Posted on 23 October 2013 by admin
शिवसेना सुप्रीमो उद्घव ठाकरे की मनोहर जोशी से नाराजगी कम होने का नाम नहीं ले रही, सो मुमकिन है कि इस दफे साऊथ सेंट्रल मुंबई लोकसभा सीट से जोशी का टिकट कट जाए, शिवसेना नेतृत्व का मानना है कि पार्टी ने जोशी को बहुत दिया, सीएम बनाया, स्पीकर बनाया, केंद्रीय मंत्री बनाया पर बदले में इन्होंने पार्टी को क्या दिया है? सूत्रों की माने तो मनोहर जोशी के तार इन दिनों शरद पवार से बखूबी जुड़ गए हैं और उन्हें सेना ने टिकट नहीं दिया तो वे पवार का दामन थाम सकते हैं।
Posted on 06 October 2013 by admin
भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ें जमाने की कोशिशों में जुटी है। 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने यहां से मात्र एक सीट जीती थी। इस बार भाजपा का लक्ष्य यहां से 3-4 सीटें जीतने का है। अभी पिछले दिनों यहां प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आहूत थी जिसमें शामिल होने के लिए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पार्टी के बंगाल प्रभारी वरूण गांधी भी कोलकाता पहुंचे थे। पर पार्टी की दिक्कत यह है कि उसे वहां से लोकसभा चुनाव लड़ सकने लायक गंभीर उम्मीदवार नहीं मिल रहे सो, भाजपा नेतृत्व ने सोचा कि क्यों नहीं बंगाल से भाजपा की टिकट पर कुछ नामचीन हस्तियों को चुनावी मैदान में उतारा जाए। इसके लिए पार्टी के केंद्रीय नेताओं ने सबसे पहले क्रिकेटर सौरभ गांगुली से बात की। सौरभ गांगुली ने भाजपा नेताओं से बातचीत में दिलचस्पी तो दिखायी पर वे पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुए। गांगुली ने कहा कि उन्हें भाजपा से कोई परहो नहीं, लेकिन मोदी की कट्टर छवि की वजह से वे उन्हें पसंद नहीं करते। पार्टी नेताओं ने फिर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल शंकर राय चौधरी से बात की, रायचौधरी ने भाजपा नेताओं के समक्ष कुछ अजीबोगरीब शत्र्तें रख दी, उनकी एकर् शत्त यह भी थी कि जसवंत सिंह को तत्काल प्रभाव से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए।
Posted on 06 October 2013 by admin
दिल्ली के एक प्रसिध्द न्यूमरोलोजिस्ट (अंकगणितीय ज्योतिष) ने भविष्यवाणी की है कि जून 2014 तक नरेंद्र मोदी का सितारा सबसे बुलंद रहने वाला है। इस ज्योतिषीय गणना के मुताबिक मोदी का अंक आठ आ रहा है जो उनके कैरियर के पीकटाइम का द्योतक है। समझा जाता है कि कालांतर में इसी ज्योतिष महोदय ने मोदी को सलाह दी थी कि वे अपने नाम नरेंद्र मोदी में एक शब्द और जोड़ें, आगे चलकर मोदी ने अपने नाम के संग अपने पिता का नाम लिखना शुरू कर दिया यानी नरेंद्र दामोदरदास मोदी। अंक ज्योतिषी के मुताबिक नरेंद्र मोदी के ‘मोदी’ शब्द में सबसे ज्यादा वजन है। वहीं दूसरी ओर इस ज्येतिष महोदय ने यह भी भविष्यवाणी की है कि आने वाले तीन महीनों में अडवानी की तबियत नासाज हो सकती है। अब जबकि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है और दिल्ली और राजस्थान में 4 दिसंबर को चुनाव है तो ऐसे में कुछ भाजपाई ज्येतिष महोदय के पास यह जानने पहुंचे थे कि इन तारीखों का भाजपा की जीत के साथ कोई ताल्लुक है?
