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महामहिम की दरियादिली

Posted on 20 May 2020 by admin

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मार्च की तनख्वाह ’पीएम केयर फंड’ में पहले ही दान कर दी है, फिर देश की आर्थिक हालात का जायजा लेते हुए उन्होंने अपनी साल भर की तनख्वाह में 30 फीसदी की कटौती कर ली है। इस वर्ष राष्ट्रपति भवन अपने लिए नई लिमोज़िन कार खरीदने जा रहा था, इसकी खरीद को रद्द कर दिया गया है। फूलों समेत अन्य साजो-सज्जा के खर्चों को भी आधा कर दिया गया है। मेहमानों की लिस्ट भी बहुत छोटी कर दी गई है और खान के मैन्यू में भी बहुत कटौती कर दी गई है। जहां पहले राष्ट्रपति भवन के किसी न किसी हिस्से में मरम्मत का कार्य लगा ही रहता था, इस वर्ष उस पर रोक लगा दी गई है। राष्ट्रपति की यात्राओं पर आने वाले खर्चों को भी आधा कर दिया गया है, अब राष्ट्रपति सीधे लोगों तक पहुंचने में, उनसे संवाद स्थापित करने में टेक्नोलॉजी का सहारा लेंगे, वे ऑन लाइन ऐप्प द्वारा सीधे लोगों से जुड़ेंगे। वाकई देश के महामहिम ने एक नज़ीर पेश करने की कोशिश की है।

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दिल्ली टू मुंबई 14 घंटों में

Posted on 20 May 2020 by admin

केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘दिल्ली-मुंबई ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेस-वे’ इस लॉकडाउन में भी आकार ले रहा है। इस प्रोजेक्ट की कुल कीमत एक लाख करोड़ बताई जा रही है, इस प्रोजेक्ट के मूर्त्त रूप लेने से दिल्ली से मुंबई या फिर मुंबई से दिल्ली तक की सड़क मार्ग से यात्रा मात्र 14-15 घंटे में पूरी की जा सकेगी, सरकार यह प्रोजेक्ट पीपीपी मॉडल पर नहीं कर रही है। एक बार इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई तो फिर हाईवे के निर्माण के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया आरंभ की जा सकेगी। सरकार ने तो टोल के राइट्स देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, इसके लिए जल्द ही निविदाएं मंगवाई जा सकती हैं, सरकार का अनुमान है कि अकेले टोल राइट्स से उसके खजाने में 25 हजार करोड़ रूपए तक आ सकते हैं।

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श्रमिकों के भूख की कीमत कितनी?

Posted on 20 May 2020 by admin

लॉकडाउन और स्वॉइन फ्लू के आसन्न आहटों के चक्कर में जब पोल्ट्री मालिक बड़े पैमाने पर अपनी मुर्गियों को मार रहे थे तो उनसे पूछा गया कि वे आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं तो जवाब मिला कि जब बाजार में चिकेन की कोई कीमत ही नहीं रही, जितना पैसा वे मुर्गियों को दाना खिलाने पर खर्च कर रहे हैं इसे बेच कर उन्हें इसका आधा भी रिकवर नहीं हो रहा। सो, यूपी में भी प्रवासी मजदूरों को जिन आइसोलेशन केंद्रों में रखा गया है, वहां राज्य सरकार उनके प्रति मील पर एनजीओ को 40 रूपए का भुगतान कर रही है यानी कि पूरे दिन के लिए कोई 120 रूपए, वहीं राजस्थान जैसे राज्य इसी मद में एनजीओ को 300 रूपयों का भुगतान कर रही हैं। जब यूपी में कार्यरत एनजीओ ने अधिकारियों से सवाल किए तो प्रति मील 40 रूपए से बढ़ा कर 70 रूपए कर दिया गया, पर यह फाइल अभी भी लाल फीताशाही के चपेट से बाहर नहीं निकल पाई है और वे एक टेबल से निकल कर दूसरे टेबल का चक्कर लगा रही है, जबकि वहीं मजदूर इन आइसोलेशन केंद्रों से बाहर निकल अपने घरों तक पहुंचने लगे हैं।

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गैर भाजपाई राज्यों की उपेक्षा क्यों?

