Posted on 11 July 2023 by admin
पिछले दिनों कांग्रेस के असंतुष्ट गुट जी-23 के प्रमुख नेता मनीष तिवारी राहुल गांधी के साथ एक कार्यक्रम में बंगलुरू में नज़र आए जहां राहुल को महिलाओं की फ्री बस यात्रा को हरी झंडी दिखानी थी। इसी कार्यक्रम के दौरान राहुल मनीष की गाड़ी में आकर बैठ गए, जहां दोनों नेताओं के दरम्यान एक लंबी बातचीत हुई। दरअसल, पिछले काफी दिनों से यह चर्चा गरम थी कि पार्टी हाईकमान से नाराज़ चल रहे मनीष भाजपा और आप नेताओं के निरंतर संपर्क में हैं। आप के राज्यसभा सदस्य राघव चड्डा का भी पंजाब में मनीष के घर खूब आना-जाना लगा रहता है। वहीं बताया जाता है कि मनीष की केजरीवाल से भी सीधी बातचीत होती है। संघ से जुड़े एक प्रमुख नेता ने भी पिछले दिनों मनीष को भाजपा में ‘ाामिल होने का आॅफर भिजवाया था, ऐसा सूत्र बताते हैं। पर पिछले 35 सालों से कांग्रेस से जुड़े रहे मनीष को कांग्रेस छोड़ने में काफी हिचक है। इसे भांपते हुए ही राहुल ने फिर से उनके आगे दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। सोनिया गांधी से मनीष के निजी ताल्लुकात हमेशा से बेहतर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो चूंकि पंजाब में कांग्रेस को कैप्टन अमरिंदर के बाद एक माकूल चेहरे की तलाश है। सो, वे मनीष को पंजाब की कमान सौंपना चाहती है, हालांकि नवजोत सिंह सिद्धू जेल से बाहर आकर सक्रिय राजनीति में उतर आए हैं। पर कांग्रेस के ‘ाीर्ष नेतृत्व के समक्ष उनके प्रति विश्वसनीयता का संकट है। सो, ऐसे में पंजाब में काग्रेस मनीष तिवारी पर दांव लगा सकती है।
Posted on 19 June 2023 by admin
कर्नाटक चुनाव के दंश के बाद से ही लगातार भाजपा में मंथन बैठकों का दौर जारी है, अभी बीते शुक्रवार को ही अमित शाह, बी एल संतोष और जे पी नड्डा की भाजपा महासचिवों के साथ एक अहम बैठक हुई। दरअसल, भगवा पार्टी की यह सारी कवायद आनेवाले 2024 के आम चुनाव को लेकर है जहां पार्टी किसी भी मोर्चे पर कमजोर नहीं दिखना चाहती। इस कड़ी में सबसे पहला कदम प्रदेश अध्यक्षों को बदलने का हो सकता है। इससे पूर्व पार्टी ने बिहार, राजस्थान, दिल्ली और ओडिशा में नए अध्यक्ष बनाए गए थे। पर इनमें से भी कई सिरमौर पार्टी नेतृत्व की आकांक्षाओं पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। यूपी में भी पश्चिमी यूपी के जाट नेता भूपेंद्र चैधरी को अध्यक्षीय पारी सौंपी गई पर पार्टी नेतृत्व उनके प्रदर्शन से भी खुश नहीं बताया जाता। महाराष्ट्र और झारखंड में भी नए अध्यक्ष लाने की तैयारी है। झारखंड में पार्टी बतौर प्रदेश अध्यक्ष किसी आदिखसी चेहरे पर दांव लगाना चाहती है, फिलहाल इस रेस में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी सबसे आगे बताए जा रहे हैं। हालांकि इस रेस में अर्जुन मुंडा और समीर ओरांव भी शामिल हैं, पर सूत्रों की मानें तो वहां दीपक प्रकाश की जगह भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी का नाम लगभग तय हो चुका है। महाराष्ट्र में चंद्रशेखर बावनकुले अगस्त 2022 में ही पार्टी अध्यक्ष बने हैं पर उनके कामकाज और तौर तरीकों से पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व नाराज़ बताया जा रहा है, सो महाराष्ट्र की कमान किसी ‘प्रो एक्टिव लीडर’ को सौंपी जा सकती है। कर्नाटक में भी भाजपा लंबे समय से नलिन कतिल के विकल्प की तलाश में जुटी है, यानी 2024 में भाजपा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।
Posted on 19 June 2023 by admin
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस पिछले दो महीनों में कई बार शिंदे सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की बात दुहरा चुके हैं, पर वह नायाब घड़ी कभी आती ही नहीं है। इस पर महाराष्ट्र में एक चुटकुला चल पड़ा है कि ‘अगर पत्नी यह कह कर मेकअप रूम में गयी है कि ‘दस मिनट में तैयार होकर आती हूं तो फिर हर आधे घंटे में दरवाजा खटखटाने की क्या जरूरत है?’
