Posted on 07 February 2010 by admin
और तो और अब अमर सिंह को भाजपा में लाने की भी पैरवी हो रही है और इस पैरवी मुहिम को भाजपा के जो एकमात्र नेता आगे बढ़ा रहे हैं, सियासी बाऊंसर उछालने में उनका कोई सानी नहीं, वे क्रिकेट की सियासत से लेकर सिफासत में क्रिकेट का बखूबी इल्म रखते हैं। वे ही शायद एकमात्र भगवा नेता हैं जो बीमार अमर का कुशलक्षेम पूछने के लिए सिंगापुर भी जा टपके थे।
Posted on 29 January 2010 by admin
इस दफे खूब हवा उड़ी कि वरिष्ठ कांग्रेसी अर्जुन सिंह का भी राजनैतिक पुनर्वास होगा और उन्हें किसी महत्वपूर्ण राज्य का गवर्नर बनाया जा सकता है, मगर ऐसा नहीं हुआ तो इसके पीछे एक खास कारण है और वह यह कि कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी अर्जुन सिंह को पसंद नहीं करते हैं।
Posted on 29 January 2010 by admin
भाजपा के जिन नेताओं को अध्यक्ष जी से अपने दिल की बात कहनी होती है, वे सब बड़े धर्म संकट में है। रामलाल जी हैं कि गडकरी को कभी अकेला नहीं छोड़ते, सुबह जो आकर जम जाते हैं तो देर शाम ही उनकी विदाई होती है। किरीट सोमैया और पीयूष गोयल तो हर वक्त साए के मानिंद अध्यक्ष जी के साथ होते हैं, बाल आप्टे और संजय जोशी भी उनके इर्द-गिर्द विचरते पाए जा सकते हैं, ऐसे में भला कोई भगवा नेता अध्यक्ष जी से अपनी दिल की बात कैसे कर सकता है?
Posted on 23 January 2010 by admin
एक केंद्रीय मंत्री की अनियमितताओं की दास्तां जिन दस्तावेजों में कैद है उस तक भाजपा के एक राज्यसभा सदस्य की पहुंच हो गई। इस दक्षिण भारतीय मंत्री को धमकाने के लिहाज से भगवा सांसद ने उनसे 12 करोड़ रुपयों की मांग की है और उनसे कहा है कि अगर मंत्री जी चाहते हैं कि यह मामला प्रेस और संसद में न पहुंचे तो वे झटपट जरूरी रकम का इंतजाम कर लें। अब मंत्री जी भी ठहरे निरे कलयुगी, घाट-घाट का पानी तो वे पहले ही पी चुके हैं, सो उन्होंने इस सांसद की शिकायत भाजपा हाईकमान से कर दी है। पर हाईकमान की ओर से अब तक किसी कार्यवाही की सुगबुगाहट नहीं दिख रही। सो भगवा सांसद ने अब मंत्री के खिलाफ अलख जगाने का इरादा पक्का कर लिया है, आने वाले दिनों में दिल्ली से प्रकाशित होने वाले एक अंग्रेजी अखबार में इस मामले की झलक दिख सकती है।
Posted on 13 January 2010 by admin
तेलंगाना के तेल की कड़कती कड़ाही में कई और राजनीतिक बली हो सकती हैं, सबसे ताजा नाम आंध्र के कांग्रेस प्रभारी एम.वीरप्पा मोइली का है, जिनके ऊपर आरोप लग रहे हैं कि राजशेखर रेड्डी के आकस्मिक निधन के बाद वे न तो जगन की उद्दात महत्वाकांक्षाओं को कंट्रोल कर पाए और न ही सुलगते तेलंगाना के मुद्दे को। चुनांचे मोइली का विदाई गीत लिखा जा चुका है और उनकी जगह आंध्र का प्रभारी या तो गुलाम नबी आजाद को या फिर दिग्विजय सिंह को बनाया जा सकता है।
Posted on 13 January 2010 by admin
माकपा और तृणमूल में भले ही छत्तीस का आंकड़ा हो और ममता दीदी चाहे कितनी ही मार्क्सवादी फोबिया से ग्रस्त हों, इन पार्टियों के सांसद दिलों की दूरियों पाटने में लगे हैं। हालिया दिनों में संसद के कॉरिडोर में तृणमूल का एक सांसद माकपा की एक महिला सांसद से टकरा गया तो उन्होंने झट से उन्हें उद्बोधन दिया-‘दीदी’। सांसद ने जब चौंककर देखा तो तृणमूल सांसद ने कहा-‘मेरी तो बस दो दीदी हैं और दोनों ही उतनी ही प्यारी हैं, एक आप हो और दूसरी ममता दीदी’। ममता दीदी को मालूम पड़ गया तो?
