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क्या संघ का चेहरा-मोहरा बदल रहा है?

Posted on 23 November 2022 by admin

क्या संघ का चेहरा-मोहरा बदल रहा है? सूत्रों की मानें तो अक्टूबर के अंत में संघ के कोई प्रमुख 35 नेतागण अपनी मंडली के साथ एक विशेष विमान से मालदीव पहुंचे, कहते हैं वहां इनके लिए ताज एक्जोटिका के ऑलीशान होटल में 35 कमरे बुक थे। यह भी मालूम चला कि वे 5 दिन मालदीव में जहां उन्होंने 2024 के बाद की रणनीति बुनने के लिए मंथन बैठक की। फिर वे एक चार्टर्ड विमान से वापिस दिल्ली लौट आए। सूत्रों से यह भी पता चला कि इस पूरी यात्रा का खर्च संघ के एक शीर्ष नेता से जुड़े दिल्ली के एक बड़े कारोबारी ने उठाया।

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वेल डन गडकरी!

Posted on 23 November 2022 by admin

अनियंत्रित उछाल लेती सियासी पिचों पर अपनी ओर आती खतरनाक बाऊंसर गेंदों को हुक या पुल कर सीमा रेखा पार पहुंचाने का हुनर कोई नितिन गडकरी से सीखे। इस 8 नवंबर को नई दिल्ली के ताज़ पैलेस होटल में ‘टीआईओएल’ के एक अहम इवेंट में ढेरों कॉरपोरेट लीडर्स की मौजूदगी में गडकरी ने खम्म ठोक कर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफों के पुल बांध दिए। गडकरी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. सिंह को वर्ष 2022 का ’टीआईओएल फिसकल हेरिटेज’ अवार्ड देते हुए कहा कि ‘1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारत को एक नई दिशा दिखाने का काम किया, देश इसके लिए सदैव उनका ऋणी रहेगा।’ गडकरी ने एक उदार आर्थिक नीति की वकालत की जिसका फायदा गरीबों और किसानों तक पहुंच सके। गडकरी ने यह भी खुलासा किया कि वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए आम आदमी से पैसे जुटाने का इरादा रखते हैं, जिसके लिए लोगों को सालाना 8 फीसदी ब्याज दर से मंथली भुगतान हो सकेगा। सनद रहे कि उक्त रोज गडकरी हिमाचल प्रदेश में पार्टी का चुनाव प्रचार कर रहे थे। पर डॉ. मनमोहन सिंह को अवार्ड देने के लिए वे एयरपोर्ट से सीधे समारोह स्थल आ पहुंचे थे।

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मान गए चव्हाण

Posted on 23 November 2022 by admin

जब राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ महाराष्ट्र के नांदेड़ पहुंची तो प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण उनकी अगवानी में दिखे, जिनके बारे में यह चर्चा जोरों पर थी कि वे अपने 12 समर्थक विधायकों के साथ भाजपा ज्वॉइन करने वाले हैं, इस सूची में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बाला साहब थोराट और विजय वडट्टीवार के नाम भी बताए जा रहे थे। वैसे भी इन कयासों को तब बल मिले थे जब शिदे-फड़णवीस के विश्वास मत प्रस्ताव के दौरान चव्हाण अपने 12 समर्थक विधायकों के साथ वहां काफी देर से पहुंचे थे। गणेश उत्सव के दौरान अपने एक मित्र के घर पर उनकी देवेंद्र फड़णवीस के साथ हुई मुलाकात भी काफी चर्चा में रही थी। चव्हाण अपनी पुत्री श्रीजया को सक्रिय राजनीति में लाने के लिए एक माकूल मंच की तलाश कर रहे हैं। अशोक के पिता यशवंत राव चव्हाण को भी जब कांग्रेस ने उस वक्त महाराष्ट्र का सीएम घोषित नहीं किया था तो उन्होंने नाराज़ होकर अपनी एक अलग राह पकड़ ली थी। नई पार्टी का गठन कर लिया था। सो, इस बार जैसे ही अशोक चव्हाण ने राहुल की यात्रा को नांदेड़ में रिसीव किया, फिर राहुल सीधे वहां से एक गुरूद्वारा गए और उसके बाद पार्टी नेताओं की एक अहम मीटिंग ली, उस मीटिंग में बोलते हुए राहुल ने साथ बैठे चव्हाण की ओर इशारा करते हुए कहा,-’देखिए वह यहीं बैठे हैं, जिनकी अभी हाल तक भाजपा में जाने की बात चल रही थी।’ अपना सा मुंह लेकर रह गए चव्हाण।

