Posted on 06 March 2012 by admin
कांग्रेस ममता बनर्जी की इन भावनाओं को बखूबी भांप चुकी है कि ममता आज न कल केंद्र सरकार से अपने मंत्रियों को वापिस बुला ही लेंगी और यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देगी। सो ममता के खिलाफ कांग्रेस ने मीडिया को भी मैनेज कर रखा कि वह जितनी हो सके जनता में ममता की किरकिरी करे। इसीलिए ममता के भतीजे के मामले को कोलकाता के एक बड़े मीडिया समूह के (जिनके स्वामी दस जनपथ करीबी बताए जाते हैं) अखबार व चैनल ने इस मुद्दे को पूरे जोर-शोर से उठाया और इस पूरे प्रकरण को ममता परिवार को सत्ता के नशे से जोड़कर दिखाया। दरअसल कांग्रेसी मैनेजरों की यह रणनीति है कि किसी भी भांति राष्ट्रपति चुनाव तक ममता यूपीए सरकार का हिस्सा बनी रहें और अपने मंत्रियों को अभी वापिस नहीं बुलाए।
Posted on 06 March 2012 by admin
मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपा शंकर सिंह पर कानून का शिकंजा कसता ही जा रहा है। दरअसल कृपा शंकर उस कांग्रेसी रणनीति के शिकार हो गए, जिस फार्मूले के तहत कांग्रेस अपने चिरंतन विरोधियों और क्षत्रपों को काबू में रखने के लिए उनके खिलाफ अपना कोई व्यक्ति या संस्था (एनजीओ) लगाकर उसके खिलाफ तमाम तरह के सुबूत इक्कट्ठे करती है, फिर उनके माध्यम से कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करवा दी जाती है। और बाद में ऐसे मामलों को सीबीआई को जांच के लिए सौंप दिया जाता है। जैसा कि दिवंगत राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी के मामले में हुआ। माना जाता है कि महाराष्ट्र कांग्रेस के एक खेमे ने ही अपनी पहल पर एक उत्तर भारतीय दीपक तिवारी से मुंबई हाई कोर्ट में कृपा शंकर के खिलाफ एक पीआईएल दाखिल करवाई, कोर्ट ने इसी याचिका को एफआईआर मान लेने का आदेश जारी कर दिया। इस मामले में कांग्रेसी खेमे ने यह चतुराई बरती कि उन्होंने किसी मराठी से यह पीआईएल दर्ज नहीं करवाई कि मुंबई में केले बेचने वाला एक व्यक्ति 400 करोड़ रुपयों की अकूत संपत्ति का कैसे मालिक बन गया? ऐसी स्थिति में यह मामला मराठी मानुष बनाम उत्तर भारतीय हो जाता और कृपा शंकर इस क्रम में हीरो बन जाते। सूत्र बताते हैं कि कृपा शंकर के बाद यह कांग्रेसी ब्रह्मास्त्र पीआईएल शरद पवार पर चल सकता है जो महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में बुरी तरह मुंह के खा चुके हैं।
Posted on 28 February 2012 by admin
हरेन पांडया मर्डर कांड एक बारगी पुन: सुर्खियों में आने वाला है, सनद रहे कि इस मामले में पहले अहमदाबाद ट्रायल कोर्ट ने 12 में से 9 आरोपियों को दोषी करार दिया था, बाद में गुजरात हाई कोर्ट से यह सारे आरोपी उचित साक्ष्य के अभाव में बरी हो गए थे। पांडया की पत्नी लगातार इस मामले को उठाती रही और कहती रही कि अपने पति के हत्यारों को सजा दिलवा के ही वह चैन की सांस लेंगी। कांग्रेस को भी यह मामला सियासी भाव-भंगिमाओं से ओत-प्रोत लग रहा था, सो इस मामले को सीबीआई जांच के सुपुर्द कर दिया गया। सीबीआई जांच से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि हरेन पांडया मर्डर कांड में क्या कहीं सोहराबुद्दीन व तुलसी प्रजापति का हाथ तो नहीं था, जिस वजह से इनका पुलिस एन्काउंटर हो गया।
Posted on 28 February 2012 by admin
आखिरकार क्यों आई जयललिता और शशिकला की इतनी पुरानी दोस्ती में दरार, रिश्तों में खटास। सूत्र बताते हैं कि नरेंद्र मोदी ने जयललिता को पहले पहल यह ‘टिप’ दी थी कि उनका कोई निकटस्थ सहयोगी ही उनके खिलाफ किसी बड़े षडयंत्र को अंजाम दे रहा है, जाहिर है मोदी का इशारा शशिकला की ओर था। मोदी ने अपनी खास दोस्त जयललिता को यह भी चेताया था कि उनके ऊपर जानलेवा हमला भी हो सकता है। मोदी से यूं तो जयललिता की मित्रता काफी पुरानी है, पर जया ने शुरू में मोदी की बातों पर ध्यान नहीं दिया, पर एक दिन उन्हें जब खटका हुआ तो उन्होंने शशिकला और उनके घर वालों के फोन खुफिया विभाग वालों को टेप करने को कहा, इसी फोन टेपिंग में कुछ ऐसे राज उभर कर सामने आए जिसने तमिल महारानी को दहला दिया। और शशिकला के लिए उल्टी गिनती की शुरूआत हुई।
Posted on 28 February 2012 by admin
