Posted on 08 May 2011 by admin
लादेन पर अमरीकी कार्यवाही को सरंजाम देने वाले नेवी सील कमांडरों की भी एक अनोखी दास्तां है, पूरी अमरीकी फौज में इसकी संख्या मात्र 2,500 से 3,000 के आसपास है। ‘सील’ में बने रहने की उनकी अधिकतम उम्र ही 29 साल है। रिकार्ड बताते हैं कि इनका एक भी मिशन कभी फेल नहीं हुआ है। सबसे दिलचस्प तो यह कि इस विंग में शामिल किसी भी कमांडर का न तो कोई नाम होता है न ही कोई चेहरा। चुनांचे इसमें से कोई कभी क्लेम ही नहीं कर सकता कि फलां ऑपरेशन में वह भी शामिल था। यह अपने सिर पर जो हेलमेट पहनते हैं पूरा ट्रांसमिशन सिस्टम इसी से जुड़ा होता है, जो आम तौर पर ऊपर उड़ रहे हेलिकॉप्टर से संचालित होता है। सो, अब वक्त आ गया है कि भारत दाउद या सईद के लिए महज खटराग न अलापे, ‘सील’ की तर्ज पर अपने यहां भी कोई ऐसा विंग गठित करे।
Posted on 08 May 2011 by admin
चिंतन बैठकों से बाहर निकल समय, काल व बदलते हालात से समन्वय बिठाने के लिए संघ का शीर्ष नेतृत्व चिंतित है, उसकी असली चिंता इस बात को लेकर है कि नई सोच की नई पीढ़ी के लिए संघ और गैर-प्रसांगिक क्यों होता जा रहा है? पिछले दिनों अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को जिस तरह युवा भारत का समर्थन हासिल हुआ उसके परिप्रेक्ष्य में संघ ने अपने अनुषांगिक संगठनों से कहा है कि संघ से जुड़े लोग व संस्थाएं ज्यादा से ज्यादा तादाद में अन्ना की मुहिम में कदम से कदम मिलाए और यहां आकर अहम दायित्वों का निर्वहन भी करें। संघ को लगता है कि अगर दक्षिणपंथी ताकतें ऐसा करने में विफल रहीं तो नक्सली आंदोलनों से सुहानुभूति रखने वाले स्वामी अग्निवेश या मेधा पाटेकर जैसे लोग इसे अतिक्रमित कर लेंगे या फिर कांग्रेस से जुड़े हर्ष मंदर या अरुणा रॉय जैसे लोग इसका फायदा उठा लेंगे यानी संघ विरोधी लोगों के हाथों की कठपुतली बन सकते हैं अन्ना, और वैसे भी अन्ना इन दिनों गोविंदाचार्य, बाबा रामदेव जैसे हिंदुत्ववादी विचारधारा के पोषक लोगों से पर्याप्त दूरी बनाने की रणनीति बुनने में जुटे हैं। अन्ना ने यह भी साफ कर दिया है कि रामदेव के प्रस्तावित अनशन से उनका कोई लेना-देना नहीं। यानी साफ है कि रामदेव सरीखे लोगों की लोकप्रियता का फायदा उठाने से अन्ना को गुरेज नहीं, पर वे किसी भी कीमत पर खुद को इस्तेमाल नहीं होने देंगे। अन्ना से बड़ा राजनैतिज्ञ कौन है?
Posted on 08 May 2011 by admin
विद्रोही कवि मुक्ति बोध के शब्द हैं-‘जो है उससे बेहतर चाहिए, दुनिया को साफ करने के लिए मेहतर चाहिए…।’ चुनांचे हम भी शब्दों को बाजार नहीं, विचारों का कारगर हथियार मानते हैं। वैसे भी सियासी आहटों को टटोलने, परखने व उसे संप्रेषित करने का जिम्मा ‘मिर्च मसाला’ ने एक दशक से ज्यादा समय से उठाया हुआ है। कहने को तो यह एक ‘गॉसिप’ कॉलम है, पर हम खबरों के प्रस्फुटन की आहट भांप लेते हैं। अभी पिछले ही हफ्ते ‘चक्कर सीडी व ईडी का’ शीर्षक के अंतर्गत इसी कॉलम में इसकी एक बानगी पेश हुई। इस खबर के छपने के बाद ठीक दो रोज के बाद मंगलवार को इसी को विस्तार देते हुए ‘इकॉनोमिक टाइम्स’ ने अपने पहले पेज पर इसी खबर को जगह दी। और शुक्रवार आते-आते इसी खबर के आलोक में सुप्रीम कोर्ट ने सहाराश्री व चैनल प्रमुख उपेंद्र राय को अदालत की अवमानना का नोटिस भी थमा दिया।
Posted on 01 May 2011 by admin
कांग्रेस भी क्या गजब की पार्टी है, प्रतिकूल सियासी झंझावातों से भी गुजरते हुए कभी विपक्षी दलों (खासकर भाजपा) के प्रति उनकी आक्रामकता की धार कभी भोथरी नहीं पड़ती, पिछले दिनों एक अहम बैठक में कांग्रेसी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से भिड़ गए, जब उस भगवा नेता ने कांग्रेस को आइना दिखाने की बात कही तो पलटवार करते हुए कुछ युवा कांग्रेसी सांसदों ने भगवा नेता से चुनौती उछाली-‘तस्वीर तो आप की हम आप को भी दिखा सकते हैं, कुछ धोती वाली, कुछ बिना धोती के, बताइए आप कौन-सी देखना पसंद करेंगे?’
