Posted on 12 July 2015 by admin
देष के एक तेज चैनल पर मोदी की छाया बेतरह मंडरा रही है, सो हालिया दिनों में 360 डिग्री का टर्न लेते हुए यह चैनल भी मोदी के गीत गाने लगा है। मोदी के रणनीतिकारों ने चैनल के कर्Ÿााधर्Ÿाा के समक्ष यह आषंका जाहिर की थी कि इस चैनल के षीर्श पदों पर आसीन कई लोगों की गहरी आस्था अरविन्द केजरीवाल के साथ जुड़ी है, यही वजह है कि गाहे-बगाहे वे केंद्र सरकार के खिलाफ खटराग अलापते रहते हैं, चुनांचे चैनल स्वामी ने इनमें से कई उत्साही प्रस्तुत-कर्Ÿााओं को प्राइम टाइम के कार्यक्रर्मों से मुक्त कर दिया है। आए दिन चैनल के नोएडा स्थित दफ्तर में पूजा-अनुश्ठान का उपक्रम साधा जाता है, खास तौर काषी से 27 पंडितों की एक टीम बुलाई जाती है, जो इस धार्मिक अनुश्ठान को संपन्न कराते हैं। वैसे भी नियम से हर रोज चैनल के दफ्तर में पूजा-पाठ का एक वक्त निर्धारित कर दिया गया है, उस दरम्यान चैनल के दफ्तर के रिसेप्षन का स्वरूप भी बदल दिया जाता है, तीनों फ्लोर पर एक साथ मंत्रोच्चार के टेप चलाए जाते हैं, पत्रकारों को भी अपने जूते-चप्पल बाहर उतार कर अंदर आने की इज्जात होती है। चैनल चलाने वाले पत्रकारों को मैनेजमेंट की ओर से सख्त हिदायत दी गई है कि वे दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल का कोई लाइव प्रेस-कांफ्रेंस नहीं दिखाएंगे, चूंकि मोदी के रणनीतिकारों का ऐसा मानना है कि केजरीवाल का अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं, सो वे कभी भी किसी के बारे में कुछ भी बोल सकते हैं।
Posted on 12 July 2015 by admin
गांधी परिवार के दामादश्री राॅबर्ट वाड्रा जो पिछले दिनों राहुल-प्रियंका के साथ लंदन में थे, लगता है उन्होंने अपनी लंदन प्रवास की अवधि और आगे बढ़ा ली है। पिछले दिनों उन्हें लंदन के आर्ट पैलेस होटल में आयोजित एक बर्थडे पार्टी में देखा गया, यह पार्टी रक्षा सौदों से जुड़े एक अहम व्यक्ति सुरेष नंदा की बताई जाती है।
Posted on 05 July 2015 by admin
बिहार चुनाव में नीतीश-लालू मिलकर लड़ें इसको लेकर सोनिया खासी दिलचस्पी दिखा रही है, इन दोनों नेताओं के गिले-शिकवे दूर करने के लिए सोनिया ने अपने घर इफ्तार की दावत दी है, जिसमें आने के लिए इन दोनों नेताओं को खास तौर पर न्यौता भेजा गया। कांग्रेस लालू-नीतीश गठबंधन में अपने लिए 50 सीटों की मांग कर रही है, गुलाम नबी आजाद और सीपी जोशी को यह जिम्मा सौंपा गया है कि वे लालू-नीतीश के साथ मिल बैठकर सीटों का यह झगड़ा निपटा लें। संकेत मिल रहे हैं कि लालू-नीतीश कांग्रेस के लिए 30 सीटें छोड़ने को राजी हो सकते हैं। लालू व नीतीश के हिस्से सौ-सौ सीटें आ सकती है। और यह गठबंधन कोई एक दर्जन सीट अपने वामपंथी साथियों के लिए छोड़ सकता है। किंचित दुयाएं भी फसल सी होती है, फलती-फूलती है किसी गैर के लबों पर, होती है किसी और की है और बदलती है किसी और की किस्मत।
Posted on 05 July 2015 by admin
नरेंद्र मोदी का ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ का दावा खोखला साबित हो रहा है, उनका वह हुंकार भी बेमानी साबित हो रहा है-‘न खाएंगे, ना खाने देंगे।’ पिछले दिनों झारखंड में 7 माईंस के ठेके रिलीज किए गए, सूत्र बताते हैं कि अंदरखाने से जो डील हुई है, उसमें एक माईंस के रेट 15-20 करोड़ से बढ़कर 35 करोड़ तक जा पहुंचा है, चुगने वाले सारी गर्मी ऊपर ही ऊपर चुग बैठे, और जिसने जलाई थी क्रांति की मशाल, उस आम अवाम के हिस्से आ रही है बस राख!
