अजित सिंह और कांग्रेस में सीटों के तालमेल का फच्चर अब भी फंसा हुआ है, अजित खेमा कहता है कि कांग्रेस उनकी पार्टी को उनके हक से भी कम देना चाहती है, वहीं कांग्रेसी कहते हैं कि अजित सीट के साथ उसका खर्चा-पानी भी मांग रहे हैं।
Posted on 02 October 2011 by admin
अजित सिंह और कांग्रेस में सीटों के तालमेल का फच्चर अब भी फंसा हुआ है, अजित खेमा कहता है कि कांग्रेस उनकी पार्टी को उनके हक से भी कम देना चाहती है, वहीं कांग्रेसी कहते हैं कि अजित सीट के साथ उसका खर्चा-पानी भी मांग रहे हैं।
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Posted on 02 October 2011 by admin
नरेंद्र मोदी मीडिया के एक सेक्शन के अपनी पत्नी जसोदा बेन चिमनलाल मोदी का पीछा किए जाने से नाराज हैं। मोदी ने कथित तौर पर अपनी पत्नी को विवाह के तुरंत बाद छोड़ दिया था और उसे यह कहते हुए मायके भेज दिया था कि ‘अभी तुम्हें और पढ़ाई करने की जरूरत है’ इसके बाद मोदी ने कभी पलट कर अपनी पत्नी की ओर नहीं देखा, जो आगे की पढ़ाई कर बकायदा टीचर हो गईं और गुजरात के बांसकंठा जिले के एक छोटे से मुस्लिम बहुल्य गांव में रह कर अध्यापन से अपना जीवन-यापन करती रहीं। जसोदा बेन के पत्नी होने के दावे को मोदी ने न कभी नकारा है और न ही स्वीकारा है। पर मीडिया द्वारा लगातार जसोदा बेन का पीछा किए जाने की प्रवृत्ति मोदी को रास नहीं आ रही है, उन्हें मालूम है कि जसोदा बेन से उनके खिलाफ कुछ भी उगलवा पाना मीडिया के लिए टेढ़ी खीर ही साबित होगा।
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Posted on 26 September 2011 by admin
मोदी को लेकर नीतीश का सिर्फ वोट-बैंक का पंगा नहीं है अपितु इसमें व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं व अहंकारों की टंकार भी कहीं प्रबल है। नीतीश जानते हैं कितनी आवाजें हैं जो हर बात पर उनका पीछा करती हैं। अपनी तमाम चीखों के बावजूद नीतीश की आवाज भी तमाम उन आवाजों में है शामिल। तमाम नाराजगी, सियासी असहमतियां और नरेंद्र मोदी के बावजूद अगर नीतीश भाजपा का दामन छोड़ पाने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहे हैं तो इसके पीछे है उनकी पीएम बनने की उद्दात महत्त्वाकांक्षाएं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने लगातार नीतीश को इस भ्रम में रखा है कि अगर 2014 में भाजपा अपना पीएम नहीं बनवा पाई तो उस सूरत में वह प्रधानमंत्री पद के लिए नीतीश का नाम आगे कर देगी।
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Posted on 26 September 2011 by admin
प्रधानमंत्री के अमरीका से लौटने के बाद दस जनपथ की मध्यस्थता में चिदंबरम व प्रणब दा के मुद्दे पर एक निर्णायक बैठक हो सकती है। विपक्षी हमला अगर पीसी पर यूं बदस्तूर जारी रहता है तो गृह मंत्री के इस्तीफे की नौबत भी आ सकती है। पूरे चिदंबरम प्रकरण पर एम्स में भर्ती अमर सिंह और उनके करीबियों की पैनी निगाहें हैं, अगर चिदंबरम नहीं गए तो फिर अमर को वापिस तिहाड़ जाना पड़ सकता है, क्योंकि वेदांता काल में चिदंबरम पुत्र पर अमर सिंह ने जो तल्ख टिप्पणियां की थीं वे अब भी पीसी को परेशान किए जाती है।
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Posted on 26 September 2011 by admin
कभी जिस एनएसी (राष्ट्रीय सलाहकार परिषद) पर कांग्रेस इतना इतराती थी, आज उसे वह अपने गले का फांस मान रही हैं। कांग्रेसियों को लगता है कि एनएसी के दबाव की वजह से ही उन्हें आनन-फानन में आरटीआई एक्ट लागू करना पड़ा था, आज वही आरटीआई एक्टिविस्ट (मसलन अरविंद केजरीवाल) पार्टी की जान हलकान किए हुए हैं। अब कांग्रेस आरटीआई आंदोलन कर्मियों पर निशाना बनाने का उपक्रम साध रही है, कांग्रेस इन आंदोलनकर्मी व कॉरपोरेट सेक्टर की मिलीभगत का भी भंडाफोड़ करना चाहती है, सारे तथ्य जुटाए जा रहे हैं कि कितने आरटीआई आवेदन अब तक वापिस ले लिए गए हैं, कांग्रेस इन विड्रॉल आवेदनों में लेन-देन के मामले को सूंघ रही है।
