Posted on 24 September 2022 by admin
कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई असम के एक बड़े राजनैतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुष्मिता देव ने भी क्या टीएमसी छोड़ने का मन बना लिया है? दरअसल, सुष्मिता अपने राजनैतिक भविष्य को लेकर चिंता में हैं, जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी तो वह राहुल गांधी की कोर टीम की एक अहम सदस्य में शुमार होती थी। सुष्मिता को उम्मीद थी कि ममता कम से कम उन्हें राज्यसभा तो अवश्य दे देंगी। पर ऐसा संभव न हो पाया, सुष्मिता की उम्मीदों को पलीता लग गया। सुष्मिता को इस बात का भी बखूबी इल्म है कि असम में टीएमसी के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीतना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं। सो, उन्होंने अभी से संभावनाओं के नए द्वार की पड़ताल शुरू कर दी है, हद तो तब हो गई जब पिछले दिनों गुवाहाटी में टीएमसी के कोर ग्रुप की मीटिंग चल रही थी और सुष्मिता उस मीटिंग में षामिल होने के बजाए असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा से मिलने पहुंच गई। इस पर जब दीदी ने उनकी क्लास लगाई तो सुष्मिता ने बेहद भोलेपन से जवाब देते हुए कहा-’मैं तो सीएम से यह बात करने गई थी कि राज्य में हमारी पार्टी के लोगों पर इतने जुल्म क्यों हो रहे हैं?’ दीदी से भी आगे कुछ बोलते नहीं बना।
Posted on 24 September 2022 by admin
पिछले दिनों बिहार के उप मुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपने घर एक चाय पार्टी रखी और इस चाय पार्टी में अपनी पार्टी के वैसे वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया जो अपनी वरिष्ठता के बावजूद बिहार की नई गठबंधन सरकार में जगह नहीं पा सके। तेजस्वी इन नेताओं के साथ अपने मन की बात साझा कर रहे थे कि अचानक मुंगेर से आए एक सीनियर राजद नेता ने तेजस्वी से सवाल किया-’आपने नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री बनवा दिया जबकि उनका वोट प्रतिशत हमारी पार्टी के आगे बौना ही है, मात्र 10-12 प्रतिशत, और हमारे बूते ही वे 2024 में देष का पीएम बनने का सपना देख रहे हैं। और बदले में आपको क्या मिला है सिर्फ डिप्टी सीएम का पद?’ तेजस्वी ने उस नेता की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और धैर्यपूर्वक उनकी बातों का जवाब देते हुए कहा-’आप उम्र और अनुभव दोनों में मुझसे सीनियर हैं, आज जरा समझिए कि बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। 2024 में 4-6 सीटों पर कांग्रेस और लेफ्ट लड़ेंगे। बाकी बची 34 सीटों में से राजद और जदयू के हिस्से 17-17 सीटें आएंगी, हमारा लक्ष्य है कि इस बार हमें ये सभी 17 सीटें जीतनी है, दम लगा कर। अब यह नीतीश जी के ऊपर है कि वे अपने हिस्से की 17 में से कितनी सीटें जीत पाते हैं, राजनैतिक पर्यवेक्षक बताते हैं कि नीतीश जी की 12 सीटें आ सकती है, तो क्या 12 सीट लेकर कोई प्रधानमंत्री पद का गंभीर उम्मीदवार हो सकता है, यह दिल्ली के मीडिया को भी समझना होगा।’
