Posted on 28 July 2021 by admin
लंबे समय से संघ और भाजपा के बीच समन्वय का रास्ता तैयार करने वाले संघ के वरिष्ठ नेता कृष्ण गोपाल की यूं एक झटके में विदाई चौंकाने वाली है। संघ से जुड़े विश्वस्त सूत्र खुलासा करते हैं कि भाजपा के घोषित चाणक्य अमित शाह जब बंगाल चुनाव के फौरन बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने गए थे तो वहां कृष्ण गोपाल भी मौजूद थे। कहते हैं कृष्ण गोपाल ने भाजपा और सरकार के नंबर दो अमित शाह से कुछ अप्रिय सवाल पूछने का अदम्य साहस दिखाया। कृष्ण गोपाल का कहना था कि पिछले 4 सालों से संघ ने पश्चिम बंगाल में अपने को झोंक रखा था, संघ के स्वयंसेवकों ने बंगाल में कमल खिलाने के प्रयास में दिन-रात एक कर दिए थे, पर पार्टी हाईकमान के चंद गलत बोलों और चंद गलत फैसलों की वजह से वहां बाजी पलट गई। खास कर भाजपा हाईकमान ने टिकट बंटवारे में वहां काफी गलतियां कर दीं, चुन-चुन कर अन्य पार्टियों से भाजपा में आए लोगों को थोकभाव में टिकट बांटे गए। कहते हैं इस पर शाह ने उन्हें समझाना चाहा कि चुनावों में हार-जीत तो चलती रहती है, भाजपा यूपी और त्रिपुरा में इतनी बंपर जीत दर्ज कराएगी इसका इल्म किसको था, कहते हैं कृष्ण गोपाल बैठक बीच में ही छोड़ कर चले गए, स्वयं भागवत ने बीच-बचाव के प्रयास किए, पर बात बनी नहीं, जाते-जाते शाह ने संघ प्रमुख से बस इतना ही निवेदन किया कि ‘आप यूपी में समन्वय के लिए किसी और को देख लीजिए‘ और वहीं से कृष्ण गोपाल की बाजी पलट गई।
Posted on 28 July 2021 by admin
’शफ्फाक तेरा ये चेहरा जमाने की नई रोशनी से अलमदार है
किस्से-कहानियों में कहां बयां होता तेरा जो नया किरदार है’
किसे मालूम था कि दिल्ली के झिलमिल कॉलोनी से झिलमिला कर संघ की सीढ़ियां चढ़ने वाला नई सोच का यह मेकेनिकल इंजीनियर एक दिन संगठन की इतनी महती जिम्मेदारियां संभालेगा। 57 वर्षीय संघ के संयुक्त महासचिव अरूण कुमार को जब कृष्ण गोपाल जैसे दिग्गज को रिप्लेस कर चुनावी वर्ष में प्रवेश करने वाले यूपी का कोऑर्डिनेटर बनाया गया तो सियासी दीवार पर लिखी इबारत को किंचित साफगोई से पढ़ा जा सकता था कि यूपी को लेकर संघ और भाजपा दोनों की पेशानियों पर बल हैं। अरूण कुमार को आप दत्तात्रेय स्कूल का ही एक झंडाबरदार मान सकते हैं, जो अपनी सोच और अप्रोच दोनों में ही ज्यादा प्रगतिशील दिखते हैं। संघ की मान्य परंपराओं से अलहदा अरूण कुमार को आज भी अपने टेबलेट पर ऑनलाइन रहना ज्यादा पसंद है, टैब पर ही वे अपनी पसंद का साहित्य पढ़ते हैं, काम की खबरें देखते हैं और गाहे-बगाहे सामाजिक चिंतन से जुड़े आंकड़ों को भी खंगालते हैं। इन्हें जम्मू-कश्मीर मामलों का एक्सपर्ट माना जाता है, सन् 2008 में ये तब सुर्खियों में आए थे जब जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री गुलाब नबी आजाद ने ‘अमरनाथ श्राइन बोर्ड’ को भंग कर दिया था, ये अरूण कुमार ही थे जिन्होंने उस विरोध प्रदर्शन को एक आंदोलन में तब्दील कर दिया था। ईनाम के तौर पर संघ ने 2016 में इन्हें अपना ऑल इंडिया प्रचार प्रमुख बनाया, सुरेश सोनी की जगह ज्वॉइंट जनरल सेक्रेटरी बना कर संगठन में इनकी महत्ता को प्रतिपादित किया गया और 2015 से भाजपा और संघ में समन्वय बिठाने का जो काम कृष्ण गोपाल देख रहे थे, वह इनके हवाले कर दिया गया है। एक बाल स्वयंसेवक के रूप में संघ से जुड़ने वाले अरूण कुमार के समक्ष असली चुनौती योगी आदित्यनाथ और भाजपा हाईकमान के बीच सामंजस्य बिठाने की रहेगी, यही ककहरा उन्हें कंठस्थ करना होगा।
