Archive | विशेष

दिग्गी राजा का रुतबा

Posted on 25 April 2013 by admin

राहुल गांधी के जयपुर चिंतन शिविर के उनके उस चर्चित भाषण के बाद से लगातार यह कयास लगते रहे हैं कि अब दिग्विजय राहुल के उतने लाडले नहीं रहे, या यूं कहा जाए कि अब कांग्रेस में दिग्विजय की उतनी पूछ नहीं रही। पर सच इससे उलट है। देखा जाए तो दिग्गी राजा बिना पोर्टफोलियो के मंत्री हैं। मसलन् रेवेन्यू सेक्रेटरी हों, सीबीआई डायरेक्टर, सीबीआई के टॉप आफिसर, इन्फोर्समेंट डायरेक्टर, डीआरआई प्रमुख, सेबी चीफ लगभग यह सभी लोग दिग्गी राजा के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं। इन्फोर्समेंट एजेंसियों पर अपनी इसी पैनी पकड़ की वजह से दिग्विजय दस जनपथ के भी उतने ही दुलारे हैं। वैसे भी सोनिया गांधी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं जो नेहरू और इंदिरा गांधी के जमाने में हुआ करती थी। नेहरू की कैबिनेट में लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा की कैबिनेट में डी.पी.धर को यही रूतबा हासिल था।

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सिध्दूवाणी

Posted on 25 April 2013 by admin

नवजोत सिंह सिध्दू की यह भाजपा से नाराजगी है या उनकी एक सोची समझी सियासी चाल कि उनकी पार्टी से नाराजगी की खबर को मीडिया ने क्या तूल दिया, दरअसल पंजाब भाजपाध्यक्ष कमल शर्मा से सिध्दू का छत्तीस का आंकड़ा बना हुआ है। जब राजनाथ सिंह ने सिध्दू को फोन किया तो सिध्दू ने उनसे बस इतना भर कहा कि ‘सर, आपसे दिल्ली आकर बात बात करूंगा।’ सूत्र बताते हैं कि सिध्दू की यह सारी भूमिका इस दफे अमृतसर के बजाए पश्चिमी दिल्ली संसदीय सीट से चुनाव लड़ने को लेकर है।

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मोदी बनाम राजनाथ

Posted on 05 March 2013 by admin

बाहर से मोदी और अंदर से विरोधी, भाजपा के चमकते नक्षत्र नरेंद्र मोदी के साथ राजनाथ सिंह बस यही सुलुक कर रहे हैं। पार्टी के विभिन्न फोरम पर एक ओर जहां राजनाथ सिंह नरेंद्र मोदी के तारीफ में कसीदें पढ़ रहे हैं, अपनी बहकी भाव-भंगिमाओं से नमो की मान-मर्यादा को नया आकाश मुहैया करा रहे हैं। वहां अंदर से मोदी के पैरों के नीचे की जमीन खिसकाने में जुटे हैं। राजनाथ की अगुआई में भाजपा के दिगगज नेताओं का एक जमावड़ा यह सुनिश्चित करने में जुटा है चाहे जो हो मोदी को पार्टी का पीएम कैंडिडेट प्रोजेक्ट नहीं करना है। इसके लिए मोदी को यह झुनझुना थमाने की तैयारी है कि उन्हें पार्टी की ‘कैंपेन कमेटी’ का सिरमौर बनाया जाएगा, पर सूत्रों की मानें तो मोदी इसके लिए तैयार नहीं। आखिरकार राजनाथ सिंह की इन बदली भाव-भंगिमाओं का राज क्या है? सूत्र बताते हैं कि राजनाथ के एक करीबी ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की है कि 2014 का साल आते-आते राजनाथ का सितारा अपनी बुलंदी पर पहुंच जाएगा और पार्टी में अपने समकक्ष नेताओं को धत्ता बताते हुए वे पीएम की कुर्सी पर काबिज हो सकते हैं।

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(English) Unsure about Shah

Posted on 12 February 2013 by admin

Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.

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(English) Political jamboree

Posted on 12 February 2013 by admin

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(English) Netaji angry with son

Posted on 06 February 2013 by admin

आजकल मुलायम सिंह यादव अपने मुख्यमंत्री बेटे अखिलेश से खासे नाराा बताए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने बकायदा अखिलेश को अपने काम-काज में आमूल चूल परर्िवत्तन लाने के लिए 2 महीने का टाइम दिया है। नेताजी ने अपने पुत्र से साफ कर दिया है कि या तो बदलो या बदलाव के लिए रास्ता खाली करो। यानी अब नेताजी ने एक तरह से खुद ही यूपी की कमान संभालने के लिए कमर कस ली है। दरअसल, पिछले काफी समय से अखिलेश की कार्यशैली से नाराा नेता व कार्र्यकत्ता मुलायम सिंह से मिलकर उनके समक्ष अपना दुखड़ा रो रहे हैं। राज्य की खुफिया एजेंसियों ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि पिछले दिनों में सपा की कीमत पर राज्य में बसपा का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। खासकर मुसलमानों का जिस कदर सपा से मोहभंग हो रहा है, अगर स्थितियां ऐसी ही बनी रहीं तो आगामी लोकसभा चुनाव में सपा के लिए अपनी 22 सीटों के परफॉमर्ेंस को दुहरा पाना भी मुश्किल हो जाएगा। यही बात नेताजी को खायी जा रही है।

