Posted on 29 January 2010 by admin
गुजरात में अगले विधानसभा चुनावों तक कांग्रेस मोदी को नाथ लेना चाहती है। पिछले दिनों जब चिदंबरम सोनिया गांधी से मिले थे तो मोदी की बाबत सोनिया ने काफी तल्ख टिप्पणी की, जो कि इस बात का परिचायक है कि सोनिया ने अभी भी पिछले आम चुनावों के दौरान मोदी की गूंगी गुड़िया, कांग्रेस बुढ़िया जैसी बयानों के लिए उन्हें दिल से माफ नहीं किया है। सो, आने वाले दिनों में सोहराबुद्दीन के मामले में मोदी पर और भी कानूनी शिकंजा कस सकता है। समझा जाता है कि उस वक्त गुजरात भाजपा के इंचार्ज रहे ओम माथुर भी जांच की परिधि में आ सकते हैं, कहा तो यहां तक जा रहा है कि मार्बल व्यापारियों से माथुर का ही सीधा रिश्ता रहा है।
Posted on 29 January 2010 by admin
गृह मंत्री पी.चिदंबरम को फैसला लेने वाला गृह मंत्री बताया जा रहा है, खुद कांग्रेसी कहते फिर रहे हैं कि सन् 1980 में जब ज्ञानी जैल सिंह केंद्रीय गृह मंत्री थे तो वे दवाब मुक्त फैसले लेने के लिए मशहूर थे, अब चिदंबरम भी कुछ इसी परिपाटी पर चल रहे हैं। 2611 की घटना के बाद उनकी एम.के.नारायणन से कुछ इस कदर ठनी कि वे नारायणन का बोरिया बिस्तर गोल करवा कर ही माने। चिदंबरम ने यह भी साफ कर दिया है कि अब गृह सचिव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को रिपोर्ट नहीं करेगा। काएदे से अब यह पूछने का वक्त आ गया है कि क्या चिदंबरम साहब एनडीए शासन काल के एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहे हैं? क्योंकि एनडीए शासन काल में अडवानी ने पहली बार यह बयान देकर सनसनी मचा दी थी कि गृह मंत्रालय को रिअरेंज करने की जरूरत है और एक आतंरिक सुरक्षा मंत्रालय अलग से बनाया जाना चाहिए।
Posted on 23 January 2010 by admin
कांग्रेस के एक दिग्गज नेता इस पैरवी के साथ सोनिया दरबार में पधारे कि अमर सिंह को क्यों नहीं कांग्रेस में ले लिया जाए? इस प्रस्ताव पर सचमुच किसी घायल शेरनी की मानिंद बिफर गई सोनिया, तमक कर बोलीं-‘जो कांग्रेस में उन्हें (अमर)लाने की बात करेगा वह भी उनके साथ यहां से बाहर चला जाएगा।’ सो अब कांग्रेस में अमर का कोई नामलेवा नहीं। मुलायम व कांग्रेस की दोस्ती शनै:शनै: परवान चढ़ने लगी है, शायद इसीलिए मुलायम के ऊपर चल रहे सीबीआई मामलों की रफ्तार धीमी कर दी गई है ताकि यह नई दोस्ती यूपी के नए सियासी पिच पर सरपट भाग सके।
Posted on 23 January 2010 by admin
पर नहीं यह मामला व्यक्तिगत से कहीं ज्यादा सियासी है। कांग्रेस और सपा में कहीं न कहीं कुछ खिचड़ी अवश्य पक रही है। समझा जाता है कि कांग्रेस और सपा में एक अघोषित समझौता हुआ है कि यूपी से माया को खदेड़ने के लिए इन दोनों पार्टियों का साथ आना जरूरी है। और इसके लिए यह भी जरूरी है कि वर्ष 2012 का यूपी विधानसभा चुनाव कांग्रेस व सपा मिलकर लड़े इसके लिए फिफ्टी-फिफ्टी फार्मूले पर भी विचार हुआ है यानी राज्य की आधी सीटों पर कांग्रेस लड़ेगी और आधी सीटों पर सपा। इस मामले में कांग्रेस की एक खास शर्त थी कि इस समझौते के अमर सिंह हिस्सा नहीं होंगे, सो अमर को खदेड़ने की कमान सुनियोजित तौर पर रामगोपाल को सौंपी गई, समझा जा सकता है कि रामगोपाल ने अमर के खिलाफ जो भी आग उगली उसे नेताजी हवा दे रहे थे। और जब राज्य में विधान परिषद की 36 में से मात्र 1 सीट पर सपा जीत पाई तो मुलायम को यह भी अहसास हो चला है कि वे कितने पानी में है। सो अमर को पानी-पानी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे नेताजी।
Posted on 23 January 2010 by admin
दोस्ती की नई इबारत लिखने में अमर सिंह का कोई सानी नहीं, पर ऐसा क्या हुआ जो इतनी पुरानी दांत कटी दोस्ती में खटास आ गई, मुलायम और अमर अब दोस्त न रहे, और अपने खास धमकाऊ अंदाज में अमर का यह कहना और बताना भी मायने रखता है कि मुलायम के कई राज मरने तक उनकी सीने में दफ्न रहेंगे। क्या हैं ये राज? कुछ जमा खातों की जानकारियां या सियासी हलकों में विचरती एक नामचीन अभिनेत्री के साथ नेताजी की कथित अंतरंग सीडी?
