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आनंद की मांद

Posted on 23 December 2009 by admin

कांग्रेस आलाकमान ने हिमाचल प्रदेश के लिए वीरभद्र सिंह के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी है, उन्हें लगता है कि अब वीरभद्र की एक उम्र हो चली है सो उनके उत्तराधिकारी के तौर पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा को देखा जा रहा है। समझा जाता है कि आनंद शर्मा को इस हेतु जरूरी संदेश मिल गए हैं और उन्हें हिमाचल अपने गृह राज्य वापिस जाने को तैयार रहने को कहा गया है और उनसे यह भी कहा गया है कि वह पहले हिमाचल में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने का कार्य करेंगे।

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…और अंत में

Posted on 20 December 2009 by admin

महामहिम राज्यपालों की कई बेजा मांगों से कई प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की नींद उड़ी हुई है, याद कीजिए जब बलराम जाखड़ ने मध्य प्रदेश के राजभवन का कामकाज संभाला था तो उनके लिए राजभवन के कई फर्नीचर को खास तौर पर बदला गया था। जब उनके लिए 7 फीट का कोई बना बनाया रेडीमेड पलंग उपलब्ध नहीं हो सका तो खास तौर पर उनके लिए डिजाइन किए हुए सात फुटी पलंग बढ़ई मिस्त्री द्वारा बनवाए गए थे। अब हरियाणा के माननीय महामहिम व राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने अपने लिए ‘बुलेटप्रुफ बेडरूम’ की मांग की है, तब से हैरान-परेशान हैं हुड्डा कि गवर्नर की चौकसी तो पहले से इतनी चाक-चौबंद है वह भी चौबीसो घंटे, अब ऐसे में बुलेटप्रुफ बेडरूम की जरूरत क्या आन पड़ी है?

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भाषा का कुहासा

Posted on 20 December 2009 by admin

कैबिनेट की बैठकों में जब से एक तमिल मंत्री जी अमरीका से अंग्रेजी सीखकर आए हैं तो उनका अंदाज देखते ही बनता है, अपनी अमरीकन एक्सेंट वाली गिटपिट अंग्रेजी में मंत्री महोदय जब कुछ कहना चाहते हैं तो उनकी अतिउत्साह के वजह से उनकी बात शायद ही किसी के पल्ले पड़ती है। सो मित्रों ने उन्हें सलाह दी है कि बहुत हुई अंग्रेजी, अब हिंदी सीखो, इसी से बेड़ा पार होगा। सो अब अपने लिए एक माकूल शिक्षक की तलाश में हैं मंत्री जी, बस शर्त इतनी है कि उस हिंदी शिक्षक को तमिल भी आती हो क्योंकि मंत्री जी को खुद अपनी अंग्रेजी पर ज्यादा विश्वास नहीं रह गया है।

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उल्फा से खफा

Posted on 10 December 2009 by admin

उल्फा आतंकियों के छुपने की अब तक तीन महफूज जगह थीं भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश। जब भारत सूकी को सपोर्ट कर रहा था तो म्यांमार आर्मी उल्फा को बांग्लादेश स्थित बेस पर हथियार, प्रशिक्षण और आर्थिक मदद देती आई थी। भारत सरकार ने इस दफे कूटनीतिक स्तर पर काफी प्रयास किए और भारतीय डिप्लोमेसी ने सचमुच इस दफे इतिहास बना दिया। बांग्लादेश सरकार की मदद से रातों-रात अरविंद राजखोवा और राजू बरूआ आदि को धर दबोचा गया और उन्हें सिल्चर के पास भारतीय एजेंसियों के सुपुर्द कर दिया गया। भारत सरकार जानती है कि इन गिरफ्तार आतंकी नेताओं को न तो जेल में रखने से कोई फायदा है और ना ही इन पर लंबा मुकदमा चलाने से। सो सरकार इन्हें जल्द से जल्द दिल्ली लाकर न सिर्फ इनसे पूछताछ करना चाहती है अपितु इनसे बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहती है।

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…और अंत में

Posted on 03 December 2009 by admin

पंजाब का राज्यपाल बनने के लिए अभ्यर्थियों की लाइन चाहे जितनी भी लंबी हो, सबसे मजबूत दावा इस पद के लिए जस्टिस लिब्रहान का ही है, उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए कांग्रेस उन्हें उपकृत करने का हरसंभव मन बना रही है।

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गडकरी ही क्यों?

Posted on 28 November 2009 by admin

संघ से जब यह पूछा गया कि आखिर नितिन गडकरी के अध्यक्षीय चयन के पीछे उनका तर्क क्या है तो संघ का कहना था कि वह एक ऐसा अध्यक्ष चाहता था जो प्रधानमंत्री बनने का सपना न पाले। पूर्ववर्ती अध्यक्षों के बड़े सपनों और आकांक्षाओं से आहत संघ ने गडकरी को अपनी मंशाओं से अवगत करा दिया है।

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चल खुसरो घर आपणै

Posted on 28 November 2009 by admin

संघ भाजपा के रूठे नेताओं की घर वापिस सुनिश्चित कराने के प्रयासों में जुटा है। संघ से कल्याण की बढ़ती पींगों से आजिज होकर ही मुलायम ने कल्याण से अपने रिश्तों की इतने आनन-फानन में इतिश्री कर ली। मुलायम जान गए थे कि कल्याण कभी भी साईकिल से दलदल में कमल के लिए उतर सकते हैं। गोविंदाचार्य को भी वापिस भाजपा में लाने के लिए संघ प्रयत्नशील है, संघ की अपनी सोच है कि चूंकि गोविंद और बाबूलाल मरांडी के बीच काफी अच्छे रिश्ते हैं, चुनांचे गोविंद और बाबूलाल को भाजपा की ओर प्रवृत्त करने में सफल हो सकते हैं। संघ लंबे समय से उमा भारती को भी एनडीए में शामिल कराने की योजना पर काम कर रहा है। पर यह सब होगा तब जब इससे पहले भाजपा का नया अध्यक्ष अपना काम-काज संभाल लें।

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कहां गए तीन करोड़?