Posted on 01 May 2011 by admin
सियासी करवटों की सलवटें पढ़ने में माहिर शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के लोगों ने कलमाड़ी पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं, वैसे भी कलमाड़ी का शरद पवार से छत्तीस का आंकड़ा है और कांग्रेस भी महज पवार के पावर को बैलेंस रखने के खातिर अब तलक कमलाड़ी को आगे बढ़ाती रही…पर अब कलमाड़ी कांग्रेस से निष्कासित हैं सो शिवसेना वालों की आशाएं फिर से बहाल हो गई हैं कि वे पुणे संसदीय क्षेत्र में कलमाड़ी के प्रभाव को अपने हित में साध लेंगे।
Posted on 01 May 2011 by admin
…वक्त होता है बेवफा यारों आदमी बेवफा नहीं होता वो भी मंजिल की बात करते हैं जिनको अपना पता नहीं होता …क्या सुरेश कलमाड़ी को कभी इत्ता-सा भी इल्म था कि जब गर्दिशे दौर आएगा तो हालात उन पर इस कदर चप्पल बरसाएगा? गिरफ्तारी के रोज जब सीबीआई वाले उन्हें पूछताछ के लिए एक उनींदे-से कमरे में ले गए तो वहां सिर्फ तीन कुर्सियां थीं और एक अदद स्टूल, लकड़ी के उस स्टूल पर असहाय से बैठने वाले कलमाड़ी ने छूटते ही कहा कि उन्हें सोनिया गांधी से फोन पर बात करनी है…इस पर वहां मौजूद एक एसपी ने उन्हें इस कदर घुड़का कि कलमाड़ी के पसीने छूट गए, पूछताछ का पहला राउंड खत्म हुआ…तीनों कुर्सी वाले साहब उठकर चले गए,…बिचारे कलमाड़ी पूरे वक्त स्टूल पर बैठे साहब लोगों के आने का इंतजार करते रहे…पर उस रोज वे अफसर नहीं आए, आईं तो बस कलमाड़ी के लिए नई मुसीबतों की आहटें…हालात बताते हैं उन्हें जमानत मिल पाना फिलवक्त बहुत मुश्किल लगता है…
Posted on 23 April 2011 by admin
दिल्ली भाजपा अपने बड़बोले अध्यक्ष के बोलने से परेशान है… नासमझ भगवा पार्टी इतना भी नहीं समझ पाई है कि बोलते-बोलते ही तो बिजेंद्र गुप्ता गली-मुहल्ले की राजनीति से दिल्ली की राजनीति तक पहुंच पाए हैं। जबसे बिचारे मजनूं का टीला हार गए हैं, कोई सियासी लैला उन्हें घास नहीं डाल रही। दिल्ली भाजपा में उनका और उनकी पत्नी शोभा विजेंद्र का जलवा तो बस देखते ही बनता है। पार्टी में इनके विरोधी कहते हैं पार्टी चलाने से ज्यादा ध्यान इन दिनों वे अपनी पत्नी के एनजीओ ‘संपूर्णा’ पर दे रहे हैं। अभी पिछले दिनों राष्ट्रीय महिला मोर्चा अध्यक्ष स्मृति ईरानी ने नितीन गडकरी से मिलकर जी-भर के गुप्ता की शिकायत लगाई कि दिल्ली में व्यक्ति ही पार्टी का पर्याय बन गया है और यहां की राजनीति में निरंतर उनकी (स्मृति की) उपेक्षा हो रही है, स्मृति इसे अपना अपमान समझ रही हैं, उनका खुले तौर पर मानना है कि दिल्ली भाजपा तो शोभा विजेंद्र के इशारों पर चल रही है।…जाने अध्यक्ष जी ने क्या दिलासा दी होगी…।
Posted on 23 April 2011 by admin