Posted on 15 January 2010 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 15 January 2010 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 13 January 2010 by admin
उदासी, तन्हाई के अजीबो गरीब सफर के हमसफर बन गए हैं जॉर्ज फर्नांडीस, कभी जुझारू समाजवाद से वास्ता था, पर जिंदगी के भी खेल अजीब हैं, उम्र के इस पड़ाव पर आकर बच्चों के मानिंद हो गए हैं जॉर्ज, उनकी सेवा में मुस्तैदी से जुटे बस तीन नौकरों के भरोसे अब उनकी जिंदगी की गाड़ी चल रही है। कहते हैं उन्हें सब कुछ भूल जाने वाली ‘अल्जाइमर’ बीमारी हो गई, उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता, कल तक जो लोग उनके खासमखास थे आज उनकी पहचान भी गडमगड हो गई है, पर पिछले कुछ दिनों से जॉर्ज की जिंदगी में तनिक रौनक आ गई है, उनकी किसी जमीन का सरकारी मुआवजा मिला है कोई 12 करोड़ रुपए जो उनके अकाउंट में जमा हो गया है। जॉर्ज को करीब से जानने वाले उनके एक पुराने मित्र बताते हैं कि जॉर्ज ने अब तलक अपनी कोई वसीयत नहीं बनवाई है। सो कई और लोग भी लौट आए हैं उनकी जिंदगी में, जो कभी उनसे दूर चले गए थे, जैसे उनकी पत्नी लैला फर्नांडीस जब उन्हें छोड़ गई तो फिर से लैला कबीर हो गई थीं, पर इन दिनों वे अपने आपको मिसेज जॉर्ज कहलाना ज्यादा पसंद करती हैं, लैला भी अपने पुत्र के साथ दिन में एक दफे जरूर आ जाती हैं जॉर्ज से मिलने। जया जेतली नियम से हर दिन दो घंटे के लिए आती हैं। सबकी नजर बराबर जॉर्ज के अंगूठे पर होती है कि कोई किसी वसीयत पर जॉर्ज का अंगूठा न लगवा ले, पर जॉर्ज हैं कि इन बातों से बेखबर सबको अंगूठा दिखा रहे हैं। बेहद भोलेपन से।
Posted on 03 January 2010 by admin
दिल्ली की लुटियन जोन से पार्टी ऑफिसों के तबादले का सिलसिला शुरू हो गया है, भाजपा का प्रधान कार्यालय 11 अशोक रोड पर है, तो कांग्रेस का 24 अकबर रोड पर, सो अब कांग्रेस का कार्यालय अकबर रोड से शिफ्ट होकर दीन दयाल उपाध्याय मार्ग जा रहा है, अब आप कांग्रेस जनों की परेशानी का सहज ही अंदाजा लगाइए, दीने इलाही मार्ग से सीधे दीन दयाल उपाध्याय मार्ग (पंडित दीन दयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक हैं) सो पार्टी ऑफिस के बहाने बिलावजह दीन दयाल की पब्लिसिटी होती रहेगी और हिंदुत्व का परचम भी यूं अनचाहे लहराता रहेगा। सो इसकी काट ढूंढी गई तो पता चला कि बैक लेन की रोड का नाम कुछ इस्लामी-सा है, शायद 9ए, कोटला रोड, सो कांग्रेसी कर्णधारों के निर्देश पर बैक साइड की दीवार को तोड़कर वहीं से मेन एंट्री का प्रावधान रखा गया, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए। कांग्रेस का 125 साला जलसा यहीं से शुरू होने वाला है और सोमवार को कांग्रेस के इस नए भवन कार्यालय का उद्धाटन सोनिया गांधी के करकमलों से होना है (कांग्रेस जन माफ करें, यहां अनायास ही सोनिया जी के साथ कमल शब्द आ गया है वे चाहे तो इसे परिवर्तित करके पढ़ लें)।
Posted on 03 January 2010 by admin
आम तौर पर डा. मनमोहन सिंह अपने मनोभावों को खुलकर इस कदर कभी जाहिर नहीं करते, जैसाकि पिछले दिनों उन्होंने अपने विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा के साथ अपनी मुलाकात में जाहिर की, मुद्दा था विदेश सचिव निरूपमा राव का, दरअसल प्रधानमंत्री निरूपमा राव के मीडिया प्रेम को लेकर खासा कुपित थे, प्रधानमंत्री का कहना था कि विदेश सचिव महोदया इस कदर मीडिया में अपना चेहरा दिखाने को आतुर रहती है जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि वे देश की विदेश सचिव नहीं अपितु सूचना प्रसारण सचिव हैं, प्रधानमंत्री ने कृष्णा को हौले से डपट लगाई-‘कृपया आप उन्हें उनके पद का दायरा और गरिमा समझाएं।’