Posted on 19 June 2023 by admin
महाराष्ट्रके एकमात्र कांग्रेसी सांसद सुरेश उर्फ बालू धानोरकर के अचानक निधन से चंद्रपुर सीट खाली हो गई है। अब चंद्रपुर उपचुनाव में यहां कांग्रेस से प्रत्याशी कौन होगा इसको लेकर पार्टी नेताओं में कोहराम मचा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले दिवंगत धानोरकर की विधायक पत्नी प्रतिभा को यहां से मैदान में उतारना चाहते हैं, वहीं पार्टी नेताओं का एक और तबका चंद्रपुर के पूर्व सांसद और टेªड यूनियन नेता नरेश पुगलिया को यहां से टिकट दिए जाने का पक्षधर है। 2019 लोकसभा चुनाव के नामांकन के एक दिन पहले तब के शिवसेना विधायक धानोरकर कांगे्रस में ‘ाामिल हुए थे, वे बड़े ‘ाराब व्यवसायी थे, उनके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी ‘ाायद इसीलिए उस वक्त उन्होंने मुकुल वासनिक और विजय वडीटवार जैसे दिग्गज नेताओं को भी अपने पक्ष में कर लिया और इन्हीं नेताओं ने तब पुगलिया को बागी होने से रोक लिया था। 2019 में गठबंधन के तहत चंद्रपुर सीट शिवसेना कोटे से भाजपा के पाले में आ गई थी इसी वजह से बालू को आनन-फानन में शिवसेना छोड़ कांग्रेस का दामन थामना पड़ा था। वहीं इस सीट के प्रबल दावेदार नरेश पुगलिया राहुल गांधी के खास विश्वस्तों में ‘ाुमार होते हैं। याद कीजिए जब राहुल गांधी विदर्भ में लीलावती और कलावती से मिलने उनके घर गए थे तो राहुल के कहने पर पुगलिया ने ही इन दोनों की आर्थिक मदद की थी। विदर्भ के एक किसान जिन्होने एक क्रांतिकारी बीज का अविष्कार किया था, जब उसने आत्महत्या कर ली तो राहुल के कहने पर ही पुगलिया ने उनके पुत्र की ‘बल्लारपुर पेपर मिल’ में नौकरी लगवायी। पार्टी का एक गुट यहां दिवंगत धानोरकर की पत्नी प्रतिभा को टिकट दिए जाने का विरोध कर रहा है और कह रहा है कि पार्टी जालंधर उपचुनाव से सबक सीखे जहां कांग्रेस के दिवंगत सांसद की पत्नी कमलजीत कौर को यहां हार का मुंह देखना पड़ा और 24 साल बाद कांग्रेस ने अपनी जालंधर की परंपरागत सीट आप के हाथों गंवा दी।
Posted on 19 June 2023 by admin
पिछले दो महीनों में कम से कम दो बार राकांपा नेता ‘ारद पवार की मुलाकात गौतम अडानी से हुई है। वैसे भी पवार के थैलीशाहों के साथ पुराने रिश्ते रहे हैं, उनका अपना एक बड़ा आर्थिक साम्राज्य दूर-दूर तक फैला है। सो, जब विपक्षी दलों ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर इतना ‘ाोर मचा रखा था तो पवार ने अपनी केंचुल से बाहर आकर अपने साथी विपक्षी दलों की जेपीसी की मांग को खारिज कर दिया था यह उनके परम मित्र अडानी के लिए एक बड़ा अभयदान था। वैसे भी अडानी और पवार के रिश्ते कोई आज के नहीं हैं, यह रिश्ता 3 दशक पुराना है। पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उद्धव ठाकरे अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने विदेश गए हुए हैं तो एक दिन यूं अचानक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलने पवार उनके सरकारी आवास वर्षा क्यों पहुंच जाते हैं और इन दोनों नेताओं के दरम्यान एक घंटे से भी ज्यादा क्या बातचीत होती है? पवार जैसे ही शिंदे से मिल कर वापिस आते हैं वे डेढ़ घंंटे गौतम अदानी से मिलते हैं। सूत्रों की मानें तो पवार अपनी पुत्री सुप्रिया सूले को किसी भी भांति महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर काबिज देखना चाहते हैं चाहे वह भाजपा के सहयोग से हो या शिवसेना के, पवार का द्वार इसके लिए हमेशा खुला है।
