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थैली पर कांग्रेसी बोली

Posted on 13 November 2011 by admin

इन्कम टैक्स की पूछताछ में माना जा रहा है कि कम से कम 17 लोगों ने कुबूल कर लिया है कि ‘हां’ उनका स्विस बैंक में खाता है। ‘खाताधारियों की एक कथित लिस्ट सरकार के पास होने का दावा किया जा रहा है जिसमें 690 भारतीयों के नाम शामिल हैं। इसको लेकर भाजपा के युवा सांसद वरुण गांधी पहले ही एक आरटीआई फाइल कर चुके हैं। माना जा रहा है कि जिन लोगों ने पूछताछ में स्विस बैंक में अपने खाता होने की बात कुबूली है उसमें से ज्यादातर कांग्रेस से नजदीकियों वाले लोग हैं। सो बहुत मुमकिन है कि कांग्रेस सरकार व वित्त मंत्री जी ऐसे लोगों को एक ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ फाइल करने का मौका दें, जिससे वे अपने दाग धो सकें। ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ की प्रक्रिया में उक्त व्यक्ति को जमा धन का टैक्स भारत में अदा करना होगा, इसके बाद ही उन्हें ‘सेफ पैसेज’ (बचाव का रास्ता) मुहैया कराया जा सकता है।

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क्या होगा लोकपाल का?

Posted on 06 November 2011 by admin

21 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में कई महत्त्वपूर्ण विधेयक आने वाले हैं, जैसे जमीन अधिग्रहण बिल के पास होने की पूरी उम्मीद है, फूड सिक्युरिटी बिल भी आएगा, पर लोकपाल बिल को लेकर अभी भी संशय का माहौल बना हुआ है कि कौन सा लोकपाल बिल संसद में लाया जाएगा, अन्ना समर्थित जन लोकपाल या सरकार समर्थित संवैधानिक लोकपाल यह फच्चर अब भी फंसा हुआ है।

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ईवीएम पर सवाल

Posted on 06 November 2011 by admin

नासा और डिपार्टमेंट एनर्जी, अमरीका कि एक हालिया रिपोर्ट के बाद कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ‘हैक्ड’ किया जा सकती है, भाजपा ईवीएम के मुद्दे को ढोल-नगाड़े के साथ दुबारा उठा सकती है, अडवानी की जन चेतना यात्रा भले ही फ्लॉप रही हो पर उनके कई सवाल व आइडियाज हिट रहे हैं, और अडवानी कालांतर में लगातार ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर पहले भी सवाल उठा चुके हैं, क्याेंकि भाजपा चिदंबरम की जीत को अभी भी संदेह की निगाहों से देखती है। चूंकि चिदंबरम का हारते-हारते जीत का मामला पहले से ही कोर्ट में लंबित है सो, पार्टी को ईवीएम मशीनों की ‘रिकाऊंटिंग’ की क्षमता को लेकर भी शक है, भाजपा के नेता पहले से ही दबी जुबान में कहते आए हैं कि 2009 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को 206 सीटें दिलाने में ईवीएम मशीनों की भी एक महती भूमिका रही है, कई छोटे-बड़े दल पहले से ही ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। चुनांचे आने वाले दिनों में ईवीएम मशीनों पर सियासत गरमा सकती है।

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…और अंत में

Posted on 30 October 2011 by admin

संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व केंद्रीय मंत्रिमंडल का एक और विस्तार हो सकता है, इस विस्तार में यूपी, ओडिशा व आंध्र को जगह मिल सकती है। अजीत सिंह, चिरंजीवी सरीखे नेताओं का भाग्य खुल सकता है। कांग्रेस अब उन्हीं राज्यों पर फोकस करना चाहती है जहां उसे अपने लिए नई संभावनाएं दिख रही हैं।

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कुलकर्णी की बेचैनी

Posted on 30 October 2011 by admin

सुधींद्र कुलकर्णी ने जेल के जीवन को लगता है पूरी तरह स्वीकार कर लिया है, जो भी जेल से मिलता बस वही खाकर रह जाते हैं कभी कैंटीन की ओर फटकते भी नहीं। उनका परिवार मुंबई रहता है, सो घर से खाना आने का भी सवाल नहीं। कुलकर्णी को सबसे ज्यादा नाराजगी अडवानी से हैं, उन्हें लगता है कि अडवानी अपने एक खास चेले को बचाने के लिए कभी भूले से भी अपनी जनचेतना यात्रा में ‘कैश फोर वोट’ का नाम नहीं ले रहे हैं।

