Posted on 06 June 2021 by admin
कहां तो इस युवा नेता चिराग पासवान को सुर्खियों की सवारी गांठने की आदत पड़ी थी और कहां नियति ने उन्हें सियासी निर्वासन की पीड़ा झेलने को अभिशप्त कर दिया है। खबर मिली है कि चिराग ने खुद को आइसोलेशन में रखा हुआ है, लेकिन जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक बेतुका बयान देते हुए कहा कि ’जिस तरह से वैक्सीन के सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो लगाई जा रही है, वैसे ही कोरोना से होने वाली मौतों में डेथ सर्टिफिकेट पर भी प्रधानमंत्री की ही फोटो लगे।’ मांझी की इस बयान पर किसी ने टिप्पणी नहीं की सिवा लोजपा नेता चिराग के जिन्होंने कहा-’मांझी जानबूझ कर भाजपा के खिलाफ बोल रहे हैं।’ कहते हैं चिराग को मोदी निजी तौर पर पसंद करते हैं, सूत्रों की मानें तो पीएम ने स्वयं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से कहा है कि ’वे लोजपा का भाजपा में विलय का मार्ग निकाले, ताकि चिराग को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सके।’ हो सकता है जब देश में कोरोना का प्रकोप किंचित कम होने लगे तो नड्डा स्वयं चिराग से बात कर कोई फार्मूला निकाल सकें। संभव यह भी है कि जुलाई में होने वाले मोदी मंत्रिमंडल के फेरबदल में वहां चिराग भी अपनी रौशनी फैलाते नज़र आएं।
Posted on 06 June 2021 by admin
बिहार में जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कोविड प्रबंधन में चूक को लेकर बिहार के जदयू नेताओं ने शायद ही टीवी पर या सार्वजनिक रूप से मोदी या भाजपा का बचाव किया है। ममता को जीत की बधाई देने के लिए जदयू नेताओं में होड़ मची थी। वहीं इस 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर कई जदयू नेताओं ने राजीव गांधी के साथ नीतीश की फोटो लगा कर इस पूर्व प्रधानमंत्री को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जब भाजपा नेता राजीव प्रताप रूढ़ी पर भी पप्पू यादव ने उनके घर तिरपाल में ढक कर रखी गईं एंबुलेंस को मुद्दा बनाया तो जदयू रूढ़ी के बचाव में सामने नहीं आई। ऐसे वक्त में जबकि सरकार और विपक्ष की सीटों में महज़ 10 सीट का अंतर है, और पीएम मोदी के खिलाफ टिप्पणी करने वाले ‘हम’ के जीतन राम मांझी की भी 4 सीट है, तो बिहार में असंतोष के खेल को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। विश्वस्त सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो नीतीश कुमार का एक खास संदेशा लेकर उपेंद्र कुशवाहा लालू यादव से मिलने पिछले दिनों दिल्ली आए थे। लालू इन दिनों दिल्ली के पंडारा रोड पर अपनी पुत्री मीसा भारती के आवास पर ही टिके हुए हैं। कुशवाहा और लालू में क्या सियासी खिचड़ी पकी इसकी खुशबू अब तलक बाहर नहीं आ पाई है, पर सियासी नेपथ्य में कुछ बड़ी आहटों ने शक्ल अख्तियार करने शुरू कर दिए हैं।
Posted on 06 June 2021 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 06 June 2021 by admin
’तेरे मुंह से बिल्कुल अच्छी नहीं लगती लोकतंत्र की बात
तूने निगला है बोलता सूरज, तब आई है गूंगी रात’
पिछले रविवार को भाजपा शीर्ष के साथ हुई अपनी अहम बैठक में संघ ने साफ कर दिया कि यूपी और देश को लेकर उनका स्पष्ट दृष्टिकोण क्या है। संघ यह भी जानता है कि कोविड के कमजोर प्रबंधन को लेकर देश-दुनिया में केंद्र सरकार खास कर ’ब्रांड मोदी’ को झटका लगा है। सो, सूत्रों की मानें तो रविवार को आहूत उस बैठक में जिसमें भैयाजी जोशी, संघ के सह कार्यवाह दत्तात्रेय होसाबोले, पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा और भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष की उपस्थिति देखी गई। कहते हैं उस बैठक में मूलतः तीन बिंदुओं पर चर्चा हुई, देश में कोरोना के हालात व वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार, यूपी चुनाव, और केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल का स्वरूप कैसा हो? विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में भैयाजी जोशी की उपस्थिति हैरान करने वाली थी, उनके सख्त लहज़े से हर कोई वाकिफ है। इस बैठक में संघ ने यूपी को लेकर अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं, पहला कि तमाम इन अटकलों पर विराम लगाया जाए कि योगी बदले जा रहे हैं, उनकी जगह राजनाथ सिंह को भेजे जाने की अफवाहों से संघ नाखुश बताया जाता है। संघ ने यूपी चुनाव के एजेंडे पर भी रोशनी डाली और साफ कर दिया कि यूपी का अगला चुनाव ‘हिंदुत्व’ पर लड़ा जाएगा, इस मुद्दे को आगे ले जाने के लिए फिलहाल भाजपा के पास योगी से बेहतर और कोई हिंदुवादी चेहरा नहीं है। यानी इतना तय मानिए कि बंगाल की तर्ज पर ही यूपी का अगला चुनाव भाजपा को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आधार पर ही लड़ना होगा। बंगाल हारने के बाद संघ का यह आग्रह तेज हो गया है कि उसे अपनी ’बैक सीट ड्राईव’ की रफ्तार बढ़ानी होगी। बैठक में एक तरह से यह भी साफ हो गया है कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में जब देश में कोरोना संक्रमितों के कुल मामले अनुमानतः 50 हजार से भी कम हो जाएंगे तब मोदी अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। कहते हैं इसके लिए संघ ने भी अपनी ओर से कुछ नाम सुझाए हैं। इस बैठक में संघ ने साफ कर दिया है कि आने वाले 2022 के विधानसभा चुनावों में वह