Posted on 28 May 2023 by admin
नियति के गर्भ में कई अन्चीहने फैसले कैद रहते हैं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी भाजपा के बुने जाल में फंस गए और अपने जिस सरकारी निवास 12 तुगलक लेन में वे पिछले 19 साल से रह रहे थे, सूरत कोर्ट के एक अनचाहे फैसले की वजह से उन्हें यह अपना घर छोड़ना पड़ा और वे अपनी मां के घर 10 जनपथ में शिफ्ट हो गए। मुंबई के एक नामचीन ज्योतिष पंडित राजकुमार शर्मा ने पिछले दिनों 12 तुगलक लेन की परिक्रमा लगाई और वहां के वास्तुदोष को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर की हैं। पंडित शर्मा के मुताबिक 12 तुगलक लेन दक्षिणमुखी घर है, जो वास्तु के लिहाज से अच्छा नहीं है, इससे इस घर में ‘निगेटिव एनर्जी’ व्याप्त रहती है। यही वजह थी कि पिछले कई वर्षों से कांग्रेस को पराभव का मुंह देखना पड़ा। राहुल अमेठी हार गए। लोकसभा में कांग्रेस की सीटें लगातार कम हुई, पार्टी के कई कद्दावर नेता कांग्रेस छोड़ अन्यत्र चले गए। एक वक्त पार्टी में ही राहुल का इकबाल काफी कम हो गया। पंडित शर्मा कहते हैं कि ’जिस दिन से राहुल ने 12 तुगलक लेन छोड़ा है उनका उदय काल शुरू हो गया है।’ कांग्रेस ढोल-नगाड़े के गूंज के साथ कर्नाटक जीत गई, आने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी इसकी संभावनाएं बेहतर दिख रहीं है। पंडित जी कहते हैं कि ’राहुल गांधी की राशि वृश्चिक है और लग्न कर्क है। दिसंबर 2022 से राहुल की चंद्रमा की महादशा शुरू हुई है जो 2032 तक चलेगी। यह दशा एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा कर रही है। आने वाले दिन राहुल के लिए चमकदार और आशा से भरे हो सकते हैं, इस अवधि में उनका 10 जनपथ शिफ्ट कर जाना भी एक शुभ बदलाव के लक्षण हैं, क्योंकि 10 जनपथ का वास्तु राहुल के लिए पॉजिटिव एनर्जी लेकर आएगा।’
Posted on 28 May 2023 by admin
यह तो कर्नाटक चुनाव के नतीजे आने से पहले ही सबको पता था कि अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई तो ताज सिद्दारमैया के सिर ही सजेगा। एक तो वे प्रदेश की 36 फीसदी ओबीसी जातियों के सबसे बड़े नेता हैं, वे जिस कुरूबा जाति से आते हैं राज्य में इस जाति का प्रतिशत भी 7 फीसदी से ज्यादा है। और सौ बात की एक बात कि वे मुख्यमंत्री के रूप में राहुल गांधी की पहली पसंद हैं। पर कांग्रेस का एक गुट ऐसा भी था जो लगातार डीके शिवकुमार की वकालत करता रहा। उसके पक्ष में लगातार कदमताल करता रहा। इस गुट की अगुवाई राहुल प्रिय के सी वेणुगोपाल और कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला कर रहे थे। यह देख कर्नाटक कांग्रेस के विधायक जी परमेश्वर अपने समर्थकों के साथ मैदान में उतर आए और डिप्टी सीएम पद की मांग करने लगे। कांग्रेस ने इन सारी परिस्थितियों को भांपते हुए अपने आब्जर्वर सुशील कुमार शिंदे को यह जिम्मेदारी सौंपी कि ’वे तत्काल इस मामले को निपटाएं।’ शिंदे ने आनन-फानन में अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी और कहा कि ’यदि जल्दी ही सिद्दारमैया का नाम सीएम के लिए घोषित नहीं किया गया तो वे बागी हो सकते हैं क्योंकि भाजपा व जेडीएस के कुछ नेता उनके निरंतर संपर्क में हैं, सो कांग्रेस के कुल 135 में से 96 विधायक लेकर वे अलग हो सकते हैं और भाजपा के समर्थन के साथ अपनी सरकार बना सकते हैं।’ ऐसे में डीके के साथ गिनती के 32 विधायक ही रह गए थे। इसके साथ ही राहुल की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अपने संन्यास की घोषणा करने वाले महाराष्ट्र के दलित नेता सुशील कुमार शिंदे की कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में वापसी भी हो गई है।
