Archive | विशेष

…और अंत में

Posted on 23 February 2016 by admin

आने वाला आम बजट लोकोन्मुख व लोकप्रिय कैसे हो, इसको लेकर वित्त मंत्री अरूण जेटली के पेशानियों पर बल पड़ गए हैं, उनका कहना है कि सरकारी खजाने पर अकेले सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों की मार 1 लाख करोड़ से ज्यादा की है, तो वहीं सैनिकों के वन रैंक वन पैंशन मामले से भी खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है, ऐसे में लोकप्रिय बजट पेश कर पाना खासा मुश्किलों भरा काम होगा, वैसे भी जयंत सिन्हा व रघुराम राजन दानों की पृष्ठभूमि ’हेच फंड’ की रही है, सो इनकी सोच भी उसी अनुरूप विकसित हुई है।

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संगठन व सरकार में फेरबदल की आहटें

Posted on 25 January 2016 by admin

अमित शाह को तीन वर्षों के लिए दोबारा अध्यक्ष बनवाना नरेंद्र मोदी के लिए खासा चुनौतियों भरा उपक्रम रहा, एक आत्ममुग्ध सेनापति के लिए किसी के दर शीश नवाना कतई आसान नहीं होता, पर अपने गुजराती सखा के लिए मोदी ने यह करने से भी संकोच नहीं किया। संघ के शीर्ष नेताओं से इस बाबत उन्होंने कई दौर की बात की और बाकी का मोर्चा नितिन गडकरी ने संभाला, जो हालिया दिनों में मोदी के खास वफादार बनकर उभरे हैं। कहते हैं अपने परिवार की दबाव की वजह से गडकरी ने संगठन में जाने के बजाए सरकार में बने रहना ही ज्यादा मुफीद समझा, यही बात शाह के हक में चली गई। क्योंकि पार्टी के अगले अध्यक्ष के रूप में नितिन गडकरी संघ के र्निविवाद पसंद बनकर उभरे थे। एक बार गडकरी को साधने के बाद मोदी के लिए संघ व पार्टी के अन्य नेताओं को मनाना किंचित मुश्किल नहीं था। इस दफे अमित शाह अपनी नई टीम को चुनने में काफी सतर्कता बरत सकते हैं और जिताऊ चेहरों पर दांव लगा सकते हैं। चुनांचे इस दफे की ’टीम-शाह’ में आपको चंद ऐसे चेहरे देखने को मिल जाएंगे, जिनकी एक विद्रोही छवि है। पर अपने-अपने गृह राज्यों में इनका असर है। सो, इस दफे थोकभाव में टीम शाह में ऐसे नेता षामिल हो सकते हैं, जिन पर उनके पालतू होने का ’ठप्पा’ नहीं लगा है। सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार से कोई तीन-चार मंत्रियों को भी संगठन की सेवा में लगाया जा सकता है। चूंकि 23 फरवरी से संसद का बजट सत्र आहूत है, सो इसके पहले मोदी अपनी कैबिनेट में भी एक व्यापक फेरबदल कर सकते हैं। 75 पार मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है, सात राज्यों के आसन्न चुनावों को देखते हुए उन राज्यों को मंत्रिमंडल में नए सिरे से प्रतिनिधित्व देने की कवायद हो सकती है। कई हैवीवेट मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जिन मंत्रियों के पास एक से ज्यादा विभाग है उनके बोझ को हल्का किया जा सकता है। पर यह फेरबदल किस तारीख को होगी इस बात का इल्म प्रधानमंत्री के सिवा षायद ही किसी और को हो।

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अतीत होते अमर

Posted on 25 January 2016 by admin

पिछले दिनों प्रधानमंत्री आवास पर ज़ी के सुभाष चंद्रा की आत्मकथा के विमोचन का मौका था। इस अवसर पर कई नामचीन हस्तियां 7 रेसकोर्स पर जुटी थी। आमंत्रण अमर सिंह को भी था, और मुलायम सिंह को भी। सो दोनों साथ-साथ इस कार्यक्रम में तशरीफ लाए। मुलायम बगैर भटके पते की बात कर गए, समारोह में प्रधानमंत्री कम से कम दो मौकों पर बात करने मुलायम के पास जा पहुंचे, पर अमर सिंह को उन्होंने कोई भाव नहीं दिया, जबकि वे मुलायम के ही बगलगीर थे। तब लोगों को इस बात का इल्म हुआ कि अमर सिंह के अरूण जेटली और अमित षाह से इतने प्रगाढ़ रिश्तों के बावजूद भगवा पार्टी ने उनके लिए अपने द्वार नहीं खोले?