Posted on 06 October 2013 by admin
मोदी ने कोर ग्रुप की बैठक में साफ कर दिया है कि सिर्फ जीत सकने का माद्दा रखने वाले उम्मीदवारों को ही पार्टी टिकट से नवााा जाएगा, सो भाजपा के तमाम निवर्तमान सांसदों की एक रिपोर्ट कार्ड तैयार हो रही है। उनके संसदीय क्षेत्रों में कई सर्वेक्षण एजेंसियां गुप्त जनमत सर्वेक्षण करवा रही हैं और निवर्तमान सांसदों के ‘एंटी इंकमबेंसी ग्राफ’ तैयार किए जा रहे हैं। सांसदों के उनके परफारमेंस और क्षेत्र की जनता से मिले फीडबैक के आधार पर अंक दिए जा रहे हैं। इस परीक्षा में जो निवर्तमान सांसद फेल हो गए, उन्हें पार्टी टिकट से महरूम किया जा सकता है। इस चार्ट में बिहार के सबसे ज्यादा वर्तमान भाजपा सांसदों के टिकट कटने की संभावना व्यक्त की गई है।
Posted on 29 September 2013 by admin
नरेंद्र मोदी के बेहद करीबियों में शुमार होने वाले भाजपा महासचिव और उसके यूपी प्रभारी अमित शाह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। पहले सीबीआई उन पर रासुका लगवाना चाहती थी पर वंजारा, पांडे, सिंगल समेत गुजरात के कई नौकरशाहों के बयान और राज्य के दो मंत्रियों प्रफुल्ल पटेल और प्रदीप सिंह जडेजा के यू टर्न से सीबीआई ने अपना स्टैंड बदल लिया अब सीबीआई को साफ लगने लगा है कि इन बयानों को आधार बना कर कोर्ट कभी भी शाह की जमानत रद्द कर सकती है और सीबीआई को लगता है कि वह वक्त करीब आ पहुंचा है।
Posted on 29 September 2013 by admin
‘नज़रें बदलती हैं तो नजारे बदल जाते हैं, सुबह होती है तो सितारे बदल जाते हैं’ कांग्रेस पोषित मशीनरी को भी यह आभास हो चला है कि केंद्र का निज़ाम बस बदलने वाला है, तभी तो जब कांग्रेस के कुछ चुनींदा नेताओं ने इस आग्रह के साथ चुनाव आयोग से संपर्क किया कि इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा के मध्यावधि चुनाव भी करवा दिए जाएं तो वहां से उन्हें दो टूक ‘ना’ सुनने को मिली। सूत्र बताते हैं कि चुनाव आयोग ने साफ कर दिया कि उसे देश में लोकसभा चुनाव करवाने के लिए कम से कम 6 महीने का वक्त चाहिए होता हैऔर 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में मात्र दो-ढाई महीने का ही वक्त रह गया है सो, वे चाह कर भी मुल्क में मध्यावधि चुनाव नहीं करवा सकते।
Posted on 29 September 2013 by admin
कांग्रेस संसद का शीतकालीन सत्र वक्त से पहले बुलाना चाहती है। कायदे से यह सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह से 22 दिसंबर तक आहूत रहता है, 2009 के आम चुनाव के वक्त भी 2 मार्च 2009 को देश में चुनावी ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ लागू हुआ था और उसी परिप्रेक्ष्य में संसद का बजट सत्र 10 दिनों के लिए बुलाया गया था। सरकार से जुड़े सूत्र स्पष्टï करते हैं कि इस दफे भी संसद का नियमित बजट सत्र नहीं बुलाया जाएगा और बजट की जगह ‘एप्रेप्रिएशन बिल’ पास करवाया जाएगा ताकि देश का आर्थिक कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे। इसी दरम्यान संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को राष्टï्रपति संबोधित कर सकते हैं, और सदस्य राष्टï्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पास कर सकते हैं। दरअसल, जिस तरह देश एक आर्थिक बदहाली की दिशा में बढ़ रहा है यूपीए सरकार ऐसे में कोई बजट लेकर नहीं आना चाहती और चंद महत्त्वपूर्ण विधेयकों को संसद के शीतकालीन सत्र में आनन-फानन में पास करवा लेना चाहती है, जिसमें स्ट्रीट वेंडर बिल से लेकर तेलांगना बिल तक शामिल है। यही वजह है कि सरकार के कर्णधार शीतकालीन सत्र पहले लाना चाहते हैं।