Posted on 20 May 2020 by admin

प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए सबसे ज्यादा ट्रेनें यूपी के लिए चली हैं, कुल हजार में से अकेले 400 ट्रेन यूपी के लिए है। जब इस बात पर सवाल-जवाब हुए तो रेल मंत्री की ओर से स्पष्ट्रीकरण आया कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों की ओर से स्पेशल ट्रेन की डिमांड ही नहीं आई। इस पर तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पहले से जारी हुए अपने वीडियो दिखा दिए जिसमें उन्होंने यह डिमांड की थी, उल्टे इन्होंने रेल मंत्री पर देश को गुमराह करने के आरोप जड़ दिए।

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उड़ान कंपनियां आई ज़मीन पर

Posted on 15 May 2020 by admin

आर्थिक मंदी जो कहीं पहले से पांव पसार रही थी जब उसे लॉकडाउन का साथ मिला तो अब इसके बुरे नतीजे सामने आने लगे हैं। उड़ान कंपनियों की उड़ानों पर ग्रहण लग गया है। यक तरह से साफ हो गया है कि 30 अप्रैल तक कोई बोर्डिंग नहीं होगी, यानी लगभग डेढ़ महीने तक एयरलाइंस कंपनियों का कारोबार ठप्प है। इस संकट से निबटने के लिए ‘गो एयर’ ने अपने कर्मचारियों की तनख्खाह आधी कर दी है, ‘इंडिगो’ में तनख्खाह में 5 से 30 फीसदी तक कमी आई है। ‘एयर इंडिया’ में जितने भी पायलट अनुबंध के आधार पर काम कर रहे थे, उनके अनुबंधों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। ‘स्पाइसजेट’ ने भी कमोबेश ऐसे ही कदम उठाए हैं। यही हाल मीडिया सेक्टर का भी है। इंडियन एक्सप्रेस ने जहां अपने लोगों की तनख्खाह 30 फीसदी तक कम कर दी है, वहीं इंडिया टुडे ग्रुप और टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी साफ कर दिया है कि इस वर्ष किसी को इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा। आधे से ज्यादा ‘र्स्टाट अप’ अब बंद होने की कगार पर हैं। ऑटो सेक्टर में भी कमोबेश उत्पादन ठप्प पड़ा है, क्योंकि बाज़ार में इनके उत्पादों की मांग ही नहीं है। एफएमसीजी सेक्टर पर भी संकट गहरा रहा है। एक के बाद एक सभी फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। सेंसेक्स पहले ही 15 हजार तक नीचे लुढ़क चुका है। यानी आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।

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सरकार के मंत्रियों पर भी लॉकडाउन

Posted on 15 May 2020 by admin

लगता है सरकार के मंत्रिगण भी लॉकडाउन की चपेट में आ गए हैं। अमित शाह भूले भटके कभी किसी मीटिंग में दिख भी जाते हैं। वहीं देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्द्धन भिंडी काटते हुए अपना फोटो शेयर कर रहे हैं। मोदी सरकार के एक अन्य प्रभावशाली मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बागवानी कर रहे हैं उनका अच्छा-खासा किचन गार्डन है। किरण रिजिजू ने गार्डन में झाड़ू लगाते हुए अपनी फोटो शेयर की है तो ‘गो कोरोना गो’ का सुर अलापने वाले रामदास अठावले घर पर बैठकर कैरम खेल रहे हैं। वहीं योगी सरकार के मंत्रियों की बात करें तो श्रीकांत शर्मा पूरियां तल रहे हैं, सिद्धार्थनाथ सिंह मटर छील रहे है। वहीं मोदी और योगी दोनों ही पूरे 18 घंटे काम पर लगे हैं। योगी की मीटिंग्स भी शाम 7 बजे से शुरू होकर रात्रि भोजन से गुजर कर बारह-एक बजे तक चलती है। वहीं मोदी ने पूरी मुस्तैदी से कोरोना संकट पर नज़र बनाए रखी है।

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रात 9 बजे के 9 मिनट

Posted on 15 May 2020 by admin

प्रधानमंत्री मोदी ने इस रविवार यानी 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए देशवासियों से मोमबती, दीया या टॉर्च जलाने की अपील की है। कांग्रेसी नेता शशि थरुर ने इसका संज्ञान लेते हुए एक ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में लोगों के दर्द और उनकी वितीय चिंताओं के बारे में कुछ नहीं कहा, यह पीएम का ‘फील गुड मोमेंट’ था। इस ट्वीट से कांग्रेस ने यह कहते हुए अपने को अलग कर लिया कि यह थरुर के निजी विचार हैं। पर छतीसगढ़ कांग्रेस ने एक चुभता हुआ ट्वीट उछाल दिया है-‘जली को आग कहते हैं, बुझी को राख कहते हैं, जो महामारी को महोत्सव में बदल दे उसे नरेंद्र दामोदरदास कहते हैं।’