Posted on 13 January 2010 by admin
आसाराम बापू पिछले दिनों अडवानी से मिले और मदद की गुहार लगाई। चतुर सुजान अडवानी ने आदतन अपने हाथ यूं ही झाड़ लिए-‘बापू, आपको मालूम है कि वो (मोदी) किसी की सुनता नहीं, मेरी भी नहीं।’ सो बापू के एक नए तारणहार बनकर अवतरित हुए विहिप के अशोक सिंघल, उन्होंने मोदी से मिलने का वक्त मांगा तो मोदी ने उन्हें अपने घर बुला लिया, सिंघल साहब को एक भव्य ड्राईंग रूम में बिठाया गया, तयशुदा वक्त पर मोदी वहां उपस्थित हुए, उन्हें देखकर वहां सोफे पर बैठे सिंघल भी खड़े हो गए, बिना किसी औपचारिक दुआ सलाम के मोदी ने अपने शब्दबाण दाग दिए-‘क्यों अपनी तपस्या भंग करने लगे हैं अशोक जी?’ यह कहकर मोदी अपने अंदर के कमरे की ओर बढ़ लिए, सिंघल को तन्हा छोड़।
Posted on 03 January 2010 by admin
गुरु जी और भाजपा में क्या खूब खिचड़ी पक रही है और भाजपा की ओर से शिबू सोरेन से निर्णायक बातचीत का जिम्मा फिर से उन्हीं नेत्री को सौंपा गया है जिनका गुरु जी के साथ पूर्व में कोलकाता बातचीत का अनुभव खासा कड़ुवा रहा था। पर इस दफे भाजपा नेतृत्व ने गुरुजी से दो टूक शब्दों में कह दिया था-‘हमें पता है कि हमारी सीटें कितनी है और कितनी आपकी, सो बेहतर होगा कि पहले आप कांग्रेस से बात कर लो क्योंकि आपके साथ हमारा पहले का अनुभव कोई अच्छा नहीं, अगर आपकी कांग्रेस से बात नहीं बनती है तो फिर हम आपसे बात करने को तैयार हैं और आपके साथ सरकार बनाने को भी।’ भाजपा जानती है कि सोरेन की यह खास आदत है कि वे दोनों ओर ही बातचीत के सूत्र खुले रखते हैं और सियासी मोल-तोल में बकायदा अपनी इस दोहरी चाल का इस्तेमाल भी करते हैं। सो अगर सब कुछ भाजपा नेतृत्व की सोच के मुताबिक चला तो गुरु जी झारखंड के मुख्यमंत्री और भाजपा की ओर से रघुवर दास उप मुख्यमंत्री होंगे।
Posted on 03 January 2010 by admin
भाजपा में तीन लोग हैं जो भाजपा व सोरेन गठबंधन के सख्त खिलाफ हैं, वे हैं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह, यशवंत सिन्हा और अर्जुन मुंडा। इस तिकड़ी का तर्क है कि भाजपा ने पूर्व में दागी सोरेन को मनमोहन मंत्रिमंडल से हटाने के लिए व्यापक अभियान छेड़ा था और आज भाजपा किस मुंह से उसी दागी सोरेन के साथ सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकती है? इस पर भाजपा नेतृत्व का तर्क है कि जब कांग्रेस हमारे कारसेवकों (मसलन बाबूलाल मरांडी, शंकर सिंह वाघेला, जगदंबिका पाल) को अपने पाले में ले सकती है और उनके बलबूते खुला खेल फरूर्काबादी की राजनीति कर सकती है तो फिर भाजपा कब तक गुड़ से परहेज करे गुलगुल्ले की खातिर।
Posted on 23 December 2009 by admin
मनमोहन सिंह के एक सबसे शक्तिशाली मंत्री की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां हैरान-परेशान हैं, इन माननीय कैबिनेट मंत्री की इन दिनों प्रणबदा से खूब ठनी हुई है, मंत्री महोदय को लगता है कि अगर कभी ऐसी स्थितियां बनती हैं कि सोनिया जी को मनमोहन की जगह एक नया पीएम चुनने की जरूरत आन पड़े तो वो निश्चय ही उनका ही चुनाव करेंगी। सो, इन दिनों यह मंत्री महोदय अति आत्मविश्वास की अतिरिक्त खुराक से लबरेज हैं, और अपनी एक खास महिला मित्र से मिलने नई दिल्ली के गोल्फ लिंक कॉलोनी में खुद ही कार ड्राइव करके पहुंच जाते हैं, सुरक्षा एजेंसियां तो बस मुंह तकती रह जाती हैं।