Posted on 27 February 2011 by admin
2जी स्पेक्ट्रम मामला सरकार के गले की हड्डी बनता जा रहा है, करीबियों को बचाने की कवायद जारी है और सीबीआई को सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपना क्या मुंह दिखाएगी? चुनांचे रतन टाटा और प्रधानमंत्री के बीच हुई एक अहम मीटिंग में यह लगभग तय हो गया कि रतन टाटा या उनके खास लोगों को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाएगा। मुकेश अंबानी भी सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री से मिलकर पहले ही अपनी बात रख चुके हैं। मुकेश व टाटा दोनों ही नीरा राडिया को बचाने की जुगत भिड़ाने में जुटे हैं, पर इस पूरे मामले में राडिया का नाम इस तरह से खुल चुका है कि सरकार जानती है कि इस प्रयास में उसकी खासी किरकिरी हो सकती है। फिलहाल तो प्रदीप बैजल की गिरफ्तारी भी टल गई लगती है।
Posted on 23 February 2011 by admin
सोनिया व मनमोहन के मतभेद अब जाहिर होने लगे हैं। 2जी पर विपक्ष की जेपीसी की मांग को भले ही प्रधानमंत्री ने अपनी नाक का सवाल बना लिया हो, विपक्षी हंगामे और घटक दलों के रुख को देखते हुए सोनिया पहले से ही जेपीसी के पक्ष में थीं, पर मनमोहन ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था। पीएम अब भले ही इस मसले पर झुकने को तैयार हों, पर उन्होंने अब तक सरकार की काफी किरकिरी करा दी है। यूपीए कार्यकाल का दस्तूर रहा है कि पद्म पुरस्कारों की अंतिम लिस्ट सोनिया को उनकी अनौपचारिक अनुमति के लिए भेजी जाती रही है पर यह पहली दफा था कि पद्म पुरस्कारों की लिस्ट में (एक दो नाम छोड़ दें तो) पूरी तरह से पीएमओ का दखल रहा। सो, ब्रजेश मिश्रा हों या मोंटेक सिंह उन्हें क्यों सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों के लिए चुना गया यह सोनिया अब तक समझ नहीं पाई हैं।
Posted on 08 February 2011 by admin
सीबीआई ने कांग्रेसी गृह मंत्री को दो टूक बता दिया है कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री राजा पर केस बनता है। वहीं अझागिरि और मारन ने भी इशारो-इशारों में कांग्रेसी कर्णधारों से कह दिया है कि राजा को अंदर होना चाहिए। इसके बाद ही सोनिया गांधी ने करुणानिधि से बात की और तमिलनाडु के आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी उन्होंने कांग्रेस का स्टैंड साफ कर दिया कि अगर करुणा चाहे तो विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़े, पर लोकसभा चुनावों में इकट्ठे, जिससे केंद्र में डीएमके-कांग्रेस का गठबंधन बना रहे, करुणानिधि के पास मान जाने के सिवाय और चारा भी क्या बचा है?
