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Posted on 07 February 2012 by admin
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Comments Off on (English) It happened like we said it would
Posted on 31 January 2012 by admin
नए राज्यपालों की नियुक्ति, कुछ के फेरबदल और कुछ को एक्सटेंशन मिलने की तैयारियां पूरी हो चुकी है। कम से कम दो राज्यपाल ऐसे हैं जो बीमार चल रहे हैं, सरकार उन्हें बदलने की सोच रही है। महाराष्ट्र के राज्यपाल के.शंकर नारायण हृदय रोग से पीड़ित हैं और इन दिनों उनका अक्सर अस्पताल में ही चक्कर लग रहा है। केरल के राज्यपाल एम.ओ.एच फारूख को अभी चैन्नई के अस्पताल में रिनल की कुछ समस्याओं की वजह से भर्ती कराया गया है, कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को फिलवक्त केरल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि कम से कम दो राज्यपालों के राज्य बदलने की तैयारी है और 2 को 5 वर्षों का एक्सटेंशन दिया जा रहा है। नए राज्यपाल के लिए कई नाम सियासी हलकों में उमड़धुमड़ रहे हैं पर यूपीए सरकार इस मामले में फिलहाल तो उदासीन ही दिखती है।
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Posted on 31 January 2012 by admin
गणतंत्र दिवस समारोह के लिए सोनिया गांधी विशेष तौर पर दिल्ली में बनी रहीं, अपने व्यस्त चुनावी कार्यक्रमों से समय निकालते हुए। देखने वालों ने यह भी देखा कि कैसे एक न्यूज चैनल की सलाह पर माननीय राष्ट्रपति पहली दफा बच्चों से घुल-मिल कर बात करती दिखीं और अपने पूर्ववर्ती ए.पी.जे.अब्दुल कलाम की याद दिला गईं, जिनका बच्चों व युवाओं से एक खास तरह का लगाव रहता था। पर्यवेक्षक तो यहां तक मान रहे हैं कि माननीय राष्ट्रपति का यह उपक्रम अगली बार के लिए उनके दावे के कयासों को और पुख्तगी दे रहा है।
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Posted on 31 January 2012 by admin
जाने यह कैसा एक हसीन इत्तफाक था एक दिन अचानक यूं ही लखनऊ एयरपोर्ट पर दो विपरीत धु्रवों की राजनीति करने वाले राजनेताओं का आमना-सामना हो गया हिंदू हृदय सम्राट में शुमार होने वाले वरुण गांधी ने जब मुसलमानों के रहनुमा बनने की कवायद में जुटे मुलायम सिंह को सामने से आते देखा तो तपाक से उनसे मिलने जा पहुंचे, ये दोनों नेता इतनी आत्मीयता से बतिया रहे थे कि वहां मौजूद समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता भी एकबारगी असहज हो गए, वहां उपस्थित सपा के एक सांसद ने मुलायम की सुरक्षा में लगे एनएसजी कमांडों से कहा कि वे फौरन मुलायम को चारों तरफ से घेर लें ताकी इन दोनों नेताओं की यह मुलाकात मीडिया की नजरों से बच जाए। वैसे भी नई दिल्ली में मुलायम सिंह का सरकारी निवास व वरुण गांधी की मां मेनका गांधी का सरकारी निवास 14 अशोक रोड एकदम आमने-सामने हैं, चुनांचे दोनों नेताओं की न सिर्फ देखा-देखी हो जाती है, बल्कि बदलते वक्त के साथ इनकी आत्मीयता और परवान चढ़ती जाती है।
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Posted on 24 January 2012 by admin
पर कृष्ण की नगरी मथुरा के पंकज पचौरी को न तो पुलक को रिपोर्ट करने से परहेज था और न ही भाषायी पत्रकारों से कोई खास एलर्जी, वैसे भी पंकज के हिंदी पत्रकारों से अच्छे रिश्ते हैं। इनकी पत्नी मराठी हैं, चुनांचे भाषायी पत्रकारों में भी इनकी पहुंच है। पर पीएमओ में अभी भी यह चर्चा चल रही है कि पंकज पीएम की आखिरी च्वॉइस नहीं है, जब तक खरे के स्थानापन्न की तलाश पूरी नहीं हो जाती है तब तक वे बने रहेंगे। लगता है कि यह खबर बाहर भी लीक हो गई है इसीलिए तो महज औपचारिक मुलाकात के लिए पंकज ने प्रणब मुखर्जी व अडवानी से जब मिलने का टाइम मांगा तो इन दोनों ही जगहों पर उन्हें निराशा हाथ लगी।
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Posted on 24 January 2012 by admin
कांग्रेस की दहलीज पर कांग्रेस का एजेंडा आगे बढ़ाने वाले तमाम वरिष्ठ पत्रकारों ने धमा चौकड़ी मचा रखी है। हिंदुस्तान टाइम्स की शोभना भरतिया ने सोनिया गांधी से मिलकर पहले ही साफ कर दिया है कि उन्हें अपने लिए राज्यसभा की अगली टर्म नहीं चाहिए। जिन्हें चाहिए उनके नाम भी बड़े हैं और उनका दावा भी मजबूत है मसलन, विनोद शर्मा, आलोक मेहता, मृणाल पांडेय, राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त आदि-आदि।
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Posted on 24 January 2012 by admin
