Posted on 07 November 2010 by admin
देश के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार के वे दामाद जी हैं, वे हिट हैं, फिट हैं और स्पोर्टी हैं, देर रात तक चलने वाली पार्टियां उनकी कमजोरी है, अपनी उद्दात सियासी महत्वकांक्षाओं की दास्तांबयानी भी वे अपने एक हालिया इंटरव्यू में पहले ही कर चुके हैं। सो, जब दिल्ली में इतने ‘हाइप’ के साथ एक नया पब खुला तो उसके उद्धाटन पर दामाद जी को भी न्यौता गया, वक्त के पाबंद हैं दामाद जी, समय से आ गए, उन्हें सामने लगे एक वीआईपी टेबुल पर बिठा दिया गया, कुछ क्षणों बाद उसी टेबुल पर दिल्ली की एक अधेड़ फैशन डिजाइनर अपने बिल्कुल युवा पुरुष मित्र के साथ तशरीफ लाईं और दामाद जी का आकर्षण उन्हें उसी टेबुल पर खींच लाया। फैशन डिजाइनर का पुरुष मित्र (जो कि एक नवोदित मॉडल भी है) ऐसी पेज थ्री पार्टियों के लिए नया था, दो चार पेग में ही उसे चढ़ गई और सामने बैठे दामाद जी की ओर इशारा कर उसने भद्दी टिप्पणियां करनी शुरू कर दी, शायद वह दामाद जी के रुतबे से अनजान था, सो उसने दामाद जी की मूंछों पर ही फब्ती कसनी शुरू कर दी-‘इस व्यक्ति की मूंछें मुझे पसंद नहीं’ उसकी अधेड़ महिला मित्र ने लाख समझाने की कोशिश की पर तब तक युवक बेकाबू हो चुका था, दामाद जी के सब्र का बांध भी टूट चुका था, जब तक दामाद जी के सुरक्षाकर्मी हरकत में आते, युवक ने बकायदा उनसे धक्का-मुक्की शुरू कर दी थी, पब के बाउंसरों ने फिर उस युवक को वहां से उठाकर बाहर फेंका, पर तब तक दामाद जी का दिल व नशा दोनों टूट चुके थे और इस घटना के तुरंत बाद वे अपने लाव-लश्कर के साथ वहां से बाहर निकलते देखे गए।
Posted on 28 October 2010 by admin
कॉमनवेल्थ मुद्दे पर गडकरी की चर्चित प्रेस-कांफ्रेंस का आइडिया किरीट सोमैया और पीयूष गोयल का था। इस कांफ्रेंस को काफी हाईप भी दी गई थी, पत्रकारों को भी लगा था कि भाजपा अध्यक्ष कोई नया-नायाब खुलासा करने जा रहे हैं, सो कांफ्रेंस में पत्रकारों की भीड़ भी ताबड़ तोड़ जुटी। लेकिन जब पत्रकारों के हाथ अध्यक्ष जी की कॉमनवेल्थ गेम्स की लूट पर फर्स्ट इंफॉरमेशन रिपोर्ट लगी तो एकबारगी वे हताश हो गए, क्योंकि इस पूरे डॉक्यूमेंट में कुछ भी नया नहीं था, अखबारों की कतरनें, कीर्ति आजाद व अनुराग सिंह ठाकुर के संसद में दिए गए भाषण, संसद में प्रश्न, सीएजी, सीवीसी रिपोर्ट इन सारी बातों से पत्रकारगण पहले ही वाकिफ थे, जाहिर है उन्हें अंतत्वोगत्वा यहां से निराश होकर ही वापिस लौटना पड़ा।
Posted on 28 October 2010 by admin
पर देश के सबसे अहम राजनैतिक परिवार के एक अहम सदस्य को बचाने का उपक्रम शुरू हो गया है। सबको मालूम है कि सत्ता पक्ष से जुड़ा वह अहम सदस्य कौन है और इन दिनों उनकी सियासी महत्वाकांक्षाएं किस कदर हिलौरे मार रही है, इनका हित एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़ा है, जो एक पंजाबी परिवार द्वारा संचालित होता है, और इस कंपनी को कॉमनवेल्थ खेलों के निर्माण कार्य का एक बड़ा ठेका मिला था, पर सरकार ने गेम्स के भ्रष्टाचार की जांच कर रही एजेंसियों को हौले से बता दिया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर-प्रोजक्ट्स को जांच के दायरे से बाहर कर दिया जाए और फोकस सप्लायर्स पर रखा जाए। वाह रे जनतंत्र, वाह रे जनतंत्र का तंत्र!
Posted on 19 October 2010 by admin
येदुरप्पा सरकार की गिनती अब वैसे भी देश की भ्रष्टतम सरकारों में हो रही है यानी जिस सरकार की बुनियाद ही भ्रष्टाचार पर आलंबित हो उसे हिलाना-गिराना-भरभराना वैसे भी कोई मुश्किल कार्य नहीं। येदुरप्पा सरकार के कई मंत्रियों पर पहले ही भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप लग चुके हैं। अब तो इसके छींटे मुख्यमंत्री के दामन पर भी दिखने लगे थे। मुख्यमंत्री के बेटे और दामाद पर आरोप है कि उन्होंने वहां के किसानों से औने-पौने दामों पर जमीन खरीद ली और फिर उस जमीन का सीएलयू यानी चेंज ऑफ लैंड यूज करा उसे मुंहमांगी कीमतों पर बेच डाली, सुना तो यही जाता है कि नोटिफाई होने के बाद मात्र पांच एकड़ जमीन की कीमत कोई ढाई सौ करोड़ तक पहुंच गई। पाठक सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि इस कृत्य-कुकृत्य से मुख्यमंत्री के बेटे और दामाद ने कितनी चांदी कूटी होगी?