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…और अंत में

Posted on 25 January 2016 by admin

जैसे-जैसे यूपी में चुनाव करीब आ रहे हैं, बड़ी सियासी उथल-पुथल की पटकथा लिखने का दौर भी शुरू हो चुका है। राज्य में बदली सियासी बयार की आहटों को भांपते पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के दर्जनों सपा विधायक साइकिल छोड़ हाथी की सवारी गांठने को बेकरार दिख रहे हैं। वे बसपा से टिकट पाने की जबर्दस्त लॉबिंग करते दिख रहे हैं, तो वहीं सपा की एक बड़ी और प्रभावशाली ठाकुर लॉबी भाजपा में जाने के लिए सही समय के इंतजार में है, वे राजनाथ सिंह के निरंतर संपर्क में बताए जा रहे हैं।

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नजमा आपा की सक्रियता

Posted on 19 January 2016 by admin

जैसे-जैसे केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की आहटें करीब आ रही है, 75 वर्ष की उम्र छूने वाले केंद्रीय मंत्रियों की धड़कनें बढ़ रही हैं। चूंकि यूपी में अगले साल चुनाव होने हैं, सो इस बात की संभावना कम दिख रही है कि यूपी के एक बड़े ब्राह्मण फेस कलराज मिश्र को मंत्रिमंडल से बाहर कर भाजपा यूपी में अपने ब्राह्मण वोटरों को नाराज़ करने का जोखिम उठाएगी। रह गई बात नजमा आपा की तो इन दिनों उन्हें 8-10 घंटे मंत्रालय में काम करते देखा जा सकता है। और वे अपने विभाग के सेक्रेटरी को बकायदा इस बात का ब्रीफ करती हैं कि उनके मंत्रालय की प्रो-एक्टिव इमेज की खबर पीएमओ तक जरूर पहुंचनी चाहिए।

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…और अंत में

Posted on 19 January 2016 by admin

पिछले दिनों केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने अपने घर पत्रकारों को लंच पर आमंत्रित किया और बातों ही बातों में इस बात को स्वीकार किया कि उनसे यूपी में भाजपा संगठन संभालने की जिम्मेदारी लेने को कहा गया था, पर उन्होंने फिलवक्त यह जिम्मेदारी लेने से शालीनता से मना कर दिया है। अब कुछ उत्साही भाजपा वाले मंत्री जी की इस शालीनता को उनकी कायरता बताने पर तुले हैं।

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…और अंत में

Posted on 13 January 2016 by admin

ज्यों-ज्यों मोदी सरकार का ग्राफ तेजी से गिर रहा है, कांग्रेस का दिल बल्लियों उछल रहा है, अभी सप्ताह पूर्व कांग्रेस ने अपनी संभावनाओं को टटोलने के लिए एक देशव्यापी जनमत सर्वेक्षण करवाया है, इसके नतीजों से कांग्रेस के हौंसले बम-बम है। कांग्रेस 45 की गिनती से 100 पार जा रही है। इसे बिहार में 5, यूपी में 11, एमपी में 9, गुजरात में 11 सीटें मिलती दिखाई गई है, जबकि 2019 में अभी 3 साल का वक्त है, यानी कांग्रेस वापसी के लिए कमर कस रही है। (एनटीआई-