‘क्या तेज जगमगाती थी कातिल के हाथ में अब उसकी आस्तीन में तो खंजर भी न रहा…’ औरतों के रुखसार के पाउडर व लबों की लिपस्टिक उन्हें जम्मू-कश्मीर के आतंकी का भान कराते हैं,जब ये जनाब वर्ष 1998 के एनडीए शासनकाल में सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री थे तो इन्होंने अपने इलाहाबाद का मकान अपने ही मंत्रालय के अधीनस्थ ‘सांग एंड ड्रामा डिविजन’ को मुंहमांगी कीमत पर किराए पर दे दिया था, बाद में जब ये पार्टी प्रवक्ता बने तो इन्हें पार्टी के नई दिल्ली के 11 अशोक रोड स्थित केंद्रीय कार्यालय में कथित तौर पर मदिरा पान करते हुए पाया गया, तब अडवानी के निर्देश पर इन्हें पार्टी प्रवक्ता पद से हटा दिया गया, इस दफे के लोकसभा चुनाव में रामपुर से उनकी जमानत जब्त हो गई, मौजूदा वक्त में वे खुद को पार्टी का प्रवक्ता प्रोजेक्ट करते हैं, पर आधिकारिक तौर पर हैं नहीं, पर भाजपा बीट कवर कर रहे पत्रकारों की माने तो ‘ऑफ द् रिकार्ड’ ब्रीफ करने में उनका कोई सानी नहीं, उन्हें पार्टी का ‘ऑफ द् रिकार्ड टि्वटर’ भी कहा जाता है, इस शुक्रवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन गडकरी ने उन्हें क्या खूब लानतें भेजी, पर लगता नहीं कि मुख्तार अब्बास नकवी बस इतनी डपट भर से सुधरने वाले। क्या करें, …’वो भी मंजिल की बात करते हैं, जिनको अपना पता नहीं होता।’
Posted on 23 April 2011 by admin
अन्ना हजारे एंड पार्टी पर कांग्रेस का हमला इतना तीखा क्यों है? यह अन्ना हजारे को लिखे सोनिया के 19 अप्रैल वाले पत्र से स्पष्ट हो जाता है, इस पत्र के पैरा (दो) में सोनिया बड़ी स्पष्टता से कहती हैं कि अरुणा राय को संयोजक बना राष्ट्रीय सलाहकार परिषद लोकपाल बिल की पारदर्शिता, जवाबदेही और गवर्नेस को लेकर पहले से कार्यरत था। और अरुणा राय व हर्ष मंदर की टीम इस बिल पर राय लेने के लिए भूषण बाप-बेटे, अरविंद केजरीवाल, संतोष हेगड़े आदि से मिली थी। कांग्रेस को लगता है कि अन्ना और उनके लोगों ने एनएसी के इसी मौलिक आइडिया को उड़ा लिया और सीधे जंतर मंतर पर जाकर धरने पर बैठ गए।
Posted on 17 April 2011 by admin
कतिपय एक अनजाने व उत्तर भारतीय राज्यों में अनचीन्हे नितीन गडकरी ने जब भाजपा की बागडोर संभाली तो उनके नेतृत्व को लेकर उम्मीद कम शंकाएं ज्यादा थीं, पर गडकरी ने अपने प्रो-एक्टिव कार्य शैली से लगता है अपने आलोचकों का मुंह बंद करने का काम किया है। अपने पूर्र्ववत्ती राजनाथ सिंह की निर्णय न ले सकने की इमेज के विपरीत गडकरी को आनन-फानन में निर्णय लेने की आदत है। पार्टी के पूर्र्ववत्ती अध्यक्षों की तुलना में वे एक घुमक्क्ड़ अध्यक्ष हैं। उन्हें सफर में रहना पसंद है, उनकी यही बात संघ को भा रही है। पर पार्टी को लेकर उनकी योजनाएं और उनकी जुबान दोनों लंबी है, पर वे अपनी इमेज रिजल्ट देने वाले अध्यक्ष की बनाने में जुटे हैं। गडकरी अपने वजन को लेकर भी इन दिनों ज्यादा फिक्रमंद हैं, चुनांचे वे अन्न की बजाए दाल व सब्जियां ज्यादा खा रहे हैं, उनका लक्ष्य है तीन महीने में अपना 15 किलो वजन कम करने का। साथ ही अपने सियासी वजन को लगातार बढ़ाते रहने का मूलमंत्र तो उन्होंने पकड़ा हुआ ही है।