Posted on 19 October 2010 by admin
प्रदेश की ताकतवर माइनिंग लॉबी से पंगा लेना भी येदुरप्पा को महंगा पड़ा था और तब से ही माइनिंग लॉबी ने येदुरप्पा सरकार को डगमगाने की ठान ली थी, जब से येदुरप्पा ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में लौह अयस्क के निर्यात पर रोक लगा दी तो रेड्डी बंधुओं से अलहदा बलडोटा और मोदी भी बिगड़ गए, और तब से इस ताकतवर माइनिंग लॉबी ने जैसे ठान ली थी कि येदुरप्पा सरकार को गिराकर जेडी(एस) के कुमारस्वामी समर्थित कांग्रेस की सरकार बनानी है। उपरोक्त उद्योगपतियों की कर्नाटक के अलावा आंध्र प्रदेश, ओडिसा और झारखंड में आयरन ओर की खानें हैं जहां से उनका करोड़ों का वारा-न्यारा होता है। शायद यही कारण रहा हो कि 32 विधायकों की खरीद-फरोख्त में कथित तौर पर तीन सौ बीस करोड़ झोंक दिए गए यानी प्रति विधायक दस करोड़ की रकम। चलिए सियासतदां का मान सम्मान जनता की नजरों में भले न बढ़ा हो पर उनकी खरीद-बिक्री की कीमत जरूर बढ़ गई है।
Posted on 19 October 2010 by admin
भाजपा और कांग्रेस का जो ताजा जनमत सर्वेक्षण आया है उसके मुताबिक राज्य में मुस्लिम, यादव और राजपूत लालू के साथ जा रहे हैं, इसे देखते हुए ही अररिया, कटिहार व सुपौल की जनसभा में राहुल गांधी ने अपनी स्पीच से मुसलमानों को लुभाने का भरसक यत्न किया ताकि उन्हें लालू से तोड़कर कांग्रेस के पक्ष में खड़ा किया जा सके।
Posted on 19 October 2010 by admin
ललित मोदी के लिए आने वाले दिन और मुश्किलों भरे हो सकते हैं। अब तो ललित मोदी के करीबी नेतागण उनका फोन तक लेने से गुरेज कर रहे हैं, यहां तक कि मोदी के पुराने अभिन्न मित्र प्रफुल्ल पटेल तक ने नजरें बदल ली है। सो अब मजबूरी में ललित की पत्नी मीनल आइसलैंड, फिनलैंड और रूस से टूट कर अलग हुए छोटे-छोटे मुल्कों के चक्कर लगा रही हैं कि किसी छोटे-मोटे देश की भी कैसे कर नागरिकता हासिल हो जाए, इसके लिए मोदी कोई भी कीमत देने को तैयार हैं।
Posted on 06 October 2010 by admin
कर्नाटक की येदुरप्पा सरकार की गिनती अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकारों में होने लगी है, मंत्रियों के लूट-खसोट के दंश से अभी राज्य उबर भी नहीं पाया था कि ताजा-ताजा येदुरप्पा के बेटों का एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आया है, इस मुद्दे पर कांग्रेस भाजपा को घेरने की तैयारियों में जुट गई है, वहीं येदुरप्पा खुद को और अपने बेटों को बचाने के लिए खूब हाथ-पैर मार रहे हैं।
Posted on 19 September 2010 by admin
झारखंड में मुंडा सरकार के गठन के वक्त क्या लेन-देन हुई इसकी पूरी वीडियो रिर्काडिंग कांग्रेस के कब्जे में हैं, इस सीडी में मुंडा को समर्थन दे रहे एक सहयोगी दल के नेता को बड़ी रकम लेते दिखाया गया है, यह रकम देश के कुछ चुनींदा औद्योगिक घरानों तथा पंजाब के बिजनेस मैन के सौजन्य से इकट्ठी की गई थी। मुमकिन है तीन-चार महीने बाद कांग्रेस इन्हीं पूरे साक्ष्यों को कोर्ट में पेश करे और भाजपा व भाजपानीत गठबंधन सरकार के मुखिया अर्जुन मुंडा को भी बेनकाब करने की कोशिश करे, पर इस पूरे मामले में जान-बूझकर थोड़ी देर की जा रही है, जिससे कि तब तक बड़े अंबानी के कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को मुंडा सरकार की हरी झंडी मिल जाए।
Posted on 19 September 2010 by admin
देश के नवनियुक्त चीफ विजिलेंस कमिश्नर पी.जे.थॉमस पॉमोलिन घोटाला केस में आज भी बेल पर हैं, वह अप्रैल 2, 2003 को बकायदा इस मामले में कोर्ट में अपीयर हुए थे और उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई करते कोर्ट ने उन्हें तब जमानत दे दी थी, तब थॉमस केरल में सिविल सप्लाई सचिव हुआ करते थे। इस पूरे मामले की जांच विजिलेंस और एंटीकरप्शन ब्यूरो कर रहा था, उसी विजिलेंस विभाग के आज थॉमस सबसे बड़े मुखिया हैं। थॉमस को यह बेल तिरूवनंतपुरम के कोर्ट ऑफ इन्क्यॉरी कमिश्नर व विशेष जज (विजिलेंस) के कोर्ट से मिली है।