलाम

Posted on 16 March 2010 by admin

लगता है इन दिनों कांग्रेस और सपा में अंदर ही अंदर कुछ खिचड़ी पक रही है, क्योंकि महंगाई के मुद्दे पर जैसे ही राजीव शुक्ला बोलकर हटे, सपा नेता रामगोपाल यादव ऊपरी सदन में मौजूद प्रणब मुखर्जी के पास फौरन जा पहुंचे और उनसे आग्रह किया कि राजीव शुक्ला को कांग्रेस केशव राव की जगह अगर पहला वक्ता बनातीं तो ज्यादा अच्छा होता क्योंकि राव की तुलना में शुक्ला जी की स्पीच कहीं ज्यादा प्रभावी थी।

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दिग्गी राजा का बाजा

Posted on 16 March 2010 by admin

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह यकीनन इन दिनों कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी के तारणहार की भूमिका में अवतरित हुए हैं। राहुल के मिशन यूपी 2012 के मद्देनजर राज्य के मुस्लिम वोटरों को लुभाने की जुगत में जुटे दिग्गी राजा ने आजमगढ़ के एक प्रख्यात मुस्लिम संगठन में बेहद ऊंचे पद पर कार्यरत एक व्यक्ति को दाना डाला और उसे इस बात के लिए राजी कर लिया गया कि अगर राहुल गांधी आजमगढ़ का दौरा करेंगे तो उनका यह अल्पसंख्यक संगठन खुलकर राहुल का साथ देगा। बदले में इस संचालक महोदय की खूब सेवा पानी की गई, इस संचालक महोदय ने भी दिग्गी राजा के समक्ष कुछ शतर्ें रखीं कि जैसे बाटला एंकाऊटर के खिलाफ दिग्गी राजा को खुलकर बोलना होगा (दिग्गी राजा ने प्रकारांतर में ऐसा किया भी) साथ ही केंद्र सरकार ने सिमी पर बैन को जो एक्सटेंशन देने का जो निर्णय लिया है दिग्गी राजा को इसकी भी मुखालफत करनी होगी। पर दिग्गी राजा ने उस संचालक महोदय की इतनी ज्यादा मदद कर दी कि फिर राज न राज रहा, संगठन के अन्य सदस्यों ने विद्रोह कर दिया और कांग्रेस प्रायोजित उस संचालक महोदय को भी उस मुस्लिम संगठन के तमाम पदों से बेदखल कर दिया गया, और इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि राहुल गांधी को भी आजमगढ़ का अपना प्रस्तावित दौरा रद्द करना पड़ा।

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ठाकुरी खेल में अकेले अमर

Posted on 16 March 2010 by admin

सियासत के खेल में खेलने को है बहुत कुछ, जीत उनकी हो गई और हारते हम रह गए, कभी भारतीय सियासत को पतुरिया के मानिंद अपने इर्द-गिर्द नचाने वाले अमर सिंह कहीं न कहीं अकेले पड़ते जा रहे हैं, नहीं तो कभी सपा के कद्दावर ठाकुर नेता को क्या यूं हर कोई भला ठेंगा दिखा सकता है? अब ठाकुर नेता के सजातीय राजा भैय्या ने भी अमर से मुंह मोड़ मुलायम की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है। पिछले दिनों राजा भैय्या ने लखनऊ में एक शानदार डिनर का आयोजन किया, इस डिनर के मुलायम सिंह ही होस्ट नजर आ रहे थे, जा-जाकर उपस्थित मेहमानों का अभिनंदन कर रहे थे, उनका कुशलक्षेम पूछ रहे थे। इस डिनर की खास बात यह रही कि इसमें न सिर्फ अमर सिंह के कई करीबी ठाकुर विधायक तशरीफ लाए थे, अपितु इसमें उत्तर प्रदेश भाजपा के भी एक दर्जन से ज्यादा यानी कोई 14 विधायक शरीक हुए थे, बाद में जब इन भगवा विधायकों से भाजपा आलाकमान ने पूछताछ की तो इनका कहना साफ था कि चूंकि वे 2012 के चुनाव में कमल के निशान पर चुनाव जीत नहीं सकते, चुनांचे उन्होंने साइकिल की सवारी गांठनी ही ज्यादा मुनासिब समझा।

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बड़े कूल हैं कुलकर्णी!