Posted on 24 September 2022 by admin
अपनी ’भारत जोड़ो यात्रा’ की प्रारंभिक सफलताओं से राहुल और कांग्रेस गद्गद् है। राहुल की यह यात्रा 2024 में कांग्रेस के सीटों की गिनती को भी एक भरपूर उछाल देने की मंशा लिए है। 24 के चुनाव को मद्देनज़र रखते राहुल की ’भारत जोड़ो यात्रा’ उन्हीं राज्यों से गुजर रही है जहां कांग्रेस को अपने लिए कुछ उम्मीद की किरण दिख रही है, जहां उनका कैडर है, नेता है, उम्मीद है। जहां उम्मीद नहीं है, जैसे यूपी वहां यात्रा 5 दिनों में ही सिमटा दी गई है। उन राज्यों को भी छोड़ दिया गया है जहां कांग्रेस अपने सहयोगियों के भरोसे है, जैसे तमिलनाडु, जहां कांग्रेस की यात्रा सिर्फ 3 दिन चली, कन्याकुमारी से यात्रा का आगाज़ हुआ और तीसरे ही दिन यह यात्रा केरल पहुंच गई, क्योंकि तमिलनाडु में कांग्रेस की राजनीति इस वक्त डीएमके के भरोसे है। केरल जैसे छोटे राज्य में राहुल की यात्रा 19 दिन चलनी है और कर्नाटक में 21 दिन। तेलांगना में 13 दिन। यानी 148 दिनों की यात्रा में राहुल सिर्फ दक्षिण के उन 3 राज्यों में 53 दिन बिता रहे हैं। उसी तरह अगले साल राजस्थान और मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने हैं, यहां कांग्रेस अपना पिछला प्रदर्शन बरकरार रखना चाहती है। राजस्थान में राहुल की यात्रा 21 दिनों की और मध्य प्रदेश में 16 दिन की है। पंजाब में 11 दिन की और हरियाणा में 12 दिन की है। वहीं दिल्ली में महज़ 2 दिन में यात्रा सिमट जाएगी। 2019 के लोकसभा चुनाव में 29 ऐसी सीटें थी जहां भाजपा ने मामूली अंतर से कांग्रेस को हरा दिया था, 57 सीटें ऐसी है जहां कांग्रेस से भाजपा की जीत का अंतर एक लाख से कम रहा है। सो, इन 86 लोकसभा सीटों पर इस बार कांग्रेस अपना पूरा जोर लगाना चाहती है और 2019 की अपनी सीटों को कम से कम दोगुना करना चाहती है।
Posted on 24 September 2022 by admin
हाल में संपन्न हुए संघ के रायपुर अधिवेशन में जिसमें शामिल होने के लिए भाजपाध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष खास तौर पर रायपुर पधारे थे, वहां संघ और भाजपा के रिश्तों के दरम्यान एक तल्खी दिखी। संघ का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भाजपा का अपेक्षित राजनैतिक विस्तार हुआ है, पर इसकी तुलना में संघ अपने संगठन को वांछित विस्तार नहीं दे पाया है। संघ भाजपा से इसीलिए भी नाराज़ बताया जाता है कि कर्नाटक के सीएम बदलने की प्रक्रिया में संघ को शामिल नहीं किया गया था, जहां आज भाजपा का विस्तार संघ की प्रयासों की वजह से हुआ है। रायपुर की संघ की समन्वय बैठक से पहले जिस तरह से भाजपा प्रभारियों को बदला गया उसमें भी संघ की राय नहीं ली गई। सूत्र बताते हैं कि मोदी व शाह भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल को 2024 तक विस्तार देना चाहते हैं, जबकि संघ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भाजपा के नए अध्यक्ष के तौर पर पेश कर रहा है।
Posted on 24 September 2022 by admin
’यह रिश्ता जो मैंने मुद्दतों से संभाला हुआ है, यही तो है जिससे दिलों में उजाला हुआ है