Posted on 28 May 2023 by admin
’वह कहीं दूर जो एक दीया अब भी जल रहा है
तेरी नामुराद हवाएं हर तरफ पहुंची नहीं हैं अभी’
आखिरकार केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजुजु को अपनी अपरिक्वता और बड़बोलेपन की कीमत चुकानी ही पड़ी, उन्हें पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में भेज कर पीएम ने उन्हें एक तरह से यह समझाने की कोशिश की है कि ’वे जरा ‘ग्राउंडेड’ ही रहें।’ उनकी जगह लेने वाले अर्जुन राम मेघवाल की बस दो खूबियों ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है, एक तो वे पीएम के बेहद करीबी मंत्रियों में शुमार होते हैं, दूसरा वे उतना ही बोलते और करते हैं जितना उनसे कहा जाता है। रिजुजु के यूं अचानक जाने की पटकथा तब लिखी गई जब नए सीबीआई चीफ के चयन को लेकर प्रधानमंत्री, देश के मुख्य न्यायाधीश और नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी की एक महत्वपूर्ण बैठक आहूत थी। शुरूआती रूझानों में पीएम का आग्रह इस बात को लेकर दिखा कि ’क्यों नहीं सीबीआई के मौजूदा डायरेक्टर सुबोध जायसवाल को ही एक एक्सटेंशन दे दिया जाए।’ सूत्र बताते हैं कि इस मामले में सीजेआई की राय बिल्कुल स्पष्ट थी कि ’अभी अदालत में ईडी डायरेक्टर के सेवा विस्तार पर इतने सवाल खड़े किए हैं, ऐसे में सीबीआई डायरेक्टर इससे अलग कैसे हो सकते हैं?’ इसके बाद 1987 बैच के दिनकर गुप्ता के नाम की चर्चा हुई, जो वर्तमान में एनआईए चीफ हैं। पर मुख्य न्यायाधीश की स्पष्ट राय थी कि ’ऐसी नियुक्तियों में हमेशा वरिष्ठता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए,’ इस नाते 1986 बैच के प्रवीण सूद सबसे सीनियर थे और उनके नाम पर मुहर लग गई। इसके बाद चाय के दौरान पीएम और सीजेआई में न्यायपालिका और विधायिका के बीच परस्पर सौहार्द्र का जिक्र आया। और जब बात निकली तो बात दूर तलक गई। मुख्य न्यायाधीश ने सरकार के मंत्री के उन बयानों की ओर पीएम का ध्यान आकृष्ट कराया जहां वे बात-बेबात कॉलिजियम सिस्टम को गरियाते रहे हैं, रिजुजु का वह बयान भी न्यायपालिका के लिए खासा संवेदनशील था जिसमें उन्होंने कुछ रिटायर्ड जजों को ’एंटी इंडिया’ गतिविधियों में संलिप्त बता दिया और यह भी कहा कि ’ये रिटायर्ड जज गण विपक्ष का ’रोल प्ले’ करने की कोशिश कर रहे हैं।’ जाहिर है इतने बड़े और संवेदनशील बयान सिर्फ रिजुजु के मन में तो नहीं पनपा होगा? सो, 2024 के चुनाव की आहटों की बेला में परस्पर सहयोग के कसीदे पढ़े गए, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी से अडानी को क्लीनचिट भी मिल गई, सेबी को भी तीन महीने का वक्त मिल गया और बदले में रिजुजु की कानून मंत्रालय से छुट्टी हो गई।
Posted on 28 May 2023 by admin
’नाहक गुमान था इस कागज़ की कश्ती को अपने आप पर
इक-इक आंसू से भी समंदर में सैलाब आ जाता है’
