Archive | विशेष

…और अंत में

Posted on 03 January 2015 by admin

लोकसभा में मनोनयन के लिए दो एंग्लो इंडियन की खोज जारी है, मोदी के एक विश्वस्त मंत्री ने अपनी ओर से दो नाम सुझाए थे, इसमें से एक नाम बीबीसी के पूर्व पत्रकार मार्क टुली का था तो दूसरा नाम थियेटर और सिनेमा के एक जाने-माने चेहरे टॉम ऑल्टर का था, पर इत्तफाक से ये दोनों ही नाम लोकसभा की ओर से तय ‘एंग्लो इंडियन कैटेगरी’ की जरूरी मापदंडों को पूरा नहीं करते थे। चुनांचे अब मोदी चाहते हैं कि ऐसे दो नाम जनता की ओर से सुझाए जाएं, लोग अपने सुझाव मोदी को उनकी वेबसाइट पर दे सकते हैं या सोशल मीडिया के किसी अन्य साधन का इस्तेमाल कर अपनी बात सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकते हैं।

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पानीपत में बेटी बचाओ लड़ाई

Posted on 03 January 2015 by admin

सरकार की ‘बेटी बचाओ मुहिम’ को नए पंख मुहैया कराने की गरज से आने वाली 22 जनवरी को हरियाणा के पानीपत में एक दो दिवसीय महत्त्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसे स्वयं प्रधानमंत्री संबोधित करने वाले हैं, उम्मीद जताई जा रही है कि इस आयोजन में एक लाख से ज्यादा लोग शिरकत करेंगे। हालांकि केंद्रीय महिला व बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी इस राय की बताई जाती थीं कि इस कार्यक्रम का आयोजन राजधानी दिल्ली में होना चाहिए ताकि पूरे देश व नेशनल मीडिया की नार इस पर रह सके, पर मोदी इस मामले में हरियाणा को एक प्रतीकात्मक राज्य मानते हैं क्योंकि मादा भ्रूण हत्या के मामले में हरियाणा कहीं आगे है और लैंगिक अनुपात के मामले में भी यह राज्य कहीं ज्यादा पिछड़ा हुआ है। चुनांचे मुख्यमंत्री बनने के बाद मनोहर खट्टर के समक्ष यह महती चुनौती इस आयोजन के लिए भीड़ जुटाने की है, और सही मायनों में यह उनके लिए एक अग्नि परीक्षा की मानिंद है।

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…और अंत में

Posted on 21 December 2014 by admin

ममता सरकार के पॉवरफुल मंत्री मदन मित्रा को 22 हजार करोड़ के सारदा चिटफंड घोटाले में भले ही सीबीआई कोर्ट ने 2 जनवरी तक के लिए जेल भेज दिया हो, पर कोलकाता के अलीपुर जेल पहुंचने के 1 घंटे के अंदर कथित तौर पर उन्हें सांस की तकलीफ हो गई और उन्हें एसएसकेएम अस्पताल भेज दिया गया। सनद रहे कि मित्रा रोगी कल्याण समिति के सह संस्थापक हैं, इसी संस्था के पास इस अस्पताल का प्रबंधन है। कहना न होगा कि मित्रा के लिए यह अस्पताल एक-दूसरे घर के ही मानिंद है, ममता-मित्रा कहीं सीबीआई और केंद्र को यह बताने की कोशिश तो नहीं कर रहे कि कोई इनका क्या बिगाड़ लेगा।