रुकना गवारा नहीं मुझे, चलूंगा दूर तक, मेरी इसी बात ने तुम्हें मुश्किल में डाला हुआ है’
राहुल गांधी अपनी ’भारत जोड़ो यात्रा’ की अनुगूंज को सहेजने में लगे हैं, वहीं उनकी मां, बहन और उनके करीबी नेताओं ने उन पर निरंतर दबाव बनाया हुआ है कि कांग्रेस की अध्यक्षीय बागडोर उन्हें ही संभालनी चाहिए। पर राहुल अपने करीबियों की इस राय से इत्तफाक नहीं रखते। राहुल को लगता है कि ’अगर कांग्रेस का नेतृत्व फिर से उनके हाथों में आया तो पीएम को उन पर परिवारवाद के तीर छोड़ने के मौके मिल जाएंगे।’ आसन्न विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में गुजरात में कांग्रेस की हालत पतली है, वहां भाजपा अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती है, भाजपा का संख्या बल माधव सिंह सोलंकी के वक्त के रिकार्ड को भी तोड़ सकता है। गुजरात और हिमाचल में अगर हार हुई तो इसका ठीकरा भी राहुल के सिर ही फोड़ा जाएगा। सो, राहुल अपनी पसंद का नया अध्यक्ष चाहते हैं, जिनकी व्यवहार कुशलता और वरिष्ठता को पार्टी में कोई चुनौती न मिल सके। हालिया एआईसीसी अधिवेशन में कांग्रेस के तीन वर्षों के अध्यक्षीय कार्यकाल को भी 5 वर्षों का कर देने का प्रस्ताव है। राहुल और सोनिया ने अपनी ओर से अशोक गहलोत का नाम चुपचाप आगे किया है, बावजूद इसके कि गहलोत अभी भी राजस्थान छोड़ना नहीं चाहते, पर राहुल से जुड़े करीबी सूत्रों का दावा है कि इसके लिए गहलोत को मना लिया जाएगा। दरअसल, राहुल अपने परंपरागत विरोधी राजनैतिक पार्टी को डंके की चोट पर यह संदेश देना चाहते हैं कि ’गांधी परिवार किसी पद का भूखा नहीं है।’ सनद रहे कि कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव 17 अक्टूबर को होना है, जिसके लिए 22 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन 24 से 30 सितंबर तक होना है। सो, गहलोत के लिए भी अब सोचने के लिए ज्यादा वक्त बचा नहीं है।
Posted on 24 September 2022 by admin
यह पिछले सप्ताह की ही तो बात है जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे देर रात कोई ग्यारह बजे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलने पहुंचते हैं। दोनों नेताओं के बीच एक लंबी बातचीत होती है। शिंदे राज ठाकरे के समक्ष प्रस्ताव रखते हैं ’चूंकि आप ठाकरे हैं सो मेरी नवगठित पार्टी के आप अध्यक्ष बन जाइए और इसे संभालिए। आपका नाम पार्टी से जुड़ने से शिव सैनिकों का भरोसा भी पार्टी में बहाल होगा और हम उद्धव ठाकरे के समक्ष एक मजबूत चुनौती भी उछाल पाएंगे।’ सूत्रों की मानें तो यह बात बन सकती है, बदले में राज ठाकरे की पत्नी शर्मिला को शिंदे की पार्टी राज्यसभा दे सकती है और राज्यसभा में वह पार्टी की नेता भी हो सकती हैं। राज ने शिंदे से एक वादा अपने पुत्र के लिए भी लिया है कि ’2024 में शिंदे उन्हें अपनी पार्टी से लोकसभा का चुनाव लड़वाएंगे।’ राज ठाकरे के इन दोनों प्रस्तावों पर एक तरह से शिंदे की हरी झंडी है, बस उन्हें एक बार दिल्ली जाकर इस पर भगवा सहमति की आखिरी मुहर लगवानी है।
