Posted on 25 April 2013 by admin
पिछले सप्ताह ममता दीदी दिल्ली में थीं और सुर्खियों के सिरमौर नरेंद्र मोदी कोलकाता में, क्या यह महज संयोग था या इसके पीछे कुछ गूढ़ सियासी निहितार्थ छुपे थे। दरअसल, दीदी को इस बात का बखूबी इल्म था कि मोदी का कोलकाता आने का प्रोग्राम बना है वहां वे उद्योगपतियों के एक समूह को संबोधित करने वाले हैं। मोदी के प्रोग्राम को देखते हुए ममता ने आनन-फानन में दिल्ली का प्रोग्राम बना लिया अपने कुछ मंत्रियों के साथ। जब भी एक राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में जाता है तो सौहार्द्र के नाते ही सही मेजबान मुख्यमंत्री मेहमान मुख्यमंत्री से जरूर मिलता है। जाहिर है ऐसे में ममता-मोदी का मिलन ढेर सारी सुर्खियां बटोर जाता और इससे दीदी के राज्य के मुस्लिम वोटर बिदक सकते थे। सो, ऐसे में दीदी ने दिल्ली की ठौर पकड़ना ही उचित समझा।
Posted on 05 March 2013 by admin
हेलिकॉप्टर सौदे में इटली में गिरफ्तारी भी हो गई, पर अपने देश में अब तलक इसमें एफआईआर भी र्दा नहीं हुई है। 362 करोड़ की रिश्वत का मामला है, तो क्या सरकार के संज्ञान के बिना ही इतना बड़ा सौदा हो गया? पिछले दिनों जब इटली के प्रधानमंत्री अपने भारत दौरे पर आए थे तो उनके साथ आए बिजनेसप्रतिनिधिमंडल में यह बिचौलिया भी मौजूद था। उसी दौरान विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर इस बिचौलिए बिजनेसमैन की मीटिंग एयरचीफ मार्शल से तय करवाई थी। इटली में ‘एंटी करप्शन’ पर कानून हमारे देश से ज्यादा सख्त हैं सो बोफोर्स हो या हेलिकाप्टर डील पहली चिंगारी वहीं से फूटी है।
Posted on 05 March 2013 by admin
उत्तर प्रदेश में जब से वहां के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने अपनी नई टीम का ऐलान किया है प्रदेश पार्टी में घमासान मचा हुआ है। वाजपेयी पर उनके पार्टी जन ही यह आरोप लगा रहे हैं कि उनकी नई टीम फाइनल करने में वाजपेयी के निजी सचिव अनूप गुप्ता की सबसे महती भूमिका रही है। अनूप गुप्ता पर तो पार्टी जन यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने वाजपेयी की नई टीम में अपनी तीन पुरानी महिला मित्रों को भी एडजस्ट करा दिया है। इस टीम में 14 वैसे लोगों को जगह दी गई है जो बुरी तरह से पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। वंशवाद की बेल को पल्लवित-पुष्पित करने के इरादे से राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, लालजी टंडन के बेटों और प्रेमलता कटियार की बेटी को वाजपेयी की नई टीम में जगह मिल गई। ओमप्रकाश सिंह और रमापति राम त्रिपाठी के बेटों से अगले चुनाव में टिकट का वादा हुआ है। मुरली मनोहर जोशी के तीन लोगों को भी नई टीम में जगह दे दी गई है। पर वाजपेयी ने अपनी नई टीम के गठन में वरूण गांधी, योगी आदित्यनाथ जैसे लोगों की एक न सुनी। चुनांचे आने वाले दिनों में यह बावेला और बढ़ सकता है।
Posted on 12 February 2013 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 06 February 2013 by admin
केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार को लेकर पिछले कुछ दिनों में दस जनपथ की नाराजगी बढी है। वैसे भी बतौर कानून मंत्री अश्विनी कुमार डा. मनमोहन सिंह की निजी पसंद थे। इन्हीं अटकलों को परवान चढ़ाने के लिहाज से पिछले दिनों मुल्क के अटॉर्नी जनरल सोनिया गांधी से मिले थे और इस मुलाकात में उन्होंने सोनिया के समक्ष कानून मंत्री के खिलाफ जमकर आग उगली। अटॉर्नी जनरल के अलावा कुछ न्यायाधीशों ने भी सोनिया से मिलकर उनसे कानून मंत्री की शिकायत लगायी। सूत्रों की मानें तो इसके अलावा दस जनपथ मंत्री जी के लोकपाल पर दिए उनके बयान से भी नाराज है जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार के समक्ष तमाम किस्म की अनुशंसाओं को मानने की कोई बाध्यता नहीं है। समझा जाता है कि इस बाबत सोनिया गांधी ने स्वयं पीएम से बात की है। इन बदले घटनाक्रमों को देखकर कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी सरीखे नेताओं की बांछे खिल गई हैं।
Posted on 15 January 2013 by admin
कांग्रेस के गेम-प्लॉन में झारखंड और कर्नाटक पहले से ही शामिल थे। झारखंड में उसे सफलता मिल गई है अब बारी कर्नाटक की है, जहां कांग्रेसी मैनेजर भाजपा बागी येदुरप्पा के निरंतर संपर्क में हैं। झारखंड में भाजपा सरकार जाने की भनक कांग्रेस को पहले ही लग चुकी थी। यही वाह थी कि झारखंड के गवर्नर सईद अहमद 1 जनवरी से ही अपने लिए नया पिंसीपल सेक्रेटरी तलाश करने में जुट गए थे। वैसे भी कांग्रेस को झारखंड से मधु कोड़ा सरकार जाने का दर्द पहले से साल रहा था क्योंकि कोड़ा राज में झारखंड कांग्रेस के लिए एक दुधारू गाय की मानिंद था। वैसे भी झारखंड में चर्च काफी पहले से सक्रिय है, और कांग्रेसी हुकुमत के लिए यहां के भोले-भाले आदिवासी इनके ‘साफ्ट टार्गेट’ पर हैं। जिन्हें वे अपनी ‘कैश ट्रांसफर’ की महत्त्वाकांक्षी योजना से साध लेना चाहते हैं।