Posted on 21 November 2009 by admin

हरियाणा विधानसभा चुनाव में न सिर्फ भाजपा के वोट उड़नछूं हुए अपितु पार्टी फंड के कोई 3 करोड़ रुपए भी गायब हो गए, इस पैसे का अब तलक कोई सुराग नहीं मिला है। याद करिए कुछ अरसे पहले भाजपा के पार्टी मुख्यालय के तिजोरी से ढाई करोड़ रुपए गायब हो गए थे, पर पार्टी ने उन पैसों की बरामदगी के लिए अपनी ओर से शायद ही कोई प्रयास किए हों, यहां तक कि पार्टी ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की जहमत भी नहीं उठाई। इस बार के हरियाणा चुनाव में पार्टी फंड में कोई 7 करोड़ रुपए इकट्ठे हुए। हरियाणा में भगवा पार्टी का काम-धाम देखने वाले लोगों का दावा है कि इन पैसों में से कोई चार करोड़ रुपए तो चुनाव में खर्च हो गए। यह और बात है कि यह पैसा न तो भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों तक पहुंचा, न ही पार्टी के होर्डिंग्स वगैरह ही नजर आए, पार्टी का प्रचार अभियान भी बेहद मामूली था, इस पर भी अगर इन चार करोड़ का खर्चा मान भी लिया जाए तो शेष बचे 3 करोड़ आखिर गए कहां? धरती निगल गई या आसमां खा गया? जेतली जी कहते हैं कि यह रकम उन्होंने अध्यक्ष जी को दे दी, अध्यक्ष भी कथित तौर पर रामलाल जी का नाम ले रहे हैं और रामलाल जी विजय गोयल का नाम ले रहे हैं और पूछने पर विजय गोयल कहते हैं कि यह रकम उन्होंने उस शख्स को दे दी जो हरियाणा देख रहा था, …इन सबसे अलहदा कोई और भी है जो देख रहा है इन सबको।

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क्या पटेंगे पटनायक?

Posted on 14 November 2009 by admin

क्या नवीन पटनायक के लिए भाजपा ने अब भी अपना दिल और दरवाजा खुला रखा हुआ है? नहीं तो पिछले दिनों नई दिल्ली के चितरंजन पार्क इलाके में रहने वाले भाजपा के एक करीबी बंगाली पत्रकार (जो कभी अडवानी के खास हुआ करते थे, इन दिनों वे अरुण जेतली के काफी करीबी हैं) के घर डिनर पर नवीन घंटों रहे, इस डिनर में नवीन की एक करीबी महिला पत्रकार शामिल भी थीं जो आर्क्सफोर्ड के दिनों से ही नवीन की करीबी दोस्त हैं। अगर नवीन की किसी से नाराजगी है तो वह एक अन्य पत्रकार टर्न राजनेता चंदन मित्रा से है। शायद इस बात को भाजपा आलाकमान भांप गया है और उन्होंने ‘नवीन-मुहिम’ की कमान अपने एक अन्य बंगाली योध्दा को सौंप दी है।

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संघ का निशाना भंग

Posted on 20 October 2009 by admin

संघ का निशाना कहीं और होता है, गोली कहीं और चलती है। संघ हिंदुत्व के नए पुरोधा के तौर पर पुचकारता तो वरुण गांधी को है, पर गाहे-बगाहे तारीफ राहुल गांधी की करता है। अभी राजगीर के संघ अधिवेशन में संघियों ने एक स्वर में गरीबो-दलितों के घर राहुल गांधी के रात्रि प्रवास मुहिम पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है। और लगे हाथ भाजपाईयों को सीख दे डाली है कि वे ग्रामीण भारत की दशा-दिशा पर ज्यादा विचार करें। अब भोपाल में दशहरे के दिन एक स्कूल में संघ का शस्त्र पूजन का कार्यक्रम था, सो एक संघी श्यामलाल गुर्जर के गैर लाईसेंसी देसी पिस्तौल से गोली चल गई और एक समर्पित संघ सेवक नरेश मोटवाणी मौके पर ही बेमौत मारे गए। अब संघियों को हिदायत मिली है कि वे अपने पथ संचरण के कार्यक्रमों में भी आग्नेय अस्त्र लेकर न चलें,फायरिंग करना तो भूल ही जाएं। सो, अब संघियों की बंदूके खामोश हो गई हैं और अगर आग उगल रही है तो बस उनकी जुबान। जैसा अभी राजगीर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उवाचा कि वे अभी धर्म संकट में हैं कि अपने 50 प्रचारकों को भाजपा में भेजें अथवा नहीं, सांसें तो सचमुच भाजपा की भी अटकी हुई हैं कि कहीं भागवत सचमुच इन प्रचारकों को भाजपा में न भेज दें।

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