Posted on 02 February 2011 by admin
हाले हिंदुस्तान के मौजूदा हश्र पर पाब्लो नेरुदा की पंक्तियां कितनी सटीक लगती हैं, …’मुलाकातें आदिम वनों में अंधेरा और नगाड़ों की भीगी हुई मध्दम गमक अकस्मात सुनता हूं मैं पुकार कहीं दूर से छूता हूं घनी-घनी डालें, टहनियां और पाता हूं तुम्हारे चुंबन में स्वाद अपने ही खून का’
…क्या कश्मीर सचमुच हमारा है? श्रीनगर के लाल चौक पर भारतीय तिरंगा फहराने की हसरत से बेदखल, भाजपा नेताओं की दर्दे बयानी एक अलग ही कश्मीर की कहानी कहती है। उमर के कश्मीर की, पाक परस्त मंसूबों के कश्मीर की, अरुण जेतली करीबी आर.पी.सिंह मर्द हैं, कम से कम अपनी पीठ तो दिखा सकते हैं, जिस पर बूटों, लात-घूंसों व लोहे के छड़ों की चोटें दर्ज है, पर दिल्ली महिला भाजपा की अध्यक्ष शिखा राय पब्बी क्या करें, औरत होने की मजबूरी आड़े आ रही है, कश्मीर पुलिस ने बेदर्दी से जहां जख्म दिए हैं उसे बेपरदा भी तो नहीं कर सकतीं। आर.पी. 2008 में पहले भी लाल चौक पर झंडा फहरा चुके थे, सो केंद्रीय नेताओं ने टीम बनाने व छांटने की जिम्मेदारी भी उन्हें ही सौंपी थी, चार-पांच लोगों की छोटी-छोटी टीम हाथों में तिरंगा और मन में हौंसला लिए अलग-अलग दिशाओं व रास्तों से लाल चौक की ओर बढ़ी। चप्पे-चप्पे पर पुलिस थी और साढ़े चार बजे ही सूर्यास्त हो जाना था सो तिरंगा उससे पहले फहराना था, पर सुबह 7.30 बजे ही श्रीनगर स्थित ब्रॉडवे होटल से टीम के एक अहम सदस्य को पकड़ लिया गया, सो पुलिस भी चौकस थी और टीम भी। पर मामला बिगड़ता देख भाजपा नेताओं ने तय किया कि अगर ये लाल चौक न भी पहुंच पाए तो यासीन मलिक के घर के आगे झंडा फहरा देंगे। पर वे मलिक का घर ही नहीं ढूंढ पाए। इनकी एक टीम शिकारे की मदद से लाल चौक के बेहद करीब पहुंच चुकी थी कि एक न्यूज चैनल वाले ने इसकी खबर स्थानीय पुलिस को दे दी। फिर शुरू हुई पकड़-धकड़, और यंत्रणाओं के दौर। कोई 5 घंटों तक उमर की पुलिस ने बर्बरता ही हर हद लांघ दी, जब नजरबंद जेतली को इस बात की भनक लगी तो उसने फौरन फोन कर उमर को हड़काया, इसके बाद भाजपा वाले कश्मीर पुलिस की चंगुल से छूट पाए। जैसाकि आर.पी.कहते हैं ‘उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे वे लाहौर की कोट लखपत जेल में कैद हों,’ कश्मीरियों को रूह की आजादी पहले देनी चाहिए।
Posted on 26 January 2011 by admin
कोई उन्नीस वर्षों के लंबे अंतराल और इंतजार के बाद जब बीते शुक्रवार नई दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में चर्चित पर्ाश्व गायिका आशा भोंसले का कंसर्ट हुआ तो उसमें अपेक्षाकृत राजनीतिज्ञों की मौजूदगी बेहद कम दिखी। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ आईं, पर प्रोग्राम के अधबीच ही चली गईं। शशि थरुर व सुनंदा का जोड़ा पूरे समय तक कार्यक्रम में मौजूद रहा। जहां सुनंदा पूरे कार्यक्रम के दौरान आशा ताई के गानों पर अपनी सीट पर उछलती-मटकती-नाचती रहीं तो शशि थरुर ज्यादातर वक्त यानी प्रोग्राम के इन ढाई घंटों में अपने ब्लैकबेरी फोन पर ‘टि्वटर’ पर मसरुफ रहे, पर सुनंदा पर आशा ताई की मस्ती इस कदर हावी रही कि कैमरों ने थरुर के साथ उनके कई अभिन्नता के पल कैद कर लिए।