जीतना जिनकी आदतों में शुमार था, जिनके भाल विजयी तिलक के अभ्यस्त थे, जिनकी हुंकार और गर्जना न्यूज़ चैनलों के ‘सिग्नेचर ट्यून’ थे, दुनिया की उसी सबसे बड़ी पार्टी के सबसे बड़े महानायक को कर्नाटक की धरती पर अगर हार का स्वाद चखना पड़ा है तो यह सियासी रंगमंच का सबसे अधूरा स्वांग है। भाजपा की चुनावी तैयारियां कांग्रेस से कहीं आगे थीं। जब से कर्नाटक में चुनाव घोषित हुआ और जब चुनावी आचार संहिता लगी इस अवधि में भाजपा धुरंधरों ने 3116 कैंपेन रैली कर दी, भगवा नेता गण 311 मंदिर व मठों में शीश नवा आए, इसके अलावा 1377 रोड शो, 9125 पब्लिक मीटिंग, गली-नुक्कड़ों पर होने वाली 9077 स्ट्रीट कॉर्नर मीटिंग। भाजपा ने अपने 128 राष्ट्रीय नेताओं को कर्नाटक के चुनाव में झोंक दिया। 15 कैबिनेट मंत्रियों ने यहां डेरा-डंडा डाल रखा था। पीएम मोदी ने भी खुद को यहां दांव पर लगा दिया, उन्होंने न सिर्फ अपने चेहरे पर यहां वोट मांगे बल्कि 19 रैलियां और 6 रोड शो भी कर दिए। बेंगलुरू के उनके रोड शो का अभूतपूर्व नज़ारा था, वे 26 किलोमीटर चले। चुनाव के आखिरी 10 दिनों में तो पीएम ’कनेक्ट विथ द् पीपल’ को अलग ऊंचाई पर ले गए, पीएम जहां भी गए अपने साथ लिंगायतों के सबसे बड़े नेता येदुरप्पा को सदैव अपने साथ रखा। गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपना यहां सर्वस्व झोंक दिया, उन्होंने 16 रैलियां और 15 रोड शो किए, भाजपाध्यक्ष नड्डा ने 10 रैलियां और 15 रोड शो किए, केंद्रीय नेत्री स्मृति ईरानी ने 17 पब्लिक मीटिंग्स और 2 रोड शो किए, योगी की भी 9 रैलियां और 3 रोड शो हुए, असम के बड़बोले सीएम हेमंत बिस्वा सरमा ने 15 रैलियां और 1 रोड शो किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भी 6 रैलियां और 1 रोड शो हुआ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शिंदे और उप मुख्यमंत्री फड़णवीस ने मिल कर 17 रैलियां की। यह फेहरिस्त और भी लंबी है, ‘पर होइए वही जो राम रचि राखा।’
Posted on 06 May 2023 by admin
दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र आस्तिक नारायण ने अपने पहले ही अटेम्ट में जेईई मेंस में 100 पर्सेंटाइल लाकर सबको चौंका दिया, दिल्ली की आप सरकार के लिए भी यह एक मौका था कि ’वे अपने दावे को पुष्ट कर सके कि उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूलों का कायाकल्प कर दिया है।’ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल जो इन दिनों अपने 45 करोड़ के सरकारी निवास को लेकर विपक्षियों के निशाने पर हैं वे इस मौके को लपकना चाहते थे। सो, उन्होंने अपनी टीम से कहा कि ’वे आस्तिक को बाबा साहेब अंबेडकर की एक प्रेरक बॉयोग्राफी भेंट करना चाहते हैं।’ उनकी टीम काम पर लग गई और सर्वसम्मति से एक पुस्तक का चुनाव किया गया, वह पुस्तक थी-’अंबेडकर: ए लाइफ’ जिसे लिखा था शशि थरूर ने, जो अब कांग्रेस के एक बड़े नेता हैं। जब यह पुस्तक केजरीवाल के संज्ञान में लाई गई तो वे इस पर किंचित झिझक गए, उनकी द्विविधा थी कि ’एक कांग्रेस नेता द्वारा लिखित बॉयोग्राफी देने से इसके अलग राजनैतिक माएने न निकाले जाए,’ सो इस पुस्तक की जगह आनन-फानन में एक वैकल्पिक पुस्तक की पड़ताल हुई और केजरीवाल ने अपने कार्यालय में आयोजित एक समारोह में आस्तिक को जो पुस्तक भेंट की, वह थी आकाश सिंह राठौर द्वारा लिखित ’बीकमिंग बाबा साहेब अंबेडकर’।