जिंदगी के हर मोड़ पर विजय की ख्वाहिश रखने वाले विजय माल्या के लिए उनकी राह इतनी मुश्किल कभी नहीं रही थी। पिछले काफी समय से माल्या यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलने की कोशिश में जुटे हैं, पर अब तक उन्हें 10 जनपथ सोनिया से मिलने का समय नहीं दे रहा है। सूत्र बताते हैं कि माल्या की रंग-बिरंगी जीवनशैली कभी भी गांधी परिवार को खासकर सोनिया व प्रियंका को मुफीद नहीं लगी। सो पहले जब माल्या सरकार से किंगफिशर के स्पेशल पैकेज की मांग कर रहे थे तो उन्हें सरकार की ओर से टका-सा जवाब मिल गया। अब माल्या अपनी तमाम देनदारी को लांग टर्म लोन में बदलवाना चाहते हैं और साथ ही यह भी चाहते हैं कि उनकी कंपनी के जो अकाऊंट फ्रीज हो गए हैं, उन्हें डिफ्रीज किया जाए, लगता है अकाऊंट डिफ्रीज के मामले में माल्या की सुन ली जाएगी। बाकी के मामले ठंडे बस्ते में।
Posted on 20 February 2012 by admin
बाबू सिंह कुशवाहा से भाजपा का एक अटूट रिश्ता स्थापित हो गया है, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से कुशवाहा निरंतर संपर्क में रहते हैं और भाजपा में अब भी उनकी तूती बोलती है। माना जाता है कि कुशवाहा ने अपने दम पर अपने कई चहेतों की सियासी महत्वाकांक्षाओं के कमल खिला दिए हैं, अभी आगरा संसदीय क्षेत्र की एक विधानसभा सीट पर बाबू सिंह को अंडर ग्राउंड रहकर एक भाजपाई उम्मीदवार का प्रचार करते देखा गया। कुशवाहा ने बकायदा अपने समर्थकों का एक मंच बना रखा है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा लोग सम्मिलित हैं। कुशवाहा जहां जाते हैं मंच के सदस्यगण साथ जाते हैं और खुलकर उनके पक्ष में नारे लगते हैं, ‘बाबू सिंह नहीं आंधी है, बुंदेलखंड का गांधी है’।
Posted on 20 February 2012 by admin
चर्चित उद्योगपति व शराब व्यावसायी पोंटी चङ्ढा के जब पिछले पखवाड़े उनके 19 स्थानों पर एक साथ आयकर विभाग के छापे पड़े तो इन छापों की गूंज में सत्ता की मिलीभगत की अनुगूंज भी शामिल हो गई। और सत्ता के गलियारों में ये सवाल भी बारंबार पूछे गए कि छापा पड़ने से ऐन पहले पोंटी प्रणब मुखर्जी व अमिता पॉल से मिलने क्यों पहुंचे थे? हालांकि इस मुलाकात की कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो पायी है फिर भी सूत्र बताते हैं कि पोंटी वित्त मंत्री से मिलने में कामयाब रहे थे। और पोंटी के ऊपर पड़े छापों में खूब शोर उमड़ा कि ढाई सौ करोड़ की नकद बरामदगी हुई है पर बड़े फिल्मानी तरीके से खोदा पहाड़ निकली चुहिया के तर्ज पर नोएडा के सेंटर स्टेज मॉल स्थित पोंटी के लॉकर से महज 100 रुपए की बरामदगी दिखाई गई, यानी सरकारी रिकार्ड में वहां 50-50 के सिर्फ दो नोट ही मिले। यह पूरा वाक्या हैरान कर देने वाला है और अपने आप में कई सवाल खड़े करने वाला भी। सीबीडीटी के जिस अधिकारी एस.एस.राणा के नेतृत्व में इस पूरे मुहिम को अंजाम दिया गया था, आनन-फानन में उनका तबादला कर दिया गया है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि ऐसा करने भर से यह मामला शांत हो सकता है, पर लगता है कि केंद्र सरकार अब भी इस बात से अनजान है कि उन्हें जनता के कई अनुत्तरित सवालों के जवाब देने ही होंगे।
Posted on 20 February 2012 by admin
एनआइए ने संघ के कुछ प्रमुख लोगों की गिरफ्तारी का अनुमोदन गृह मंत्रालय को भेज दिया है, अब सिर्फ कांग्रेस की हामी का इंतजार है, कमल चौहान की गिरफ्तारी का भी लंबे समय से इंतजार था जो समझौता एक्सप्रेस बम कांड के मुख्य आरोपी हैं, एनआइए को लगता है कि इनकी गिरफ्तारी में बहुत देर हो गई। वहीं जब एम.के.नारायणन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे तो उन्होंने संघ के कुछ प्रमुख लोगों के खिलाफ कई सबूत इकट्ठे किए थे, बाद में उन्होंने अडवानी से मिलकर ये तमाम दस्तावेज उन्हें दिखा दिए थे, तब अडवानी से कोई जवाब देते नहीं बना था। अब केंद्र सरकार पशोपेश में है कि यूपी में इतना महत्वपूर्ण चुनाव चल रहा है और इसके दरम्यान अगर संघ नेताओं की गिरफ्तारी हो गई तो उमा भारती की अगुवाई में भगवा पार्टी जरूर इस मसले को वोटरों में भुना लेगी। वहीं कांग्रेस में एक वर्ग का मानना है कि संघ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अगड़े हिंदू वोटों का रुख चाहे जो भी हो, कम से कम मुस्लिम वोटरों का रुझान तो यकीनन कांग्रेस की ओर बढ़ेगा। कांग्रेस हाईकमान को इस बारे में अपना अंतिम निर्णय लेना है।
Posted on 07 February 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 07 February 2012 by admin
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