Posted on 28 August 2012 by admin
देश भले ही कितनी अशांति की दौर से गुजर रहा हो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी अध्यात्मिक शांति की तलाश में कनाडा के मनोरम स्थल पर अवस्थित लेक लुईस जा रहे हैं,जहां महर्षि योगी का बहुचर्चित आश्रम स्थित है। इससे पूर्व गडकरी सपरिवार कनाडा के अन्य शहरों टोरंटो,बैंकंवर और कैलीगरी भी जा रहे हैं। गडकरी की यह प्राइवेट यात्रा 26 सितंबर इतवार यानी आज के दिन से ही शुरू होगी, इस यात्रा में गडकरी सपत्नीक ,उनके दोनो पुत्र,पुत्रवधु और पुत्रि शामिल है। यह एक पारिवारिक छुट्टी का आयोजन है,गडकरी के भतीजे वहीं कनाडा में ही रहते हैं,उनके कहने पर ही पूरी यात्रा का प्रारूप् तय हुआ है,सुत्र बताते हैं कि गडकरी अपने परिवार के साथ कोई 15 दिन कनाडा मं व्यतीत करेंगे।
Posted on 22 August 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 22 August 2012 by admin
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Posted on 07 August 2012 by admin
हालांकि भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी को लेकर संघ ने अपनी राय पहले ही साफ कर दी है कि वह इनकी पुनर्ताजपोशी के हक में है, बावजूद इसके पार्टी के दो सीनियर नेता अडवानी व मुरली मनोहर जोशी ने आपसी वैमनस्य भुलाकर इस बात पर एका बना ली है कि पार्टी गडकरी के नेतृत्व में चुनावों में कैसे जा सकती है। इन दोनों ही नेताओं के अपने मिले-जुले तर्क हैं कि आने वाला समय चुनावों का है गुजरात, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ आदि-आदि और उसके ठीक बाद लोकसभा चुनाव होने हैं ऐसे में पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व एक ऐसे नेता के हाथों में कैसे सौंपा जा सकता है जिनकी नेतृत्व क्षमता पर पार्टी जनों का भी भरोसा न हो। क्या गडकरी जी सुन रहे हैं…?
Posted on 07 August 2012 by admin
गुजरात के तमाम जनमत सर्वेक्षणों में भले ही मोदी आगे ही आगे दिख रहे हों और कांग्रेस को बमुश्किल 50 सीटें मिलती दिख रही हों, पर इससे कांग्रेस नेतृत्व निराश नहीं है। वह मोदी पर और भी आक्रामक और हमलावर होने के पक्ष में है। अभी कांग्रेस ने वैसे पांच बड़े औद्योगिक समूहों को शॉर्ट लिस्ट किया है जो मोदी और उनकी पार्टी भाजपा को सबसे ज्यादा आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं। इसमें से ज्यादातर गुजरात के उद्योगपति हैं, एक का शिपिंग व पोर्ट का बड़ा कारोबार है, एक की रिफाइनरी है तो एक बड़ी दवा कंपनी के मालिक। सूत्र बताते हैं कि डीआरआई इनके खिलाफ तमाम मामलों और सबूतों को खंगाल रही है। सीबीआई भी वफादारी निभाने को हमलावर मुद्रा में है।
Posted on 01 August 2012 by admin
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Posted on 01 August 2012 by admin
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Posted on 25 July 2012 by admin
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Posted on 25 July 2012 by admin
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Posted on 15 July 2012 by admin
रायसीना हिल्स पर काबिज होने के लिए प्रणब दा वे सब कुछ कर रहे हैं जो वक्त की मांग है। जाहिर है कि वक्त सब कुछ सिखा देता है। दादा जो अपने पॉलिटिकल मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं इस दफे गिनतियों के पेंचोखम में ज्यादा उलझ गए हैं। सो, वे घूम-घूम कर राष्ट्रपति चुनाव के वास्ते अपने लिए संख्या बल इकट्ठा कर रहे हैं और छोटी-बड़ी पार्टियों के क्षत्रपों से मिलने में भी गुरेज नहीं कर रहे। जैसे इस दफे रांची से लौटते वक्त और वहां झारखंड मुक्ति मोर्चा को एनडीए से अलग कर देने का दंभ भरते दादा ने फ्लाइट में अपना पसंदीदा ब्रीफकेस मंगाया उसमें से इलेक्ट्रोल कॉलेज की लिस्ट निकाली और अपनी डायरी में बाईं तरफ उन्होंने कुछ गिनती बल लिखे और फिर उनके अधरों पर एक विजयी मुस्कान तैर गई। सूत्र बताते हैं इसमें कुछ भी नया नहीं है वे दिल्ली से बाहर जहां जिन राज्यों में जाते हैं और अपनी वापसी की फ्लाइट में ऐसा ही कुछ उपक्रम साधते हैं। दादा को बखूबी इस बात का इल्म है कि रायसीना हिल्स पर काबिज कराने में विनती के बजाए गिनती उनके लिए ज्यादा कारगर रहने वाली है।