Posted on 05 July 2015 by admin
सूरज के पीछे मत भागो कभी, नहीं तो सन जाओगे मुंह से पैर तक अंधेरों से, सामने खड़े रहकर मुकाबला करो, क्या पता सूरज आ बैठे तुम्हारे कांधे पर, और तय करने लगे तुम्हारा सफर! महाराश्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने षायद यही मूलमंत्र अपनाया। महाराश्ट्र में फडनवीस के बारे में अब तो यह तुर्रा चल पड़ा है कि वे महराश्ट्र के सबसे तेज गति से बढ़ने वाले उद्योगपति हैं। वैसे भी फडनवीस के आदर्ष राजनेता षरद पवार हैं, जिन्होंने धन बल से अपने को सबसे ज्यादा मजबूत बनाया, फिर महाराश्ट्र की राजनीति में इतने लंबे समय तक जमे रहे। सूत्र बताते हैं कि बहुत पहले फडनवीस ने नागपुर में अपने एक मुंहलगे दोस्त से कहा था, उनका षौक कभी मर्सीडीज कार में बैठने का नहीं है, बल्कि उस कंपनी में अपना हिस्सा लेने का है जो कंपनी मर्सीडीज कारों का निर्माण करती है। अब ऐसा मुमकिन हो रहा है।
Posted on 05 July 2015 by admin
पिछले दिनों भारत के षीर्श उद्योगपति मुकेष अंबानी, अपनी पत्नी नीता अंबानी और पुत्र आकाष के साथ अपने निजी विमान से दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्हें महरौली स्थित आईएलबीएस (इंस्ट्ीच्यूट आॅफ लीवर एंड बाइलेरी साइंसेस) में डाॅक्टरों के एक दल के साथ गंभीर मंत्रणा करते देखा गया। अंबानी के साथ उनके निजी डाॅक्टरों का एक दल भी दिल्ली पहुंचा था, सूत्र बताते हैं कि मुकेष अंबानी अपने पुत्र आकाष की वह सर्जरी करवाना चाहते हैं, जिससे कि उनका मोटापा कम हो सके। सूत्र बताते हैं कि डाॅक्टरों में अभी इस बात को लेकर सहमति नहीं बन पाई है कि यह आॅपरेषन भारत में किया जाए या विदेष में। मुकेष अंबानी का मन यूएस में यह आॅपरेषन कराने को है, क्योंकि आज कल उनका ज्यादातर वक्त अमरीका में ही गुजर रहा है।
Posted on 21 June 2015 by admin
अपने नाम के उद्बोधन से बेख़बर दोस्ती, सत्ता के कंगूरे के ठीक नीचे किसी बजबजाते गटर में औंधी पड़ी है, उन्मुक्त भाव से पंख फैलाता भोर का उजास एक नए दिन के जन्म का ऐलान तो करता है, पर कल के अंधेरों में सने कुछ चेहरों की ठीक से शिनाख़त नहीं कर पाता। 2013 से पहले तक ललित मोदी और वसुंधरा राजे में भी सुबह और उजाले का यही रिश्ता था, आज संबंधों के दरम्यान शह-मात की बिसात बिछी है। पुर्तगाल के जिस बायो मेडिकल रिसर्च आर्गनाइजेशन की वजह से सुषमा स्वराज और ललित मोदी मामले ने तूल पकड़ा, दरअसल इस संस्थान की खोज का श्रेय वसुंधरा को जाता है। ललित मोदी की पत्नी मीनल कैंसर से पीड़ित थीं, उनके कई ऑपरेशन भी हो चुके थे। तब वसुंधरा ने ही ललित मोदी को उनकी पत्नी के इलाज के लिए लिस्बन स्थित इस रिसर्च सेंटर का नाम सुझाया और बकायदा उन्हें लेकर लिस्बन भी गईं, वहां एडमिट कराया और मीनल की खूब सेवा-सुश्रा भी की। वह ललित मोदी की पत्नी की इलाज के वास्ते कोई दो बार वहां लेकर गईं, वहां इलाज से मीनल को इसका लाभ भी मिला। वसुंधरा इस वाकये से इतनी प्रभावित थीं कि वह इस रिसर्च सेंटर को राजस्थान लाना चाहती थीं ताकि जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सके। ऐसा करने में वो सफल भी रहीं, जयपुर के प्रताप नगर में 35 हजार मीटर जमीन चपालिमोड फाउंडेशन को आबंटित की गई है जिसके तहत यह रिसर्च फाउंडेशन काम करता है। पर 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान वसुंधरा व ललित में तलवारें खींच गई, वजह रही कि ललित मोदी ने अपने कुछ खास लोगों के लिए टिकट मांगा था, पर वसुंधरा ने इन्हें टिकट देने से मना कर दिया, उसी वक्त ललित मोदी ने कथित तौर पर वसुंधरा को चेतावनी दी थी कि उसके पास कुछ ऐसे दस्तावेज हैं जिसके खुलासे के बाद वसुंधरा का राजनैतिक कैरियर भंवर में फंस सकता है।