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जया का खट्टा-मीठा मिजाज

Posted on 21 December 2014 by admin

अपने कड़क मिजाज के लिए पहचानी जाने वाली जया बच्चन अब संसद में खट्टे-मीठे रिश्तों का आनंद भी उठा रही हैं। पिछले दिनों जब जया विदेश गईं तो वहां से वह एक खास किस्म की इमली लेकर आई थीं, इस इमली के स्वाद से जया बच्चन ने अपने कई साथी सांसदों को बावस्ता कराया। राज्यसभा के अपने चंद मित्रों के लिए वे इस इमली के कुछ खास गिफ्ट पैक करवा कर लाई थीं, इस इमली का सबसे ज्यादा जायका राजीव प्रताप रूढ़ी को भाया। उन्होंने इमली के स्वाद की जमकर तारीफ की, बदले में जया ने भी उन्हें इसके कई पैक गिफ्ट में दिए। रूढ़ी के सौजन्य से कई पत्रकारों तक ये इमली के स्वाद पहुंच गए, इसमें से कुछ ऐसे भी पत्रकार शामिल थे जो यदा-कदा भाजपा को मिर्ची लगाते रहते हैं।

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शीला का हाल बेहाल

Posted on 21 December 2014 by admin

कांग्रेस में घर-घर देखा, एक ही लेखा। ऐसा ही कुछ वाकया दिल्ली पर लगातार 15 वर्ष तक अजेय रह कर राज करने वाली शीला दीक्षित का भी हो रहा है। पिछले दिनों नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित इंडिया इस्लामिक सेंटर में एक गाल का प्रोग्राम आयोजित था, मैडम दीक्षित इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बनाई गई थीं। कार्यक्रम शुरू होने के ठीक 15 मिनट पहले जब शीला की कार इंडिया इस्लामिक सेंटर के मुख्य द्वार पर पहुंची, तो गेट पर तैनात संतरियों ने कार को गेट के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी, वहां मौजूद गार्ड्स का कहना था कि न तो इस कार पर लाल या नीली बत्ती ही लगी है और न ही मैनेजमेंट की ओर से उन्हें इस कार का नंबर ही दिया गया है। चुनांचे मामले को तूल नहीं देते हुए दिल्ली की इस पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी कार को वहीं बाहर गेट पर ही छोड़ना मुनासिब समझा और मुख्य द्वार से पैदल चलते हुए वह ऑडिटोरियम की ओर प्रस्थान कर गईं, इत्तफाक की बात देखिए तब कोई आयोजक भी मैडम दीक्षित को रिसीव करने के लिए वहां मौजूद नहीं था। तभी सेंटर के एक अधिकारी की नार मैडम दीक्षित पर पड़ी और वह उन्हें ऑडिटोरियम तक छोड़ आया। इस वाकया के एक हफ्ते बाद इसी ऑडिटोरियम में मौलाना आजाद के ऊपर बनीं एक वृत्तचित्र का प्रिव्यू होना था, उसमें भी शीला जी, नजमा हेपतुल्ला के साथ आमंत्रित थी, पर पिछले वाकये से सीख लेते हुए इस्लामिक सेंटर के अध्यक्ष सिराजुद्दीन कुरैशी काफी पहले से बाहर निकल कर खड़े हो गए थे, न सिर्फ शीला जी की कार गेट के अंदर आई अपितु कुरैशी उन्हें स्वयं रिसीव कर ऊपर ऑडिटोरियम तक ले गए।

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बढ़त में भाजपा

Posted on 07 December 2014 by admin

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के नतीजों से भाजपा के हौंसले बम-बम है। भगवा पार्टी को झारखंड में पूर्ण बहुमत के साथ अपनी सरकार बनती नार आ रही है, एक सर्वेक्षण के मुताबिक झारखंड में भाजपा को 81 में से 50 से ज्यादा सीटें मिल सकती है, वहीं 15 से 17 सीटें लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा दूसरे बड़े दल के तौर पर उभर सकता है, अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस व अन्य दलों का यहां क्या हश्र होगा?