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सुधरती नहीं कांग्रेस

Posted on 23 November 2022 by admin

कांग्रेस को भले ही मल्लिकार्जुन खड़गे के तौर पर पार्टी का नया अध्यक्ष मिल गया हो पर उसके कामकाज का ढर्रा वही पुराना दिखता है। दिल्ली के निकाय चुनाव में टिकट बांटने का जिम्मा फिर से उसी मंडली को मिल गया है जिस पर परोक्ष-अपरोक्ष तौर पर पहले भी टिकट बेचने के आरोप लगते रहे हैं। निगम चुनाव के लिए हालिया गठित स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता फिर से उन्हीं अविनाष पांडे के हाथों सौंप दी गई है, विवादों से जिनका चोली-दामन का साथ रहा है। डॉ अजॉय कुमार को दिल्ली का सहप्रभारी बनाया गया है। कमेटी के अन्य दो सदस्य हैं डॉ. के. जयकुमार और उत्तराखंड के मंगलोर के विधायक रह चुके काजी मोहम्मद निजामुद्दीन। यह यही टीम है जो हर चुनाव में सक्रिय हो जाती है, जिसे राहुल की टीम के एक अहम सदस्य अलंकार सेवई का वरदहस्त प्राप्त बताया जाता है, जब पार्टी में इन नामों का विरोध शुरू हुआ तो फिर टीम में जगदीश टाइटलर का नाम भी जोड़ दिया गया।

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एक्शन में खड़गे

Posted on 31 October 2022 by admin

अध्यक्षीय पदभार संभालते ही कांग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हरकत में आ गए हैं। उन्होंने अभी पिछले दिनों गुजरात की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक ली, इस बैठक में रमेश चेन्नीथला और गुजरात के सहप्रभारी रघु शर्मा शामिल हुए। जैसे ही इस बैठक की खबर कांग्रेसियों को लगी खड़गे के पास शिकायतों का अंबार लग गया। मधुसूदन मिस्त्री ने भी चुनाव में डेलीगेट्स को लेकर हुई समस्याओं को लेकर एक लंबा पुलिंदा खड़गे को थमा दिया। वहीं गुजरात से आई ज्यादातर शिकायतें इस बात को लेकर बताई जाती है कि वहां पार्टी टिकट बेचे जा रहे हैं, हिमाचल से भी कमोबेश यही शिकायतें सुनने को मिली। खड़गे कांग्रेस संगठन में एक आमूल चूल बदलाव करना चाहते हैं, पर यह सब हिमाचल और गुजरात चुनावों के बाद ही होगा। वे एआईसीसी का सेशन भी 15 दिसंबर से पहले बुलाना चाहते हैं। खड़गे ने अध्यक्ष बनते ही 47 सदस्यों वाली एक स्टीयरिंग कमेटी गठित कर दी है पर सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस कमेटी में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और शशि थरूर के नाम शामिल नहीं है, वहीं हुड्डा के धुर विरोधियों यानी सैलजा और सुरजेवाला को इस कमेटी में जगह मिली है। सबसे हैरानी की बात तो यह कि हुड्डा खड़गे के प्रस्तावकों में से एक थे। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि खड़गे ने अकांऊट विभाग को तलब कर उनसे सारा हिसाब-किताब मांगा है, पर पार्टी के कोषाध्यक्ष पवन बंसल खड़गे के समक्ष आय-व्यय के तमाम ब्यौरे पेश करने को राजी नहीं हो रहे, उनका जोर है कि यह अधिकार तो सिर्फ गांधी परिवार के पास है।

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क्या हुआ संघ की प्रयागराज बैठक में