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रूठी-रूठी अम्मा मनाएं कैसे

Posted on 06 January 2016 by admin

तमिल महारानी जयललिता को लुभाने के लिए मोदी सरकार ने अपना संपूर्ण उपक्रम जारी रखा हुआ है। पिछले कुछ दिनों में कम से कम तीन केंद्रीय मंत्री जयललिता से मिलने चेन्नै जा पहुंचे। सबसे पहले अरूण जेटली जयललिता से मिले, उसके बाद नव वर्ष की बधाई देने के बहाने वेंकैया नायडू चेन्नै जा पहुंचे और वहां उनकी तमिल मुख्यमंत्री से लंबी बातचीत हुई। दरअसल तमिलनाडु के अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा अन्नाद्रमुक से चुनावी तालमेल चाहती है। सूत्र बताते हैं कि वेंकैया ने तो जयललिता को यहां तक ’ऑफर’ दे डाला कि अगर वे भाजपा के लिए राज्य की 25 सीट भी छोड़ दें तो भगवा पार्टी अन्ना द्रमुक के साथ चुनावी तालमेल के लिए तैयार है। पर अम्मा अंदर ही अंदर मोदी सरकार से खुन्नस खाई बैठी हैं, उन्हें लगता है कि कानूनी मामलों में मोदी सरकार ने उनकी उतनी मदद नहीं की, जितना कि उनसे वायदा किया गया था। फिर केंद्र सरकार की ओर से स्वयं कानून मंत्री सदानंद गौड़ा जयललिता से मिलने चेन्नै जा पहुंचे। सूत्र बताते हैं कि गौड़ा ने अम्मा से कहा-’देखिए आपके खिलाफ जो शिकायतें हैं, और जो मामले कोर्ट में चल रहे हैं, उस पर हम कुछ भी नहीं कर सकते, हां, हम अपनी ओर से कार्यवाही की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाएंगे।’ इस पर अम्मा ने किंचित तल्खी से कहा-’फिर ठीक है हमारा आपकी पार्टी से कोई चुनावी तालमेल नहीं हो सकता है, पर हम भाजपा के लिए इतना कर सकते हैं कि कन्याकुमारी और एक दो सीटों पर हम अपने उम्मीदवार नहीं उतारेंगे, जिससे इन सीटों से भाजपा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित हो सके।’ सदानंद गौड़ा भी अपना सा मुंह लेकर दिल्ली लौट आए।

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अगप का संकट

Posted on 06 January 2016 by admin

इस साल फरवरी मार्च में असम में विधानसभा चुनाव होने हैं, सो गठबंधन की राजनीति भी अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। भाजपा और कांग्रेस ये दोनों ही दल अगप पर डोरे डालने के उपक्रम में जुटी है। इस मसले पर अगप के दोनों गुट यानी प्रफुल्ल महंत और अतुल ग्रुप की अपनी अलग-अलग राय है। प्रफुल्ल महंत भाजपा के साथ जाने के सख्त खिलाफ हैं, वे कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन के साथ जाना चाहते हैं। महंत का खुले तौर पर कहना है कि भाजपा बिजनेसमैन की पार्टी है, जो सिर्फ अपना फायदा देखती है, बिहार चुनाव के बाद एनडीए के सहयोगी दलों का हश्र क्या हुआ इसे कोई भी देख सकता है। वहीं बोरा ग्रुप गुपचुप रूप से भाजपा के साथ जाने को तैयार है। बोरा ग्रुप के नेतागण अभी पिछले दिनों गुप्त रूप से राम माधव से मिले, पर कोई बात नहीं बन पाई।

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…और अंत में

Posted on 06 January 2016 by admin

पिछले दिनों एक फ्लाइट में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की मुलाकात हो गई। सूत्र बताते हैं कि मांझी ने नीतीश से पुराने गिले-शिकवे भुलाने का अनुरोध किया और यह भी माना कि भाजपा के साथ जाने का उनका निर्णय गलत था। नीतीश ने इसका कारण पूछा तो मांझी फट पड़े, बोले-’भाजपा वालों ने चुनाव के बाद मुझे राज्यसभा देने का वायदा किया था, अब मैं अमित शाह और मोदी से मिलने का समय मांग रहा हूं तो वह भी नहीं मिल पा रहा है।’ कहते हैं कि बातों ही बातों में मांझी ने साफ कर दिया कि वे लालू के साथ जाने को तत्पर हैं और इस बारे में उनकी लालू से एक निर्णायक बातचीत भी हो चुकी है।

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