Posted on 17 January 2011 by admin
सोनिया गांधी व राहुल गांधी इस नए वर्ष में छुट्टियां मनाने कहीं और नहीं गए, क्योंकि सोनिया की मां और उनकी बहनें दिल्ली आ गई थीं। क्या किसी को मालूम है कि सोनिया का यह इतालवी परिवार किस कांग्रेसी नेता के सबसे करीबी है? आनंद शर्मा के, क्योंकि जब वे विदेश राज्य मंत्री हुआ करते थे तो सोनिया के मायके वालों की भारत यात्रा का सारा प्रबंध (वीजा आदि समेत) आनंद शर्मा ही करते थे, जिसके चलते वे मैडम, उनकी मां और बहनों के काफी मुंहलगे हो गए और यही कांग्रेस में उनके बढ़ते ग्राफ का सबसे बड़ा कारण भी रहा। आनंद शर्मा की पत्नी गुजराती मूल की मुस्लिम हैं वह साउथ अफ्रीका निवासी हैं, जो फिलवक्त आनंद के बेटे के साथ लंदन में रहती हैं, उनके भी गांधी परिवार के साथ अच्छे ताल्लुकात हैं। आनंद शर्मा शायद इसीलिए इतनी चैन से हैं कि इस आसन्न फेरबदल में विदेश महकमा तो उन्हें ही मिलेगा।
Posted on 10 January 2011 by admin
कमलनाथ को भी लेकर देश के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार के अंदर घमासान छिड़ा है, एक ओर जहां सोनिया गांधी कमलनाथ की तारणहार के तौर पर अवतरित हुई हैं तो राहुल व प्रियंका तत्काल प्रभाव से बतौर भूतल परिवहन मंत्री कमलनाथ की छुट्टी चाहते हैं। हाई-वे के कथित घोटालों को लेकर सत्ता के गलियारों में पेपर बंटने का सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है। समझा जाता है कि मनमाफिक कंपनियों को हाई-वे प्रोजेक्ट दिलवाने के लिए न सिर्फ कायदे-कानूनों को ताक पर रखा जा रहा है, अपितु हाई-वे से संबंधित निविदाओं को अपने ढंग से संचालित भी किया जा रहा है, कई बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड टांसर्फर) प्रोजेक्ट में सड़क निर्माण कंपनियों को मनमाने तरीके से टोल वसूलने की सुविधा भी मिली है,यानी जिस प्रोजेक्ट में कायदे से बीस साल का टोल टैक्स होना चाहिए, उसे बढ़ाकर कंपनियों के फायदे में इसे 33 वर्ष कर दिया गया है। यानी भ्रष्टाचार का कमलदल खिलाने में कमलनाथ का भी कोई सानी नहीं।
Posted on 03 January 2011 by admin
उनकी जेठानी जहां सत्ता के शीर्ष कंगूरे पर बैठी दिल्ली की सरकार को अपनी अंगुलियों पर नचा रही हैं, पर हाशिए के लोगों की सुध भी मुश्किल ले पा रही हैं, वहीं इसके उलट विपक्ष की धूनी रमा रही मेनका गांधी को जानवरों की फिक्र भी उतनी शिद्दत से है। पिछले दिनों जब मेनका के संज्ञान में यह आया कि एक प्रमुख दवा की कंपनी रैनबक्सी ने जिन 33 कुत्तों पर विभिन्न मेडिकल परीक्षण किए हैं, उनका हाल बुरा है, तो उन्होंने कंपनी केर् कत्तार्-धत्ताओं से फोन करके कहा कि कंपनी वालों को इन बेजुबान कुत्तों का जो इस्तेमाल करना था वे कर चुके, अब तो ये उनके किसी काम के नहीं रह गए हैं, सो इन कुत्तों को वे मेनका की संस्था को सौंप दें