Posted on 15 January 2013 by admin
संघ ने एक तरह से निर्णय कर लिया है कि आगामी 2014 लोकसभा चुनाव में पार्टी के उम्रदराा नेताओं को टिकट नहीं मिलेगा। खासकर वैसे नेताओं को जो 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। इस बात का आभास यशवंत सिन्हा को भी भली-भांति हो चुका है। सो, इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए सिन्हा अभी से अपने बेटे को सियासी तौर पर तैयार करने में जुट गए हैं। हालिया दिनों में अपनी ‘हुंकार रैली’ में यशवंत सिन्हा ने अपने बेटे को लोगों के समक्ष अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किया। लिहााा सिन्हा को कहीं न कहीं इस बात का आभास हो चुका है कि यह उनके सियासी सूरज के अस्त होने का वक्त है।
Posted on 20 December 2012 by admin
खोदा पहाड़ और निकली चुहिया। हसन अली मामले की भी बस यही गत होने वाली है। यह मामला पहले तो हजारों करोड़ (3500 करोड़ रू.) का बताया जा रहा था पर अब खुलासा हुआ है कि यह महा 300 करोड़ का मामला है। सूत्र बताते हैं कि अली के पास इस रकम का एक बड़ा हिस्सा कोलकाता के एक प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने का है। जिन्होंने अपनी वसीयत एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के नाम कर दी थी। जांच एजेंसियां खुलासा कर रही हैं कि यह पैसा भारतीय मुद्रा में राजस्थान बार्डर से पाकिस्तान के मार्फत ले जाया गया है।
Posted on 05 November 2012 by admin
टनितिन गडकरी अपने विरोधियों पर पलटवार के लिए तैयार हैं। उन्होंने देश के एक प्रमुख कांग्रेस समर्थित चैनल के खिलाफ वे तमाम दस्तावो जुटा लिए हैं कि कैसे इस चैनल को बिना सूद के ढाईसौ करोड़ का ऋण दिया गया है। आने वाले दिनों में गडकरी इस बात का खुलासा कर सकते हैं। गडकरी के लोगों का यह भी दावा है कि दत्तात्रेय घोसबोले के बयान को अन्यथा पा लिया जाए, क्योंकि संघ के नीति निर्धारक 6 लोगों की कोर टीम में से 5 लोग गडकरी की पुन: ताजपोशी के पक्ष में हैं। इस कोर टीम में संघ प्रमुख मोहन भागवत, भैयाजी जोशी, मदनदास देवी, सुरेश सोनी, कृष्ण गोपाल और दत्तात्रेय घोसबोले शामिल हैं। इनमें से सिर्फ सुरेश सोनी ही गडकरी को दूसरा टर्म दिए जाने की मुखर ंखिलांफत कर रहे हैं और कह रहे हैं कि गडकरी को दूसरा टर्म दिए जाने से भ्रष्टाचार के ंखिलांफ संघ व भाजपा की लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी।
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Posted on 05 November 2012 by admin
कभी गांधी परिवार के नादीकियों में शुमार होने वाले महाराष्ट्र के दलित नेता मुकुल वासनिक की केंद्रीय मंत्रिमंडल से छुट्टी कईयों को हैरान करने वाली थी। सूत्र इसकी वजह पर रोशनी डालते हैं और बताते हैं कि जब वासनिक मनमोहन मंत्रिमंडल में समाज कल्याण व अधिकारिता मंत्री थे तो मंत्रालय ने उनके संज्ञान में 182 पेज की वह चर्चित रिपोर्ट भेजी थी जिसमें देश की कई एनजीओ के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे और कहा गया था कि इन स्वयंसेवी संस्थाओं ने मंत्रालय से मिले अनुदानों का दुरूपयोग किया है तो क्यों नहीं इन्हें काली सूची में डाल दिया जाए और इन पर जांच बिठाई जाए। इस लिस्ट में यूपी के कई एनजीओ भी शामिल थे, और गड़बड़झाले का यह मामला कोई 1056 करोड़ रूपए के आस-पास बैठता था। वासनिक ने रिपोर्ट में वर्णित एनजीओ की सूची पर नार डाले बगैर जांच का आदेश जारी कर विभिन्न राज्य सरकारों से उन एनजीओ के कार्यकलापों की रिपोर्ट मंगा ली। इसी जांच रिपोर्ट की जद में सलमान खुर्शीद की पत्नी द्वारा संचालित ट्रस्ट का मामला भी सामने आ गया। जब अखिलेश ने यूपी की गद्दी संभाली तो यह रिपोर्ट उनके हाथ लग गई, और सलमान खुर्शीद को आइना दिखाने के लिहाा से यह रिपोर्ट टीम केजरीवाल के हाथों सुपुर्द कर दी गई क्योंकि अखिलेश के लिए कन्नौज और फरूर्खाबाद संसदीय सीटें अहम हैं। सवाल मुस्लिम वोटों का है इसीलिए वह सलमान को यहां से उभरने नहीं देना चाहते। सूत्र बताते हैं कि अनजाने में हुई यह छोटी सी गलती ही वासनिक की रूंखसती की वजह बनी।