Posted on 07 March 2010 by admin

आप सुधींद्र कुलकर्णी नामधारी सान को शायद ही भूल पाए होंगे, अडवानी का बोरिया-बिस्तर समेटवाने में उनकी एक महती भूमिका रही है और जिन्ना के खटराग से अडवानी को बाग-बाग करवाने में उनका ही हाथ रहा है। आजकल जनाब ममता बनर्जी के साथ हैं और दीदी के आंख-कान बने हुए हैं रेल मंत्रालय में, वैसे भी ममता दीदी को वाम और बंगाल से ही कब फुर्सत मिलती है जो उनका ध्यान कभी अपने मंत्रालय की ओर भी जाए, सो दीदी ने मंत्रालय की बाबत जैसे ‘ट्रांसर्फर और पॉवर’ का नया मर्सिया लिख दिया है और सुधींद्र भले ही अधिकारिक तौर पर रेल मंत्रालय की एक कमेटी भर में दबदबा रखते हों, पर ममता के विशेष दूत बनकर पिछले दिनों वे प्रधानमंत्री से भी जाकर मिल आए, वह भी रेल बजट की बाबत। मजे की बात देखिए जहां सुधींद्र एक ओर यूपीए शासनकाल का लुत्फ उठा रहे हैं, वहीं कहीं अडवानी और वेंकैया नायडू से अब भी उनके उतने ही अच्छे रिश्ते हैं। मी मुंबईकर के नाते भाजपा के नए नवेले अध्यक्ष नितिन गडकरी से भी उनकी गहरी छनती है। अभी हालिया दिनों में कुलकर्णी मुकेश अंबानी ग्रुप नीत आब्जर्वर फाउंडेशन के मुंबई प्रमुख बन गए हैं, तो हिंदुजा से भी उनकी मित्रता उतनी ही गहरी है, जितनी उनकी दोस्ती टाटा से है। और टाटा से भी उनकी दोस्ती तब परवान चढ़ी जब सिंगूर का मामला गर्म था और जिस सिंगूर व टाटा का विरोध ममता बनर्जी कर रही थीं, पर कुलकर्णी थे जो इन तमाम वाकयातों से निकलकर ममता के भी करीब हो गए और टाटा के भी। इसे कहते हैं सियासी कलाबाजी!

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बिना थैली के रैली

Posted on 07 March 2010 by admin

अपने चचेरे भाई राहुल को सदैव सुर्खियों का सिरमौर बनते देखा है वरुण गांधी ने, चुनांचे बदली परिस्थितियों में उन्हाेंने न सिर्फ सियासत के मिजाज को बखूबी परखने में महारथ हासिल कर ली है अपितु भगवा पार्टी के सियासी ककहरे को उन्होंने कंठस्थ करने में जरा हड़बड़ी भी दिखाई है। जहां एक ओर भाजपा यूपी में सुप्तप्राय: जान पड़ती है, वरुण ने उसी यूपी में, उसी बंजर भगवा जमीन पर रैलियाें का सैलाब ला दिया है। पहले सुल्तानपुर, फिर बुलंदशहर की वह चर्चित रैली जिसमें 35-40 हजार की भीड़ जुटी थी। वरुण इसके बाद सहारनपुर में रैली कर रहे हैं और उसके बाद जौनपुर में, और ऐसे ही कोई डेढ़ दर्जन रैलियों की योजना है उनकी। उनके चचेरे भाई राहुल को प्रोजेक्ट करने में पूरी कांग्रेस पार्टी अपने युवराज के पीछे एक जुट दिखती है। और यहां वरुण हैं जो धारा के विरुध्द एक नई सियासी इबारत लिखने की जद्दोजहद में जुटे हैं पर उनकी पार्टी उनका ही टेंट-तंबू उखाड़ने का उपक्रम साध रही है।

