Posted on 13 May 2012 by admin
उत्तराखंड में कांग्रेस एक तीर से दो निशाना साधना चाहती है, समझा जाता है कि कांग्रेसी मैनेजरों ने उत्तराखंड के सीएम विजय बहुगुणा से साफ कह दिया है कि वे किसी कांग्रेसी विधायक का इस्तीफा दिलाकर उनकी सीट से उप चुनाव लड़ने के बजाए किसी भाजपा विधायक पर अपना दांव चले और उस पर कुछ ऐसा काला जादू करे कि वह उनके लिए अपनी सीट छोड़ दे। उत्तराखंड में भाजपा-कांग्रेसी विधायकों की गिनती एकदम आस-पास है, सो कर्नाटक से सबक सीख कर (जहां भाजपा के निवर्तमान सीएम विधानसभा चुनाव हार गए) कांग्रेस नहीं चाहती कि इस मामले में कोई भी रिस्क लिया जाए, नहीं तो बहुगुणा के लिए इस्तीफा देने के लिए नरेंद्र नगर के विधायक सुबोध उनियाल व गंगोत्री के विधायक विजय पाल सिंह सजवान और कर्णप्रयाग के अनसुया प्रसाद मेखुरी एकदम से तैयार बैठे हैं। पर कांग्रेस की नजर सहसपुर के भगवा विधायक सहदेव सिंह पुंडीर और किच्छा के भाजपा विधायक राजेश शुक्ला पर टिकी है, सारा खेल चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही शुरू हो जाएगा। क्या कमल पर पंजे का पंजा चल पाएगा।
Posted on 07 May 2012 by admin
आने वाले दिनों में मुलायम सिंह यादव एक बड़ा दांव चलने जा रहे हैं, उनसे जुड़े विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि नेताजी ने राष्ट्र के सेना प्रमुख जनरल वी.के.सिंह को आश्वस्त किया है कि उनकी रिटायरमेंट के बाद सपा उन्हें राज्यसभा में लेकर आएगी, सनद रहे कि भाजपा पहले ही मंशा जाहिर कर चुकी है कि सिंह को अगला लोकसभा चुनाव पार्टी सिंबल पर हरियाणा के भिवानी से लड़ाया जा सकता है। अब जनरल सिंह को इन दोनों पार्टियों में से अपने लिए एक का चुनाव करना है। दरअसल, दोनों ही राजनैतिक दल जनरल की साफ-सुथरी इमेज का फायदा उठाना चाहते हैं। सपा तो अपने इस दांव को जातीय चश्मे से भी देख रही है, नेताजी और उनके सहयोगियों को लगता है कि जनरल सिंह को राज्यसभा में लाने से प्रदेश के राजपूतों में (जिनकी आबादी राज्य में 8.5 से 9 फीसदी के बीच है) एक अच्छा संकेत जाएगा।
Posted on 29 April 2012 by admin
पिछले दिनों संसद भवन में सुषमा स्वराज और मुलायम सिंह यादव आमने सामने मिल गए, नेताजी ने छूटते ही सुषमा से पूछा-‘बताइए और किसको बना रही हैं राष्ट्रपति?’ तो सुषमा ने हंसकर कहा-‘मुलायम सिंह यादव को।’ इस पर नेताजी का कहना था कि वे राष्ट्रपति पद के लिए अनफिट हैं, बकौल नेताजी-‘बड़े आलस्य का काम है न किसी से मिलने जाओ, न कोई मिलने आए, हर तरफ प्रोटोकॉल का झंझट है।’
Posted on 22 April 2012 by admin
राष्ट्रपति पद के चुनाव में पी.ए.संगमा पूरे जोर-शोर से उतर आए हैं, उनकी उम्मीदवारी को मुलायम सिंह यादव का पूरा समर्थन हासिल हैं, हालांकि इस मसले पर अभी शरद पवार ने अपने कार्ड नहीं खोले हैं। 9 मई को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर तमाम आदिवासी संगठन संगमा की उम्मीदवारी को मजबूती देने के लिए नई दिल्ली स्थित मावलंकर हॉल में इकट्ठा हो रहे हैं, उनकी मांग एक आदिवासी को राष्ट्रपति बनाने की है, क्या देश एक आदिवासी राष्ट्रपति के लिए तैयार है?