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शाह से सहारा का क्या वास्ता

Posted on 07 December 2014 by admin

अमित शाह की कोलकाता रैली की सफलता से बिफरे तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद में एक लाल डायरी लेकर प्रदर्शन किया। लाल डायरी इस बात की द्योतक थी कि इसी रंग की एक डायरी आयकर विभाग को सहारा समूह पर छापे के दौरान मिली थी। तृणमूल वाले मानते हैं कि इस डायरी में कथित तौर पर वर्णित ‘ए एस’ कोड के तार भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से जुड़ते हैं। पर वहीं सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि शाह से सहारा वालों का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं, हां ‘ए एस’ नामधारी एक और नेताजी का अतीत जरूर सहारा के साथ जुड़ा है।

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दिल्ली में कांग्रेस का चेहरा

Posted on 01 December 2014 by admin

दिल्ली के आसन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चेहरा बनने के लिए न तो शीला दीक्षित तैयार है और न ही अजय माकन, जो तैयार हैं, पार्टी उन घिसे-पिटे चेहरों पर दांव लगाने से बच रही है।

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पुत्र-प्रेम में सोनिया

Posted on 01 December 2014 by admin

कांग्रेस के अंदर भले ही राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हों, पर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी का अपने बेटे में पूरा यकीन है कि एक दिन राहुल पार्टी को नई ऊचाईयों पर ले जाएंगे। सो, सोनिया धीरे-धीरे सारी ‘पावर्स’ राहुल को सौंपने का उपक्रम साध रही हैं। साथ ही इन दिनों वे राहुल को लेकर न केवल अतिसंवेदनशील हैं, अपितु ‘ओवर प्रोटेक्टिव’ भी हो गई हैं। सो, वह राहुल के खिलाफ एक शब्द भी सुनना पसंद नहीं करतीं, चुनांचे जब भी कोई कांग्रेसी नेता राहुल की जगह प्रियंका को आगे करने की बात करता है या इस बात की वकालत करता है, तो सोनिया के माथे पर बल पड़ जाते हैं। वहीं जब कोई कांग्रेसी सोनिया को यह राय देता है कि भाई राहुल की मदद के लिए बहन प्रियंका को आगे आना चाहिए, तो फिर वह निश्चिंत हो जाती हैं।

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राजदीप, बरखा व चर्चा

Posted on 25 November 2014 by admin

केंद्र में सत्ता परिवर्तन के साथ कई बड़े पत्रकारों के चेहरों से भी नकाब उतर गए हैं। कांग्रेस का खटराग अलाप पत्रकारिता के शीर्ष पर पहुंचने वाली बरखा दत्त से कांग्रेस ने कथित रूप से किनारा कर लिया है, कांग्रेसी रणनीतिकारों को लगता है कि बरखा व राजदीप ने कांग्रेस के बजाए अपना उल्लू ज्यादा सीधा किया है। यही वजह है कि बरखा इन दिनों ममता बनर्जी पर डोरे डाल रही हैं और उन्होंने अपने इंटरव्यू से पहले ममता को वे तमाम सवाल पहले भी भिजवा दिए थे कि वह दीदी से क्या पूछने वाली है? राजदीप की इंडिया टुडे ग्रुप में राहुल कंवल से बेतरह ठनी हुई है। सूत्र बताते हैं कि राजदीप को लगता है कि उनके भीड़ के हाथों में अमरीका में पीटे जाने का वीडियो जानबूझ कर मीडिया में राहुल ने ही लीक करवा दिया था। पर जिस तरह काटूर्निस्ट रमेश को लेकर कंवल के ट्वीट के जवाब में स्वयं मोदी ने ट्वीट कर दिया इससे कंवल को फिलवक्त अभयदान मिल गया लगता है। कहा जाता है कि राजदीप इंडिया टुडे ग्रुप की एक वेबसाइट को खरीदने में भी दिलचस्पी दिखा रहे थे, पर इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली, क्योंकि इस ग्रुप के सर्वेसर्वा अरुण पुरी को उनके नजदीकी मित्रों ने समझाया है कि राजदीप से जरा बचके, क्योंकि जो हाथ उन्हें सहारा देते हैं, उन्हीं हाथों पर वे सबसे पहला वार करते हैं।

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