Posted on 04 September 2022 by admin
’बरसों तेरे दर पर इस कदर गुलाम आस्थाओं की चाकरी की है
कि आज आज़ाद का तखलुस भी मेरे कुछ काम नहीं आ पा रहा’
24 अगस्त को सोनिया गांधी अपने दोनों बच्चों राहुल और प्रियंका के साथ इटली पहुंची, जहां उनकी बीमार मां पाओला माइनो की तबियत तेजी से बिगड़ रही थी। 27 तारीख आते-आते राहुल की नानी गुजर गई। इत्तफाक से 29 तारीख को ही 7 सितंबर से शुरु होने वाली राहुल की ’भारत जोड़ो यात्रा’ की तैयारियों से जुड़ी एआईसीसी की एक अहम मीटिंग पहले से आहूत थी। सोनिया, राहुल और प्रियंका कुछ समय के लिए इटली से ही वर्चुअल उस मीटिंग से जुड़े, पर किसी कांग्रेसजन को कानों कान यह खबर नहीं लग पाई कि सोनिया की मां का देहावसान हो चुका है। 30 तारीख को एक प्रेस कांफ्रेंस कर बागी होकर कांग्रेस के दर से बाहर निकले गुलाम नबी आजाद अपनी इस वार्ता में गांधी परिवार को आड़े हाथों लेते हैं और कहते हैं कि ’पार्टी की टॉप लीडरशिप 10 मिनट के लिए मीटिंग में आती है और मातहतों पर ऑर्डर झाड़ वर्चुअली रफा-दफा हो जाती है।’ गुलाम नबी तुर्रा उछालते हैं-’भई, यह तो एक तरह की तानाशाही है।’ इसके बाद 31 तारीख को जयराम रमेश ट्वीट कर पहली बार सोनिया की मां के निधन की सार्वजनिक जानकारी शेयर करते हैं। जब यह बात गुलाम नबी को पता चलती है तो उन्हें आत्मग्लानि होती है, पर तब तक हर ओर उनके इस बयान के लिए इतनी किरकिरी हो चुकी होती है कि उनके लिए वहां से अपने कहे को वापिस लेना संभव नहीं था। अब जाकर इस रहस्य से पर्दा उठा है कि गुलाम नबी के प्रचार-प्रसार का जिम्मा जिस बड़ी पीआर एजेंसी ने उठा रखा है, उन्हें इसके एवज में एक मोटी फीस अदा की गई है। सूत्रों की मानें तो एजेंसी की यह फीस भी एक राजनैतिक पार्टी के सौजन्य से अदा हुई है। 7 तारीख को जब कांग्रेस की इस ’भारत जोड़ो यात्रा’ का आगाज़ होगा उसी दिन गुलाम नबी कश्मीर में एक बड़ी पॉलिटिकल रैली करेंगे। आप इसे कांग्रेस की यात्रा से ध्यान बंटाना या भटकाना कुछ भी कह सकते हैं।
Posted on 04 September 2022 by admin
बिहार में भी क्या खूब रंगे सियारों वाली राजनीति चल रही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अभी चंद रोज पहले रात के कोई 11.30 बजे वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद और भाजपा के संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मिलने उनके घर पहुंचे। इन दोनों नेताओं ने सीधे तेजस्वी के समक्ष अपना चमकता दहकता प्रपोजल उछाला कि ’आप में नेतृत्व का इतना दमखम है तो फिर चाचा (नीतीश) को क्यों ढो रहे हो, आप सीधे क्यों नहीं बनते ’सीएम’, आपको संख्या बल का भी साथ है। 79 विधायक आपकी पार्टी के हैं, कांग्रेस के 19 और वामपंथियों के 16 और ओवैसी के 1 विधायक के समर्थन के साथ हो गया, यह गिनती कुल 117 की बैठती है यानी बहुमत के आकड़े से कुछ कम, पर इसका भी जुगाड़ हो जाएगा। नीतीश के कई विधायक टूटने को तैयार बैठे हैं, भाजपा के कुछ विधायक शक्ति परीक्षण के दिन अनुपस्थित रह जाएंगे।’ इस पर तेजस्वी ने छूटते ही कहा ’एक लचर सरकार का सीएम बनने से अच्छा है कि मैं एक मजबूत सरकार का डिप्टी सीएम हूं।’ कहते हैं इस पर रविशंकर ने उन्हें याद दिलाया कि ’यूपी में 2003 में हमने ही मायावती की सरकार बनवाई थी, मुलायम सिंह की सरकार भी हमने ही बनवाई थी।’ कहते हैं इस पर तेजस्वी ने टका सा जवाब दिया-’वह आज की नहीं, अटल-अडवानी के दौर की भाजपा थी, उसकी बात ही कुछ अलग थी।’ भाजपा के दोनों नेता अपना सा मुंह लेकर लौट आए।