Posted on 31 October 2022 by admin

संघ की प्रयागराज में चली चार दिवसीय ’अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल’ की बैठक का अभी-अभी समापन हुआ है। इस बैठक में संघ के शीर्ष नेता मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसाबोले समेत 370 अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में जाति-वर्णमुक्त समाज और सामाजिक समरसता और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पर इस बैठक में संघ की असली चिंता 2024 के आम चुनाव को लेकर दिखी। संघ की चिंता इस बात को लेकर भी सामने आई कि जब-जब अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के महिमा का बखान होता है तो सोशल मीडिया पर अयोध्या के जमीनों के घोटाले के मामले भी तूल पकड़ने लगते हैं। सूत्रों की मानें तो संघ की बैठक में यह तय हुआ है कि अब कैडर अपना सारा ध्यान ज्ञानवापी और मथुरा पर केंद्रित करेगा। कहते हैं संघ की इस बैठक में गुजरात चुनाव की रणनीतियों को लेकर भी खुलासा हुआ है, संघ इस रणनीति पर काम कर रहा है कि पंजाब पैटर्न की तरह गुजरात में भी आम आदमी पार्टी के संगठन में कुछ खाद-पानी डाला जाए, आप जितना बढ़ेगी, कांग्रेस उतना घटेगी और भाजपा के लिए वहां मैदान मारना आसान रहेगा। इस बैठक से एक खबर और निकल कर सामने आई है कि संघ चाहता है कि एक बार गुजरात में वोटिंग खत्म हो जाए उसके बाद ही मनीष सिसौदिया की गिफ्तारी हो।

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और अंत में

Posted on 31 October 2022 by admin

सौरभ गांगुली बतौर बीसीसीआई अध्यक्ष अपनी दूसरी पारी खेलने को एकदम तैयार बैठे थे, वैसे भी अध्यक्षीय कार्यकाल बढ़ाए जाने को लेकर बीसीसीआई के संविधान संशोधन प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट से भी मंजूरी मिल गई थी। वैसे भी गांगुली के गृह मंत्री अमित शाह से भी बेहद अच्छे निजी ताल्लुक बताए जाते हैं। शाह जब पिछले दिनों कोलकाता में थे तो वे सौरभ के घर भोजन पर भी पधारे थे। सूत्रों की मानें तो जब बीसीसीआई से जुड़े ठेके कुछ खास कंपनियों और व्यक्तियों को दिए जाने पर सौरभ ने सवाल उठाए तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। माना जा रहा है कि बीसीसीआई के नए अध्यक्ष रोजर बिन्नी महज़ एक रबर स्टांप के मानिंद ही आचरण करेंगे।

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नेताजी के अंतिम संस्कार में राजनैतिक सद्भाव

Posted on 31 October 2022 by admin

समाजवाद के पुरोधा पुरुष में शुमार होने वाले मुलायम सिंह यादव के निधन पर सैफई में विभिन्न दलों के नेताओं का उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए तांता लग गया। आए तो राजनाथ सिंह और अमित शाह भी, पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जेपी की जयंती के मौके पर उनके गांव सिताब दियारा जाकर अमित शाह के साथ उस जयंती समारोह में हिस्सा लेने का कार्यक्रम था, उस कार्यक्रम में शामिल होने के बाद योगी लौट कर सैफई आए और नेताजी के अंतिम संस्कार में हिस्सा भी लिया। योगी ने राज्य में तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान भी किया। यूपी सरकार के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत योगी सरकार के अधिकांश मंत्रियों की उपस्थिति सैफई में दर्ज हुई। बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जिनका अखिलेश के साथ नजदीकी रिश्ता भी है, वे भी वहां मौजूद थे, जयंत चौधरी भी आए थे, पर अखिलेश की ओर से इन्हें कोई खास तवज्जो नहीं मिली। मुलायम के दूसरे पुत्र प्रतीक यादव भले ही तमाम रस्मों में शरीक रहे पर उनकी अखिलेश के साथ एक दूरी दिखी। प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव जो भाजपा खेमे में चली गई है, उनसे अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव ने भी एक दूरी बना रखी थी। पहले यह शोर था कि प्रियंका गांधी भी आएंगी पर बाद में कांग्रेस ने एक पत्र जारी करके कहा कि नेताजी के अंतिम संस्कार में कमलनाथ और भूपेश बघेल आएंगे, यह पत्र जारी करने की परंपरा अनोखी थी। लोगों और मीडिया का सबसे ज्यादा ध्यान भाजपा के बागी नेता वरुण गांधी ने खींचा जो अपनी मां मेनका गांधी के साथ वहां पहुंचे थे। वरुण को देख कर भाव विह्वल होकर अखिलेश उनके गले से लग गए, यह भावुक क्षण था, पर इसमें दूरगामी राजनीति के संकेत भी छुपे थे।