Posted on 21 June 2015 by admin
ललित मोदी अब अपने इमेज मैनेजमेंट में जुट गए हैं, सूत्र बताते हैं कि अभी हालिया दिनों में इन्हाेंने एक मोटी फीस का भुगतान कर जिस पीआर एजेंसी की सेवाएं ली है (यह वही एजेंसी है जिसने ललित मोदी के 200 पेज का वह चर्चित डॉक्यूमेंट जारी किया है) सूत्रों की माने तो यह वहीं एजेंसी है जिसमें भारत के उस प्रमुख मीडिया ग्रुप की 50 फीसदी की हिस्सेदारी है, जिसके अधीनस्थ चैनल ने ललित मोदी के पोल खोल का उपम साधा था।
Posted on 07 June 2015 by admin
यादव परिवार जानता है कि भारतीय सियासत में जो दिखता है, वही बिकता है। सो, जब से सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों की तस्वीरें सरकारी विज्ञापनों में छपने पर रोक लगाई है, यूपी की सत्ता पर काबिज यादव परिवार इसके लिए शॉर्ट कट ढूंढने में लगा है। अखिलेश ने मंत्रिमंडल में शामिल अपने कुछ काबिल वकील मित्रों से सलाह ली और बीच का रास्ता निकाला गया कि किसी गतिविधि में शरीक रहते हुए मुख्यमंत्री की फोटो सरकारी खर्चे पर पत्र-पत्रिकाओं में छपवायी जा सकती है। जैसे पिछले दिनों कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम को यूपीसीए यानी यूपी क्रिकेट एसोसिएशन को 30 साल के लिए लीज पर दे दिया गया है, इसके लिए एमओयू पर साइन करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और यूपीसीए के सचिव राजीव शुक्ला की बड़ी-बड़ी तस्वीरें तमाम अखबारों में यूपी जनसंपर्क विभाग के मार्फ्त छपीं। देखा-देखी तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी इस परिपाटी का पालन करना शुरू कर दिया है, कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी फिलहाल लहरें गिन रहे हैं, चुनांचे अगर इस मामले में कोर्ट कोई संज्ञान नहीं लेता है तो वह भी अखिलेश की राहों पर चल पड़ेंगे। वहीं पिता-पुत्र यानी मुलायम-अखिलेश को कहीं न कहीं ऐसा लग रहा है कि कोर्ट के इस आदेश से मोदी को सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है, देश भर में सिर्फ उनका ही चेहरा चमक रहा है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में यूपी सरकार इस आदेश को चुनौती देने के लिए कोर्ट जा सकती है, पिता-पुत्र के काबिल वकीलों ने इस आशय के प्रतिवेदन को अंतिम रूप दे दिया है।
Posted on 07 June 2015 by admin
यह अच्छी बात है कि यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सियासी खेल से अलहदा अन्य खेलों में उतनी ही दिलचस्पी है, क्रिकेट इसमें नंबर वन पर आता है। पिछले दिनों अखिलेश ने यूपीसीए यानी यूपी क्रिकेट एसोसिएशन से एक संधि पर समझौता किया है जिसके तहत अगले 30 वर्षों तक कानपुर ग्रीन पार्क स्टेडियम के रख-रखाव का पूरा जिम्मा यूपीसीए का होगा। इसके एवज में यूपीसीए यूपी सरकार को न सिर्फ एक करोड़ रूपए का सलाना भुगतान करेगी, अपितु यहां आयोजित हर मैच में टिकटों की बिक्री से प्राप्त राजस्व का 25 फीसदी हिस्सा भी प्रदेश सरकार को देगी। यूपीसीए के सचिव राजीव शुक्ला इस प्रस्ताव को अंजाम तक पहुंचाने के लिए पिछले 10-15 वर्षों से प्रयास कर रहे थे। शुक्ला जी का तर्क था कि ऐन मैच से महीने भर पहले स्टेडियम मिलने से ठीक प्रकार से उसकी रंगाई-पुताई भी नहीं हो पाती है, स्टेडियम के मेंटेनेंस की बात तो दूर है। यूपी वालों को उम्मीद है कि नए प्रबंधों के परवान चढ़ने से उन्हें कुछ बड़े मैच यहां देखने को मिल सकते हैं।