Posted on 04 September 2022 by admin
लगता है झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के दिन बस गिनती के बचे हैं। झारखंड के गवर्नर रमेश बैंस के पास चुनाव आयोग ने एक सप्ताह पहले ही अपना फैसला भेज दिया है, पर गवर्नर अभी तक हेमंत को ‘डिसक्वालिफाई’ घोषित नहीं कर पाए हैं। यहां पर पेंच फंसा है भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी को ’डिसक्वालिफाइर्’ करने का। वहीं सूत्र खुलासा करते हैं कि भले ही सोरेन ने अपने विधायकों को रायपुर भेज दिया हो, पर इन विधायकों के घरों तक भाजपा ने अपनी पहुंच बना ली है। माना जा रहा है कि झारखंड के गवर्नर रविवार की रात तक या सोमवार की सुबह तक अपना फैसला सुना सकते हैं। तब तक सभी विधायकों की वापसी शुरू हो जाएगी। इनको वापिस रांची लाने के लिए एक चार्टर्ड विमान हायर किया जा रहा है, जिसका अनुमानित खर्च कोई 2.6 करोड़ रूपए आने वाला है। पर इस फैसले को कैबिनेट से अनुमोदन भी मिल चुका है। हेमंत सोरेन अपनी रुखसती की सूरत में अपनी गद्दी अपनी पत्नी को सौंपना चाहते हैं, पर इस फैसले में बड़ी दिक्कत पेश आ रही है, क्योंकि हेमंत की पत्नी गैर आदिवासी समुदाय की हैं और वह ओडिशा की रहने वाली हैं। सो रिजर्व एसटी सीट से उनका उप चुनाव लड़ना भी संदिग्ध रहेगा, और राज्य की ज्यादातर गैर आदिवासी सीटों पर भाजपा का दबदबा है, सो भाजपा उन्हें चुनाव में हरवाने का पुख्ता इंतजाम करेगी। पिता शिबू सोरेन इन दिनों बीमार चल रहे हैं, उनकी भूलने की बीमारी भी काफी बढ़ गई है। सो, अब हेमंत अपनी मां को गद्दी सौंपने पर विचार कर रहे हैं। वहीं भाजपा के केंद्रीय नेताओं की राय है कि झारखंड में एक साल के लिए राष्ट्रपति शासन लगाना ही ठीक रहेगा, क्योंकि झारखंड में भाजपा के पास न तो उतने योग्य नेता हैं और न ही उतना जनता का सपोर्ट।
Posted on 04 September 2022 by admin
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को दिल्ली लाए जाने की आहटों ने शोर पकड़ लिया है। नितिन गडकरी के साथ-साथ उन्हें भी भाजपा के अहम संगठन पदों से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। अब चर्चा है कि शिवराज को दिल्ली लाकर मोदी कैबिनेट में ग्रामीण विकास मंत्रालय का मंत्री बनाया जा सकता है। सितंबर माह के बाद मोदी मंत्रिमंडल में एक बड़े फेरबदल का कयास है। शायद 24 के आम चुनावों से पहले का यह आखिरी फेरबदल हो। ज्योतिरादित्य सिंधिया शिवराज की जगह मध्य प्रदेश के नए सीएम हो सकते हैं। इन कयासों को भांपते हुए अब सिंधिया इन दिनों सप्ताह के कोई दो दिन नियम से मध्य प्रदेश में गुजार रहे हैं।