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(English) What will Yeddyurappa do?

Posted on 20 November 2012 by admin

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हाई-टी गडकरी

Posted on 19 September 2012 by admin

भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी भी अब धीरे-धीरे स्वयं को प्रधानमंत्री पद के एक प्रमुख दावेदार के तौर पर पेश करने लगे हैं। इसकी बानगी अभी इसी गुरूवार को लंदन में दिखी। जब गडकरी अपने परिवार समेत कनाडा में 15 दिों की छुट्टियां बिता वापिस स्वदेश की राह पर थे तो उनके एक एनआरआई मित्र ने लंदन के चर्चित कार्लटन सुइट में उनके सम्मान में एक हाई-टी आयोजित की। इस हाई-टी में लंदन में रह रहे तमाम बड़े अप्रवासी भारतीय उद्योगपतियों ने शिरकत की। वेदांता और केयर्न एनर्जी के अनिल अग्रवाल, हिंदुजा समूह के चेयरमैन जी.पी.हिंदुजा, प्रकाश लोहिया, अर्सेनल मित्तल के चेयरमैन लक्ष्मी मित्तल, लॉर्ड हामिद, लॉर्ड नोने, एलेन हॉवर्ड, सायरस वेदरवाला जैसे प्रमुख लोगों की उपस्थिति इस चाय पार्टी में देखी गई। गडकरी ने इन वैश्विक निवेशकों और चोटी के उद्योगपतियों को इस बात के लिए आश्वस्त किया है कि अगर 2014 में भारत में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए की सरकार बनी तो भी वैश्विक निवेशकों के लिए भारत में निवेश का प्रचुर मौका होगा। ज्यादातर भारतीय उद्योगपति गडकरी से यह जानना चाहते थे कि क्या मौजूदा यूपीए-2 सरकार अपना टर्म पूरा कर पाएगी? और क्या देश में मध्यावधि चुनाव की नौबत आ सकती है? तो किसी मंझे राजनेता की मानिंद गडकरी का कहना था कि भाजपा की यूपीए सरकार गिराने में कोई दिलचस्पी नहीं है, अगर यह सरकार गिरती भी है तो अपने कुकर्मों की वजह से गिरेगी। ााहिर है ज्यादातर उद्योगपतियों की दिलचस्पी यह जानने में थी कि गडकरी आने वाले चुनावों के मद्देनार प्रधानमंत्री पद के कितने गंभीर उम्मीदवार हैं? पर गडकरी ने कोई ठोस जवाब देने की बजाय हंसी-हंसी में इस बात को टाल देना ही श्रेयस्कर समझा।

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भूल गए पासवान

Posted on 28 August 2012 by admin

टाजकल नेताओं में भूलने की बीमारी बढ़ गयी है,सदन में बोलते-बोलते अडवानी यह भूल गए िकवे यूपीए-1 के बारे में चर्चा कर रहे हैं या 2 के बारे में । इस कड़ी में एक और नेता का नाम जुड़ गया है वे हैं रामविलास पासवान जो पिछले काफी लंबे समय से राजनैतिक निर्वासन की पीड़ा झेल रह हैं। पिछले दिनों हुआ ऐसा कि ईद के मौके पर पासवान साहब ने उर्दू के एक अखबार के संपादक को फोन लगाया और उनसे कह बैठे ”होली मुबारक”संपादक जी चौके और बोले मतलब ? पासवान अपनी रौ में थे फिर से कह बैठे आपको होली की बहुत-बहुत मुबारकवाद ! अब संपादक जी से रहा नहीं गया, वे बोले पासवान जी यह होली नहीं ईद है,तब कहीं जाकर पासवान को अपनी गलती का अहसास हुआ ।

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(English) Karuna angry with party people

Posted on 22 August 2012 by admin

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…और अंत में

Posted on 07 August 2012 by admin

अपने पुत्र की राज-काज शैली से नेताजी नाराज बताए जा रहे हैं। दरअसल, अपने जिन खास लोगों मसलन अनीता सिंह जैसे अधिकारियों को नेताजी ने अखिलेश के ईर्द-गिर्द लगा रखा है, वो मुख्यमंत्री के पल-पल की खबर से नेताजी को वाकिफ कराते रहते हैं। बाप की यह चौकसी बेटे को रास नहीं आ रही है। और पिता के लाडले अधिकारियों से उनकी यदा-कदा ठन जा रही है। यही बात बाप-बेटे के बीच तनातनी की वजह बनती जा रही है।

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(English) Pranab da the saviour