पहले से ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएगा। भाजपा को इसमें आपत्ति भी क्या हो सकती है।
Posted on 06 June 2021 by admin
पिछले दिनों जब यूपी के मुख्यमंत्री नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ के अस्पतालों का निरीक्षण करने पहुंचे, तो इस वक्त तक यहां के तमाम अखबार और न्यूज चैनल गंगा नदी में बहते लाशों के मार्मिक दृश्यों और वर्णनों से अंटे-पड़े थे। सीएम नोएडा आए तो उन्होंने लगे हाथ अखबारों और न्यूज चैनलों के संपादकों से भी कोरोना को लेकर एक सौहार्द्र मीटिंग कर डाली। सीएम के एक ओर अवनीश अवस्थी तो दूसरी ओर नवनीत सहगल बैठे थे। जाने क्या बात हुई, योगी का कैसा जादू चला कि उपस्थित संपादकगण योगी की कार्यशैली और उनकी अद्भुत दूरदर्शिता के मुरीद हो गए, उसके बाद योगी सरकार और कोरोना से हो रही मौतों पर उनकी सोच भी बदल गई, और सुर भी।
Posted on 06 June 2021 by admin
उत्तराखंड के नए नवेले मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को सांस लेने की फुर्सत नहीं मिल रही है। अपनी लोकसभा की सदस्यता छोड़ अभी ताजा-ताजा मुख्यमंत्री बने हैं, पर इस 10 अगस्त तक उन्हें विधानसभा का चुनाव भी जीतना है, तभी वे आगे भी राज्य के सीएम बने रह सकते हैं। फिर अगले ही वर्ष राज्य को विधानसभा चुनाव में भी जाना है यानी कि तीरथ को तब एक चुनाव और लड़ना होगा। वहीं नंदीग्राम से चुनाव हार चुकीं बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी 6 महीने के अंदर राज्य की किसी सीट से विधानसभा चुनाव जीतना होगा। हालांकि दीदी के मार्ग को आसान बनाने के लिए कोलकाता के भवानीपुर के टीएमसी विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पर टीएमसी को चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सदैव शंका रही है कि अगर आयोग ने कोरोना का हवाला देकर राज्य में 6 महीने के अंदर चुनाव ही नहीं कराए तो फिर दीदी का क्या होगा? पर अब तीरथ सिंह रावत पर तृणमूल की निगाहें टिकी हैं जहां के सीएम को भी 10 अगस्त से पहले निर्वाचित होना है, सो अगर उत्तराखंड का चुनाव नहीं टला तो फिर बंगाल का कैसे टाला जा सकता है। सो, रावत के नाम पर ही दीदी का तीरथ हो जाएगा।
Posted on 06 June 2021 by admin
यूपी के कद्दावर मंत्री ब्रजेश पाठक इन दिनों कहां हैं? जब से राज्य में कोरोना को लेकर बेकाबू होते हालात को लेकर पाठक ने सीएम योगी को चिट्ठी लिखी है और यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, पाठक का कहीं अता-पता नहीं है। नहीं तो अब से पहले तक लखनऊ स्थित अपने आवास पर यह मंत्री जी रोजाना दो से तीन घंटे नियम से जनता दरबार लगाते थे, यह परंपरा तब तक कायम रही जब तक कि लखनऊ में कोरोना ने तेज दस्तक न दे दी हो। सूत्र बताते हैं कि जैसे ही पाठक की चिट्ठी सीएम को पहुंची, योगी ने उन्हें तलब कर कस कर डांट पिला दी-’आपकी हिम्मत कैसे हुई मुझे चिट्ठी लिखने की, आप चाहते तो मुझसे बात कर लेते, और सुना कि आप जनता दरबार भी लगा रहे थे, यह किस हैसियत से, क्या आप स्टेट के सीएम हैं?’ चिट्ठी का तो नहीं पता, पर डांट असर कर गई, ब्रजेश पाठक अब ढूंढे भी किसी को नहीं मिल रहे।
Posted on 06 June 2021 by admin
भाजपा के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह लगातार दो टर्म से लखनऊ के सांसद हैं, मोदी सरकार एक और दो दोनों में ही उनके पास अहम जिम्मेदारियां रही हैं। बतौर रक्षा मंत्री उन्होंने इस टर्म में अपनी एक ’प्रो-एक्टिव’ छवि के दर्शन कराए हैं। 2017 से योगी आदित्यनाथ जो राजनाथ के सजातीय ठाकुर हैं, उन्होंने अब से पहले न तो राजनाथ से कभी लखनऊ में अगवानी की और न ही शिष्टचार मुलाकात की औपचारिकताओं को ही निभाया। पर इस बार जब राजनाथ सिंह लखनऊ में डीआरडीओ द्वारा स्थापित कोविड अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे तो लखनऊ हवाई अड्डे पर उतर कर उस पल वह भौंचक रह गए जब उन्होंने पाया कि योगी आदित्यनाथ स्वयं उनकी अगवानी के लिए वहां खड़े हैं, क्या यह यूपी चुनावों के आगाज़ की पूर्वबेला है?