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शेष रहेगी स्मृति

Posted on 06 February 2013 by admin

भाजपा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष स्मृति इरानी अपने लिए पार्टी में कुछ बेहतर संभावनाएं तलाश रही हैं। उनकी इच्छा और लॉबिंग तो पार्टी का महासचिव बनने की है, पर सूत्र बताते हैं कि स्मृति इरानी के लिए आगे की डगर किंचित मुश्किल है। उनके हाथों से तो महिला मोर्चा की कमान भी छिन सकती है। दरअसल राजनाथ उनकी जगह एक कम ग्लैमरस चेहरे की तलाश में हैं और महिला मोर्चा के सिरमौर के लिए नया नाम किंचित सबको हैरान करने वाला हो सकता है, यानी कोई अनजाना अनचिन्हा सा नाम, मसलन सरोज पांडे।

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दादा अब भी रेस में

Posted on 15 January 2013 by admin

पर प्रणब दा के समर्थकों ने हिम्मत नहीं हारी है। वे देश में उल्टी गंगा बहाने को कमर कस रहे हैं। दादा के समर्थकों में पुराने कांग्रेसी हैं जिनका मानना है कि आनेवाले लोकसभा चुनाव 2014 में संसद की तस्वीर कुछ गड्डमड्ड सी होगी। यानी भाजपा कोई 150 सीटों के आसपास होगी तो कांग्रेस सवा सौ का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाएगी। ऐसी सूरत में प्रणब दा एक सर्वसम्मत कैंडीडेट के तौर पर उभर कर सामने आ सकते हैं। अगर वैसी परिस्थितियों में प्रणब दा 7 रेसकोर्स पर काबिज हो जाते हैं तो उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी प्रणब दा की जगह ले सकते हैं।

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राम पार्टी में लौटे राम

Posted on 15 January 2013 by admin

मशहूर वकील राम जेठमलानी का माफीनामा और उनकी पार्टी में वापसी इस बात की परिचायक है कि संघ इस बात को लेकर कृत संकल्प जान पडता है कि उनके नामित नितिन गडकरी एक बार फिर से भाजपा की अध्यक्षीय कमान संभालेंगे। सो, जहां पार्टी के कई सीनियर नेताओं ने जेठमलानी का निलंबन रद्द किए जाने का विरोध किया, वहीं कहीं गडकरी इस मामले पर किंचित शांत रहे। माना जाता है कि राम जेठमलानी की घरवापसी सुनिश्चित कराने में हिंदुजा बंधुओं की महती भूमिका रही। हिंदुजा ना सिर्फ संघ नेतृत्व के निरंतर संपर्क में थे अपितु अउवानी व गडकरी को मनाने में भी उनकी एक अहम भूमिका रही।

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घर जला के मन हरा

Posted on 15 January 2013 by admin

झारखंड में भले ही भाजपा की सरकार गिर गई हो पर भाजपा नेताओं का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है मुंडा सकार के गिरने से जिनका मनोबल बढ़ा है। वहीं अर्जुन मुंडा भी अपनी सरकार जाने की वजह कुछ केंद्रीय नेताओं को बता रहे हैं। मेरे संगसारी के तमाशे में तुम भी थे शामिल यानी एक अदद यशवंत सिन्हा जिनकी तमन्ना अब भी झारखंड के मुख्यमंत्री बनने की है। एक अदद निशिकांत दूबे जिन्हें एक केंद्रीय नेता का आशीर्वाद प्राप्त है। हेमंत सोरेन ने अर्जुन मुंडा के समक्ष जो अपनी तीन सूत्री मांगों की सूची पेश की थी उसमें दूसरे नंबर की मांग यह भी थी कि निशिकांत दूबे गुरूजी यानी शिबू सोरेन से माफी मांगे जो उन्होंने गुरूजी के बारे में अनर्गल प्रलाप किया था। वैसे भी कुछ कॉरपोरेट घरानों की लॉबिंग को लेकर निशिकांत और मुंडा में पहले से ही ठनी हुई थी, इन दोनों में आंकड़ा भी छत्तीस का था, सो दूबे मुंडा से अपना हिसाब बराबर कर लेना चाहते थे। आपसी प्रतिद्वंद्विता भी कुछ ऐसी की गई पार्टी तेल लेने।

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