Posted on 16 April 2012 by admin
यूपी में कांग्रेस की बुरी हार से बेजार गांधी परिवार के वफादार एकबारगी पुन: राहुल गांधी को ‘रिलांच’ करने की तैयारियों में जुटे हैं। पार्टी को लगता है कि राहुल को राजनीति में स्थापित करने की 8 वर्षों में चली आ रही कांग्रेसी मुहिम को यूपी के नतीजों से करारा झटका लगा है। पिछले कुछ दिनों में इस मसले को लेकर 10 जनपथ और 12 तुगलक लेन में कई दौर की बातचीत हो चुकी है। और इस योजना पर काम हो रहा है कि कैसे राहुल को ‘रिलांच’ करने के लिए एक नई टीम का गठन हो। ‘ब्लैकबेरी जेनरेशन’ की राहुल की टीम को गांधी परिवार के पुराने वफादारों से बदला जा सकता है। सोनिया स्वयं देसी व भारतीय तरीकों के प्रयोग की पक्षधर है, जैसा कि उनके मामले में फोतेदार, वोरा, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, नटवर सिंह आदि ने किया था, उन्हें गांव-गांव घुमाया गया था, कुंभ में गंगा स्नान कराया गया था। सो, मुमकिन है कि गुजरात चुनावों में राहुल गांधी को एक बदली भाव-भंगिमाओं और कुछ अभिनव प्रयासों के साथ उतारा जाएगा, और इस अभियान की कमान सोनिया वफादार अहमद पटेल के हाथों में हो सकती है, जिन्हें ‘टीम राहुल’ किंचित पसंद नहीं करती है।
Posted on 11 April 2012 by admin
भाजपा की आपसी गुटबाजी के चलते उत्तराखंड में उसकी सरकार बनते-बनते रह गई। उत्तराखंड संकट के दौरान बंगाली मार्किट के एक कोठी में (जो कि इस प्रभावशाली भाजपा नेता की है) नितिन गडकरी, इस भाजपा नेता और हरीश रावत की एक बेहद गुप्त मीटिंग हुई थी। पर इस भाजपा नेता ने मीटिंग की खबर अपने कांग्रेसी मित्र अहमद पटेल को लीक कर दी। उस वक्त हरीश रावत को 23 कांग्रेसी विधायकों का समर्थन बताया जा रहा था। जैसे ही यह खबर अहमद पटेल को लगी कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल अभियान तेज हो गया, आनन-फानन में कांग्रेसी मैनेजरों ने रावत पर डोरे डाले और उनसे वादा किया गया कि सरकार में उन्हें महती हिस्सेदारी दी जाएगी। उनके 5 समर्थक विधायकों को मंत्री, हरक सिंह रावत को उप मुख्यमंत्री, उनकी पसंद का स्पीकर और प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा तथा उन्हें एक राज्यसभा सीट भी दी जाएगी। रावत मान गए। पर कांग्रेस अभी अपने सारे वायदे पूरे नहीं कर पाई है, न तो हरक सिंह उप मुख्यमंत्री बने न ही रावत समर्थक विधायकों को अच्छे मंत्रालय मिले। सो, रावत की नाराजगी जारी है। अब देखना है कि क्या भाजपा इस बहती गंगा में हाथ धो पाएगी?
Posted on 01 April 2012 by admin
स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने यह बताते हुए कि वे पहली बार सचिन तेंदुलकर से कब मिलीं, उन्होंने इस क्रम में दो बार राज ठाकरे का नाम ले लिया और उन्होंने याद किया कि पहली बार वे सचिन से राज के घर एक पार्टी में मिली थीं। जिस वक्त लता दीदी राज ठाकरे का नाम ले रही थीं, वहीं दूसरी पंक्ति में बैठीं उध्दव ठाकरे की पत्नी के चेहरे का तनाव सहज ही पढ़ा जा सकता था।
Posted on 25 March 2012 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 18 March 2012 by admin
अंशुमन मिश्रा को झारखंड से लाने पर भी काफी बावेला मचा। अडवानी, सुषमा व जोशी ने खुलकर इसका विरोध किया, पर इस मामले के प्रमुख रणनीतिकार अरुण जेतली चुप रहे, तो गडकरी व राजनाथ सिंह ने खुलकर अंशुमन मिश्रा के परचम को लहराया। कुछ उद्योग समूह मसलन सहारा जहां खुलकर अंशुमन मिश्रा के नाम का विरोध कर रहा था, वहीं नरेश गोयल, मुकेश अंबानी, कुमारमंगलम, बिड़ला व रूईया बंधु मिश्रा की पुरकश वकालत करते दिखे। मिश्रा के नाम का सबसे ज्यादा विरोध जेतली करीबी झारखंड के सांसद निशिकांत दुबे ने किया, दरअसल दुबे जो अब तक रूईया बधुओं (एस्सार ग्रुप) के लिए कॉरपोरेट लॉबिंग करते आए हैं, वे नहीं चाहते थे कि झारखंड से किसी और ब्राह्मण चेहरे का अभ्युदय हो। वहीं दुबे को अंशुमन मिश्रा की अपने कॉरपोरेट बॉस शशि व प्रशांत रूईया के साथ नई नवेली दोस्ती भी रास नहीं आ रही। जाहिर है अगर ऐसे में अंशुमन मिश्र को गडकरी भाजपा समर्थित उम्मीदवार बना भी लेते हैं तो दुबे मिश्र की राहों में कांटे बिछाने में कोई कोर कसर नहीं उठा रखेंगे, क्योंकि उनके झामुमो में भी अच्छे संपर्क हैं। और झारखंड भाजपा में भी बखूबी उनके तार जुड़े हैं।
Posted on 28 February 2012 by admin
भगवा राजनीति में कॉरपोरेट शैली के प्रवर्तक राजनेता नितिन गडकरी जो भी करते हैं, खम्म ठोककर करते हैं, इसका अहसास उन्होंने काफी दफे अपने पार्टी के सीनियर नेताओं को करा दिया है। गडकरी के पिछले लंदन दौरे को मैनेज करने वाले व कभी अडवानी लाडली प्रतिभा के बेहद करीबी समझे जाने वाले राजेश शाह को उपकृत करने के लिए गडकरी ने अपनी कमर कस ली है, सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में शाह को महाराष्ट्र से भाजपा कोटे से राज्यसभा में लाया जा सकता है। सनद रहे कि शाह मुकेश अंबानी के खास दरबारियों में शुमार होते हैं।