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पप्पू कैसे पास हो

Posted on 07 March 2010 by admin

शुक्रवार को जब वित्त मंत्री के बजट भाषण का लगभग पूरा विपक्ष एकजुट होकर वॉकआऊट कर रहा था तो इस मौके पर भाजपा के दो सांसद ऐसे भी थे जो अपनी पार्टी लाइन से इत्तफाक नहीं रखते थे, इसमें से एक दरभंगा के भगवा सांसद कीर्ति आजाद थे तो दूसरे पूर्णिया के भाजपाई सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू थे। कीर्ति के मुकाबले पप्पू ज्यादा आक्रामक दिख रहे थे, उनका कहना था कि लोकसभा में जब वित्त मंत्री अपना बजट भाषण पढ़ रहे हों तो इसके वॉकआउट की कभी भी कोई परंपरा नहीं रही है, यहां इस बात का जिक्र कहीं ज्यादा मौजू होगा कि पप्पू सिंह एन.के.सिंह के छोटे भाई हैं सो ये किस परंपरा के वाहक रहे हैं आप इसे सहज समझ सकते हैं।

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किस्सा रंगीन मामला संगीन

Posted on 19 February 2010 by admin

यूपीए सरकार के इस काबीना मंत्री के रंगीन मिजाजी के किस्से से सžाा के कंगूरे पर बैठे वे चंद सिरमौर भी भली-भांति वाकिफ हैं पर कोई कुछ कर नहीं पा रहा। और मंत्री महोदय की दास्ताने इश्क भी उनकी अदय महत्वकांक्षाओं की तरह बेलगाम हुई जाती है। भारत की एक फैशन मॉडल जिनके साथ मंत्री जी के दिल का रिश्ता है जब वो पेरिस जाकर अपने ‘मॉडलिंग असायेनमेंट’ करने लगीं तो दीवानगी की रौ में बेतरह डूबे मंत्री जी भी यदा-कदा पेरिस जाने लगे और वहां देर रात चलने वाली पार्टियों में मंत्री जी को बेतरह ठुमके लगाते और उस भारतीय मॉडल के साथ ‘अंतरंगता शेयर’ करते देखा जा सकता है, दिल्ली के एक पंचतारा होटल में मंत्री जी का अ€सर आना-जाना है और वे भी होटल के अपने निर्धारित कमरे में पिछले द्वार से पहुंचते हैं। मंत्री जी के लिए इन सारी व्यवस्थाओं को सिरे चढ़ाने वाले एक सरदार ठेकेदार ने समझा जाता है कि मंत्री जी के अंतरंग पलों की एक सीडी बनवा ली है और उस सीडी को लेकर सरदार जी तमाम न्यूज चैनलों का च€कर लगा रहे हैं पर मंत्री जी के रूतबे को देखते हुए कोई भी मीडिया समूह उनके इस स्याह सच्चाईयों को बेपर्दा करने की हिमत नहीं जुटा पा रहा।

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जोशी की उदासी

Posted on 10 February 2010 by admin

सिर्फ जाजू ही €यों संजय जोशी की भी छुट्टी हो गई है, समझा जाता है कि संघ ने उन्हें राजगीर के प्रचारक पद से मु€त कर दिया है, साथ ही गडकरी को भी हिदायत दे दी गई है कि वे जोशी से पर्याप्त दूरी बना लें। यानी अब इस सारे काम धंधा का जिमा विनय सहस्रबुद्दे का हो जाएगा, संघ ने बुद्दे को यह बुध्दि दी है कि वे अपनी छपास की भूख को नियंत्रित कर लें तो फिर उनका सफर दूर का है।

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