येचुरी से नहीं मिले करात

June 05 2016


34 वर्षों तक पश्चिम बंगाल में शासन करने वाली माकपा इस दफे जब सीताराम येचुरी के नेतृत्व में मात्र 22 सीटों पर सिमट आई तो फिर लाल पार्टी में घमासान मचना ही था। नाराज़ प्रकाश करात को मनाने का जिम्मा फिर येचुरी ने ही संभाला, करात के एक खास व्यक्ति से उन्होंने बात की और फिर तय हुआ कि नई दिल्ली के ए के गोपालन भवन में दोनों नेता चार बजे ‘वन टू वन’ बैठ कर गिले- शिकवे दूर कल लें। येचुरी नियत वक्त पर पहुंच गए, जब छह बजे तक करात का कोई अता-पता नहीं चल पाया, तो फिर उन्होंने करात को फोन मिलाया। करात ने अफसोस जाहिर करते हुए येचुरी से कहा कि ‘घर पर कार्यकर्त्ता आ गए थे, सो वे चाह कर भी बाहर निकल नहीं पाए।’ सो क्यों नहीं वे पोलित ब्यूरो के सदस्य कॉमरेड बालकृष्ण पिल्लै से बात कर लेते हैं?

 
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  1. RMAU Says:

    Yechury asserted that he did not want to cry over the proverbial split milk by indulging in too much of introspection, but wanted to lead the party from the front into the future.

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