Posted on 09 July 2021 by admin
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अलख जगाने वाले उनके डिप्टी केशव प्रसाद मौर्या को मनाने और उन्हें सही राह दिखाने में संघ के वरिष्ठ नेता कृष्ण गोपाल का सबसे बड़ा हाथ है। जब मौर्य ने यह बयान दिया कि यूपी के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला दिल्ली करेगा तो कृष्ण गोपाल सीधे मौर्या के घर चले गए और उन्हें अकेले में बिठा कर समझाया कि अगर 22 में दुबारा प्रदेश में भाजपा की सरकार आई तो आप भी मुख्यमंत्री हो सकते हैं, तब कहीं ऐसा न हो कि योगी आपके नाम पर अड़ जाएं कि इनके सिवा किसी को बना दो। कृष्ण गोपाल ने मौर्या को सलाह दी कि वे योगी का विश्वास अर्जित करने की कोशिश करें। फिर जब मौर्या के नव विवाहित पुत्र और नव वधु को आशीर्वाद देने उनके घर दत्तात्रेय होसाबोले और मुख्यमंत्री योगी पधारे तो मौर्य की भंगिमाएं बदली हुई थीं। उन्होंने बाहर निकल कर पत्रकारों से कहा कि ’योगी कल भी हमारे मुख्यमंत्री थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे।’ कृष्ण गोपाल ने समझ लिया कि तीर निशाने पर लगा है।
Posted on 09 July 2021 by admin
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Posted on 09 July 2021 by admin
बहुत ढोल-नगाड़ों के शोर के साथ यूपी के मुख्यमंत्री योगी दिल्ली पधारे थे, जहां वे भाजपा और सरकार के नंबर दो अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष नड्डा से मिले। इसके बाद वे पीएम से मिलने पहुंचे, विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि योगी को पीएम ने कोई घंटे भर का समय दिया, जिसमें शुरूआत के 45 मिनट तो प्रधानमंत्री ने योगी सरकार के साढ़े चार साल की रिपोर्ट कार्ड देखी। यह एक ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन था जिसे खास तौर पर पीएम के लिए तैयार किया गया था। यह प्रेजेंटेशन योगी के चहेते अधिकारी अवनीश अवस्थी द्वारा तैयार की गयी थी। इस एवी के समाप्त होने के कोई 15 मिनट तक पीएम ने योगी से वन-टू-वन बात की और उनसे सख्त लहज़ों में कहा कि ’चूंकि अब यूपी में चुनाव सिर पर है, इसीलिए सबको साथ लेकर चलना बहुत जरूरी होगा।’ सूत्रों की मानें तो पीएम ने अपनी पूरी बातचीत में न तो किसी व्यक्ति विशेष की नाराज़गी या किसी खास गुट के असंतोष का ही जिक्र किया, बस उन्होंने सपाट लहज़ों में योगी से आग्रह किया कि ’उन्हें अपने व्यवहार और शासन चलाने के तौर तरीकों में किंचित और उदार होने की जरूरत है और साथियों से सामंजस्य बिठाने की दरकार है।’ शायद तब ही योगी को पीएम की ओर से यह संकेत भी दे दिया गया कि ’यूपी विधानसभा का अगला चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाना है।’ कहते हैं योगी ने पीएम को यह भी बताया कि ’वे अपने मंत्रिमंडल का विस्तार 15 जुलाई के बाद करना चाहते हैं, तब तक जिला पंचायत चुनाव खत्म हो जाएंगे, इसके बाद उन्हें किसी की नाराज़गी का डर भी नहीं रहेगा।’ इससे इतना तो पता चल ही जाता है कि मोदी के प्रिय अधिकारी एके शर्मा और ताजा-ताजा बीजेपी में शामिल हुए जितिन प्रसाद को अभी मंत्री बनने के लिए 15 जुलाई तक का इंतजार करना होगा। यूपी में विधान परिषद की चार सीटें खाली है, इसमें से एक सीट जितिन प्रसाद को और दूसरी सीट संजय निषाद को मिल सकती है। यानी जितिन एमएलसी बन कर मंत्री की कुर्सी तक का सफर तय कर सकते हैं।