Posted on 25 June 2012 by admin

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मुलायम के घर अंबानी

Posted on 18 June 2012 by admin

बुधवार को जब ममता सोनिया से मिलने के बाद मुलायम से मिलने पहुंची तो उद्योगपति अनिल अंबानी मुलायम के घर अशोक रोड पर पहले से मौजूद थे। सूत्र बताते हैं कि सारा ड्रामा होने के बाद अनिल मुलायम के घर से निकल कर सीधे प्रणब दा के घर जा पहुंचे। फिर भी अनिल प्रणब दा के लिए वे सब कुछ नहीं कर पाए जो वे करना चाहते थे। अनिल की उपस्थिति में ही प्रणब दा के कुछ सूत्रों ने दादा की नितिन गडकरी से बात कराई। उस बातचीत में गडकरी ने प्रणब दा को मदद का आश्वासन भी दिया।

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…और अंत में

Posted on 04 June 2012 by admin

अडवानी ने आखिर क्यों अपने ब्लॉग में नितिन गडकरी व संघ पर अपरोक्ष हमला किया? समझा जाता है कि पिछले दिनों संघ ने अडवानी को यह संदेश दिया है कि वे एनडीए का चैयरमैनशिप छोड़ दें और नई पीढ़ी को मौका दे। एनडीए के नए चैयरमैन को लेकर नरेंद्र मोदी व राजनाथ सिंह का नाम चल रहा है, मोदी के नाम पर जद(यू) का विरोध है, सो अडवानी हटें तो भाजपा के ‘ग्रामीण फेस’ राजनाथ सिंह की लॉटरी लग सकती है। (एनटीआई)

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भाजपा में आएंगे अमर सिंह?

Posted on 28 May 2012 by admin

कभी सोनिया गांधी पर पर्सनल एलिगेशन लगाने वाले अमर सिंह ने बाद के बदले घटनाक्रमों में (सूत्रों की मानें तो) अपने हाथों से सोनिया को माफीनामे के कई पर्सनल खत लिखे, बावजूद इसके कांग्रेस ने उनके लिए अपने दरवाजे नहीं खोले तो यूपी चुनावों से ऐन पहले अमर गडकरी के टच में आ गए, यह भी कहा जाता है कि सपा के खिलाफ कैंडिडेट उतारने के लिए गडकरी ने अमर को न सिर्फ रणनैतिक अपतिु आर्थिक मदद भी की थी। पर यूपी चुनाव में भी अमर का बोरिया-बिस्तर बंध गया। सो, अब गडकरी की ओर से उन्हें आश्वासन मिला है कि अगर वे अपनी नवगठित पार्टी का भाजपा में विलय कर दें तो उन्हें और जयाप्रदा को भाजपा में शामिल किया जा सकता है। गडकरी ने अमर से यह भी वायदा किया है कि जयाप्रदा रामपुर से लोकसभा का अगला चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ सकती है, इसके लिए गडकरी ने बकायदा मुख्तार अब्बास नकवी को मनाना भी शुरू कर दिया है।

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किंग खान को गुस्सा क्यों आता है?

Posted on 21 May 2012 by admin

केंद्रीय संसदीय राज्य मंत्री राजीव शुक्ला के अभिन्न मित्र किंग खान को इन दिनों गुस्सा बहुत आ रहा है। गुस्सा आ रहा है कि उनके प्रबल प्रतिद्वंद्वी आमिर खान का टीवी शो ‘सत्यमेव जयते’ हिट साबित हुआ है, जबकि वे 5वीं भी पास नहीं कर पाए थे। उन्हें गुस्सा आ रहा है कि बॉलीवुड में उनके सबसे चहेते मित्र करण जौहर से पिछले छह महीनों से उनकी बोलचाल बंद है (इसके बावजूद जौहर ने टि्वटर पर शाहरूख का साथ दिया)। शाहरूख गुस्से में हैं कि प्रियंका चोपड़ा को लेकर उनके और उनकी पत्नी गौरी खान के रिश्तों में खासी तल्खी आ गई है। और अब मन्नत भी उन्हें खाने को दौड़ता है। किंग खान गुस्से में हैं कि जिस अर्जुन रामपाल को उन्होंने जमीन से उठाकर आसमां पे बिठाया वे भी इस संकट की घड़ी में उन्हें अकेला छोड़ पतली गली से कांस का रुख कर लिया। ले-देकर शाहरूख को अब सारा आसरा सियासत व खेल के माहिर खिलाड़ी राजीव शुक्ला का है, पर शुक्ला जी भी क्या करें वे भी तो दोस्ती की दो पांटों के बीच फंसे हैं, चूंकि एक तरफ नीता भाभी (नीता अंबानी की मुंबई इंडियंस को हराने के बाद ही यह सारा विवाद शुरू हुआ था) हैं तो दूसरी तरफ शाहरूख भैया और शुक्ला जी नहीं चाहते कि एक बेहद मामूली से विवाद पर अंबानी दरबार में उनका हुक्का-पानी बंद हो जाए, सो वे अपना हर कदम बेहद फूंक-फूंक कर रखना चाहते हैं, और शाहरूख के बहाने विलास राव से भी अपना पुराना हिसाब-किताब चुकता कर लेना चाहते हैं।

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