Posted on 22 September 2013 by admin
भारत के माननीय राष्टï्रपति प्रणब मुखर्जी की बॉयोग्राफी हॉर्पर कोलिंस से छप कर मार्किट में आने वाली है। इसको 12 अध्यायों में बांटा गया है और इसमें प्रणबदा के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को उदघाटित किया गया है। इस बॉयोग्राफी को प्रणब दा के एक बेहद करीबी माने जाने वाले बंगाली पत्रकार जो आनंद बाजार समूह से जुड़े हैं, जयंत घोषाल ने लिखी है। कुछ दिनों के अंतराल में इसका बांग्ला संस्करण भी बाजार में उतर सकता है। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद प्रणब दा की आत्मकथा यानी ऑटो बॉयोग्राफी आने वाली है। इसे पेंग्विन छाप रहा है। प्रएाब दा की इस आत्मकथा में उनके राजीव गांधी से रिश्तों को लेकर कुछ ऐसी बातें शामिल हैं जो वे नहीं चाहते कि संसदीय चुनाव से पहले ऐसा कोई मसला उछले।
Posted on 22 September 2013 by admin
भाजपा में कत्र्ता और कार्यकत्र्ता के बीच की दूरियां कम करने के प्रयास होने लगे हैं। कार्यकत्र्ताओं को संगठित व्यवस्थित और ज्यादा समर्पित बनाने के लिए संघ के निर्देश पर मोदी एक नया प्लान लेकर आए हैं। अब ब्लॉक लेवल पर पार्टी के ऐसे अनुभवी, समर्पित व उत्साही कार्यकत्र्ताओं को ढूंढने का अभियान चल रहा है जिन्हें पार्टी के साथ पूर्णकालिक तौर पर जोड़ा जा सके। ऐसे कार्यकत्र्ताओं को आगामी लोकसभा चुनाव संपन्न होने तक प्रतिमाह 20 से 25 हजार रूपयों का मानदेय दिया जाएगा। इन कार्यकत्र्ताओं का काम होगा कि वे अपने निर्देशन में एक छोटी सी टीम गठित कर लें जो घर-घर जाकर लोगों को भाजपा व मोदी के पक्ष में जागरूक करें, पार्टी सदस्यता अभियान चलाएं। यह सुनिश्चित करे कि ऐसे हर वोटर का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो जिनका झुकाव भगवा पार्टी की ओर हो। चुनावी रणनीति में यह प्रयोग कोई नया नहीं है। कालांतर में कांग्रेस भी कुछ ऐसा ही प्रयोग कर चुकी है और इसके उन्हें वांछित परिणाम भी मिले हैं।
Posted on 22 September 2013 by admin
वृंदावन बैठक की इसी निचोड़ के साथ फिर संघ नेताओं का एक समूह अडवानी से मिलने पहुंचा और उन्हें मोदी की पीएम उम्मीदवारी को लेकर संघ की मूल भावनाओं से अवगत करा दिया गया और यह भी कहा गया कि ‘अडवानी जी, आप सबसे सीनियर लीडर हैं सो आपका एक भी गलत कदम आपके और आपके समर्थकों के लिए ‘नो रिटर्न प्वाइंट’ हो सकता है। वैसे भी हमने पीएम के तौर पर आपकी संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। एक बार चुनाव के परिणाम आने दीजिए उस समय परिस्थितयां किसी के भी पक्ष में जा सकती हैं। अगर भाजपा की सीटें उस समय अनुमान से कम रहीं और गठजोड़ की मजबूरियां ज्यादा रहीं तो फिर इस पद के लिए आपसे योग्य कौन है?’ यानी अडवानी को संघ ने एक साथ मनुहार, डांट और प्रलोभन तीनों ही डोज़ दिए। पता नहीं सियासी रूप से अस्वस्थ अडवानी के लिए इनमें से कौन सा डोज़ संजीनवी का काम कर गई।