ताकी उनकी ठीक से देख-भाल हो सके, कंपनी वालों ने मेनका से कहा कि इसके लिए वे सरकारी स्वीकृति ले आएं। मेनका ने पर्यावरण मंत्रालय में बात की तो मंत्री जी ने इसके लिए एक कमेटी बना दी। कमेटी वालों ने कंपनी के पास एक परफॉर्मा भेजा कि वे उन कुत्तों के बारे में विभिन्न जानकारियां मुहैया कराएं मसलन उनका रंग, नस्ल, आकार-प्रकार, उसके मां-बाप की जानकारी…आदि-आदि, यानी यह पूरा मामला सरकारी प्रक्रियाओं में उलझता जा रहा था, पशु अधिकार के लिए निरंतर संघर्ष करने वाली मेनका गांधी का भी धैर्य चुकता जा रहा था, तो तंग आकर उन्होंने कमेटी से जुड़े मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव को फोन कर जानना चाहा कि इन कुत्तों के रिलीज ऑर्डर कब तक आ जाएंगे? तो संयुक्त सचिव महोदय का जवाब था कि फिलहाल वे बीमार चल रहे हैं इसीलिए ऑर्डर नहीं दे सकते, वैसे भी कंपनी वालों ने पूरा प्रपत्र भरकर अब तक भेजा नहीं है, प्रपत्र का जिक्र आते ही मेनका के सब्र का बांध टूट गया-‘क्या इन कुत्तों की शादी करवानी है जो पत्री चाहिए कि इतना विवरण मांग रहे हो…।’ हक्का-बक्का रह गए संयुक्त सचिव ने आनन-फानन में रिलीज ऑर्डर पर दस्तख्त कर दिए, बहुत मुमकिन है कि नए साल के पहले सोमवार तक ये कुत्ते मेनका के पशु अस्पताल में पहुंच भी जाएं।
Posted on 30 December 2010 by admin
प्रणव मुखर्जी की हिंदी पर मत जाइए, वे हिंदी भाषा के चाहने वालों में से हैं, अभी कांग्रेस के बुराड़ी अधिवेशन के लिए उन्होंने कांग्रेस के स्वर्णिम इतिहास पर हिंदी में एक नाटक तैयार करवाया, इस नाटक का निर्देशन एक प्रणव करीबी सुखेंद्रू्र शेखर राय ने किया जो बंगाल प्रदेश कांग्रेस के नेता भी हैं। राय की पूरी नाटक मंडली कोलकाता से दिल्ली आई थी, जिसे प्रणव दा के सौजन्य से दिल्ली के एक शानदार होटल में रुकवाया गया था, बुराड़ी अधिवेशन में जब इस नाटक का मंचन हुआ तब स्वयं सोनिया गांधी और डा. मनमोहन सिंह प्रणवदा के बगलगीर थे, बस प्रणवदा को उसमें राहुल की अनुपस्थिति खली, जबकि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर राहुल को उस नाटक में आने का निमंत्रण दिया था।
Posted on 21 December 2010 by admin
अमर सिंह सियासी तौर पर चाहे लाख चोट खाए हुए हों, पर उनकी अजर-अमर भंगिमाएं हैं जो कभी बदलने का नाम नहीं लेतीं, अमर एकबारगी पुन: मुलायम पर पलटवार के लिए कमर कस रहे हैं, वे यूपी में 400 किलोमीटर तक की एक लंबी यात्रा पर निकल रहे हैं, जिसका उद्देश्य घूम-घूम कर जनता में अलख जगाना है और मुलायम की पोल खोलना है। अमर खुल कर अपने नजदीकियों से कहते हैं कि कैसे उन्होंने 14 वर्षों में कोई 1400 करोड़ रुपए मुलायम और सपा को दिए हैं। अपने खराब स्वास्थ्य के बावजूद अमर निरंतर अपने नए सियासी मित्रों की तलाश में जुटे हैं और खम्म ठोंककर यह तुर्रा उछाल रहे हैं-‘मैं इस्तेमाल होने को तैयार हूं, मायावती, कांग्रेस या भाजपा सबके लिए ‘ऑप्शन’ खुले हैं, आओ मुझे मुलायम के खिलाफ एक हथियार की मानिंद इस्तेमाल करो।’