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Posted on 18 September 2011 by admin
कर्नाटक, उत्तराखंड के बाद क्या हिमाचल का नंबर लगने वाला है? भाजपा तेजी से खुद के ‘इमेज मेक ओवर’ अभियान में जुटी है और अपने दागी छवि वाले मुख्यमंत्रियों को बदलने में एक पल की भी देर नहीं लगा रही है, ऐसे में हिमाचल से धूमल और उनके सांसद पुत्र के कारनामें व कारगुजारियां किसी से छुपी नहीं रह गई है। शांता कुमार के नेतृत्व में धूमल विरोधियों का एक गुट हालिया दिनों में जब गडकरी से मिला तो गडकरी को उनमें विरोध की आग कम दिखी। इसीलिए उन्होंने असंतुष्ट खेमे को बस इतना ही आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री तो नहीं पर प्रदेश अध्यक्ष आप लोगों की च्वॉइस का बना दिया जाएगा। पर सुनते हैं कि उत्तराखंड परिवर्तन से प्रेरित होकर शांता कुमार थोड़े कड़े तेवर अख्तियार करने की सोच रहे हैं।
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Posted on 18 September 2011 by admin
सोनिया गांधी जब से न्यूयॉर्क से अपना इलाज करवा कर दिल्ली लौटी हैं, वरिष्ठ कांग्रेसी गण उन्हें हर मुमकिन ‘फील गुड फैक्टर’ का अहसास कराने में जुटे हैं। सबसे पहले तो गुलाम नबी आजाद ने उन्हें यह ब्रीफ किया कि उनकी अनुपस्थिति में भारत में क्या-क्या महत्त्वपूर्ण घटा। अन्ना से लेकर अफजल गुरु तक, संसद में राहुल के भाषण से लेकर वरुण तक, मैडम को हर मसले की जानकारी दी गई, पर सतर्क रहते। कांग्रेसी मंत्रियों, सोनिया करीबियों व आईसीसी के पदाधिकारियों ने हर मुमकिन यह कोशिश की मैडम को जो खबर दी जाए उसमें ‘फील गुड फैक्टर’ का छौंक अवश्य हो।
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Posted on 18 September 2011 by admin
यूएस कांग्रेस की जिस रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी का इतना स्तुति गान हुआ है उसकी पटकथा तो कहीं पहले से लिखी जा रही थी, बराक ओबामा के दरबार में जितने भी गुजराती पॉवरफुल हैं सभी नरेंद्र मोदी के अनन्य प्रशंसकों में से हैं। ओबामा की सलाहकार समिति की मेंबर व अर्थशास्त्री सोनल शाह के परिवार की जड़ें तो कहीं गहरे रूप से संघ परिवार से जुड़ी हैं, ओबामा टीम के एक और अहम सदस्य 31 वर्षीय पराग मेहता या फिर वहां की डायरेक्टर ऑफ पॉलिसी गुजरात मूल की कविता पटेल हो, सभी ने एक स्वर में ओबामा को समझाना जारी रखा कि मोदी वैसे नहीं जैसी मीडिया ने उनकी छवि दर्शायी है, इतना ही नहीं मोदी ने अभी हाल में ही अमरीका राष्ट्रपति को स्वयं द्वारा संपादित एक पुस्तक ‘कंवीनियेंट एक्शन, गुजरात इन्हेशिएटिव’ भी भेजी थी, ऐसे में तो ओबामा और अमरीकी प्रशासन का यूं पिघलना लाजिमी ही था।
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Posted on 18 September 2011 by admin
‘बुङ्ढों का अड्डा’ कहे जाने वाले योजना आयोग का चेहरा-मोहरा बदलने की कवायद शुरू हो चुकी है, जो कहीं न कहीं इस बात का संकेत है कि आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस राहुल के नेतृत्व में ही लड़ेगी। क्योंकि योजना आयोग अपने 12वें प्लॉन (2012-17) की तैयारियों में युवा भावनाओं व आकांक्षाओं, कोर् मूत्त रूप देना चाहता है जिसके लिए बकायदा योजना भवन में 20 से 30 वर्ष के नौजवानों की बड़े पैमाने पर कंसलटेंट के तौर पर भर्ती हुई है। इस योजना को न सिर्फ योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह की हामी है बल्कि योजना राज्य मंत्री अश्विनी कुमार इस मामले में काफी उदारता व सक्रियता बरतते देखे जा सकते हैं, यहां तक कि योजना भवन के पार्किंग लॉट में एक खास जगह आरक्षित है जहां बोर्ड लगा है ‘केवल यंग प्रोफेशनल्स के लिए।’
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Posted on 13 September 2011 by admin
राजनीतिज्ञों ने ज्यादातर न्यूज चैनलों के एंकर के बारे में अब कहना शुरू कर दिया है कि वे न्यूजमैन कम, न्वॉयजमैन ज्यादा हो गए हैं।
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