Posted on 09 July 2021 by admin
’हवाओं के साथ चलने का ये क्या खूब हुनर है
दरवाजे पर टीका लगा दुआयें आज आईं घर है’
कयासों की बोसीदा पोटली उठाए यह पुरानी सी खबर आज फिर नया रूप धर के आई है, विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि ’आज या अगले रविवार को मोदी मंत्रिमंडल विस्तार का रुका फैसला अपने परवाज़ भर सकता है।’ मंत्री पद चाहने के आतुर नेताओं की धड़कनें फिर से तेज हो गई हैं। कहते हैं भूपेंद्र यादव को दो दिनों के गुजरात दौरे पर जाना था, उनसे दिल्ली में बने रहने को कहा गया है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के लिए अब दिल्ली दूर नहीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की उम्मीदों की रेल अब पटरी पर दौड़ सकती है। नेहरू गांधी परिवार के भगवा चिराग वरूण गांधी की महत्वाकांक्षाओं का सफर रोशन हो सकता है, उन्हें स्वतंत्र प्रभार दिए जाने की चर्चा है। अपना दल (सोनेवाल) की अनुप्रिया पटेल को भी इस दफे राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है। यूपी से एक और नाम की चर्चा है वे हैं संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद जो संत कबीर नगर से सांसद हैं। जदयू कोटे से लल्लन सिंह और आरसीपी सिंह के नाम के चर्चे हैं, चिराग के घर को धू-धू करने वाले और उनकी पार्टी में तोड़ के नायक चाचा पशुपति पारस को भी मंत्री बनाने का वायदा हुआ है, अगर वे मंत्री बनते हैं तो रामविलास पासवान के सरकारी आवास 12 जनपथ पर भी उनका कब्जा हो सकता है। बंगाल से दिनेश त्रिवेदी और दिलीप घोष के नामों की चर्चा है, बाबुल सुप्रियो का मंत्री पद छिन सकता है। बिहार से सुशील मोदी का दावा है पर इसके लिए बिहार के दो मंत्रियों आरके सिंह और नित्यानंद राय की छुट्टी हो सकती है। नित्यानंद राय को बिहार प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। हरियाणा से जाट नेता ब्रिजेंद्र सिंह का नंबर लग सकता है, लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल भी लकी साबित हो सकते हैं। राज्यसभा सांसद अश्विनी वैष्णव का नाम भी चर्चा में है, महिला कोटे से पूनम महाजन और मीनाक्षी लेखी के नाम लिए जा रहे हैं। 25 जून को देश में इमर्जेंसी लगी थी, भाजपा इसे आपातकाल विरोधी दिवस के तौर पर मनाने जा रही है, अगर इस बाबत कई कार्यक्रम हुए तो फिर आज की जगह 26 या 27 जून को मोदी अपने मंत्रिमंडल में वांछित फेरबदल कर सकते हैं।
Posted on 06 June 2021 by admin
’नादां आसमां भी सचमुच आज हैरां है
कितनी ऊंची तेरी ये उड़ान है’