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फेरबदल का मौसम

Posted on 24 October 2011 by admin

सियासी हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद के शीतकालीन सत्र जो कि 21 नवंबर से शुरू हो रहा है उससे ऐन पहले यूपीए-2 का चेहरा-मोहरा बदलने की कवायद हो सकती है, इस कैबिनेट फेरबदल में कई दिग्गज मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 5 राज्यों की आसन्न विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कई हैवीवेट मंत्रियों को संगठन में लाया जा सकता है। कांग्रेस शासित तीन राज्यों हरियाणा, राजस्थान व आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के सिर पर पहले से ही हाईकमान की तलवार लटक रही है, पर उनके विकल्प की तलाश अभी पूरी नहीं हुई है दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को महज चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है। पर राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के आसार दिखते हैं।

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क्यों पुलकित नहीं हैं पुलक

Posted on 24 October 2011 by admin

पुलक चटर्जी का बतौर प्रमुख सचिव प्रधानमंत्री कार्यालय में आना इन कयासों को जन्म देता है कि यह राहुल गांधी की ताजपोशी की तैयारी है, राहुल यूपी चुनावों के नतीजे आने तक रुकना चाहते हैं, पर पार्टी जल्दी में हैं, पार्टी व सोनिया का मानना है कि यूपी चुनाव के नतीजों से कांग्रेस का मनोबल गिरेगा और वह वक्त राहुल बाबा की ताजपोशी के लिए ठीक नहीं रहेगा। रही बात पुलक की तो फिलवक्त वे प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव जरूर हैं पर उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त नहीं है क्योंकि वरिष्ठता की क्रम में मौजूदा कैबिनेट सचिव पुलक से सीनियर हैं, और जब वे अप्रैल 2012 में रिटायर हो जाएंगे तब पुलक सबसे सीनियर हो जाएंगे। यानी वह वक्त पुलक का गोल्डन पीरियड हो सकता है।

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रथ यात्रा की गाइडलाइन

Posted on 16 October 2011 by admin

अडवानी की रथ यात्रा की शुरूआत में ही यात्रा के संयोजकों ने एक गाइडलाइन तैयार की है जिसके मुताबिक मंचासीन होने की स्थिति में प्रथम पंक्ति में अडवानी के साथ प्रतिभा, अनंत कुमार और दीपक चोपड़ा बैठेंगे, भाजपा के अन्य सीनियर नेता दूसरी पांति में बैठेंगे। साथ ही यह भी ताकीद की गई है कि भीड़ का अभिवादन स्वीकार करने के लिए सिर्फ अडवानी, प्रतिभा व चोपड़ा ही हाथ हिलाएंगे, अन्य कोई नेता नहीं।

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हिसार में जार-जार कांग्रेस

Posted on 11 October 2011 by admin

यह कांग्रेस के लिए अन्ना-इफेक्ट का आगाज है, हिसार उप चुनाव इस मामले का पहला चश्मदीद बनता नजर आ रहा है। हिसार उप चुनाव में कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी जयप्रकाश को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है, यहां तक कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हिसार उप चुनाव को अपनी मूंछों का सवाल बना लिया है फिर भी यहां कांग्रेस की हालत पतली है। और कांग्रेसी उम्मीदवार खिसककर तीसरे पायदान पर आ गया है। अपने पिता के निधन से रिक्त हुई इस सीट पर तो फिलवक्त कुलदीप विश्नोई ही सबसे आगे दिख रहे हैं, उन्हें ओम प्रकाश चौटाला के पुत्र अजय चौटाला से टक्कर मिल रही है।

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हरियाणा में नेतृत्व परिवर्तन

Posted on 11 October 2011 by admin

हरियाणा में भाजपा के बढ़ते ग्राफ से सोनिया चिंता में हैं। हिसार उप चुनाव के नतीजे भुपिंदर सिंह हुड्डा के राजनैतिक अवसान का गीत लिख सकते हैं, मुख्यमंत्री के खिलाफ आए दिन भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें आ रही है, भीतर खाने में उन्हें चलता करने की तैयारियां भी चल रही है, फिलहाल मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केंद्रीय मंत्री शैलजा को सबसे आगे बताया जा रहा है, वे युवा हैं, दलित है, पढ़ी-लिखी हैं, पर भुपिंदर को चलता करने में अब तलक आड़े आ रही थी, हुड्डा पुत्र दीपेंद्र हुड्डा व रॉबर्ट वाड्रा की दांतकटी रोटी की दोस्ती, कहा जाता है कि दोनों के संयुक्त उपक्रम में कई रीयल एस्टेट के बिजनेस फल-फूल रहे हैं, विपक्षी दल पहले भी कई दफे इस मसले को उछाल चुके हैं। पर सोनिया को लगता है कि हरियाणा में अब पानी सिर से ऊपर बह रहा है, चुनांचे निजी पूर्वाग्रहों से इतर पार्टी को प्रमुखता दी जानी जरूरी है, सो आने वाले दिनों में हरियाणा की बाबत कांग्रेस का कोई बड़ा फैसला आ सकता है।

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