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किस द्विविधा में हैं सचिन पायलट

Posted on 31 October 2022 by admin

लगता है सचिन पायलट की सियासी उड़ान को ऊंचे आसमां की नज़र लग गई है, कुछ दिनों पूर्व सोनिया गांधी ने उन्हें तलब कर उन्हें खरी-खरी सुना दी थी, सूत्रों की मानें तो राजस्थान ड्रामे के पटापेक्ष के बाद सोनिया ने सचिन से दो टूक कहा-’हमने सीएम पद के लिए आपके नाम को आगे बढ़ाया और इसके लिए विधायकों का समर्थन मांगा पर अधिकांश विधायकों ने सीधे तौर पर आपके नाम का विरोध कर दिया, ऐसा एक नहीं दो-दो बार हो चुका है। आप अच्छे नौजवान हैं, आपका भविष्य अच्छा है पर आपको अपनी राजनैतिक शैली बदलनी होगी और यह देखना होगा कि कैसे ज्यादा से ज्यादा लोग आपके साथ आएं। केवल दिल्ली के मीडिया मैनेजमेंट से राजस्थान में राजनीति नहीं हो सकती है।’ अभी कुछ रोज पूर्व सचिन जब दिल्ली आए तो उनकी मुलाकात प्रियंका गांधी से हुई, प्रियंका के समक्ष अपना दुखड़ा रोते हुए सचिन ने कहा कि ’मौजूदा हालात से वे निराश हैं, न तो उन्हें राज्यसभा मिली और न ही राजस्थान की बागडोर।’ इस पर प्रियंका ने भी सचिन से वही बातें दुहरा दीं जो कि पखवाड़े पूर्व उनकी मां ने इस युवा नेता से कही थीं। प्रियंका से मिलने के बाद सचिन सचमुच बदल गए हैं, अब वे पार्टी के हर छोटे-बड़े नेता का हालचाल फोन पर ले रहे हैं। अभी वे झालावाड़ और कोटा गए तो वहां कांग्रेस के युवा नेताओं के साथ चाय-नाश्ता भी किया। सचिन समझ गए हैं कि नई सियासी उड़ान भरने से पहले उन्हें जमीं और आसमां दोनों से ही बराबर की गुफ्तगू करनी होगी।

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केसीआर फैमिली में तनाव, गाज पीके पर

Posted on 31 October 2022 by admin

भले ही तेलांगना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की सियासी महत्वाकांक्षाएं राष्ट्रीय फलक पर कुलांचे भर रही हों पर उनके घर में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा। उनके बेटे केटीआर और बेटी कविता के दरम्यान की तल्खियां अब सार्वजनिक तौर पर भी दिखने लगी हैं। पिछले दिनों जब केसीआर ने अपनी क्षेत्रीय पार्टी ‘टीआरएस’ का नाम बदल कर ‘बीआरएस’ कर दिया और अपने मंसूबे भी साफ कर दिए कि अब उनकी निगाहें नेशनल पॉलिटिक्स पर हैं, तो उस पूरे समारोह से उनकी दुलारी बेटी के. कविता नदारद थीं, तेलांगना के मोनोगोड़े विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार और प्रबंधन के लिए बनी 87 इंचार्ज नेताओं की टीम में भी कविता को जगह नहीं मिली है। स्वयं केटीआर इसका दोश चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के मत्थे मढ़ रहे हैं, उनका दावा है कि पीके हैदराबाद में आकर उनकी बहन कविता और उनके चचेरे भाई हरीश राव से मिले थे, केटीआर को शक है कि पीके ने उनकी बहन और भाई के कान भर दिए कि पार्टी में उन्हें ‘साइडलाइन’ किया जा रहा है। इसके बाद से ही कविता का विद्रोह आकार लेने लगा है। वैसे भी जब दिल्ली के शराब घोटाले में भाजपा के एक सांसद ने कविता का नाम घसीटा तो पार्टी उनके बचाव में सामने नहीं आई। केटीआर ने भी पीके से अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए उनकी कंपनी ‘आईपैक’ के एक साथ इस कांट्रेक्ट को रिन्यू नहीं किया है, यह कांट्रेक्ट पिछले दिनों ही समाप्त हुआ है, वादे के अनुसार इसे अगले तीन साल के लिए रिन्यू होना था।

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