तमाम प्रतिकूल सियासी झंझावतों से डूबते-उतरते भी भाजपा अध्यक्ष बम-बम हैं, और अपने मनचाहे डंडे से भगवा पार्टी को हांक रहे हैं। भाजपा को नियंत्रित व पथ निर्देशित करने वाले संघ ने नितिन गडकरी से साफ-साफ कह दिया है कि वे अगले टर्म की ताजपोशी के लिए तैयार रहें। 5 राज्यों के चुनावी नतीजे आने के तुरंत बाद भाजपा का एक ‘प्लेनेरी सेशन’ बुलाया जा रहा है, जिसमें पार्टी अपना संविधान संशोधन लेकर आने वाली है, इस संशोधन के मुताबिक भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष किया जा रहा है और पार्टी संविधान में ऐसी भी व्यवस्था लाई जा रही है कि पार्टी अध्यक्ष लगातार 2 टर्म यानी अपने कार्यकाल के 6 वर्ष पूरे कर सकता है। जबसे यह खबर गडकरी को लगी है अपने 100 किलो के वजन की परवाह किए बगैर वे आसमां में कुलांचे भर रहे हैं।
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Posted on 14 January 2012 by admin
यूपी में अगड़ी जातियों खासकर ब्राह्मणों को लुभाने के लिए कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी अब ‘इंदिरा कार्ड’ चल रहे हैं। राहुल जानते हैं कि कुशवाहा प्रकरण से राज्य के अगड़े मतदाताओं में भाजपा की खूब किरकिरी हुई है, इस दफे के चुनाव में ब्राह्मण मतदाताओं का रूख भी तय नहीं है, उन्हें फ्लोटिंग वोटर्स माना जा रहा है जो क्षेत्र विशेष की हवा और प्रत्याशी को देखते हुए कहीं भी जा सकते हैं। राहुल जब इस दफे ब्राह्मण बहुल इलाकों में प्रचार कर रहे थे तो उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा का कुशवाहा प्रेम महज पिछड़े वोटरों को लुभाने का एक ढोंग भर था। राहुल ने लोगों को याद दिलाया कि वे इंदिरा गांधी के पोते व राजीव गांधी के बेटे हैं और वे यूपी में महज चुनाव जीतने नहीं आए हैं, यहां से उनका एक भावनात्मक रिश्ता भी है। कांग्रेस व राहुल को मालूम है कि यूपी में उनका कोई ‘वोट बैंक’ नहीं रह गया है, सो ऐसे समय में जबकि सपा, बसपा व भाजपा तीनों ही पार्टियां जहां पिछड़े वोटरों को लुभाने में जुटी है वहीं राहुल ने अपना फोकस सवर्ण मतदाताओं पर रखा है और कांग्रेसी युवराज ने कांग्रेस का प्रचार अभियान संभाल रही विज्ञापन एजेंसी से कहा कि वे खास सवर्ण मतदाताओं को ध्यान में रखकर अपना कोई ‘कैंपेन’ तैयार करें।
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Posted on 14 January 2012 by admin
मुलायम सिंह का इटावा प्रेम जगजाहिर है। कन्नौज जहां से उनके लाडले अखिलेश सिंह सांसद हैं तो यहां के आलू किसानों की समस्याएं जब नेताजी के पास पहुंची तो वे किसानों के दुख से द्रवित हो गए और यह जानकर परेशान भी हो गए कि किसानों की आलू की फसलें मंडी तक ही नहीं पहुंच पा रहीं, आलू का कोई खरीदार नहीं। बहुत बार तो यह फसल खेत में खड़ी-खड़ी ही खराब हो जाती है। नेताजी ने एक विशेषज्ञ राजीव टंडन को आलू पर एक प्रपोजल तैयार करने का जिम्मा सौंपा, यह प्रपोजल था कि कैसे आलू किसानों को राहत मिले? प्रपोजल तैयार हुआ, टंडन इसे लेकर नेताजी के पास पहुंचे तो नेताजी ने कहा कि इसमें इटावा भी जोड़ दो। बाद में नेताजी ने तय किया कि अब जो आलू प्रोसेसिंग यूनिट लगना है वह तो इटावा में ही लगेगा। यानी कन्नौज के आलू किसान अपनी दुर्दशा पर यूं ही आंसू बहाते रहेंगे।
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Posted on 11 January 2012 by admin
कभी बहिनजी के दायां हाथ रहे बाबू सिंह कुशवाहा ने जब से भगवा राजनीति में अपना हाथ आजमाया है, भाजपा में तूफान मच गया है। यूपी चुनाव में अन्ना इफैक्ट के हिंडोलों पर सवार होने की भाजपा की मंशा पर घड़ों पानी फिर गया है। पार्टी के अंदर गडकरी व राजनाथ की विश्वसनीयता पर सवाल किए जा रहे हैं, पार्टी जन इसे खुल्लम-खुल्ला 5-25 का चक्कर बता रहे हैं। राजनीति में नैतिकता व शुचिता की दुहाई देने वाले संघ की चुप्पी सबसे हैरान करने वाली है, दबी जुबान से भगवा हलकों में चिंता जताई जा रही है कि कहीं संघ भी तो 5-25 के लाभार्थियों में शामिल नहीं है? चिंतित अडवानी ने जब गडकरी को फोन किया कि ‘वे कुशवाहा को पार्टी में लेने की कैसे सोच सकते हैं?’ तो गडकरी ने फौरन जवाब दिया कि ‘अगर हमने इन्हें नहीं लिया होता तो सपा-कांग्रेस इन्हें कब से अपनी पार्टी में शामिल करने को तैयार बैठी थी’, गडकरी का भरोसा है कि कुशवाहा के भाजपा में आने से पिछड़े वोट भाजपा के साथ जुड़ेंगे और जो भी गडकरी के साथ जुड़ा है वह तो बोनस है ही।
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