यूपी पंचायत चुनाव, बंगाल चुनाव और कोविड कुप्रबंधन की तोहमतें झेलती सरकार और पार्टी को अभयदान देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सियासी अनिश्चितताओं के भभकते सूरज को भी लील लेने को तैयार है। पखवाड़े भर पूर्व पीएम के साथ मैराथन बैठक, फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा इस गुरूवार को मोदी सरकार के चंद महत्वपूर्ण मंत्रियों के साथ संघ कार्यालय में शीश नवा आए और इस शनिवार से दिल्ली में आहूत हुई तीन दिवसीय संघ की बैठक का एजेंडा भी कहीं न कहीं भाजपा के आसपास घूम रहा है। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, भैय्याजी जोशी और सुरेश सोनी जैसे संघ के वरिष्ठ नेताओं के अलावा दत्तात्रेय होसाबोले की नई टीम के 8 अन्य नेतागण भी शामिल हैं। देश और राज्यों के पिछले कुछ चुनाव इस बात की चुगली खाते हैं कि हालिया वर्षों में कैसे संघ भाजपा के लिए ’बूथ मैनेजमेंट’ से लेकर एक’ इनपुट गिविंग एजेंसी’ के तौर पर काम करने लगा हैं। संघ रणनीतिकारों को कहीं शिद्दत से यह इल्म हो चला है कि बनिए और अगड़ी जातियों में उनका हिंदुत्व का बिगुल अपने सेचुरेशन पर आ गया है, जब से केंद्र में मोदी की सरकार आयी है संघ ने अपने और भाजपा के लिए एक बौद्धिक वर्ग भी तैयार कर लिया है। संघ अब एक बड़े बदलाव की इबारत लिखना चाहता है कि कैसे वह पिछड़ी, अति पिछड़ी, दलित, महादलित और जनजातियों में अपनी पैठ बना सके, संघ जानता है कि अगर इन जातियों को ठीक से साधा नहीं जाएगा तो पूर्ण हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को कभी मूर्त रूप नहीं दिया जा सकता और यह ध्रुवीकरण सिर्फ और सिर्फ धर्म के आधार पर ही संभव है। सो, अपने नए प्रयासों में संघ दलितों और जनजातियों के पूज्य आदर्शों जैसे सुहेलदेव, दलदाऊ पासी, रविदास के महिमा मंडन के लिए इवेंट करने लगा है। पिछड़ी, अति पिछड़ी जातियों को लुभाने के लिए कोटा के अंदर ’कोटा’ की बात करने लगा है। अति पिछड़ी जातियों जैसे निषाद, बिंद, कसैरा, कुम्हार, ठठेरा और तंबोली, गैर जाटव दलित, मुसहर, नट, कंजर जातियों में वह अपने पैर पसार रहा है। कच्ची ताड़ी का बुंदेलखंड इलाके में व्यवसाय करने वाली कबूतरा जाति के लोगों के लिए मंदिर बनाने में सहयोग कर रहा है, नट और सपेरा जातियों के बीच भी संघ के लोग दिन-रात काम कर रहे हैं, इसके बारे में प्रोफेसर बद्रीनाथ की हालिया प्रकाशित पुस्तक ’रिपब्लिक ऑफ हिंदुत्व: हाऊ द् संघ रिशेपिंग द इंडियन डेमोक्रेसी’ में बहुत विस्तार से चर्चा हुई है कि कैसे भारतीय राजनीति में संघ एक बड़े बदलाव का सूत्रपात कर चुका है।
Posted on 06 June 2021 by admin
2024 के लोकसभा चुनाव में संयुक्त विपक्ष की ओर से पीएम पद का दावेदार कौन होगा इसको लेकर अभी से कयासों के बाजार गर्म है, अगले वर्ष 2022 में होने वाले सात राज्यों यूपी, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल, पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करती है तो सबसे पहला दावा राहुल गांधी का हो सकता है। इसके बाद ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और नीतीश कुमार के नाम लिए जा सकते हैं। ममता बनर्जी अपने हाई वोल्टेज ड्रामों के लिए जानी जाती है, पर हिंदी भाषी राज्यों में उनकी अपील कम पड़ सकती है। अभी इस शुक्रवार को कलाई कुंडा एयरबेस की यात्रा में उन्होंने पीएम को भी आधे घंटे का इंतजार करवा दिया। ममता की तुनकमिजाजी दरअसल इस बात को लेकर थी कि पीएम के साथ आखिर शुभेंदु अधिकारी क्या कर रहे हैं? नीतीश की उम्मीद का दारोमदार लालू और वामपंथियों पर टिका है। रही बात अरविंद केजरीवाल की तो उन्हें उनके सियासी स्वांगों के लिए अभी से ’छोटा मोदी’ के नाम से पुकारा जाता है। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अगले वर्ष होने वाले सात राज्यों के चुनाव में सिर्फ मणिपुर को छोड़ कर हर राज्य में चुनावी तैयारियों को अंजाम दे रही है। अभी यूपी पंचायत चुनावों में आप ने कांग्रेस के 59 के मुकाबले 86 पंचायतों में जीत दर्ज करायी है। सो, केजरीवाल के दावे को भी कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।
Posted on 06 June 2021 by admin
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Posted on 06 June 2021 by admin
’तेरे मुंह से बिल्कुल अच्छी नहीं लगती लोकतंत्र की बात
तूने निगला है बोलता सूरज, तब आई है गूंगी रात’
पिछले रविवार को भाजपा शीर्ष के साथ हुई अपनी अहम बैठक में संघ ने साफ कर दिया कि यूपी और देश को लेकर उनका स्पष्ट दृष्टिकोण क्या है। संघ यह भी जानता है कि कोविड के कमजोर प्रबंधन को लेकर देश-दुनिया में केंद्र सरकार खास कर ’ब्रांड मोदी’ को झटका लगा है। सो, सूत्रों की मानें तो रविवार को आहूत उस बैठक में जिसमें भैयाजी जोशी, संघ के सह कार्यवाह दत्तात्रेय होसाबोले, पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा और भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष की उपस्थिति देखी गई। कहते हैं उस बैठक में मूलतः तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई, देश में कोरोना के हालात व वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार, यूपी चुनाव, और केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल का स्वरूप कैसा हो? विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में भैयाजी जोशी की उपस्थिति हैरान करने वाली थी, उनके सख्त लहज़े से हर कोई वाकिफ है। इस बैठक में संघ ने यूपी को लेकर अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं, पहला कि तमाम इन अटकलों पर विराम लगाया जाए कि योगी बदले जा रहे हैं, उनकी जगह राजनाथ सिंह को भेजे जाने की अफवाहों से संघ नाखुश बताया जाता है। संघ ने यूपी चुनाव के एजेंडे पर भी रोशनी डाली और साफ कर दिया कि यूपी का अगला चुनाव ‘हिंदुत्व’ पर लड़ा जाएगा, इस मुद्दे को आगे ले जाने के लिए फिलहाल भाजपा के पास योगी से बेहतर और कोई हिंदुवादी चेहरा नहीं है। यानी इतना तय मानिए कि बंगाल की तर्ज पर ही यूपी का अगला चुनाव भाजपा को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर ही लड़ना होगा। बंगाल हारने के बाद संघ का यह आग्रह तेज हो गया है कि उसे अपनी ’बैक सीट ड्राईव’ की रफ्तार बढ़ानी होगी। बैठक में एक तरह से यह भी साफ हो गया है कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में जब देश में कोरोना संक्रमितों के कुल मामले अनुमानतः 50 हजार से भी कम हो जाएंगे तब मोदी अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। कहते हैं इसके लिए संघ ने भी अपनी ओर से कुछ नाम सुझाए हैं। इस बैठक में संघ ने साफ कर दिया है कि आने वाले 2022 के विधानसभा चुनावों में वह
पहले से ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएगा। भाजपा को इसमें आपत्ति भी क्या हो सकती है।