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भाजपा कार्यकर्ताओं को जेपी सीख

Posted on 15 May 2020 by admin

लॉकडाउन की यकबयक घोषणा के बाद दूसरे राज्यों में काम करने को गए मज़दूरों की गंभीर स्थिति थी, वे किसी भी भांति अपने घरों को लौटना चाहते थे, वाहन नहीं मिले तो पैदल ही हजारों मील के सफर पर निकल पड़े। भाजपाध्यक्ष जेपी नड्डा को जब इस बात की ख़बर लगी तो उन्होंने हर राज्य में अपने 3-4 इंचार्ज बना दिए। उनसे कहा गया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर ऐसे लोगों की पड़ताल की जाए जो काम के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर गए थे। जो जहां फंसा है भाजपा कार्यकर्ता उनकी पूरी मदद करे। जहां भाजपा सरकारें हैं वहां सरकार से मदद ली जाए और जहां गैर भाजपा सरकारें हैं वहां कार्यकर्ता उन्हें अपने लेवल पर मदद करें। उन्हें खाना-पानी राषन मुहैया कराएं घर लौटने में उनकी मदद करें। अरविंद केजरीवाल को छोड़कर कांग्रेस, सपा, बसपा, ममता व वामपंथी दल इस प्रक्रिया से गायब ही दिखे।

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एक दीया तो जलाइए मानवता का

Posted on 15 May 2020 by admin

विहिप ने रामनवमी के मौके पर देशवासियों से आग्रह किया था कि कम से कम हर घर में 5 दीए जरुर जलने चाहिए। दिल्ली व उसके आस-पास जहां हजारों दीए जले, वहीं अयोध्या में लॉकडाउन का असर दिखा। हालत यह थी कि जो लोग लॉकडाउन से पहले रामलला के दर्शन को अयोध्या आए थे, वे भी वहीं फंस गए। ‘दि प्रिंट’ के फोटोग्राफर प्रवीण जैन इस हालत का जायजा लेने अयोध्या गए थे, उन्होंने देखा सरयू नदी के किनारे झुग्गियों में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला ने अपनी टूटी-फूटी झोंपड़ी में कितने ही लोगों को आश्रय दिया हुआ है। गोरखपुर से आया परिवार भी इस लॉकडाउन में फंस गया था और वह बुजुर्ग महिला इस पूरे परिवार का खाने-पीने का ध्यान रख रही थी। जहां अमीर लोग कोरोना के भय से अपने घरों में दुबके थे, गरीब लोगों नें अपने दिल और घर के दरवाजे खोले हुए थे।

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कोरोना को डराती मधुशाला

Posted on 15 May 2020 by admin

हरियाणा में जरुरी सामान की दुकानों के साथ-साथ शराब की दुकानें भी खुली रखी गई हैं। हालांकि यह भ्रम दूर हो चुका है कि शराब के पास कोरोना का कोई मुकम्मल इलाज है। एक पत्रकार ने देखा कि हरियाणा में षराब की दुकानों के आगे लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं, और लोग दारु खरीदने में भी ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ का पूरा ध्यान रख रहे हैं। ऐसे में इसी पत्रकार ने हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से यह सवाल पूछ लिया कि अब तो डाक्टर भी कह चुके हैं कि षराब कोई कोरोना का इलाज नहीं, फिर भी लॉकडाउन में शराब की दुकानें खुली हुई हैं? दुष्यंत का कहना था कि ‘शराब के आदी लोग अगर शराब नहीं पीयेंगे तो थोकभाव में बीमार पड़ेंगे और अस्पतालों की ओर भागेंगे। जहां अस्पतालों में पहले से ही बेड, नर्स और डाक्टरों की कमी है वे कोरोना का इलाज करेंगे या बीमार षराबियों का। सो, पब्लिक हेल्थ क्रायसिस के दौर में शराब की दुकानें खुली रहें तो वही अच्छा।’ सरकार का प्लान अच्छा है।

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